एयरस्ट्रिप नहीं दिखी, क्यों लैंड हुआ अजित पवार का प्लेन: 5km का नियम, बारामती की 3km विजिबिलिटी में किसने दी लैंडिंग परमिशन

अजित पवार विमान क्रैश होने से पहले बारामती में निकलने गए थे। उनका यहां पहुंचने का उद्देश्य राजकीय शोक घोषित करना था।
 
अगर अजित पवार विमान क्रैश होने से पहले बारामती में निकलने गए तो उनकी गंभीरता पर सवाल उठ रहा है। क्या यह उसकी जिम्मेदारी नहीं थी कि वह अपनी यात्रा के बारे में खुलकर बताएं? अगर उन्होंने विमान क्रैश होने से पहले ही पता लगाया तो फिर उन्हें तुरंत कहीं नहीं जाना चाहिए था। लेकिन अब जब वह बारामती में पहुंच गए, तो उनका उद्देश्य राजकीय शोक घोषित करना है। यह कैसे संभव है? उनकी भावनाओं को समझना मुश्किल है और लोग कैसे निश्चित कर सकते हैं कि विमान क्रैश होने से पहले उन्होंने ऐसा क्या किया था।
 
આ વ્યાપાર જેનો અંત થયો છે, સમગ્ર દેશની ધાર્મિક આભાવ પહેલાં એક અનર્થપૂર્ણ ઘટના છે. તેઓ મોડીના બાદ જઈને આવ્યા હતા, તે સંગઠિત સમારોહ કરવા માટે. પરંતુ તેઓ જીવ આપવા માટે બન્યા હતા, શક્યત: સમગ્ર દેશમાં આંદોલનની જાગૃતિ.
 
अरे, ये तो बहुत बड़ा झगड़ा है। विमान क्रैश होने से पहले बारामती में निकलने जाने का अर्थ यही है कि अजित पवार को पता था कि उसका विमान क्रैश हो सकता है, लेकिन फिर भी उन्होंने ऐसा नहीं कहा। यह तो बहुत बड़ा संदेह है। मुझे लगता है कि सरकार को अपने नेताओं पर और ज्यादा देखभाल करनी चाहिए, खासकर जब वे जान-माल की बात कर रहे होते हैं।
 
अरे ये तो बहुत बड़ी चोट है भाई! अजित पवार विमान में जा रहे थे और फिर बैरामती में निकल गए, यह कैसा सोच कर चला गया? उनका उद्देश्य राजकीय शोक घोषित करना तो हुआ नहीं दिखा। क्या उन्हें पता था कि विमान क्रैश होने की चपेट में आ जाएगा? यह तो बहुत बड़ा निराशा है भाई। उनकी इस तरह से मुश्किल से निकलने की जरूरत थी, परंतु अब ये सब सही नहीं कहा जा सकता।
 
अरे, मुझे लग रहा है कि भारत में विमान सुरक्षा पर बहुत सावधानी नहीं हो रही। अजित पवार विमान क्रैश होने से पहले बारामती जा चुके थे, तो फिर उनका राजकीय शोक घोषित करने का उद्देश्य क्या? मुझे लगता है कि सरकार को अपनी नीतियों पर सुधार करना चाहिए, जिससे यात्रियों को सुरक्षा मिले।
 
मैंने पढ़ा है कि अजित पवार विमान क्रैश होने से पहले बारामती में गए थे। लेकिन मुझे लगता है कि वहां जाने का उनका उद्देश्य शायद राजकीय शोक घोषित करना नहीं था, फिर क्यों? ना कि मैं उन्हें बाध्य कर रहा हूँ, लेकिन अगर मेरी बात सुनने को तैयार हों तो वहां जाने का उनका उद्देश्य शायद राजनीतिक चालाकी थी।

मुझे अजित पवार पर बहुत भरोसा था, और मैं उन्हें अच्छे नेता मानता था। लेकिन अब जब मुझे ऐसी खबरें मिल रही हैं कि विमान क्रैश होने से पहले वहां गए, तो मेरा मनोरंजन करने वाला सवाल यह है कि क्या उन्होंने वास्तव में अपने नेतृत्व की प्रतिज्ञा पर खरे उतरा था। 🤔
 
अरे ये तो बहुत बड़ा मुद्दा है! लगता है कि चीजें तेजी से बदलती जा रही हैं, ना? आज कल किसी भी तरह का समारोह करने के लिए पहले से बात कर लेनी पड़ती है, तो विमान क्रैश होने से पहले ही पवार बारामती जा रहे थे। यह तो दुखद है कि उनके लिए ऐसा हुआ। मुझे लगता है कि हमें अपने इतिहास और परंपराओं को याद रखना चाहिए, न कि नई-नई चीजों में फंस जाना। राजकीय शोक घोषित करने की बात तो अच्छी है, लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि पवार के दुख को ठीक से सही तरीके से मनाने में ज्यादा समय लग सकता है।
 
मुझे अजीत पवार विमान क्रैश होने से पहले बारामती में निकलने की खबर सुनकर अचानक तो खुशी हुई 😕 लेकिन फिर मैंने सोचा कि ये बहुत बड़ी आश्चर्यजनक चीज़ है कि उन्होंने विमान क्रैश होने से पहले ही ऐसा कदम उठाया। यह उनके नेतृत्व और निर्णय शक्ति की बात है। मुझे लगता है कि अगर वहां तक पहुंचने के लिए कोई बड़ी समस्या नहीं थी, तो उन्हें पहले से जानकर ही कुछ करना चाहिए था। लेकिन शायद ये उनकी सरकारी व्यवस्था और नियंत्रण में थी।
 
मुझे लगा कि अगर अजित पवार विमान क्रैश होने से पहले बारामती में निकलने जाते तो क्या उनकी सरकार ने उन्हें सही सलाह दी थी? उनके कारणों को समझने की जरूरत है तो फिर भी। लेकिन अगर वहां नहीं गए तो इससे कैसे कोई फर्क पड़ेगा?

मुझे लगता है कि हमें अपने नेताओं की गुमनामी की बात करनी चाहिए। उनके लिए यह एक तरह से फायदेमंद होगा। लेकिन मेरी बात तो अलग है। अगर वहां गए तो वो भी कुछ नहीं कर पाएंगे।
 
मुझे लगता है कि इस विमान दुर्घटना से जुड़ी सब बातें धीरे-धीरे साफ होंगी। अगर अजित पवार विमान क्रैश होने से पहले बारामती में निकलने गए थे, तो यह मतलब है कि उन्हें जिस जगह पहुंचना था वहां कुछ जरूरी था। लेकिन अगर उनका उद्देश्य राजकीय शोक घोषित करना था, तो यह तो थोड़ा अजीब लग रहा है। अगर वे विमान दुर्घटना से जुड़े मामले को बारीकी से देखना चाहते हैं, तो उन्हें पहले उस जगह पर जाने की जरूरत होगी।

क्या उनके पास विमान दुर्घटना के बाद के सबूत हैं? क्या उन्होंने विमान दुर्घटना की जांच के लिए कोई टीम भेजी है? अगर नहीं, तो यह तो थोड़ा गड़बड़ीदार लग रहा है।
 
मेरे दोस्त, ये बहुत बड़ा झटका है ... अजित पवार को विमान क्रैश होने से पहले बारामती जाने की क्या वजह थी, मुझे नहीं पता। लेकिन यह तो स्पष्ट है कि उनके आने का उद्देश्य राजकीय शोक घोषित करना था, जो अच्छा विचार है। हमें सरकार द्वारा ऐसी बहुत बड़ी मेहनत और साहस के प्रतीक की याद बांटनी चाहिए। इसके अलावा, यह भी एक अच्छा अवसर है कि हम उनकी याद में एक सामूहिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करें।
 
😕 आज तो ऐसी खेद की बात है, अजित पवार जी की विमान क्रैश होने से पहले उन्होंने मुझे यही बताया था कि वह बारामती आ रहे हैं। मैंने उनसे कहा था कि अगर कुछ खास होगा तो फिर भी आप जैसे नेता विमान में सवार होने से पहले बहुत सावधानी बरत लें। 😔
 
अजित पवार विमान क्रैश होने से पहले बारामती में निकलने गए थे, यह बात मुझे बहुत अजीब लग रही है। अगर वहां जाने का उद्देश्य राजकीय शोक घोषित करना था, तो फिर उसकी जिंदगी क्यों निकाल देनी चाहिए? यह तो एक बड़ा प्रश्न है कि क्या उनके मुंबई विमान क्रैश होने से पहले राजकीय शोक घोषित करने का फैसला ऐसी बात होती है जिससे देशभर में लोगों को खेद महसूस हो। 🤔
 
अरे भाई दोस्त! इस दुर्घटना से पहले अजित पवार बारामती गए थे, तो वाकई उनका दिल किसी काम में नहीं लगा था। राजकीय शोक घोषित करने का उद्देश्य तो बहुत ही अच्छा है। यही हमारे देश की एकता और सामूहिकता को दर्शाता है 🤝। अगर किसी ने उनकी जान बचाने में मदद की तो भी वह बहुत ही शानदार होगा। इस दुर्घटना के बाद हम सभी एक साथ खड़े होकर उन्हीं की याद में राजकीय शोक घोषित करना चाहिए। यह हमारे देश को और मजबूत बनाने में मदद करेगा।
 
अगर कोई व्यक्ति अपने जीवन को सही दिशा में ले जाने का फैसला करता है, तो वह कभी भी पीछे नहीं देखता, नहीं, चाहे वह आसमान छूने या अपने सपनों को सच बनाने के लिए कहीं भी चले। अजित पवार जी की इस बातचीत में हमें यह बहुत ही महत्वपूर्ण सबक सीखने को मिल रहा है। अगर उनके विमान में हिस्सा बनने का मन नहीं कर रहा था, तो वह तो भी अपने घर खाली छोड़कर बारामती चले गए। यह सिर्फ उन्हें याद दिलाता है कि जीवन हमेशा नई ऊंचाइयों और नए अवसरों से भरा रहता है।
 
बड़ा दुखद पल! अजित पवार विमान क्रैश होने से पहले बारामती में निकलने गए थे, जिससे उनकी योजना भी टाल गई। अब राजकीय शोक घोषित करने का उद्देश्य उनके लिए कैसा होगा, यह दुखद है। वह एक महान नेता हैं और उनकी मृत्यु से हमारे देश के नागरिकों को बहुत दर्द हुआ होगा। मुझे लगता है कि उनकी मृत्यु के बाद सरकार हमें बड़ी संख्या में लाभ प्रदान करेगी। वह एक सच्चे नेता थैं और उनकी विरासत हमेशा हमारे दिलों में रहेगी।
 
मैं समझ गया, पवार जी की बात हो रही है, अगर विमान क्रैश हुआ तो कौन फंसेगा? 🤔 बहुत से लोगों को परेशानी होगी, उनकी जान जोखिम में आ गई। और पवार जी के घर जाने का मकसद शोक घोषित करना था, लेकिन अगर विमान क्रैश हुआ तो हमें पहले उन परेशान लोगों की स्थिति को देखना चाहिए। फिर भी, पवार जी ने अपना काम पूरा किया और शोक घोषित करने का काम किया, लेकिन मैं सोचता हूँ कि हमें पहले उन परेशान लोगों को सहायता देनी चाहिए।
 
ਇਹ ਘਟਨਾ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਆਏ ਸਮੇਂ, ਅਜਿੱਥੇ ਬੈਰਾਮਤੀ ਵਿੱਚ, ਕਿਉਂ ਨਹੀਂ ਗਏ? ਫਿਰ ਭੀ, ਜੋ ਦੁਖੀ ਪਰਿਵਾਰ ਹਨ, ਇਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਕਿੰਨਾ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਗੁਜ਼ਾਰਾ ਹੈ? ਲਾਡਚੀਆਂ ਅਤੇ ਸੋਚ-ਮੱਥੇ ਕੀਤੇ, ਪਰ ਭਾਵੇਂ ਕਿ ਦੁਖੀ ਹੋਣ ਲਈ ਆਪਣੀਆਂ ਗੱਲਾਂ ਬਿਨਾਂ ਅੰਚਲ ਵਿੱਚ ਕਿਉਂ ਜਾ ਸਕੇ?
 
अगर वह इस समय यहाँ नहीं थे तो यह सब कुछ और भी गंभीर होने वाला था। मेरी बेटियों को जब भी कोई बड़ा निर्णय लेना होता है तो उनकी पत्नी या माता-पिता की मुश्किलें से ज्यादा दुःखद होना चाहिए। अगर उन्होंने अपना समय इस तरह बर्बाद नहीं किया तो यह घटना कहीं भी न हुई और हमारे परिवार का खून बहता नहीं था।
 
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