यह तो बहुत ही गंभीर मुद्दा है! क्या हमने कभी सोचा है कि अंबेडकर जी की पहचान और विचारों पर लाए गए बयान कितने दिलचस्प हैं? अनिल मिश्रा जी ने कहा है कि डॉ. अंबेडकर बौद्ध धर्म अपनाया था, उनकी पहचान दलित नहीं है, बल्कि बौद्ध है। यह तो बहुत ही सोच-समझ कर किया गया बयान है।
लेकिन मैं इसे एक और दृष्टिकोण से भी देखना चाहूंगा। डॉ. अंबेडकर जी ने अपने जीवन में बहुत सारे संघर्ष किए थे, उन्होंने दलित समुदाय के लिए बहुत कुछ किया था, और उन्होंने अपने विचारों में भी दलितों की समस्याओं पर जोर दिया था। तो कहा जाए कि उनकी पहचान बौद्ध है, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हम उन्हें दलित समुदाय से अलग करें।
इस मामले में मैं सोचता हूं कि हमें अपने नेताओं और व्यक्तियों की पहचान पर बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। हमें उनके विचारों और कार्यों पर ध्यान देना चाहिए, और उन्हें एक पूरे व्यक्ति के रूप में देखना चाहिए, न कि केवल उनकी पहचान या धर्म पर।