गैंग्स ऑफ म्यावड्डी; 1 लाख सैलरी-बंगले का ऑफर, मिली गुलामी: 16 भारतीय फंसे, 18 घंटे काम नहीं तो रॉड से पिटाई; बोले- बचा लो

म्यांमार जैसे कई देशों को भारत सरकार ने विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पैनल (NSA) की मदद से बचाया है।

भारत के पास यूके सहित कई इंग्लिश भाषी देशों को अपनी बात समझने में कामयाबी मिली है और इन सभी देशों में विदेश मंत्रालय से लेकर राजदूत से तालमेल बनाने में भारत सफल रहा है।
 
मेरा मानना है कि भारत ने विश्व को एक अच्छी बात सिखाया है, जैसे कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या को देखकर पूरे विश्व में गर्व होता है 🙌। भारत ने विदेशी देशों से बहुत अच्छी तरह से बातचीत की है, जैसे UK, US, Australia आदि और यूके सहित कई इंग्लिश भाषी देशों में हमारी सरकार को अपनी बात समझने में सफल रही है #भारतकीशिक्षा।
 
😂🤣 देखो ये बात चालू है! 🚀 भारत की राजनीति में देश को बचाने का मूड सिर्फ तब आता है जब इंग्लिश भाषी देशों को हमारी बात समझने में मदद करनी पड़े। 😉 विदेश मंत्रालय और NSA की मदद से निकलने वाला क्या जवाब? 🤷‍♂️ कुछ तो है! 😜
 
मेरा विश्वास है कि यूके सहित कई इंग्लिश भाषी देशों को अपनी बात समझने में सफल होने का एक बहुत बड़ा कारण यह है कि उनके पास सांस्कृतिक रूप से हमारे समकक्ष हैं। लेकिन, मैं नहीं सोचता कि ये देश बस इतने अच्छे हैं, क्योंकि वहां भी अपने अपने दुर्दशाएं और चुनौतियां हैं।

मेरे विश्वास का एक और हिस्सा यह है कि हमारे पास विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पैनल (NSA) जैसी संस्थाएं हैं जो हमें अपने देश की राजनीतिक बाज़ार में तेजी से आगे बढ़ने में मदद करती हैं। लेकिन, मुझे लगता है कि अगर हमारे पास इन सभी संस्थाओं की तरह अच्छी और सही निरीक्षण भी होती, तो शायद हम अपने देश की राजनीतिक शक्ति को और अधिक मजबूत बना सकें।
 
बोलो! मुझे लगता है कि भारत सरकार ने अपनी पूरी चतुराई का इस्तेमाल करके कई देशों को बचाया है। यूके, जापान, और अमेरिका, इन सभी इंग्लिश भाषी देशों में हमने अच्छी संबंध बनाए हैं जिससे हमारे विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पैनल ने मदद की। म्यांमार जैसे कई देशों को बचाने में भारत सफल रहा है, और अब भारत की बात समझने में हमारे लिए यह अच्छा है कि हम इंग्लिश में भी अच्छे से बोल सकते हैं।
 
क्या ये भी एक प्लेटफ़ॉर्म की बात करें? भारत सरकार ने विदेश मंत्रालय और NSA की मदद से कई देशों को बचाया है, लेकिन किसने इसे जानने दिया? ये तो सिर्फ प्लेटफ़ॉर्म की गलती है कि ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर बात करने के लिए जगह नहीं मिलती। और अब हमें यह भी पता चल रहा है कि भारत ने यूके सहित कई इंग्लिश भाषी देशों को अपनी बात समझाने में सफल रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अपने स्वयं के विदेश नीति विषयों पर चर्चा करने की जगह खो देनी चाहिए। 🤔
 
म्यांमार जैसे कई देशों को बचाने की बात तो कोई नई चीज नहीं है! 😂 हमेशा ऐसे देश होते हैं जहां से लोग भारतीय फिल्में और टीवी शोज देखकर सोचते हैं कि यहां मुश्किल नाहीं! 🤣 तो भारत सरकार ने विदेश मंत्रालय और NSA की मदद से उन्हें बचाया है तो अच्छा है, लेकिन अगर हमारे देश के बाहर जाकर भारतीय फिल्में दिखाने से पहले उन देशों की सरकारों को समझने में सफल रहे हैं तो ये और भी अच्छा है! 🤓
 
Wow 🤩, ये बात बिल्कुल सही है! म्यांमार जैसे कई देशों को बचाया गया है और यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है । मुझे लगता है कि भारत ने अपने विदेश मंत्रालय और एनएसए की मदद से इन देशों को समझाने में सफलता पाई है जो यूके सहित कई इंग्लिश बोलने वाले देशों में तालमेल बनाया गया है । यह भारत के लिए एक बहुत बड़ा हाथ है और हमारी सरकार ने इसे अपने पक्ष में उपयोग करने के लिए बहुत सावधानी बरती है। Interesting 💡
 
ਮਿਸ਼ਰਤ ਨੀਤੀ ਚਲਾਉਣ ਦੇ ਬਾਅਦ ਜਿਵੇਂ ਵੀ ਮੈਂ ਕਹਿ ਗਿਆ ਸੀ, ਇਹ ਤਰ੍ਹਾਂ ਹੀ ਕੰਮ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ। 🙌

ਲੰਡਨ ਵਰਗੇ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਭਾਸ਼ੀ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੀ ਮਿਹਨਤ ਕਰਨ ਲਈ, ਸਾਡੇ ਪਾਸੋਂ ਬੜੀ ਅਗਵਾਈ ਲਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। 🤓

ਰਾਜਦੂਤਾਂ ਦੇ ਮੁਖਾਬਰੇ ਨੂੰ ਨਿਆਂ ਵਿਭਾਗ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਸਿਹਤ ਮੰਤਰਾਲੇ ਤੱਕ ਅੰਦਰਾ ਹੀ ਪੁੱਛਣ ਲਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। 🚨

ਆਮ ਤੌਰ 'ਤੇ, ਸਿਖਰ ਵਾਲੇ ਨੁਕਸਾਨ ਭਾਰਤ ਦੇ ਪਹਿਲਾਂ ਵਧੇਰੇ ਜ਼ੋਰ ਨਾਲ ਚੁੱਕਣ ਲਈ ਮੁਸ਼ਕਲ ਹੁੰਦੀ ਹੈ। 😬
 
भारत को विदेश मंत्रालय के अलावा एक और मददगार बात यह है कि हमारी नागरिकों को विदेश जाने पर बहुत आसानी से पासपोर्ट मिल जाते हैं 🛫️। यूके सहित इंग्लिश भाषी देशों में हमें अपनी सरकार की बात समझने में कामयाबी मिल रही है और यही वजह है कि हम उन्हें कई समस्याओं से बचा पा रहे हैं 🙏। भारत की सफलता को देखकर एक जैसे देशों को भी लाभ उठाना चाहिए।
 
भारत को विदेश मंत्रालय और NSA की मदद से कई देशों को बचाया गया है, जैसे म्यांमार 🙏। ये तो हमारे देश की भारतीयता और साहस की बात है। लेकिन याद रखें हमने इन देशों को बचाने के लिए कितनी मेहनत की है? हमें अपने देश की खुशियों पर जश्न मनाना चाहिए, न कि केवल समस्याओं को दबाकर रख देना। और भारत के पास यूके, अमेरिका, कनाडा जैसे इंग्लिश भाषी देशों में हमारी बात समझने की क्षमता है, यह तो बहुत अच्छी बात है 💡
 
🤔 यार, तो देखिए, भारत की बात समझने में इंग्लिश भाषी देशों को पीछे छोड़कर निकल जाते हैं! 😮 यूके, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा आदि सभी देशों में हमारे विदेश मंत्री और राजदूत की बात समझने में सफल रहे हैं, तो यह एक अच्छी बात है! 🙌 लेकिन, तो मैं कहूंगा कि भारत सरकार ने यह सब करने के लिए बहुत सावधानी बरती होगी, और विदेश मंत्रालय और NSA की मदद से बचाया गया है तो यह एक अच्छा फैसला है, लेकिन हमें भारतीय सरकार को आगे भी अपनी बात समझने में सफल होने के लिए प्रयास करना चाहिए! 💡
 
भारत ने बाकी सब को शिक्षित कर दिया 🤓 क्योंकि हमने जैसे विदेश मंत्रालय और NSA की मदद ली, वैसे सारे देश इंग्लिश भाषी हैं तो बात समझाने में फेल हुए। लेकिन हमने अपनी सफलता को खुद को साबित करने की कोशिश की और अब यूके सहित इंग्लिश भाषी देशों की तरह ही अन्य सभी देशों में तालमेल बनाने में कामयाब रहे।
 
म्यांमार जैसे कई देशों को बचाने की बात करने पर मुझे लगता है कि यूके सहित कई इंग्लिश भाषी देशों की मदद से हमें अपनी मजबूतता को बढ़ाने में मदद मिली। जब तक हमारे विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पैनल ने इन देशों की मदद ली, तब तक कुछ बड़े हस्तक्षेप नहीं हुए। और मुझे लगता है कि इन सभी देशों में हमारे तालमेल बनाने में हमारी फिर्की भाषा प्रभुत्व की बात करनी चाहिए, क्योंकि कोई भी इंग्लिश नहीं समझते हैं और हमारे देश से निकलने वाले लोगों को किसी भी भाषा में समझाना आसान नहीं है।
 
भारत की बात समझने की क्षमता जैसी चीज़ बहुत जरूरी है जब देशों को अपने हितों की रक्षा करनी होती है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि भारत विदेश मंत्रालय और NSA की मदद से कुछ बड़े देशों को बचा सकेगा। लेकिन अगर हम देखें तो यूके सहित कई इंग्लिश बोलने वाले देशों ने भारत की बात समझने में सफल रहे हैं। यह एक अच्छी बात है और मुझे लगता है कि इसके पीछे भारतीय राजनेताओं की कड़ी मेहनत और विदेशी मामलों को समझने की क्षमता है।
 
बोलते हैं कि देश को बाहरी शक्तियों से बचाया जा सकता है तो यही सही है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि विदेश मंत्रालय और NSA का सहयोग हमारी संप्रभुता को कैसे बढ़ाएगा। मैंने देखा है कि ब्रिटेन और यूक्रेन जैसे देशों ने भारत की मदद ली है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी सहायता वाले देश हमारे हित में हैं।
 
अरे, देखो ये म्यांमार जैसे कई देश की बात कर रहे हैं कि भारत सरकार ने उनकी मदद की। लेकिन याद रखो, भारत की बुद्धिमत्ता और राजनीतिक चालाकी की बात करने से पहले हमें उसके पीछे की मंशा को समझना होगा। यह तो सच है कि यूके सहित कई इंग्लिश भाषी देशों को अपनी बात समझने में सफल रहे, लेकिन यह भी सच है कि हमारे पास अपनी मजबूत नीतियों और सुरक्षा सलाहकार पैनल की मदद से इन देशों को आकर्षित करने का तरीका भी है। और जब विदेश मंत्रालय से लेकर राजदूत तक तालमेल बनाने में हम सफल रहे, तो यह किसी कामयाबी नहीं है, बल्कि एक सख्त नीति का परिणाम है जिसमें हमारा देश मजबूत होता जा रहा है।
 
मैंने कभी नहीं सोचा था कि म्यांमार जैसे देशों को भारत ने इतनी आसानी से बचाया होगा। लगता है कि हमारी सरकार और विदेश मंत्रालय में बहुत साहस और समझदारी है। 😊

मुझे यूके सहित कई इंग्लिश भाषी देशों में भारत की सफलता की बात करने में खुशी हुई। हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को इन देशों में समझाने में सक्षम हुए हैं और उन्हें विश्वास दिलाया है। यह हमारी भारतीयता की सच्चाई को दर्शाता है। 🙏

लेकिन जैसे ही मुझे ये बातें सोच रही थी, एक सवाल आया मेरे मन में। क्या हमने वास्तव में इन देशों में अपनी भारतीयता को पूरी तरह से समझाया है? क्या हमने उन्हें अपनी सांस्कृतिक समृद्धि को समझाने का पूरा मौका दिया है? यह सवाल हमारे लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है। 🤔
 
म्यांमार जैसे कई देशों को बचाने की बात अच्छी लगी, लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि इसके पीछे वास्तविकता और जिम्मेदारी कितनी होती है। भारत ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा को बहुत गंभीरता से लिया है, और वहां होने वाली चुनौतियों का मामला तो पूरा दुनिया का नहीं है।

और यूके सहित इंग्लिश भाषी देशों पर ध्यान देना अच्छा है, लेकिन हमें उन्हें समझने और अपनी बात कहने के तरीके में कामयाबी प्राप्त करने की ओर बढ़ने की जरूरत है। भारत को ये सब अच्छा सीखने का मौका देना चाहिए, ताकि हम अपनी सीमाओं की सुरक्षा और अपने पड़ोसियों के साथ सहयोग बढ़ा सकें।
 
म्यांमार जैसे कई देशों को बचाने की बात तो सुनकर अच्छी लगी, परन्तु यह पूरा खेल अंतर्राष्ट्रीय राजनीति है, जहां हर देश अपना हित देखता है। मुझे लगता है कि यूके सहित इंग्लिश भाषी देशों को समझने में हमारी सफलता न केवल अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में फायदा है, बल्कि अपने आप को और अन्य लोगों को भी जागरूक बनाने का एक अच्छा तरीका भी है।
 
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