ED कार्रवाई के एक दिन बाद I-PAC की पहली प्रतिक्रिया, जानें छापेमारी को लेकर क्या कहा

ED ने आई-पीएसी कार्यालय में छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए, जिसमें चुनाव अभियानों और राजनीतिक परामर्श के विवरण हैं। इस बीच, आई-पीएसी ने अपनी प्रतिक्रिया जारी की, जहां संगठन ने कहा है कि यह 'पारदर्शी और पेशेवर राजनीतिक परामर्श' प्रदान करता है, जिसमें कोई राजनीतिक विचारधारा प्रभावित नहीं होती।

आई-पीएसी ने बताया, "हम चुनावों में न राज्यसभा और राष्ट्रपति पद संभालते हैं, हम यहां तक की आम चुनाव भी नहीं लड़ते।" इसके अलावा, कंपनी ने कई दलों के साथ काम करने की भी बात कही, जैसे कि भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, टीएमसी, डीएमके, यशराज करपेट, बआरएस, जेडीयू, शिव सेना आदि।
 
मुझे लगता है कि ईडी ने बिल्कुल सही काम किया, लेकिन इसके पीछे क्यों कारण नहीं बताए गए? क्या यह तो बस इसलिए था कि उन्हें लगता है कि आई-पीएसी कुछ गलत कर रहा है? लेकिन फिर भी, अगर वे वास्तव में छापेमारी के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त करने की जांच कर रहे हैं, तो यह तो बिल्कुल सही काम है!
 
ED की यह मुहल्ला में हाथ फेरने की baat ho rahi hai 🤔. main sochta hoon ki yeh kya nishkarsh deta hai? ki unhone kuch galat pata lagaya ya sirf sahi kaha?

main sochte hain ki yeh ED ki jaati aur unke kaam ke liye ho gaya hai, jaise se unhein koi bhi baat nahin reh sakti. lekin ismein kuch galat pata lagaane waale bhi ho sakte hain.

main isse dekhna chahta hoon ki yeh kaam kaisa khaalta hai aur kya unhone sahi kaam kiya? 🤷‍♂️
 
बड़ा बड़ा झूठ! वे तो पैसे की दुनिया में हैं और चुनाव अभियानों में भी नमक खिलाते हैं। उनके दस्तावेज़ तो हमेशा सरकार से कुछ लेन-देन करने का बिंदु बताते हैं, नहीं तो फिर वे इतने बड़े और प्रभावशाली कैसे बन गए?
 
ED ने आई-पीएसी पर बहुत सारे दस्तावेज जब्त कर लिए हैं, अब यह सवाल उठता है कि ED ने इतने महंगे राजनीतिक परामर्श प्राप्त करने के लिए कैसे पैसे खर्च किए? 🤑 और अगर आई-पीएसी ने तो किसी भी दल के साथ काम नहीं किया है, फिर ED क्यों उन्हें दबाने की कोशिश कर रहा है? 🤔 चाहे वह कुछ भी हो, मुझे लगना है कि ED ने बस आई-पीएसी को बुरी तरह से डराया है! 😱
 
ED ने आई-पीएसी पर छापेमारी किया, और अब कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त हो गए हैं। मुझे लगता है कि यह तो पुलिस की बात हो सकती है, लेकिन ज्यादा नहीं। ED ने कुछ भी पक्का नहीं किया, बस विवरण जब्त कर लिए। शायद हमें इन सभी दलों के बीच में हिंसा और धमकी की बात करनी चाहिए, न कि पारदर्शिता और पेशेवरता। क्या ED ने जिन दस्तावेजों को जब्त किया, वे तो कुछ भी बड़ा नहीं थे।
 
ED ने क्या खोज लिया? सभी चुनाव अभियानों और राजनीतिक परामर्श के विवरण बर्बाद हो गए 🤦‍♂️। यह तो बड़ा मुद्दा है, हमारे देश में इतने पैसे लगाकर भी इस तरह की जानकारी जब्त कर लेनी ताकि आगे क्या हुआ?
 
बतौर तो यह बहुत ही रोचक है की आई-पीएसी के पास ऐसे कई दलों से राजनीतिक परामर्श करने की क्षमता है। लेकिन क्या हमें कभी सोचा था की उनके पास इतनी जानकारी और विवरण होगा? यह तो देखकर ही अच्छा लग रहा है की उन्होंने अपनी गोपनीयता और राजनीतिक परामर्श से बात करते हुए बहुत स्पष्ट है।

लेकिन मुझे लगता है की यह सब तो कुछ बड़े मेंदबाजी का हिस्सा है, जिसके पीछे क्या सच्चाई है? हमें पता नहीं है की कौन-कौन से दल उन्हें कैसे समर्थन देते हैं और फिर से उनके साथ मिलकर काम करते हैं। यह तो एक बहुत ही जटिल संबंध है, जिस पर और अधिक जानकारी की आवश्यकता है।
 
बिल्कुल मैने देखा है तो किसी भी काम में सफलता पाने का साथी कौन होता है, उसके बिना खाली हाथ चलना। यहां आई-पीएसी ने अपनी कड़ी मेहनत और सहयोग की बात कही है कि वो चुनाव अभियानों और राजनीतिक परामर्श के क्षेत्र में सफल रहे हैं। लेकिन यह सवाल उठता है कि अगर उन्होंने दूसरे दलों के साथ भी काम किया, तो उनकी सफलता किस प्रकार से हुई? यह कहानी हमें याद दिलाती है कि सहयोग और मेहनत के साथ, खुद को सफल बनाया जा सकता है।
 
ईडी ने आई-पीएसी पर छापेमारी किया और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए। तो फिर यह तो ईडी की बड़ी जीत है ना, आपने तयार किया था कि इन पुराने राजनेताओं ने सब कुछ ठीक से नहीं किया। लेकिन मुझे लगता है कि यह तो सभी को शांति और समर्थता देने का एक अच्छा अवसर है।
 
बिल्कुल, ED की यह कार्रवाई से पहले तो मैंने सोचा था कि इन्होंने क्या पकड़ लिया होगा, लेकिन अब तो पता चल गया है कि वे ज्यादातर चुनाव अभियानों और राजनीतिक परामर्श के बारे में जानकारी जब्त कर ली है। यह अच्छा है, लेकिन सोचिए, अगर ED एक छोटे स्कूल की सेवाएं प्रदान करने वाले संस्थान की तरह काम करता, तो क्या चीजें बेहतर होंगी?
 
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