दिल्ली बलास्ट के बाद इस राज्य को दहलाने की साजिश नाकाम! लंबी दूरी वाले रॉकेट में 40 किलो विस्फोटक बरामद

मनिपुर के गेलबुंग जंगल में साजिश का खुलासा

कांगपोकपी जिले के इस राज्य में पिछले दिनों तीन बाओफेंग हैंडसेट और एक हथियार बरामद होने की खबर आई थी। इसी बीच मनिपुर पुलिस ने बताया कि उन्होंने सामान्य क्षेत्र से हथियारों और गोला-बारूद का बड़ा जखीरा बरामद किया है।

इस जखीरे में एक सीएमजी कार्बाइन और मैगजीन, एक राइफल, दो पिस्तौल और एक-एक मैगजीन, नौ देशी बोल्ट एक्शन सिंगल बैरल, एक देशी एसबीबीएल, विभिन्न कैलिबर के 46 जिंदा राउंड गोलाबारूद, 80 खाली डिब्बे, एक-एक स्थानीय ग्रेनेड, सेफ्टी फ्यूज, डेटोनेटर, तीन पीईके, चार पम्पी, एक पम्पी स्टैंड और दो बाओफेंग हैंडसेट शामिल थे।

हालांकि इससे पहले जखीरे में सेफ्टी फ्यूज, डेटोनेटर और तीन पीईके बरामद होने की भी खबर आई थी। इसे देखते हुए पुलिस ने यह कहा कि यह जखीरा राज्य को ही नहीं, बल्कि देश को दहलाने की साजिश का हिस्सा था।
 
बिल्कुल भी ठीक है... कुछ लोगों की जिंदगी कैसे बनती है, यह समझ में नहीं आता... मनिपुर में ऐसे दंगे क्यों होते हैं? क्या कोई और साजिश चल रही है? तो फिर पुलिस ने जखीरा बरामद किया तो अच्छा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसी साजिश कभी भी होने का मौका नहीं देती।
 
मैंने तो सोचा था कि मनिपुर में जंगलों में साजिश करने वाले लोग रात में भागते रहते हैं। अगर उन्होंने इतनी बड़ी साजिश बनाई तो फिर उनका खुलासा कहीं काम नहीं करेगा। यह सिर्फ पुलिस के द्वारा लगाए गए झूठ है। जखीरे में कुछ भी बरामद करने की बात तो सिर्फ लोकप्रियता बढ़ाने के लिए की गई होगी। मनिपुर में साजिश के खिलाफ लड़ने की बजाय, हमें खुलकर सोच-विचार करें कि क्या साजिश का असली उद्देश्य है। क्या यह सिर्फ एक बड़ा धमाल था जिसमें कई लोग शामिल थे।
 
मैंने आज पढ़ा कि मनिपुर की पुलिस ने गेलबुंग जंगल में ऐसी साजिश का खुलासा किया है जो देश को ही नहीं, बल्कि राज्य को भी हिलाएगी। तीन बाओफेंग हैंडसेट और एक हथियार बरामद करने की खबर आई थी, लेकिन तब से इसका खुलासा कैसे हुआ? पुलिस ने बताया कि जखीरे में कई तरह की बंदूकें, गोलाबारूद, और अन्य खतरनाक चीजें बरामद हुईं। यह तो दिखाता है कि लोगों ने बहुत सोच-समझकर इस साजिश की योजना बनाई थी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम सभी ठीक हैं।

प्लेटफॉर्म पर इतना ज्यादा जानकारी और चीजें देना कैसे अच्छा लगता है? मुझे लग रहा है कि हमें अपने कमेंट में भी थोड़ा सोच-समझकर लिखना चाहिए।
 
मुझे ये बात बहुत चिंताजनक लग रही है.. मनिपुर जैसे पहाड़ी इलाकों में आतंकवादी गतिविधियाँ और भी बढ़ रही हैं। ये राज्य में होने वाली साजिश का खुलासा सुनकर सभी को डर लग रहा है। यह जखीरा न केवल मनिपुर के लिए बल्कि देश के लिए भी खतरनाक है 🚨💥

मेरा मानना है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को इस तरह की साजिशों की पहचान करने और रोकने के लिए मजबूत और तेज़ तरीके से काम करना चाहिए। इसके अलावा, हमें यह भी ध्यान देना चाहिए कि युवाओं को आतंकवाद के खिलाफ शिक्षित और जागरूक किया जाए, ताकि वे ऐसी गलत गतिविधियों में शामिल होने से बच सकें।
 
बुरी बातें और भी बढ़ गईं, मनिपुर में हुए जंगल में साजिश का खुलासा सुनकर मुझे लगता है कि हमारे देश में सब कुछ गलत हो रहा है। तीन बाओफेंग हैंडसेट और एक हथियार बरामद होने की खबर, इससे पहले जखीरे में सेफ्टी फ्यूज, डेटोनेटर और तीन पीईके बरामद होने की भी। यह सब हमारे देश को खतरे में डाल रहा है।
 
यारों को ये तो समझ आ गया होगा कि मनिपुर में जंगलों में भी साजिशें होती रहती हैं... जैसे कि गेलबुंग जंगल में भी। पुलिस ने वहां बड़ा जखीरा बरामद कर लिया है, जिसमें हथियारों और गोला-बारूद के साथ-साथ बाओफेंग हैंडसेट भी शामिल थे।

मुझे यह तो बहुत चिंताजनक लग रहा है... क्योंकि इससे पता चलता है कि मनिपुर में कुछ लोग और भी खतरनाक साजिशें कर रहे हैं। पुलिस ने कहा है कि यह जखीरा राज्य को ही नहीं, बल्कि देश को दहलाने की साजिश का हिस्सा था।

मुझे लगता है कि हमें अपनी सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को लेकर जागरूक रहना चाहिए... ताकि ऐसी साजिशों को रोकने में मदद मिल सके।
 
बात करो, इस जखीरे में तो कुछ भी विवाद नहीं है, यह तो एक बहुत बड़ा और खतरनाक खिलाफत का प्रयोग हो रहा है। लोगों को लगता है कि हमारे देश में साजिशें होने का मतलब ही कुछ गलत होता है, लेकिन क्या यह सच है? और क्या हम अपने देश के खिलाफ काम कर रहे हैं या नहीं?

मुझे लगता है कि पुलिस ने जानबूझकर इसे बड़ा-चढ़ावा दिया, अगर सिर्फ तीन बाओफेंग और एक हथियार बरामद होते, तो शायद लोग नहीं मानते थे कि यह साजिश है। लेकिन जब पुलिस ने कहा कि यह राज्य को ही नहीं, बल्कि देश को ही विषाद देने की साजिश है, तो हमें सोच-विचार करना पड़ा।

क्या हमारे देश में ऐसे लोग हैं जो अपने देश के खिलाफ काम कर रहे हैं, और अगर नहीं, तो फिर यह सब क्यों कहलाता है? मुझे लगता है कि हमें अपनी सोच-विचार बदलने की जरूरत है, और हमें देश की रक्षा के लिए एकजुट होने की जरूरत।
 
बिल्कुल! यह तो बहुत बड़ी चिंता की बात है... मनिपुर में जैसे ही कुछ गलत होता है, फिर वहां से सभी ऐसे सामान भेज दिया जाता है। यह तो हमारे पूरे देश के लिए खतरा है! और क्या यही नहीं? अब साजिश का खुलासा हुआ, इससे पहले तो यह तो पता चल जाना चाहिए था कि कुछ गलत हो रहा है। पुलिस ने बहुत अच्छा काम किया है, और मुझे उम्मीद है कि जल्द ही वास्तविक अपराधियों को पकड़ा जाएगा।
 
मुझे लगता है कि ये जखीरा बहुत बड़ा है, लेकिन इसकी पूरी जानकारी मिलने से पहले तो ऐसा कहना मुश्किल है। क्या यह राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा है? और क्या इससे हमें यह सोचे कि हर बंदूक और गोला-बारूद का मतलब एक बड़ी साजिश है? इसके पीछे कुछ और भी जानकारी हो सकती है, जिसे हमें पहले से नहीं पता।
 
अरे, यह तो बिल्कुल भी अच्छी बात है कि पुलिस ने इन सब चीजों को बरामद कर लिया 🙌। लेकिन फिर सोचें तो यार, यह जखीरा कितना बड़ा था... 80 खाली डिब्बे, 46 जिंदा गोलाबारूद... यह तो किसी भी तरह के अपराधी के लिए बहुत ही खतरनाक होगा। और यह सुनकर तो लगता है कि पुलिस ने बहुत अच्छी मेहनत की है उनके। पुलिस वालों को शुक्रियां देना चाहिए।
 
बिल्कुल विलंबित लेकिन अब तो सच्चाई आ गई है कि कौन सी साजिश चल रही थी मनिपुर में 🤔 यह जखीरे से पता चलता है कि कुछ लोग देश को खतरे में डालने के लिए तैयार हो गए थे। लेकिन अच्छी बात यह है कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और साजिश को रोक दिया गया। इससे पहले कि यह जखीरा विकसित किया जा सके। मनिपुर के लोगों को यह अच्छी खबर है कि उनके पास कानून प्रवर्तन एजेंसियां हैं जो उन्हें सुरक्षित रखने में सक्षम हैं।
 
अरे बाबा, ये तो बहुत बड़ी साजिश का खुलासा है ! मनिपुर में ऐसी चीजें बरामद करने का यहां तक कि कोई विचार नहीं होना चाहिए। सरकार जैसे लोगों पर इतनी भारी आरोप लगाने से पहले तो सबकुछ साबित कर लेना चाहिए, लेकिन लगता है कि ये जखीरा वास्तव में राज्य को ही नहीं, बल्कि पूरे देश को खतरा दे रहा है।
 
मनिपुर में जंगलों में ऐसे हथियार बरामद करने की बात तो पहले से ही चिंताजनक थी, लेकिन यह जखीरा तो और भी दिलचस्प है। पुलिस ने बताया है कि इसमें कई तरह के हथियार और अन्य वस्तुएं शामिल हैं, जो कि साजिश का हिस्सा था। यह देखना रोचक होगा कि पुलिस तीन बाओफेंग हैंडसेट बरामद करने में कैसे लगी और अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
 
वाह! इस बात सुनकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ 🤯। मनिपुर में ऐसा जखीरा बरामद करना और इसमें इतने खतरनाक उपकरण शामिल करना तो सचमुच खतरनाक है 😬। अगर यह देश की सुरक्षा के लिए बनाया गया था तो फिर क्यों ऐसी बातें की गईं? 🤔 और अगर यह राज्य की समस्या थी तो फिर सरकार को क्या करना चाहिए? 🤷‍♂️

लेकिन मुझे लगता है कि इस जखीरे के पीछे कुछ बड़ा खेल चल रहा है। अगर यह राज्य की समस्या थी तो फिर ऐसी बातें नहीं होतीं। और अगर यह देश की सुरक्षा के लिए बनाया गया था तो फिर क्यों इतने खतरनाक उपकरण शामिल किए गए? 🤯

मुझे लगता है कि इस जखीरे की जांच करने वाली पुलिस ने बहुत अच्छी तरह से काम किया है। उनकी चतुराई और समझदारी मुझे बहुत पसंद आती है। 🙌 और भारतीय राष्ट्रीय बांग्ला फ़ाइन्डिंग इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BFL) जैसे विभिन्न प्रौद्योगिकी कंपनियों से निपटने में उनकी मदद करनी चाहिए। 🤝
 
भाई, ये तो मनिपुर में कुछ बड़ी सी चीजें हो रही हैं 🤯! पुलिस ने इतनी ज्यादा हथियार बरामद किए, यह तो देश को ही नहीं, बल्कि विश्व को चुनौती देने की बात कर रहे हैं 🌎। लेकिन ये सवाल उठता है कि क्या ये जखीरा निजी हाथों से आया था या फिर किसी बड़े में ही छुपकर रखा गया था? और सबसे बड़ी बात, यह तो हमारे देश की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठा रहे हैं 💥
 
नाराज़ हूँ, मनिपुर में ऐसा होना नज़रन्द है ताकि हम सब जानते हों कि कैसे सामाजिक शांति और आर्थिक विकास को धमकी देने के लिए भारतीय पुलिस को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है 🤔। अगर यह जखीरा राज्य में ही नहीं, बल्कि देश को दहलाने की साजिश थी, तो फिर क्यों हम इसे बिना सवाल किए छोड़ देते हैं?

क्या पुलिस विभाग ने यह जांच कैसे की कि यह सभी वस्तुएं मनिपुर में नहीं मिलीं थीं, बल्कि उन्हें कहाँ से लाए गए थे और किसने लाया था? याद रखना चाहिए कि पुलिस को अपने जिम्मेदारियों को संभालने की क्षमता को देखना चाहिए, न कि यह है कि हम सब उनकी गलतियों पर ही छुप जाएं।

इस बातचीत में और भी कई सवाल उठते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हम पुलिस विभाग से सच्चाई देखने की उम्मीद कर सकते हैं? 🤷‍♂️
 
मुझे लगता है कि ये घटना कुछ और भी गहराई में जाती है। मनिपुर जैसे राज्यों में आर्म्ड क्रिमिनल समूहों की सक्रियता एक बड़ी चुनौती है। हमें सोचना चाहिए कि ये समूह कौन से लोग हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या है, फिर ही ऐसे समूहों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

हमें यह भी देखना चाहिए कि हमारे देश में आर्म्ड क्रिमिनलिस्टिक समूहों को सीमित करने के लिए क्या किया जाता है और क्या ऐसे समूहों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है। हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आर्म्ड क्रिमिनलिस्टिक समूहों को दंडित करने के लिए हमारे पास पर्याप्त संसाधन और उपकरण हैं।

मुझे लगता है कि हमें इस मुद्दे पर और अधिक चर्चा करनी चाहिए।
 
यह तो बहुत बड़ा खुलासा है 🤯 मनिपुर में ऐसी साजिश कैसे हुई, ये तो समझ नहीं आ रहा है। पुलिस ने इतने जखीरे बरामद किए हैं और उनमें इतनी सारी चीज़ें शामिल थीं। मुझे लगता है कि सरकार को भी ऐसी बातों पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन ये तो प्रशासनिक जटिलताओं में फंस जाएंगे, नहीं तो यह साफ़ ही होगा।
 
જો, આ બધું કેવીયું? ત્રણ બાઓફેંગ હેંડસેટ અને એક હથિયાર લાવવામાં આવ્યા છે, તો પણ જળીખડાનો ભાગ કરીને થઈ શકે છે? અહીં એવું લાગે છે કે આ જળીખડા ઘણામાં ફેલાયેલા હોઈ શકે છે, તેથી રજિસ્ટર કરવામાં આવેલ પ્રક્રિયાનો હું ધ્યાન રાખીશ નહીં.

અને ઘણા ગોલાબારૂડનું સામાન્ય કે ખરીદી કરીને તેનો ઉપયોગ કરવાનું? આ સબળપણે અહીં મોઢે લઈ જશે.
 
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