Delhi Assembly: विधानसभा का सत्र आज से, प्रदूषण पर भाजपा सरकार को घेरेगी आप; इस बार नहीं बजेगी गणपूर्ति घंटी

दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया, जिसमें सरकार अपनी नीतिगत सोच, विकास योजनाओं और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर चर्चा करेगी। सदन में शोक प्रस्ताव भी लिया जाएगा। चार दिवसीय विधानसभा का सत्र 8 जनवरी तक चलेगा।

शीतकालीन सत्र में आम आदमी पार्टी (आप) वायु प्रदूषण को लेकर भाजपा सरकार को घेरने की तैयारी में है। आप विधायक दल के चीफ व्हिप संजीव झा ने कहा कि शीतकालीन सत्र में उनकी पार्टी के लिए प्रदूषण सबसे अहम मुद्दा रहेगा।

संजीव झा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार प्रदूषण पर ठोस कदम उठाने के बजाय एक्यूआई के आंकड़ों में हेरफेर कर रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदूषण मापने वाली मशीनों के पास पानी का छिड़काव कराया गया, ताकि रीडिंग कम दिखाई जाए और जनता को गुमराह किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह गंभीर विषय है और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

आप नेता ने कहा कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ा है। कई परिवारों को अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े और विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के कारण लोगों की सेहत पर गहरा असर पड़ा।

आने वाले दिनों में सत्र के दौरान महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और फैसले होने की भी संभावना है। इसमें सीएजी की रिपोर्ट पटल पर रखी जानी है।
 
मैंने सुना तो यह शीतकालीन सत्र में वायु प्रदूषण का बहुत बड़ा मुद्दा होने वाला है! 🤯 यह बिल्कुल सही है, हमारे शहर में लोगों की सेहत पर इसका बहुत गहरा असर पड़ रहा है। मेरे दोस्त का बच्चा ही इसी प्रदूषण से अस्पताल जाने पड़ा! 🤕

आप विधायक दल के चीफ व्हिप ने बिल्कुल सही कहा है, यह एक गंभीर विषय है और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। मैं उम्मीद करता हूँ कि शीतकालीन सत्र में सरकार इस पर कुछ प्रभावी निर्णय लेगी। हमें जल्द से जल्द अपने शहर को साफ और स्वस्थ बनाने की जरूरत है! 💚
 
प्रदूषण एक बहुत बड़ा समस्या है 🌪️, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह बहुत खतरनाक है । सरकार को वास्तव में इस पर serious step lena chahiye aur parda phulaana nahin bataane chahiye .

कुछ दिन पहले मैंने भी read tha tha ki उत्तर प्रदेश सरकार ne air purifier distribute karna shuru kar diya hai , lekin abhi tak uska effect dekhna nahi mila hai.

मेरi baat hai ki हमare देश mein paryavaran ke muddo ko lekar thoda serious approach lena chahiye.
 
दिल्ली विधानसभा शीतकालीन सत्र को लेकर बहुत ही उत्साहित हूं, लेकिन मुझे लगता है कि सरकार की तैयारी भी अच्छी नहीं हुई है। वायु प्रदूषण एक बहुत बड़ा मुद्दा है, और यहां तक कि आम आदमी पार्टी भी इसके खिलाफ लड़ रही है। लेकिन सरकार को अभी भी अपने निर्णयों पर सख्त खड़े रहना चाहिए।

मुझे लगता है कि सरकार वायु प्रदूषण पर कुछ भी नहीं कर सकती, तो फिर तो उन्हें कम से कम बोल देना चाहिए। यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है, और इसकी वजह से लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। मैं उम्मीद करता हूं कि विधानसभा में इस पर चर्चा हो और सरकार अपने निर्णयों को सुधारने की कोशिश करे।

मुझे लगता है कि प्रदूषण एक बहुत बड़ा मुद्दा है, लेकिन इसके बाद क्या होगा? अगर हम प्रदूषण पर नहीं सोच सकते, तो फिर कुछ और कहाँ से निकालिए? मैं उम्मीद करता हूं कि विधानसभा में इस पर चर्चा हो और सरकार अपने निर्णयों को सुधारने की कोशिश करे। 👀💨
 
बात तो इस प्रदूषण के लिए भारी हो गई है 🌫️। लोगों की सेहत पर इसका असर और भी बढ़ रहा है, तो सरकार को अपनी स्थिति में बदलने का समय आ गया है। पार्टियों ने चुनावों से पहले ही इस मुद्दे पर हमला करना शुरू कर दिया होगा, तो इसके लिए जवाबदेही कौन लेगा? 🤔

आजकल दिल्ली में केवल वायु प्रदूषण नहीं, बल्कि जल प्रदूषण और भी बढ़ रहा है। सरकार ने ऐसे मामलों पर कोई ठोस कदम उठाने की तैयारी नहीं की, जिसके लिए जनता को शिकायत करनी पड़ी। यह एक बड़ा मुद्दा है और इसकी समाधि जल्द से जल्द देखनी चाहिए। 💦
 
मुझे लगता है कि यह शीतकालीन सत्र हमारी सरकार को अपनी नीतियों और योजनाओं पर अच्छी तरह से विचार करने का मौका देगा। लेकिन प्रदूषण की बात करने वाली आम आदमी पार्टी की तेजी से बढ़ रही है। मुझे लगता है कि अगर हमारी सरकार प्रदूषण पर सच्चाई बता सकती है, तो यह बहुत अच्छा होगा। लेकिन अगर सरकार इस मुद्दे पर ठुकरा देती है, तो आम आदमी पार्टी और अन्य प्रतिपक्ष दलों की जिद भी नहीं मिटेगी। 🤔💡
 
बेटा, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है वायु प्रदूषण। सरकार से उम्मीद थी कि वे इस पर कुछ कदम उठाएंगे, लेकिन लग रहा है कि हमें और भी जोर से बोलने की जरूरत है। मैंने देखा है कि हरियाणा में ऐसा क्या बदलाव आया है, वहां की वायु प्रदूषण स्तर तो इतना बढ़ गया है कि लोगों को घर पर ही खुली छाती रखनी पड़ती है। यह तो बहुत गंभीर बात है, हमें इसके बारे में और भी जागरूकता फैलानी चाहिए।

शीतकालीन सत्र में यह एक मौका है कि सरकार अपनी नीतियों पर चर्चा करे और विकास के लिए सही रास्ता ढूंढे। हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सरकार वायु प्रदूषण को लेकर एक स्पष्ट रुख अपनाएगी।
 
भाई, ये दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र तो फिर से एक बड़ा मंच बन गया है! आम आदमी पार्टी ने यहाँ से अच्छे नतीजे लाने की उम्मीदें बढ़ी हैं। लेकिन भाई, प्रदूषण का मुद्दा तो बहुत बड़ा है, और इसके बारे में सरकार को सच्ची जवाबदेही दिखानी होगी। यहाँ पर हमें न केवल राजनीति करनी चाहिए, बल्कि हमें सामाजिक समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए भी बैठना होगा। 🤔

और भाई, दिल्ली विधानसभा में शोक प्रस्ताव लेने से न केवल सरकार को जवाबदेही दिखानी होगी, बल्कि हमें यह समझने की जरूरत है कि राजनीति करने के बाद भी हमें समाज की समस्याओं का समाधान ढूंढने की जरूरत है। यहाँ पर हमारी प्रतिभा, ज्ञान और देने की इच्छा का उपयोग करके हम समाज को बेहतर बनाने में सक्षम हो सकते हैं। 💪

आइए, भाई, आने वाले सत्र में सरकार से प्रदूषण पर चर्चा करें और एक साथ मिलकर समाधान ढूंढें। हमें अपनी आवाज उठानी होगी और दिल्ली को प्रदूषण-मुक्त बनाने की लड़ाई लड़नी होगी। 🚨
 
यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है वायु प्रदूषण का। शीतकालीन सत्र में आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार को घेरने की तैयारी में है। मुझे लगता है कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वे अपने नीतिगत सोच पर चर्चा करें और प्रदूषण के खिलाफ काम करें।

मैंने देखा है कि प्रदूषण के कारण लोगों की सेहत पर बहुत बड़ा असर पड़ता है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वे अपने नागरिकों की सेहत का ध्यान रखें और प्रदूषण को कम करने के लिए काम करें।

मुझे लगता है कि शीतकालीन सत्र में सरकार अपनी नीतिगत सोच पर चर्चा करेगी और प्रदूषण के खिलाफ काम करेगी। मैं उम्मीद करता हूं कि यह सरकार अपने नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखेगी और प्रदूषण को कम करने के लिए काम करेगा। 👍
 
मुझे लगता है कि शीतकालीन सत्र में प्रदूषण पर चर्चा करना एक अच्छा निर्णय था, लेकिन इसके बाद क्या हुआ? अभी तक सरकार को और भी कई बड़े मुद्दों को हल नहीं करने दिया गया। 😒

प्रदूषण के बारे में संजीव झा जी ने बहुत अच्छी बात कही है, लेकिन इसके पीछे क्या तर्क है? क्या वास्तव में सरकार प्रदूषण पर ठोस कदम उठाने के बजाय एक्यूआई के आंकड़ों में हेरफेर कर रही है? यह बहुत अजीब है और संदेह बढ़ाता है। 🤔

मुझे लगता है कि शीतकालीन सत्र में अगर प्रदूषण पर चर्चा करने का निर्णय लिया गया तो इसके बाद दिशानिर्देश बनाए जाने चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सरकार वास्तव में इस मुद्दे पर ध्यान देगी। अगर नहीं तो यह शायद एक पल की खेल बन जाएगा। ⏰
 
बिल्कुल, इस वायु प्रदूषण मुद्दे पर बात करना बहुत जरूरी है। सरकार को तुरंत कुछ कदम उठाने चाहिए। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आम आदमी की सेहत और भविष्य का ध्यान रखा जाए। प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार को अपनी पूरी ताकत लगानी चाहिए, न कि फिर से एक-दूसरे को दोषी ठहराने की बात करें।
 
वायु प्रदूषण की बात कर रहे तो यह बहुत ज्यादा बड़ा मुद्दा है... भाजपा सरकार ने शायद सही तरीके से इसका समाधान नहीं दिखाया है। आम आदमी पार्टी तो ठीक है, लेकिन उन्हें अपनी राजनीति को ठीक से चलाने की जरूरत है... यह प्रदूषण मुद्दा हर किसी के लिए महत्वपूर्ण है, और इसकी बात करना जरूरी है।
 
मैंने बीते दिन मेरी पत्नी ने मुझसे कहा कि वह अब शीतकालीन सत्र को देखना चाहती है, लेकिन मैंने उसे समझाया कि वाह मंदिर से तो हमारे परिवार में प्रदूषण बहुत ज्यादा नहीं होता 🤣, लेकिन शायद भाजपा सरकार के खिलाफ हमारी राजनीति कर रही थी। मेरे दोस्त ने मुझसे कहा कि मैंने अपने बेटे को एक साल पहले दिल्ली यूपीएस स्कूल में भर्ती होने के लिए लिखित परीक्षा में चोट लगी थी, वहाँ मैंने किसी भी तरह से वायु प्रदूषण नहीं देखा। लेकिन मुझे लगता है कि हमारे परिवार ने अपने बच्चों को स्कूल जाने के लिए बहुत अच्छे स्कूल चुने, जिससे उन्हें प्रदूषण की बात नहीं तो लगी। मैंने देखा है कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर पड़ता है, लेकिन मेरे चाचा ने मुझसे कहा कि वह भी वायु प्रदूषण से नहीं प्रभावित होते। मैं शायद समझ गया हूँ, जो दिल्ली से तो हमारे परिवार में प्रदूषण बहुत ज्यादा नहीं होता। 🤔
 
बड़ा मुद्दा है वायु प्रदूषण। सरकार को ऐसे में क्या करेगी, जिसे चुनावों के दौरान सबको गुमराह करने का मौका मिले। आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाया है और अब देखिए, उनकी बात सुननी पड़ेगी।

शीतकालीन सत्र के दौरान विधायक दल के चीफ व्हिप संजीव झा ने कहा है कि प्रदूषण सबसे अहम मुद्दा रहेगा। लेकिन सरकार को अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। तो अब देखिए, आम आदमी पार्टी भाजपा पर दबाव डालेगी।

मुझे लगा कि यह एक बड़ा मुद्दा है और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। सरकार को वायु प्रदूषण के बारे में सख्त कदम उठाने होंगे।
 
🎉✨ आज दिल्ली विधानसभा में शीतकालीन सत्र शुरू हो गया! 🌟 यह सरकार के नीतिगत सोच, विकास योजनाओं और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर चर्चा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। 🤔

प्रदूषण एक बहुत बड़ा मुद्दा है! 🌫️ यह बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर सबसे ज्यादा असर डालता है। 🤕 कई परिवार अस्पतालों के चक्कर लगाते हैं और विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रदूषण के कारण लोगों की सेहत पर गहरा असर पड़ता है। 😷

आप नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वे प्रदूषण पर ठोस कदम उठाने में असफल हैं और इसके बजाय मशीनों को हेरफेर कर रही हैं। 🤥 यह गंभीर विषय है और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। 💬

आने वाले दिनों में सत्र में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और फैसले होने की संभावना है। यह सरकार को अपनी नीतिगत सोच और विकास योजनाओं पर फिर से नजर रखने का एक अच्छा अवसर है! 📚
 
बड़ा बिगड़ा तो नहीं चालू हुआ, दिल्ली विधानसभा में प्रदूषण पर घेराव बनाने की कोशिश कर रही आम आदमी। लेकिन याद रखिए, सत्र 8 जनवरी तक चलेगा, तो चार दिवसीय तौर पर कहीं भी ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए। प्रदूषण एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन शॉक प्रस्ताव के साथ-साथ, सरकार वास्तविक समाधान लाने की कोशिश करे।
 
आपको लगे तो शीतकालीन सत्र में वायु प्रदूषण एक बहुत बड़ा मुद्दा बन गया है। मैंने भी अपने दोस्तों के साथ बातचीत की तो कहीं न कहीं सब लोग प्रदूषण पर चिंतित हैं। सरकार जरूर इस पर ध्यान देनी चाहिए। प्रदूषण इतना खतरनाक है कि बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे ज्यादा असर पड़ता है। हमें जरूर अपने शहर को साफ-सुथरा बनाने की कोशिश करनी चाहिए। 🌎
 
बड़े तो दिल्ली विधानसभा में यह सत्र कैसे शुरू हुआ, लेकिन पूरे देश में जहरीले धुएं के साथ हमारी बातचीत ही नहीं हुई। वायु प्रदूषण तो एक बहुत बड़ा मुद्दा है, और यह सरकार के नेताओं के बीच भी गंभीर विवाद का कारण बन सकता है।
 
प्रदूषण को लेकर बोलते समय शांति बनाए रखना जरूरी है 🙏। कुछ चीजों को देखने से पहले हमें सब कुछ समझना चाहिए। मुझे लगता है कि प्रदूषण एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन इसके बारे में जो बोल रहे हैं उसकी तारीफ करना जरूरी नहीं है। क्या हमें यह सुनिश्चित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए कि सत्र में सभी पक्षों की बातें सुनी जाएं? 🤔
 
मुझे लगता है कि यह सब तो एक बड़ा खेल है, सरकार नेताओं द्वारा अपनी छवि बनाने के लिए। वायु प्रदूषण, शिकायतें... सब कुछ ही एक बड़ी झूठी कहानी है। मैंने देखा है कि जब सरकार को लगता है कि उनकी छवि पर हमला होगा, तो वे अचानक से कोई बड़ा बदलाव लाने की कोशिश करती हैं। लेकिन मुझे लगता है कि यह सब एक बहुत ही रणनीतिक योजना है, जिसमें सरकार अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने की कोशिश कर रही है।
 
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