मुझे लगता है कि अजित पवार विमान क्रैश होने से पहले बारामती में निकलने गए थे तो उनका यहां पहुंचने का उद्देश्य शायद राजनेताओं और समाज से दूर करने का था। यह एक अजीब पल लगता है, जैसे कि वे अपने निर्णयों की सजा को भुगतने आई है। मैं समझता हूं कि उन्होंने बहुत बड़ी गलती की होगी, लेकिन यह तभी सही होता जब हम उनके इस्तीफे पर दखल देने के बाद विमान क्रैश होने की जांच करें।
मेरे मन में एक सवाल उठता है कि क्या उन्होंने इसके लिए कोई रास्ता नहीं देखा था, शायद उनके नेतृत्व में सरकार को ये पता ही चाहिए था। लेकिन अगर ऐसा हुआ तो सरकार को विमान क्रैश के पीछे की सबकुछ जांचने और उन पर भी दबाव डालने की जरूरत है।