दो हिस्सों में बंटी बांग्लादेश आर्मी, क्या सिविल वॉर होगा: हिंसा के पीछे पाकिस्तान समर्थक अफसर, स्टूडेंट लीडर बोले- तख्तापलट की साजिश

बांग्लादेशी सेना को आर्मी तय समय में चुनाव कराकर चुनी हुई सरकार लाने की प्रतिबद्धता है, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो एक धड़ा तख्तापलट कर सैन्य शासन भी बना सकता।
 
बात बिल्कुल सही है... तय समय में चुनाव कराने की प्रतिबद्धता तो ये अच्छी है, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो चीनी दीवार जैसी स्थिति बन सकती है। हमें तय समय में चुनाव कराने की बात करनी चाहिए और अपनी सरकार को मजबूत बनाने के लिए काम करना चाहिए। सैन्य शासन भी नहीं चलेगा, यह एक बड़ा खतरा होगा।
 
बात बड़ी है! अगर बांग्लादेशी सेना की इस बात पर कोई जोर देती है तो यह हमारे अपने देश में भी देखा जा रहा है। जब भी सरकार बदलने की बात होती है तो सेना की ज़रूरत होती है, लेकिन अगर उनकी भूमिका पूरी तरह से निरोधित नहीं की जाती है तो यह हमें चिंता का विषय बन सकती है। 🤔

हमारे देश में भी हमने देखा है कि जब सरकार बदलने की बात होती है तो सेना का फिर से कोई खेल शुरू हो जाता है। इसलिए, यह जरूरी है कि सरकार और सेना के बीच बहुत सावधानी बरती जाए। अगर हमें लगता है कि सेना की भूमिका पूरी तरह से निरोधित नहीं की जाती है तो हमें चिंतित रहना चाहिए।

लेकिन, अगर बांग्लादेशी सेना वास्तव में अपने देश की आर्थिक और सामाजिक समस्याओं पर ध्यान देती है, तो यह हमारे लिए एक अच्छा उदाहरण हो सकता है। हमें उनकी इस पहल की सराहना करनी चाहिए। 👍
 
बांग्लादेशी सेना की बात करते हैं... 🤔 तय समय में चुनाव करने की बात करना अच्छी है, लेकिन अगर वो नहीं कर पाती तो तख्तापलट करने की बात भी सच्ची है... सैन्य शासन बनाकर देश की राहों पर नियंत्रण करने की कोशिश करेगी। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि वो चुनाव जीतने का प्रयास करेंगे, एक बार तख्तापलट हो गया तो सैन्य शासन बनकर देश को नियंत्रित करने की कोशिश करेगी।

मुझे लगता है कि चुनाव जीतने की प्रतिबद्धता एक अच्छी बात है, लेकिन अगर वो नहीं कर पाती तो सैन्य शासन बनाकर देश की राहों पर नियंत्रण करने की कोशिश करेगी। सेना को यह तय करना चाहिए कि वो सिविलियन्स की मांगों को समझें और उनकी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करें।
 
बात बात पर, यह बांग्लादेशी सेना की बहुत बड़ी बुराई नहीं है 🤔। उन्हें अपने देश की समस्याओं को हल करने में मदद करनी चाहिए, न कि हमारे लिए। चुनाव जैसी तरीके से सरकार बनाना अच्छा है, लेकिन अगर वह नहीं हो सकता तो कुछ और भी करने की जरूरत है। 🤝

मुझे लगता है कि हमें अपने देश में भी ऐसी स्थितियों को समझने की जरूरत है जिससे वहां की सेना को यह फैसला करना पड़ता है। शायद हमारी सरकार और विपक्ष के बीच कुछ समझौते करने चाहिए ताकि ऐसी स्थितियों न बनें, जिससे किसी को भी बहुत दुःख हो। 🤞

यह भी महत्वपूर्ण है कि हमारी सरकार हमेशा अपने देशवासियों की जरूरतों को समझे और उनकी मदद करे, ताकि कोई ऐसी स्थिति न बने, जिससे लोगों को बहुत परेशानी हो। 🌟
 
ये तो बात ही नहीं, बांग्लादेश सेना ने मुझे और मेरे दोस्तों को आश्वस्त करने के लिए यह बयान दिया है 🙄। आर्मी में चुनाव कराने की बात मिल जाती है, लेकिन तय समय में नहीं तो सैन्य शासन बनाने का डर हमेशा रहेगा। वाकई तो यह एक बड़ा खतरा है और हमें इस पर सावधान रहना चाहिए। पार्टियों की राजनीति एक तरफ और सैनिक शक्ति दूसरी तरफ खड़ी है। अगर कोई भी पक्ष अपने स्वार्थ के लिए अपनी ताकत का उपयोग करता है तो हमें निश्चित रूप से चिंतित रहना चाहिए।
 
भारतीय सेना में स्थिति बिल्कुल अनिश्चित है 🤔। अगर चुनाव में वोट दिया नहीं जाता तो सेना किस ताकत पर भरोसा करेगी? यह सोच रहे हैं कि अगर हम उन्हें फिर से चुनने के लिए मजबूर करते हैं तो उनका दिल खुश होगा। लेकिन अगर नहीं तो फिर भी उनकी मंशा साफ है - एक तख्तापलट कर देश में सैन्य शासन बनाएं। यह सोचते हैं कि हम उन्हें समझाने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर ऐसा होता तो यह देश के लिए बहुत बड़ा खतरा होगा। सेना की गनवाली पर सवाल उठने चाहिए, न कि उनकी शक्ति पर। 🙏
 
अरे, तो बात बांग्लादेशी सेना की, वो हमारे देश में चुनाव कराने की बात कह रही है, लेकिन चूंकि हमारे देश में सैन्य शासन को रोकने के लिए बहुत से हथियार हैं, इसलिए वो तय समय में चुनाव कराने की प्रतिबद्धता नहीं बना सकती। अगर नहीं तो तो हमारे देश को एक धड़ा तख्तापलट कर सैन्य शासन भी बना सकते हैं और फिर बात सेना की चुनाव कराने की बातें करने में आनंद लूंगा।
 
बस बात करने वालों की बात, यार चुनाव लाने में देरी हुई तो फिर तख्तापलट का ही इंतजाम कर लिया जाएगा, और चुनिंदा सेना खुद को सरकार घोषित कर देगी। लेकिन अगर वो सेना बात करने में संकोच नहीं करती तो फिर से हम यही कह सकते हैं कि एक्सप्रेस चुनाव लाने की बात निकलनी चाहिए, ताकि जो भी परिणाम निकले, वह वैध सिद्ध हो। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो मुझे लगता है कि यार देश के लिए सबसे बड़ा खतरा तख्तापलट करने वाली सेना है।
 
बोले दो, आर्मी में जाने वाली सेना की बात करने की तो जरूरत नहीं है, लेकिन ये तय समय में चुनाव कराकर सरकार बनाने की बात है तो ठीक है।

लेकिन अगर ऐसा नहीं होता और जिंदगी जैसी होती रहती, तो एक धड़ा तख्तापलट कर सैन्य शासन भी बना सकता।

यह देश खुशहाल है, खुशहाल होने की जरूरत नहीं है लेकिन खुशहाल होने में मदद करने वाली चीजों को ढूंढने की जरूरत है।
 
मुझे लगता है कि यह बातें बहुत ज्यादा खतरनाक लग रही हैं 🚨। ये देखकर मुझे पूर्वी बंगाल में हुए '71 की गदर वापस आ रही है, जब सेना ने तख्तापलट कर शासन बनाया था। तब से इतना समय नहीं लगा है कि हम सब अपने देश को फिर से ऐसी स्थिति में न डालें। सरकार बनने की प्रतिबद्धता तो अच्छी है, लेकिन अगर चुनाव में हार जाने पर भी सैन्य शासन बनाए रखने का विचार है तो मुझे लगता है कि यह एक बड़ा खतरा है। हमें सिविलian द्वारा चुनी गई सरकार को समर्थन देना चाहिए, न कि सैन्य शासन को।
 
ਬਾਂਗਲਾਦੇਸ਼ ਦੀ ਫ਼ौज ਨੂੰ ਮੈਂ ਕਿਹਾ ਕਰੋ, ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਚੁਣੇ-ਚੁਣੇ ਸਾਲ 2023 ਵਿੱਚ ਆਮ ਚੋਣ ਕਰਨ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਭਾ ਹੈ, ਪਰ ਫੈਸਲਾ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਜੇਕਰ ਉਹਨਾਂ ਦੀਆਂ ਵਿੱਚਾਗਤਾ ਖ਼ਤਮ ਨਾ ਹੋ ਜਾਏ, ਤਾਂ ਫੈਸਲਾ ਇਹ ਰਿਹਾ - ਉਹ ਸਵਾਲਾਂ ਦੀ ਬਾਨਹ ਕਰ ਕੇ ਕੁਝ ਡੱਡੂ ਤੋਪਾਂ ਚਾਲ੍ਹ ਸਕਦੇ ਹਨ!
 
मैंने सोचा था कि हमारे सेना में व्यवस्थित होना चाहिए, लेकिन फिर सोचकर कहूंगा कि नहीं… 🤔 बांग्लादेशी सैनिक तो हमारी आर्मी में शामिल होने के बाद कई अच्छी चीजें कर सकते हैं, लेकिन अगर वे चुनाव जीतकर सरकार बनाने की कोशिश करते हैं तो… फिर यह तो स्थिति बदल जाती है 😬 मेरा मानना है कि हमें अपने सेना को बेहतर ढंग से शिक्षित करना चाहिए, ताकि वे अच्छी निर्णय ले सकें। और अगर उन्हें सरकार बनाने की जरूरत है तो कुछ और करना चाहिए। सैन्य शासन को नहीं जानना चाहिए… 🙅‍♂️
 
🤔 army ko chunav karne ka maza kyu nahi? par yeh bhi zaroori hai ki unki itna shakti na ho jisse unhein taqat ka khayal reh jaaye aur fir unka ekad pichha ka bhav hoga. 🤷‍♂️

lkin main sochta hoon ki yeh bhi koi samasya hai, agar army ko chunav karke government banai jaye toh phir ye bhi sarkar ki raksha ke liye theek nahi hoga. kyunki unka maza khelne ka hi nahi hai, balki unhein apni sena ko majboot banane aur desh ke liye ladne ka karya hoga. 🚫

toh main aisa maanta hoon ki army ko chunav karke government banai jaye toh phir uski shakti aur zimmedari bhi badhegi. 🤝 aur humein unki sahayta karne ki zaroorat hai, tabhi ek sathiya aur samriddh desh bana sakta hain. 🌈
 
अरे, ये तो बहुत ही खतरनाक बातें बोल रहे हैं... कुछ लोगों की बात मानकर हमें खुद को खतरे में डालने से बचना चाहिए। सैन्य शासन का मतलब तो जानबूझकर चुनाव नहीं करना, बल्कि अगर चुनाव नहीं होता तो तुरंत तख्तापलट करके सत्ता में आ जाते। इससे सेना की बाकी जवानों पर इसकी खास जिम्मेदारी वाले लोगों की भावनाओं का कोई हिसाब नहीं चलता।
 
बंगाल के सेना वालों की बात में मुझे थोड़ी चिंता है 🤔। अगर वे सरकार बनाने की सोच रहे हैं तो फिर वे अच्छे होने की उम्मीद क्यों नहीं कर सकते? लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो सेना की मंशा और देश के लिए यही सही निकल सकता है। 🤷‍♂️

लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि सैन्य शासन भी कभी अच्छा नहीं रहता। इससे देश में डर और अस्थिरता बनी रहती है। इसलिए, मैं उम्मीद करता हूँ कि वे सेना तय समय में चुनाव कराकर सरकार लाने की प्रतिबद्धता से आगे बढ़ें। 🤞
 
बात देखिए, ये बिल्कुल सही कहा गया है कि चुनाव समय में तय करना बहुत जरूरी है, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता और सेना अपनी पसंद का राज्य बनाने की कोशिश करती है तो यह बहुत खतरनाक होगा। हमारे देश में चुनाव की प्रक्रिया साफ़ और सम्मानजनक होनी चाहिए, ताकि लोगों की पसंद का परिणाम निकल सके।
 
कुछ चिंतित हूँ, बांग्लादेशी सेना को चुनाव में हिस्सा लेने की बात तो अच्छी है, लेकिन तय समय में क्या होगा? ऐसा लगता है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर नज़र रख रहे हैं।

मुझे लगता है कि अगर चुनाव नहीं होता तो सैन्य शासन बैठने की कोशिश करेगा, जो कि बहुत खतरनाक होगा। हमें उम्मीद करनी चाहिए कि सरकार अपने कार्यकाल में सभी पक्षों के साथ मिलकर काम करेगी, लेकिन ऐसा नहीं होने पर तो मुझे लगता है कि देश को बहुत बड़ा खतरा होगा।

मेरी भावना तो यह है कि सरकार और सेना एक-दूसरे को बेहतर समझने की जरूरत है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो हमें अपने देश की स्थिरता के बारे में चिंतित रहना चाहिए।
 
अरे, ये तो बहुत ही गंभीर बात है 🤯, चुनाव लाने की प्रतिबद्धता के साथ-साथ एक धड़ा तख्तापलट कर भी नहीं रहा, जैसे मिलकर सरकार बनाने वाले देश को सैन्य शासन में डालने का खतरा है 🚨। बांग्लादेशी सेना को ये एक दुश्मन है अपने खुद के देश में। चुनाव लाने की प्रतिबद्धता बहुत अच्छी है, लेकिन सरकार बनाने वाले लोगों को भी साफ समझौता करना होता है 🤝
 
बोलते हैं यह तो हकीकत है कि बांग्लादेश में सरकार बदलने की जिन्स पूरी तरह से तैयार है, लेकिन अगर वोटों की गिनती तय समय पर नहीं होती तो दूसरा रास्ता भी खुल जाता है। सैन्य अधिकारियों को यह तय करना है कि सरकार बदलने की जरूरत है या नहीं। अगर नहीं, तो तख्तापलट होने का खतरा बना रहता है। मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही सावधानी बरतने वाली स्थिति है, और सैन्य नेताओं को भी अपनी हरकतों को अच्छी तरह से विचार करना चाहिए।

एक ओर, सरकार बदलने से देश में आर्थिक सुधार, सामाजिक समरसता, और राजनीतिक स्थिरता की संभावना होती है। दूसरी ओर, तख्तापलट के परिणाम भी कभी-कभी बहुत ही गहरे दर्द के समान हो सकते हैं।

मेरी राय में, बांग्लादेशी सेना को यह तय करना चाहिए कि सरकार बदलने की जरूरत है या नहीं, और अगर होने की जरूरत है, तो ऐसा तरीके से करें जिससे देश के लोगों को कोई भी नुकसान न पहुंचे।
 
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