Congress: 'मणिपुर में सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर केंद्र की लापरवाही', कांग्रेस ने भाजपा सरकार को लिया आड़े हाथ

कांग्रेस ने दावा किया है कि भाजपा सरकार ने मणिपुर को लापरवाही से संभाला है, जिससे राज्य की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा। मणिपुर में जातीय हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और पार्टी के 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान में हिस्सा लेने पहुंचे थे कांग्रेस के मणिपुर मामलों के कार्यकर्ता।

इस दौरान, उन्होंने कहा कि मणिपुर में जो हुआ वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। पिछले पांच वर्षों में, केंद्र ने राज्य को जिम्मेदारी से नहीं संभाला। अर्थव्यवस्था बुरी स्थिति में है और अब सुरक्षा, खासकर सीमा सुरक्षा, भी चिंता का विषय है।

कांग्रेस नेताओं ने मणिपुर सरकार को अपने प्रदर्शन की निगरानी करने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके अभियान में पूरे राज्य में शामिल होने के लिए पार्टी के सभी सदस्यों से अनुरोध किया गया है।

पार्टी ने मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान की घोषणा की थी, जो 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलेगा। इसमें पार्टी वीबी जी राम जी एक्ट को वापस लेने, मनरेगा को अधिकार आधारित कानून के रूप में बहाल करने, काम का अधिकार और पंचायतों के अधिकार की मांग करेंगे।

इस अभियान से पहले कांग्रेस ने मणिपुर सरकार पर अपने आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि दिल्ली में शासन करने वाली भाजपा सरकार ने मणिपुर को लापरवाही से छोड़ दिया।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा है कि पिछले पांच वर्षों में, मणिपुर की अर्थव्यवस्था खराब स्थिति में है।
 
मणिपुर की समस्या से जुड़े यह सब हिंदुस्तान की सरकारी नीतियों और पार्टी दरबार की दूरदराजी की बात है। अगर केंद्र सरकार इतनी दूरदराज में चल रही है तो क्या जनता के लिए कुछ भी करेगी।

पहले यही बात कही गई थी, जब मणिपुर में जातीय हिंसा की समस्या सामने आई थी। तो क्या कोई कदम उठाया गया? नहीं, हमेशा दूरदराजी रही है।

अब मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान चल रहा है, लेकिन इससे पहले कि पार्टी अपने मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर सके, मणिपुर सरकार को अपने प्रदर्शन की निगरानी करने के लिए कह दिया जाता है।

किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए, जनता की आशाएं तोड़ना नहीं चाहिए। अगर सरकार मनरेगा बचाओ संग्राम को बहुत गंभीरता से नहीं ले रही है तो इसका मतलब यह है कि जनता की बातें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दी जा रही है।
 
मैनिपुर मामले में कांग्रेस की राय तो सुनने लायक है 🤔। मणिपुर सरकार ने जिम्मेदारी से नहीं संभाला है, और अब अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ रहा है। मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान की बात तो सही है, लेकिन पूरे राज्य में शामिल होने के लिए पार्टी के सभी सदस्यों से अनुरोध करना थोड़ा लापरवाही से लगता है 😐। कांग्रेस नेताओं को अपने आरोपों पर खड़े रहना चाहिए और मणिपुर सरकार को जवाबदेह ठहराना चाहिए।
 
मणिपुर सरकार द्वारा जो गलतियाँ की गई हैं, वो बहुत बड़ी हैं। सरकार ने राज्य की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाला है। अगर पिछले 5 वर्षों में केंद्र सरकार राज्य को जिम्मेदारी से नहीं संभाला, तो आज ऐसा वातावरण बन गया है जहां जातीय हिंसा और अनियमितता बढ़ रही है।
 
माने तो मणिपुर जैसा हुआ, देखिए क्या किसी और राज्य में ऐसा होता। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राज्य को संभालने की भावना दिखाई, फिर भी सुरक्षा, अर्थव्यवस्था जैसी बातों पर ध्यान नहीं दिया।

अब मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान की बात हो रही है, लेकिन इससे पहले यह तय करना चाहिए कि पार्टी के लोग वास्तव में राज्य की समस्याओं को समझते हैं या नहीं।
 
मणिपुर में जो हुआ वह बहुत दुखद है, लोगों की जान जोखिम में पड़ी है और उनके परिवारों को भी दर्द हुआ होगा। सरकार ने राज्य को जिम्मेदारी से नहीं संभाला है, अर्थव्यवस्था खराब है और अब सुरक्षा, खासकर सीमा सुरक्षा, चिंताजनक है। पार्टी वीबी जी राम जी एक्ट को वापस लेने और मनरेगा को अधिकार आधारित कानून बनाने की मांग करने के पीछे क्यों कारण हैं?
 
मनरेगा बचाओ संग्राम का विषय बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन देखो यह तो कांग्रेस के नेता मणिपुर जाने पर खुद को बाध्य कर रहे हैं। 🤔

मणिपुर में स्थिति गंभीर है, और वहाँ की अर्थव्यवस्था खराब होने का मतलब है हमारे देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण हो सकता है।

आज के समय में, हमें सिर्फ अपने घर-घर जाकर बात करने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि सरकार और नेताओं पर दबाव बनाकर अपने अधिकारों की मांग करनी चाहिए।

कांग्रेस के नेताओं को इस अभियान में अपनी पूरी ऊर्जा लगानी चाहिए, और हमें उनके साथ जुड़कर इसके लिए लड़ना चाहिए। 💪
 
मणिपुर की स्थिति बहुत चिंताजनक है 🤔। अगर भाजपा सरकार ने राज्य को लापरवाही से छोड़ दिया तो इसमें कुछ गलत हुआ होगा। कांग्रेस नेताओं के आरोप में पूरा सहयोग करने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह भी सच है कि मणिपुर सरकार को अपने प्रदर्शन पर ध्यान देने की जरूरत है।

कम से कम 10 जनवरी से शुरू होने वाले मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान में पूरे राज्य में शामिल होने के लिए पार्टी के सभी सदस्यों से अनुरोध करने से पहले इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि मणिपुर सरकार ने जिम्मेदारी से राज्य का दौरा नहीं किया।

मुझे लगता है कि अगर पार्टी वीबी जी राम जी एक्ट को वापस लेने, मनरेगा को अधिकार आधारित कानून बनाने और काम का अधिकार, पंचायतों के अधिकार की मांग करने से पहले सरकार ने सोच-समझकर काम करने की जरूरत है।
 
मणिपुर की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ना एक बड़ा दुखद अनुभव है 🤕। कांग्रेस नेताओं के आरोपों को सुनकर मुझे लगता है कि सरकार ने मणिपुर को जरूरी जिम्मेदारी से नहीं लिया था। पार्टी के 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान में भाग लेने और मणिपुर में जातीय हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने से यह साबित होता है कि वास्तव में सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया। और अब अर्थव्यवस्था खराब स्थिति में है तो यह एक बड़ा चिंताजनक स्थिति है।
 
मणिपुर सरकार को तेजी से जिम्मेदारी से खेलना चाहिए, न कि लापरवाही। कांग्रेस नेताओं द्वारा आरोप लगाने से पहले, उन्हें अपने पार्टी के अंदर से शुद्धता लानी चाहिए। जातीय हिंसा मामलों पर उनकी राय और मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान को देखकर यह समझना मुश्किल नहीं है कि मणिपुर में क्या वास्तव में हुआ है। पार्टी के सभी सदस्यों से अनुरोध करने की जरूरत नहीं, बल्कि उन्हें अपने राज्य को देखने की इजाजत देने की जरूरत है।
 
मैनिपुर को लेकर बोलते हुए कांग्रेस नेताओं के दावों पर सवाल उठना जरूरी है 🤔। अगर उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार ने राज्य को जिम्मेदारी से नहीं संभाला, तो यह कहां से पता चलता है? किस प्रकार के डेटा पर आधारित है उनका दावा? और अगर मणिपुर की अर्थव्यवस्था खराब स्थिति में है, तो इसके बारे में कोई विश्लेषण या अध्ययन कहां उपलब्ध है? इन सवालों के जवाब देने से पहले हमें अपनी राय को सटीक बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
 
मैंने देखा है कि बिना समझे वाले काम कर दिए जाते हैं 🤦‍♂️। मणिपुर में गड़बड़ी तो पहले से भी थी, लेकिन अब यह इतनी गंभीर हो गई है। मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान का मतलब क्या है? 🤔 पार्टी ने ये दिखाने की जरूरत नहीं थी कि मणिपुर में जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है।

कांग्रेस नेताओं की आलोचना करने से पहले अपने पार्टी की गलतियों पर भी ध्यान देना चाहिए। पिछले पांच वर्षों में क्या था? 🤷‍♂️ केंद्र ने राज्य को जिम्मेदारी से नहीं संभाला, अर्थव्यवस्था खराब हो गई और अब सुरक्षा चिंता का विषय बन गया।

मणिपुर सरकार को अपने प्रदर्शन की निगरानी करने के लिए कहा गया, लेकिन यह सवाल उठता है कि सरकारें ऐसे समय में अच्छी तरह से काम कर सकती हैं या नहीं? 🤔
 
अरे यार, मणिपुर की स्थिति बिल्कुल भी अच्छी नहीं दिख रही है... पार्टी नेताओं ने कहा है कि सरकार ने राज्य को जिम्मेदारी से नहीं संभाला, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर बुरा असर पड़ा। कांग्रेस ने भी अपने आरोप लगाए हैं कि भाजपा सरकार ने मणिपुर को लापरवाही से छोड़ दिया... तो अब पार्टी वीबी जी राम जी एक्ट को वापस लेने, मनरेगा को अधिकार आधारित कानून के रूप में बहाल करने और काम का अधिकार, पंचायतों के अधिकार... इन सभी चीजों पर ध्यान देने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने मणिपुर सरकार से अपने प्रदर्शन की निगरानी करने की मांग की है... तो उम्मीद है, सरकार से इस पर ध्यान देने का फैसला कर लेगी।
 
मणिपुर सरकार पर लगाए गए आरोप तो सच्चे हो सकते हैं, लेकिन क्या कांग्रेस ने इस मामले में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की सुरक्षा का ध्यान रखा? पार्टी के कार्यकर्ताओं को जोखिम में डालने से पहले हमें यह जानने की जरूरत है कि वे क्यों ऐसा कर रहे हैं और उन्हें समर्थन देने की जरूरत है या नहीं।
 
मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान तो वाकई बहुत ही जतनी मायने देने वाली बात है 🤔। मणिपुर की अर्थव्यवस्था खराब स्थिति में तो सही, लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि राज्य की सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।

पिछले पांच वर्षों में केंद्र ने मणिपुर को जिम्मेदारी से नहीं संभाला, तो फिर आज कहाँ तक आगे बढ़ा है? 🤷‍♂️ यह देखना रोचक होगा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने ऐसा क्यूँ नहीं किया।

मणिपुर सरकार से कहानी तो अलग, हमें अपने वोटों की गिनती करनी चाहिए। 🗳️
 
मैंने मणिपुर जाने का फैसला किया और वास्तव में वहाँ की स्थिति देखी। सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर बहुत गंभीर असर पड़ा। मैंने पूर्वांचलियों के साथ बातचीत की और उनकी जिंदगी को देखा। यह बहुत दुखद है। केंद्र सरकार ने राज्य को जिम्मेदारी से नहीं संभाला और अब वहाँ की अर्थव्यवस्था खराब है और सुरक्षा चिंताजनक है। मैंने मणिपुर सरकार से बातचीत की और उनसे पूछा कि वे अपने प्रदर्शन की निगरानी करने के लिए क्या करेंगे।
 
मुझे लगता है कि मणिपुर राज्य में जो स्थिति बन गई है, वह बहुत गंभीर है। सरकार को यह समझना चाहिए कि राजनीतिक विवादों के अलावा, लोगों की जिंदगी पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।

मैं सोचता हूँ कि अगर हम सभी एक साथ मिलकर इस समस्या को हल करने की कोशिश करें, तो शायद यह राज्य जल्दी से बेहतर होने लगेगा। पार्टियों और सरकारों को अपने-अपने राजनीतिक लक्ष्यों को धुंधला न बनाएं, बल्कि लोगों की जरूरतों को समझना चाहिए।

इस अभियान में भाग लेने से पहले, मैं सोचता हूँ कि हमें अपनी-अपनी समस्याओं को स्पष्ट रूप से समझना होगा। अगर हमारे पास समय और धैर्य है, तो शायद हम इन समस्याओं का समाधान निकाल सकें।
 
मैंने देखा है कि मणिपुर सरकार पर आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि पूरी कहानी थोड़ी जटिल है। मेरी राय में अगर पिछले पांच वर्षों में मणिपुर की अर्थव्यवस्था खराब स्थिति में आई है, तो यह तो किसी भी सरकार की नीति पर आधारित नहीं है।

मुझे लगता है कि अगर कांग्रेस अपने अभियान में पूरे राज्य में शामिल होने के लिए पार्टी वीबी जी राम जी एक्ट को वापस लेने की मांग कर रही है, तो यह भी थोड़ा परेशान करने वाला हो सकता है।

मेरा ख्याल है कि अगर मणिपुर सरकार अपने प्रदर्शन की निगरानी करने के लिए कही, तो यह एक अच्छा कदम होगा। लेकिन अगर सरकार को दिशा-निर्देश मिलने से नहीं बदलेगा, तो यह अभियान ज्यादा प्रभावी नहीं होगा।

मुझे लगता है कि मणिपुर में जो हुआ है, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसके पीछे कुछ बड़े मुद्दे भी हैं। अगर सरकार और पार्टियां इन मुद्दों पर ध्यान दें, तो शायद मणिपुर में जीवन बेहतर हो सकता है। 🤔
 
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