अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नए 'शांति' फॉर्मूले की घोषणा की है, जिसमें देशों को 8,200 करोड़ रुपये देने और युद्ध से बचने का विकल्प चुनने का प्रस्ताव दिया गया है। यह फॉर्मूला भारत की पारंपरिक विदेश नीति के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है, जिसमें देशों को विवादों को बातचीत से हल करने का मौका देने का प्रयास करता है।
ट्रंप के इस फॉर्मूले के तहत, अगर भारत यह बोर्ड का हिस्सा बनता है, तो उसे बहुत बड़ी राशि देनी पड़ सकती है। लेकिन इससे भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत हो सकती है और वह 'विश्व गुरु' की छवि बना सकता है।
लेकिन इस फॉर्मूले के पीछे क्या ताकत है, यह जानने के लिए विशेषज्ञों ने अपनी राय देनी शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा है कि यह फॉर्मूला भारत के बढ़ते आर्थिक कद और उसकी 'विश्व गुरु' की छवि के बीच एक कठिन चुनाव हो सकता है।
इस फॉर्मूले के तहत, अगर भारत इसमें शामिल होता है, तो वह वैश्विक विवादों को हल करने का मौका देने के लिए अपनी पारंपरिक विदेश नीति से बदलने को मजबूर होगा। इससे भारत की आर्थिक स्थिति और उसकी वैश्विक महत्वाकांक्षाएं सीधे जुड़ी होंगी।
ट्रंप के इस फॉर्मूले के तहत, अगर भारत यह बोर्ड का हिस्सा बनता है, तो उसे बहुत बड़ी राशि देनी पड़ सकती है। लेकिन इससे भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत हो सकती है और वह 'विश्व गुरु' की छवि बना सकता है।
लेकिन इस फॉर्मूले के पीछे क्या ताकत है, यह जानने के लिए विशेषज्ञों ने अपनी राय देनी शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा है कि यह फॉर्मूला भारत के बढ़ते आर्थिक कद और उसकी 'विश्व गुरु' की छवि के बीच एक कठिन चुनाव हो सकता है।
इस फॉर्मूले के तहत, अगर भारत इसमें शामिल होता है, तो वह वैश्विक विवादों को हल करने का मौका देने के लिए अपनी पारंपरिक विदेश नीति से बदलने को मजबूर होगा। इससे भारत की आर्थिक स्थिति और उसकी वैश्विक महत्वाकांक्षाएं सीधे जुड़ी होंगी।