ED छापे के बाद ममता की इमरजेंसी-मीटिंग में क्या हुआ: I-PAC स्टाफ के लिए ‘सीक्रेट गाइडलाइंस’ लागू, क्या रेड से BJP को नुकसान होगा

बसंत फिर से उत्पन्न हुआ, ममता की इस बात पर ED चुनावी रणनीति बन रही है। I-PAC और TMC नेताओं को बताया गया है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी ऐसी ही छापेमारी हुई थी।
 
बसंत फिर से उत्पन्न हुआ! 🌸 और यह बात तो सचमुच अच्छी लग रही है - श्रीमति ममता की इस बात पर ED चुनावी रणनीति बन रही है। लेकिन हमें समझना होगा कि क्या ईडी वास्तव में बसंत के पीछे की सरकार को देखने के लिए तैयार है? या यह सिर्फ एक छोटी सी राजनीतिक गेम है? 🤔

मुझे लगता है कि जैसे-जैसे चुनावों के दिन निकट होते जाएंगे, हमें जागरूक रहना होगा। I-PAC और TMC के नेताओं को यह जरूरी है कि वे अपने समर्थकों से प्रेरित करें और उन्हें चुनाव में भाग लेने के लिए मजबूर करें। 🙌

लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि यह छापेमारी एक ताकतवर दावा नहीं लगाती। चुनावों में जीतने के लिए हमें वोटरों को अपने साथ खड़े करने की जरूरत है। और इसके लिए हमें अपने विचारों को स्पष्ट रूप से साझा करना होगा। 💬
 
बसंत फिर से उत्पन्न हुआ, लेकिन मुझे लगता है कि यह सब कुछ पूरी तरह से प्यादों की बात है। I-PAC और TMC नेताओं को बताने से पहले क्या उन्हें पता था कि बसंत फिर से उत्पन्न होता है? या फिर यह बस एक चुनावी रणनीति का हिस्सा बन गया। मुझे लगता है कि पार्टियां अपने उम्मीदवारों को ज्यादा ध्यान देनी चाहिए, न कि बसंत की। और ED को यह सब क्यों बताया जा रहा है? क्या उन्हें लगता है कि यह एक अच्छी रणनीति है? या फिर बस प्यादों की बात मान रहे हैं।
 
बसंत फिर से उत्पन्न हुआ तो ED को निकाल लेना चाहिए, बाकी सब खेल है 🤷‍♂️। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी ऐसी ही छापेमारी हुई थी, लेकिन उस समय सरकार ने जो कहा, वो सुना। आज ED को चुनावी रणनीति बनाने देने से फायदा नहीं होगा। यह तो ममता की खेल है, उनकी बात पर हमें ध्यान देना चाहिए, पार्टी की छापेमारी करनी चाहिए न कि पार्टी के खिलाफ। 🙅‍♂️
 
बसंत का फिर से उत्पन्न होना तो बहुत अच्छी बात है, बसंत की खुशियों में कोई भाई को नहीं दुख होना चाहिए 🌼😊। लेकिन ED की इस बात पर चुनावी रणनीति बन रही है? तो मुझे लगता है कि यह पूरी तरह से सही नहीं है। बसंत के साथ छापेमारी करना और चुनावी रणनीति बनाना भी एक अलग मामला है 🤔। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी ऐसी ही छापेमारी हुई थी, तो यह तो हमें याद आ गया है कि कैसे बीजेपी ने इस्तेमाल किया था। लेकिन बसंत के साथ ED की इस तरह की रणनीति बनाना नहीं चाहिए।
 
बसंत फिर से उत्पन्न हुआ, लगता है कि ED बसंत की खेती में ही शामिल हो गया 🌼😒 क्या लोगों ने नहीं सोचा कि चुनाव प्रचार में छापेमारी करना कोई अच्छा विचार नहीं है? यह तो बसंत की खुशबू को बाहर कर देगा, जैसे ताजगी और उत्साह 🌺😊 I-PAC और TMC नेताओं को बताने से पहले क्यों नहीं सोचा कि उनकी रणनीति अच्छी हो सकती है? बसंत की खेती में ED तो चुनावी जीत की बात समझने में विफल रहेगा 🌻😅
 
बसंत फिर से उत्पन्न हुआ, तो शायद यही बात है कि लोगों का ध्यान फिर से दिल में आकर पुलिस चुनावी रणनीति पर लगा है। I-PAC और TMC नेताओं को भी याद होना चाहिए कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान वैसी ही छापेमारी हुई थी। तो अब ममता जी की इस बात पर ED चुनावी रणनीति बन रही है, तो यही संदेश है। लेकिन सवाल यह है कि बसंत के आसपास घूमती हुई छापेमारी क्यों? क्या पुलिस वाले लोग बसंत को चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाना चाहते हैं या फिर बसंत को कुछ गलत मानते हैं?
 
बसंत फिर से उत्पन्न हुआ, यह तो अच्छा है कि जनता अपना बोलबाला कर सके। लेकिन ED ने फिर से इस्तेमाल करने का प्लान तैयार किया, यह चुनावी रणनीति दिखाई देती है। ममता जी और I-PAC, TMC नेताओं को याद रखना चाहिए कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी ऐसे ही छापेमारी हुए थे। बसंत का फूल खुलता है तो लोगों की आवाज सुनने की जरूरत। ED ने यह फैसला नहीं किया, यह तय ममता जी और उनके प्रखंडों द्वारा किया गया।
 
बसंत फिर से उत्पन्न हुआ, यह तो अच्छा है लेकिन ED की छापेमारी से मुझे लगता है कि वे बसंत को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी ऐसी ही छापेमारी हुई थी, तब तो कुछ सवाल उठ गए थे।

अब यह कहा जा रहा है कि I-PAC और TMC नेताओं को बताया गया है कि बसंत फिर से उत्पन्न हुआ, लेकिन मुझे लगता है कि यह बसंत की वजह से नहीं है, बल्कि ED की वजह से।

मुझे लगता है कि चुनाव के दौरान ऐसी गड़बड़ी करने से निष्पक्षता खोने का खतरा है। चुनाव के दौरान ऐसी गलतियां कर सकते हैं जिससे उनके फैसलों पर सवाल उठाए जाएंगे।
 
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