दिल्ली में अब 11 की जगह 13 जिले होंगे: दिल्ली कैबिनेट ने प्रस्ताव मंजूर किया; लागू करने के लिए LG को भेजा जाएगा

दिल्ली में अब 11 की जगह 13 जिले होंगे, इस फैसले पर दिल्ली सरकार ने गुरुवार को प्रस्ताव मंजूर कर दिया है। अब लेफ्टिनेंट गवर्नर विनय कुमार सक्सेना को इस बदलाव को लागू करने के लिए भेजा जाएगा।

इस फैसले से दिल्ली में एसडीएम कार्यालयों की संख्या 33 से बढ़कर 39 हो जाएगी। अब हर जिले में मिनी सेक्रेटेरिएट बनेगा, जहां ज्यादातर सरकारी सेवाएं एक ही जगह मिलेंगी। इससे लोगों को एक से ज्यादा दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। काम जल्दी होगा, भीड़ कम होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी।

दिल्ली में मौजूदा 11 राजस्व जिलों को नए जिलों में बदल दिया गया है। अब सदर जोन को पुरानी दिल्ली जिला नाम दिया जाएगा। ईस्ट और नॉर्थ-ईस्ट जिले खत्म होकर शाहदरा नॉर्थ व साउथ बनेंगे। नॉर्थ जिले को सिविल लाइंस और पुरानी दिल्ली में बांटा जाएगा। साउथ-वेस्ट के बड़े हिस्से से नजफगढ़ नया जिला बनेगा।

एनडीएमसी व कैंटोनमेंट को न्यू दिल्ली जिले में मिलाया जाएगा। इससे लोगों को एक से ज्यादा दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। काम जल्दी होगा, भीड़ कम होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी।

इस बदलाव से दिल्ली में सरकारी कार्यालयों की संख्या बढ़ जाएगी। इससे लोगों को सुविधा मिलेगी।
 
नया जिला व्यवस्था तय हुई, फिर भी चिंता कौन करेगा? अब दिल्ली में 39 जिले होंगे, इससे तो ट्रैफिक और पार्किंग का बड़ा संकट होगा। लेकिन अच्छा, ऐसा नहीं है। न्यूनतम शुल्क वाली टैक्सी की तरह फिर से दिल्ली में बिगड़ जाएगी पार्किंग स्थिति, तो फिर कुछ काम है - दुकानों और ऑफिसों में से निकलने का साधन मिलता। इससे सरकारी वाहनों पर रोक लगने का डर भी कम होगा।
 
नम्बर 11 जिलों को फिर से बनाया गया है, यह तो अच्छा है कि कमियां ढूंढकर सुधार की जाएगी, लेकिन पुरानी जिले बदलने का क्या मतलब है? सबकुछ ठीक से समझा नहीं गया, नम्बर 13 जिलों को बनाने का मतलब ये है कि लोगों को भी नई जगहों पर जाना पड़ेगा। यह फैसला दिल्ली वासियों के लिए अच्छा नहीं लग रहा है।
 
मैंने तो कल सुबह ट्रेन पर गुजरते समय क्या देखा? फिर बहुत देर तक बालू में खोया हुआ एक पुराना कागज़ निकला और मुझे पल्ला लगा। क्या आपको ऐसा कभी लगता है? तो दिल्ली सरकार अपने नए फैसले से लोगों को ज्यादा सुविधाएं देने की बात कर रही है, लेकिन मुझे लगता है कि सबसे बड़ी सुविधा यह है कि हमें अपने कागज़ों को खोजने में आसानी होगी।
 
मुझे लगता है कि यह फैसला अच्छा नहीं था, यह तो देर से हुआ चाहे वह कहीं न कहीं। हमें पहले ही नई दिल्ली में सब कुछ एक ही जगह में होना चाहिए था। अब 13 जिले बनाने से क्या फायदा होगा, यह तो लोगों को और भी चक्कर लगाएगा। और नजफगढ़ नया जिला बनाकर दिल्ली का विभाजन और बढ़ेगा।

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बिल्कुल, यह फैसला ही चाहिए था, न कि 11 से 13 जिले तक, इससे सरकारी काम और भी बेहतर तरीके से चलेगा 🙌। सदर जोन को पुरानी दिल्ली जिला बनाकर नहीं तो हमें अब दिल्ली में एक अलग जिला होना पड़गा, और ईस्ट, नॉर्थ-ईस्ट, नॉर्थ, सिविल लाइंस, साउथ-वेस्ट जैसे कई जगहों को फिर से तय करना पड़ेगा।
 
तो ये नई जिला व्यवस्था कैसे होनी है? पहले तो 11 जिले थे, अब 13, यह बड़ा बदलाव है। लेकिन क्या यह बदलाव हमारे दिल्ली राज्य की स्वतंत्रता को कम कर रहा है? मेरा कहना है, यह फैसला गोविंद विलास केसरी जैसे पुराने खिलाफतवादियों की बातें करने वाले लोगों द्वारा चलाया गया है। उनका मकसद हमेशा दिल्ली के स्वतंत्र होने को रोकना है।
 
नई जिले बनाने से अच्छा, लेकिन काम कैसे चलेगा? इतने अधिक जिले होने से कार्यालयों में भीड़ बढ़ेगी, ना तो काम जल्दी होगा, ना ही पारदर्शिता। 🤔
 
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