आखिरकार पायलट विमान अनुपात पर सरकार ने खुलासा किया है कि यह पर्याप्त है। यह तो साफ सुथरा बयान है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सच है? क्या सरकार सही मायने में कहती है? या यह बस एक बयान था जिसे सरकार ने बाहर निकालने के लिए कहा गया?
पिछले महीने इंडिगो की उड़ानों में बड़े पैमाने पर व्यवधान आया, जिसमें कई उड़ानें रद्द हुईं और कई उड़ानें देर से होने लगीं। इसमें पायलटों की थकान कम करने के नए नियमों को ठीक से लागू करने की योजना नहीं बनाई गई। यह एक बड़ी बात है और सरकार को इसके पीछे कारणों को समझने की जरूरत है।
विमानन राज्य मंत्री मोहोल ने कहा है कि सभी एयरलाइनों की ओर से पायलट विमान अनुपात का मूल्यांकन किया जाता है, लेकिन यह कहना कि अनुपात पर्याप्त है, तो सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। यह कहना कि अनुपात पर्याप्त है, तो इसमें कोई गहन विवेचना नहीं की गई। क्या इस तरह की बात सरकार ने कभी कही थी?
इस मामले में, सरकार को पायलटों और विमानों के बीच संतुलन बनाए रखने पर ध्यान देने की जरूरत है। पायलटों की थकान कम करने के नए नियमों को ठीक से लागू करना भी जरूरी है, ताकि उड़ानों में व्यवधान न हो। सरकार को यह समझने की जरूरत है कि पायलटों और विमानों के बीच संतुलन बनाए रखना कैसे होता है।
पिछले महीने इंडिगो की उड़ानों में बड़े पैमाने पर व्यवधान आया, जिसमें कई उड़ानें रद्द हुईं और कई उड़ानें देर से होने लगीं। इसमें पायलटों की थकान कम करने के नए नियमों को ठीक से लागू करने की योजना नहीं बनाई गई। यह एक बड़ी बात है और सरकार को इसके पीछे कारणों को समझने की जरूरत है।
विमानन राज्य मंत्री मोहोल ने कहा है कि सभी एयरलाइनों की ओर से पायलट विमान अनुपात का मूल्यांकन किया जाता है, लेकिन यह कहना कि अनुपात पर्याप्त है, तो सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। यह कहना कि अनुपात पर्याप्त है, तो इसमें कोई गहन विवेचना नहीं की गई। क्या इस तरह की बात सरकार ने कभी कही थी?
इस मामले में, सरकार को पायलटों और विमानों के बीच संतुलन बनाए रखने पर ध्यान देने की जरूरत है। पायलटों की थकान कम करने के नए नियमों को ठीक से लागू करना भी जरूरी है, ताकि उड़ानों में व्यवधान न हो। सरकार को यह समझने की जरूरत है कि पायलटों और विमानों के बीच संतुलन बनाए रखना कैसे होता है।