Congress: कांग्रेस का चुनाव आयोग को पत्र, फार्म-7 के दुरुपयोग का लगाया आरोप; मताधिकार खतरे में होने की चेतावनी

चुनाव आयोग को पत्र, फार्म-7 के दुरुपयोग का लगाया आरोप; मताधिकार खतरे में होने की चेतावनी।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) वाले राज्यों में फार्म-7 का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है।

पार्टी का कहना है कि इसके जरिये तय रणनीति के तहत योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस के अनुसार 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक जैसा पैटर्न सामने आना बेहद गंभीर चिंता का विषय है।

कांग्रेस नेताओं की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि पहले से छपे फार्म-7 भरे जा रहे हैं और चुनिंदा मतदाता समूहों के खिलाफ बड़ी संख्या में एक साथ आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। इसके बाद एक सुनियोजित कार्ययोजना के तहत अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में ये फॉर्म जमा कराए जा रहे हैं।

कांग्रेस का कहना है कि अगर इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो इससे न केवल सत्ताधारी भाजपा को चुनावी लाभ मिलेगा, बल्कि बड़ी संख्या में नागरिकों का मताधिकार भी छिन सकता है। कांग्रेस का यह कहना है कि खासकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और वरिष्ठ नागरिकों जैसे कमजोर वर्गों को प्रभावित कर सकती है।
 
बड़े मूर्ख! ये तो चुनाव आयोग का नया ट्रिक है... फार्म-7 भरने वाले लोगों को पता नहीं है कि उनके मतपत्र का मूल्य कहां? किसी चोर को भी मताधिकार छीनने के लिए तैयार होना चाहिए...

आजकल देश में हर चीज़ पर आरोप लगाने वालों का बाज़ आता है... एक राजनीतिक पार्टी बिना सबूत के अपने खिलाफ कोई भी काम करने वाले को बदनाम करने की कोशिश करती है। लेकिन यह सच है कि अगर किसी भी चीज़ में तुरंत रोक लगाई जाए तो इसका मतलब यह नहीं होता कि हम बिल्कुल सही हैं।

मतदाताओं के खिलाफ ऐसी गैरकानूनी गतिविधियाँ चलाने वालों को अपने काम से विचलित न करना चाहिए... और चुनाव आयोग को यह भी मानना चाहिए कि हमें अपने मतपत्र का महत्व जानते हैं।

अगर हर चीज़ पर आरोप लगाना ही बेहतर है तो क्यों न हम सभी एक-दूसरे पर आरोप लगाएं?
 
मैंने फार्म-7 भरने की चीज भी देखी है तो वाह... यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है 🙅‍♂️। मुझे लगता है कि यह चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, लेकिन लगता है उनकी पास करन्या नहीं है। मैंने देखा है कि राजनीतिक दलों ने पत्र भेजे हैं, लेकिन यह तो सरकार के लिए थोड़ी कमजोर बात होगी। मुझे लगता है कि हमें अपनी मतदान सूचियों की जांच-पड़ताल करनी चाहिए, ताकि हमें पता चले कि हमारे नाम वायरल नहीं हुए हैं या नहीं।
 
यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है मतदाताओं के अधिकार की बात करें। अगर ऐसा फार्म-7 भरने का दुरुपयोग जारी रहता है तो यह सिर्फ भाजपा के लिए चुनावी लाभ मिलेगा नहीं, बल्कि आम आदमी के मताधिकार को भी खतरे में डाल देगा। अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक और वरिष्ठ नागरिकों के समूहों को यह सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, उनके मतदान अधिकार पर यह दुरुपयोग सीधे हमला है।
 
बेटा, ये तो बहुत बड़ा मुद्दा है 🤔। चुनाव आयोग को लगता है कि फार्म-7 का दुरुपयोग ज्यादातर राज्यों में हो रहा है। अगर सच में तो इसमें वोटर सूचियों की सत्यता के लिए कुछ छूट नहीं होनी चाहिए। लेकिन पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे वोटर मताधिकार पर खतरा लगा सकता है, खासकर कमजोर वर्गों को प्रभावित कर सकता है। 🚨

मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को इस मामले में कड़ी जांच करनी चाहिए। फार्म-7 भरने के लिए तय रणनीति का सामना करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वोटर मताधिकार सुरक्षित रहे। अगर पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे नागरिकों का मताधिकार छिन सकता है, तो जरूरी है कि इस पर रोक लगाई जाए। 🚫
 
अरे, मुझे लगता है कि चुनाव आयोग से बात करना जरूरी है ताकि ऐसी गड़बड़ी न हो। फार्म-7 में भ्रष्टाचार की बात करते हैं तो यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है। मतदाताओं की सूचियों में गलती करने से कुछ लोगों का मताधिकार खतरे में आ सकता है 🚨

मुझे लगता है कि चुनाव आयोग ने इसे ठीक से नहीं देखा। जैसे फार्म-7 भरने की प्रक्रिया में छोटी-छोटी गलतियाँ कर रहे हैं, तो यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। मतदाताओं की सूचियों में बदलाव करना और योग्य मतदाताओं को हटाना बिल्कुल भी सही नहीं है 🤦‍♂️

कांग्रेस के आरोप को लेकर मुझे लगता है कि एक सार्थक जवाब देना जरूरी है। चुनाव आयोग ने इस पर क्या काम किया और यह कैसे रोका जाएगा कि ऐसी गलतियाँ न हों? 🤔
 
अरे, यह तो बहुत चिंताजनक बात है, फार्म-7 का दुरुपयोग से मताधिकार खतरे में आ रहा है... 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक जैसा पैटर्न सामने आना तो वाकई गंभीर है, कांग्रेस ने सही तरीके से पत्रकारिता की है... पहले से छपे फार्म-7 भरने से और चुनिंदा मतदाताओं के खिलाफ ज्यादा आपत्तियां दर्ज करने से यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है, अगर इस पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो सत्ताधारी भाजपा और आम आदमी दोनों को इस में फायदा हो सकता है...
 
😕 चुनाव आयोग पर इतना आरोप लगाना ठीक नहीं है तो दुर्भाग्य में इस तरह की बातें होना पड़ते रहते हैं... फार्म-7 की समस्या से निपटने के लिए हमें खुद कुछ करने होंगे, इसके अलावा चुनाव आयोग को तेजी से सुधारने की जरूरत है ताकि इससे मताधिकार खतरे में नहीं पड़े।

मुझे लगता है कि हमें चुनावों की प्रक्रिया को स्पष्ट और सार्थक बनाने की जरूरत है, इसके लिए सभी पक्षों को एकजुट होने की जरूरत है। अगर हम सब मिलकर इस समस्या का समाधान निकालेंगे तो बेहतर होगा।
 
मुझे लगता है कि चुनाव आयोग पर निगरानी रखना जरूरी है, लेकिन इससे पहले कि हम किसी भी आरोप पर रुकें तो फार्म-7 भरने के पीछे की वजह साफ होनी चाहिए। क्या योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की बात सच्ची है या यह तय रणनीति में भ्रष्टाचार शामिल है?
 
बड़ा हुआ मतदान सिस्टम तो एक ही तरह का ही व्यापार चल रहा है... राज्यों में फार्म-7 भरने का मकसद कौन बताएगा? यह तो एक बड़ी दुर्घटना की बात है... चुनाव आयोग को पत्र लिखने से पहले इसकी जांच भी नहीं कर ली गई। क्या चुनाव आयोग को पता है कि इस तरह की गलतियों से कितने नागरिकों का मताधिकार खतरे में पड़ रहा है? 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ऐसा एक जैसा पैटर्न तो बहुत भयानक है। 🤯👎
 
अरे भाई, यह तो बेहद चिंताजनक है 😱। मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को इस पर ध्यान देना जरूरी है। अगर ऐसा जारी रहा तो हमारे मताधिकार की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। पार्टियों के बीच भ्रष्टाचार की समस्या नहीं दूर होती, इसका समाधान ढूंढना जरूरी है। 🙏
 
बिल्कुल सही है! चुनाव आयोग को इन सभी बातों पर ध्यान से देखना चाहिए, विशेष रूप से फार्म-7 का इस तरह से उपयोग करने का। इससे हमें बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है, खासकर कमजोर वर्गों को। मुझे लगता है कि चुनाव आयोग द्वारा जो भी रुकावट लगाई गई, वो जरूरी है ताकि हमें सभी मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें।
 
बड़ी संख्या में फार्म-7 भरने की घटनाएं होनी चाहिए तो कम से कम पहले से छपे मतदाता विवरण दिखाई देने चाहिए 🤔, लेकिन यह सब पता नहीं चलता कि क्या फार्म-7 को सही तरीके से भरा जा रहा है या किसी कुछ भी में शरारत कर रहे हैं?
 
तो ये बात तो सुनकर भी नहीं मान सकता! चुनाव आयोग वालों का यह दुरुपयोग तो हमेशा ही होता आया है, लेकिन अब यह और बढ़ गया है। फार्म-7 का दुरुपयोग करने से मतदाताओं की जानबूझकर बहिष्कार करने की बात निकलनी चाहिए। पार्टियों में एक साथ मिलकर ये नहीं रोकना चाहिए, बल्कि चुनाव आयोग वालों को भी अपने दफ्तरों में कड़ी जांच करानी चाहिए ताकि ऐसा कुछ और न हो। मतदाताओं के अधिकार को खत्म करने से तो हम सब फायदा नहीं करते, बल्कि हमारी लोकतंत्र को भी खतरे में डाल देते।
 
मैंने देखा है कि ये फार्म-7 कितनी मामूली बात है, लेकिन अगर ये मतदाताओं के नाम से हटाए जाने लगे, तो यह बहुत गंभीर है। पार्टी की चिंता का विषय भी जरूर है क्योंकि इससे कोई बड़ा फायदा नहीं होगा, बल्कि हमारा देश कुछ गलत कर रहा है।
 
बड़े मेहमान, मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को अपने काम की पूरी संभावना देनी चाहिए। अगर फार्म-7 का इस तरह से दुरुपयोग किया जा रहा है, तो यह देखना रोचक होगा कि क्या वे इसके लिए जवाबदेह ठहराए जाएंगे।

मुझे लगता है कि चुनावी प्रक्रिया में सुधार करने का समय है, और अगर हमारे नेताओं को अपने पद पर रहने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, तो वे इस मुद्दे पर भी ध्यान देने के लिए तैयार होना चाहिए।

हमें उम्मीद करनी चाहिए कि चुनाव आयोग जल्द से जल्द इस मुद्दे पर नज़र रखेगा, और अगर हमें इसके बारे में कोई जानकारी मिलती है, तो वह जरूर सार्वजनिक कर देना चाहिए।
 
मैं तो लगता है कि यह तो बिल्कुल सही कहा गया है, लेकिन फिर दूसरी ओर देखिए, फार्म-7 का इस्तेमाल न केवल छोटे पैमाने पर होना चाहिए, बल्कि योग्य मतदाताओं को सूचियों में रखने के लिए जरूरी है, नहीं तो यह एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला बन सकता है… 🤔

लेकिन फिर, क्या हमने कभी सोचा है कि फार्म-7 का इस्तेमाल विशेष रूप से मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया में शामिल करने के लिए नहीं किया जा सकता, बल्कि इसका एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला बनाया जा सकता है? 🤑

मैं तो लगता है कि यह एक बुरी चीज़ है, लेकिन फिर, क्या हमने कभी सोचा है कि मतदाताओं को अपनी पहचान पत्र जमा करने की जरूरत नहीं है? 🤷‍♂️
 
चुनाव आयोग को पत्र भेजने से अच्छा नहीं लग रहा। अगर फार्म-7 भरने वाले लोगों को पकड़ा जाए तो कई गलतियां दिखाई देंगी। पूरी तरह से ईमानदार मतदाताओं तक पहुंच न होने पर चुनाव में छेड़छाड़ करना बड़ी बुराई है। हमें कुछ ठीक कराने की जरूरत है, लेकिन बहुत तेजी से ऐसा नहीं करना चाहिए। 🚫
 
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