गुजरात में पड़ोसियों ने व्यक्ति को जिंदा जलाया, VIDEO: घर के बाहर बैठने को लेकर विवाद, डीजल डालकर आग लगाई; 3 गिरफ्तार

गुजरात के गांधीधाम में एक व्यक्ति को जिंदा जला दिया गया, जबकि उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। यह घटना घर के बाहर बैठने के विवाद को लेकर हुई थी।

विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने 50 साल के करसनभाई को पकड़कर उनके साथ मारपीट की। इसके बाद जब करसनभाई अपने घर के बाथरूम में गए तो आरोपी उनके पीछे पहुंच गए। वहां उन पर डीजल डालकर आग लगा दी गई, जिससे उनका पूरा शरीर बुरी तरह झुलस गया।

घटना के बाद परिजनों ने उन्हें तुरंत भुज के जीके जनरल अस्पताल में भर्ती कराया। रात में पुलिस की मौजूदगी में करसनभाई की मौत के पहले बयान दर्ज किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

पुलिस ने बताया कि घटना के बाद गांधीधाम बी डिवीजन पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस इंस्पेक्टर एसवी गोजिया की टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपियों में 30 साल की प्रेमिलाबेन नरेशभाई मातंग, 36 साल की अंजूबben उर्फ अजीबben हरेशभाई मातंग और 47 साल के चिमनाराम गोमाराम मारवाड़ी हैं। मामले में एक अन्य महिला आरोपी मंजुबेन लाहिड़ीभाई माहेश्वरी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।
 
जलना न तो भाई की मौत, न ही उसकी शान. दिल दहल गया 🤕। गांधीधाम में ऐसे विवाद होते हैं जब पूरा इलाका धुंधला हो जाता है। पुलिस की आंखें तेज होनी चाहिए, लेकिन लगता है कि वह भी अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है।
 
यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है 🤕। मुझे लगता है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हमें एक साथ मिलकर सोचना होगा। घर के बाहर बैठने का विवाद तो बहुत ही हल्का मामला है, लेकिन यहां पर इतनी गंभीरता से आग लगाने की घटना तो बहुत ही चिंताजनक है। पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़कर गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अभी तक मंजुबेन जैसी अन्य महिला आरोपी फरार है और उसकी तलाश चल रही है।

मुझे लगता है कि हमें अपने समाज में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक साथ आने की जरूरत है। हमें अपने घरों के बाहर की स्थितियों को समझने की जरूरत है और जब भी कोई समस्या arises तो जल्दी मदद मांगनी चाहिए।
 
तो क्या हुआ करसनभाई साहब? 50 साल के आदमी को घर के बाहर बैठने के विवाद में लेकर तो फिर इतनी दुष्चर्य कैसे हुई? पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़ लिया है, लेकिन कोई जांच नहीं हुई, कोई सबूत नहीं मिला, तो यह कैसे संभव? 🤔

मैं समझता हूँ घर के बाहर बैठने के विवाद में लेकर तो फिर इतनी भावनाएं जुट सकती हैं, लेकिन ऐसे बड़े दुष्चर्य कैसे होने चाहिए? पुलिस इंस्पेक्टर एसवी गोजिया की टीम ने खुफिया जानकारी के आधार पर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, लेकिन यह तो फिर इतनी मुश्किल सी बात है? 🚔

अब करसनभाई साहब की मौत हो गई, और पुलिस ने बयान दर्ज किया है, लेकिन मुझे लगता है कि यह बहुत जल्दी नहीं हुआ होगा। पुलिस को तुरंत जांच करानी चाहिए, और आरोपियों को सख्त सजा देनी चाहिए। 🚫
 
गांधीधाम की यह घटना बहुत ही गंभीर है... पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया, लेकिन मुझे लगता है कि उनके पीछे कुछ और भी जांचने देना चाहिए... पूरा मामला साफ नहीं है। आरोपियों ने करसनभाई पर हमला क्यों किया, उसकी मर्जी थी कि घर के बाहर बैठे? इससे पहले भी ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, लेकिन कभी नहीं सुना गया कि आरोपियों को सजा मिली। मुझे लगता है कि हमें अपनी संवेदनशीलता बढ़ानी चाहिए और जिंदा जलाने वालों को दंडित करना चाहिए...
 
बड़ा गला आ गया, न सिर्फ करसनभाई, बल्कि पूरे गांधीधाम में! 50 साल के व्यक्ति को जिंदा जलाने का यह खिल्ली तो देखने को मिलती है या देखकर भी नहीं जाती। रिश्वत और माफिया की गतिविधियों को रोकने के लिए पुलिस इंस्पेक्टर एसवी गोजिया की टीम ने तीन आरोपियों को पकड़कर गिरफ्तार कर लिया, लेकिन एक महिला आरोपी मंजुबेन लाहिड़ीभाई माहेश्वरी फरार है, यह तो और भी बुरा है। 🚔 8.5% पुलिस व्यावसायिक अपराधों के मामले में गुजरात में सबसे अधिक आरोपियों को पकड़ने का राज्य किया गया। 📊

गांधीधाम में पीड़ित की प्रार्थना माँ जानकी (प्रेमिलाबेन नरेशभाई मातंग) की उम्र 30 साल, जबकि मृतक की उम्र 47 साल है। 🤝 15.2% बुलेट प्रूफ वाले हथियारों से जुड़े अपराध के मामलों में गुजरात ने एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है।

यह घटना घर पर बैठने के विवाद को लेकर हुई थी, लेकिन तेजी से बढ़कर हत्या का मामला बन गई। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने पीड़ित के साथ मारपीट की और उसके शरीर पर डीजल डालकर आग लगाई गई। 🚒

गुजरात के गांधीधाम में इस तरह की घटनाएं होना आम बात बन गई है। यहाँ 5 साल में 40% पुलिस व्यावसायिक अपराधों के मामले में गुजरात ने सबसे अधिक आरोपियों को पकड़ने का राज्य किया गया।
 
मैंने पढ़ा कि गांधीधाम में व्यक्ति को जला दिया, लेकिन इसके बाद उसकी मौत हो गई। मुझे लगा कि यह घटना बहुत ही दुखद है, लेकिन फिर मैंने सोचा कि शायद वह व्यक्ति जिंदा नहीं था जब उन्हें जला दिया गया, क्योंकि उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। लेकिन फिर मैंने सोचा कि शायद वह व्यक्ति जिंदा था, और इसकी वजह से उनकी मौत हुई, यह बहुत ही दुखद है। मुझे लगता है कि हमें इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कुछ करना चाहिए, लेकिन फिर मैंने सोचा कि शायद हमें अपनी खुद की जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए।
 
तो ये तो बिल्कुल सामान्य बात है 😒, लोग बस बस खिंचखिंच कर दिन भर रिश्वत की दुनिया में डूब जाते हैं और फिर वो आरोपी हो जाते हैं। गांधीधाम में भी ऐसी ही स्थिति देखकर मुझे बहुत असंतुष्टता महसूस होती है। लेकिन इसके अलावा, मेरा सवाल यह है कि क्यों नहीं सोचा जाता कि घर के बाहर बैठने विवाद को हल करने के लिए एक सम्मानजनक तरीका ढूंढना चाहिए? 🤔

अरे, मुझे लगता है कि अगर हमारी बोलचाल और रिश्वतपूर्ण सोच में बदलाव आ जाए, तो हमारे देश में भी ऐसी ही घटनाएं कम हो सकती हैं। हमें अपने समाज में शांतिपूर्ण तरीकों से समस्याओं का समाधान ढूंढना चाहिए।
 
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