बोलते हैं यह तो हकीकत है कि बांग्लादेश में सरकार बदलने की जिन्स पूरी तरह से तैयार है, लेकिन अगर वोटों की गिनती तय समय पर नहीं होती तो दूसरा रास्ता भी खुल जाता है। सैन्य अधिकारियों को यह तय करना है कि सरकार बदलने की जरूरत है या नहीं। अगर नहीं, तो तख्तापलट होने का खतरा बना रहता है। मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही सावधानी बरतने वाली स्थिति है, और सैन्य नेताओं को भी अपनी हरकतों को अच्छी तरह से विचार करना चाहिए।
एक ओर, सरकार बदलने से देश में आर्थिक सुधार, सामाजिक समरसता, और राजनीतिक स्थिरता की संभावना होती है। दूसरी ओर, तख्तापलट के परिणाम भी कभी-कभी बहुत ही गहरे दर्द के समान हो सकते हैं।
मेरी राय में, बांग्लादेशी सेना को यह तय करना चाहिए कि सरकार बदलने की जरूरत है या नहीं, और अगर होने की जरूरत है, तो ऐसा तरीके से करें जिससे देश के लोगों को कोई भी नुकसान न पहुंचे।