ग्राहकों को अब नहीं होना पड़ेगा परेशान, दिल्ली हाई कोर्ट ने RBI और बैंकों को दिए कड़े आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार (27 नवंबर, 2025) को एक अहम आदेश देते हुए कहा है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सभी बैंकों को ग्राहक शिकायत निपटान की प्रक्रिया को और मजबूत बनाना होगा। जस्टिस प्रभा एम. सिंह ने कहा है कि बैंक, वित्तीय संस्थान और रेगुलेटर्स की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे सिस्टम बनाएं जिससे धोखाधड़ी रुके, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और मासूम ग्राहकों को झूठे बिल, धमकी भरे मैसेज या लगातार कॉल का सामना न करना पड़े।

कोर्ट ने कहा है कि ग्राहक शिकायत की पूरी जांच-देखभाल करें और मशीन आधारित प्रक्रिया के आधार पर खारिज न करने दें। अगर किसी ग्राहक से शिकायत दर्ज करते समय गलती हो जाए, तो उन्हें सुधार का मौका दिया जाना चाहिए। कई बार ओम्बुड्समैन की ओर से शिकायतों को बिना मानव हस्तक्षेप के खारिज कर देने से लोग मजबूर होकर उपभोक्ता फोरम, नागरिक अदालतों और हाई कोर्ट में मुकदमे दर्ज कराते हैं।

कोर्ट ने कहा है कि यदि जरूरत हो तो ओम्बुड्समैन कार्यालय में प्रशिक्षित कानूनी विशेषज्ञों जैसे रिटायर्ड जज या अनुभवी वकील को शामिल किया जाए ताकि छोटी-छोटी गलतियों के चलते शिकायतें खारिज न हो।

इसके अलावा, कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट से सभी बैंकों को आदेश जारी करने का कहा है। RBI को कहा है कि वे अपनी वेबसाइट पर एक आसान फ्लोचार्ट डालें, जिसमें बताया जाए कि ग्राहक किस तरह कस्टमर केयर, ब्रांच मैनेजर और नोडल अधिकारी तक शिकायत पहुंचा सकते हैं।

वकील सरवर रजा की शिकायत पर दिल्ली हाई कोर्ट ने उठाया कदम। उन्हें एक ऐसे क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन का भुगतान करने के लिए परेशान किया गया, जिसे उन्होंने कभी किया ही नहीं था। बाद में बैंक ने उनकी राशि 76,777 रुपये वापस कर दी, लेकिन शिकायत बंद होते ही उन पर ब्याज और पेनल्टी जोड़ दी गई।

कोर्ट ने कहा है कि बैंक अब उनसे किसी तरह का लेट फीस या ब्याज नहीं लेगा और उनका CIBIL स्कोर भी नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। साथ ही, ग्राहक को परेशान करने के लिए बैंक को 1 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया गया है, जिसे 15 जनवरी, 2026 तक अदा करना होगा।
 
बैंकों की शिकायत निपटान प्रक्रिया में सुधार चाहिए तो फिर भी ओम्बुड्समैन को अपने हाथ जोड़कर सभी ग्राहक शिकायतें खारिज करने देने की क्या जरूरत?
 
यार! RBI और सभी बैंकों को ग्राहक शिकायत निपटान की प्रक्रिया को तेज कर देना चाहिए। ओम्बुड्समैन की गड़बड़ी से लोग परेशान होते हैं, तो उनको ठीक करना ही पड़ता है। कोर्ट ने सही कहा, ग्राहकों को शिकायत दर्ज करने में आसानी होनी चाहिए, ना कि मशीन आधारित प्रक्रिया से। और अगर गलती होती है तो उन्हें सुधार का मौका देना चाहिए। इससे ग्राहकों की भरोसा बनेगी।
 
अगर भी तुम्हारी शिकायत गलत तरीके से खारिज हो जाए, तो वो तो फिर कैसे ठीक हो सकता? यह बहुत ही मुश्किल है और लोग मजबूर होकर अदालतों में मुकदमे कराते हैं। अगर हम बैंकों और सरकारी संस्थाओं में प्रशिक्षित कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करते हैं, तो शायद यह सब नहीं होता।
 
ये तो अंतहस्ती बात है! क्या RBI और सभी बैंकों ने पहले भी सोचा था कि ग्राहक शिकायतों की जांच-देखभाल करना उनकी जिम्मेदारी? और क्या उन्हें पता है कि मशीन आधारित प्रक्रिया से खारिज करने से लोग उपभोक्ता फोरम, नागरिक अदालतों में मुकदमे दर्ज कराते हैं?

बिल्कुल ऐसी जांच-देखभाल की जरूरत है, परंतु यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि शिकायतें सही तरीके से दर्ज हो और ग्राहकों को न्याय मिले। इसके लिए प्रशिक्षित कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करना एक अच्छा विचार है।

क्या 1 लाख मुआवजा देना सही समाधान है? मुझे लगता है कि यह एक चप्पल पर फेंकने जैसी बात है!
 
बात है तो यह एक बहुत बड़ा और जरूरी कदम है! यह सुनकर अच्छा लगता है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले पर ध्यान केंद्रित किया है। ओम्बुड्समैन की ओर से शिकायतों को खारिज करने की प्रक्रिया को और भी मजबूत बनाना जरूरी है, ताकि मासूम ग्राहकों को नुकसान न पहुंचे। मशीन आधारित प्रक्रिया के आधार पर खारिज नहीं करने देना जरूरी है, और अगर गलती हुई है तो सुधार का मौका भी देना चाहिए। यह एक अच्छा संकेत है कि सरकार इस मामले पर ध्यान दे रही है और ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा कर रही है। 🙌
 
मुझे लगता है कि यह बड़ी मेहनत की जरुरत नहीं है कि हमारे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ग्राहक शिकायत निपटान की प्रक्रिया में सुधार करना होगा। लेकिन अगर हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि मासूम ग्राहकों को धोखाधड़ी और झूठे बिल से बचाया जाए, तो यह जरुरी है 🤔
 
बैंकों की शिकायत निपटान की प्रक्रिया में सुधार करने की बात कहकर, अदालत ने दिखाया कि हम वास्तव में उनकी सुनने वाली हैं। लेकिन यह तो बहुत अच्छी शुरुआत है। अब देखें, क्या वास्तव में बदलाव आ रहा है या इसके पीछे चीजें और भी जटिल हैं।

शिकायतों की जांच-देखभाल करना आसान बात नहीं है, लेकिन अगर मशीन आधारित प्रक्रिया के माध्यम से हम ऐसा कर सकते हैं, तो यह एक अच्छी शुरुआत है। और ओम्बुड्समैन की ओर से शिकायतों को बिना मानव हस्तक्षेप के खारिज करने पर रोक लगाना, यह तो बहुत जरूरी था। अब अगर उन्हें प्रशिक्षित कानूनी विशेषज्ञ जैसे रिटायर्ड जज या अनुभवी वकील शामिल करें, तो यह एक अच्छा सोचा गया हुआ कदम है।
 
मैंने हाल ही में मेरी बैंक की शिकायत निपटान प्रक्रिया में बहुत परेशानी का सामना किया था, लेकिन मुझे यह जानकारी पढ़ने से अच्छा महसूस हुआ कि अब दिल्ली हाई कोर्ट ने ग्राहकों को बेहतर शिकायत निपटान प्रक्रिया की सुनिश्चिति करने के लिए आदेश जारी किए हैं।

मेरे अनुभव से पता चलता है कि बैंक शिकायत निपटान प्रक्रिया में बहुत धीमी और अस्पष्ट हो सकती है, जिससे ग्राहकों को परेशानी होती है। लेकिन अब यह सुनिश्चित है कि बैंकों को अपनी शिकायत निपटान प्रक्रिया को मजबूत बनाना होगा, ताकि ग्राहकों को झूठे बिल, धमकी भरे मैसेज या लगातार कॉल से बचाया जा सके।

मुझे खुशी है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि बैंकों को अपनी वेबसाइट पर एक आसान फ्लोचार्ट डालें, जहां ग्राहक अपनी शिकायत दर्ज कर सकें। यह सुनिश्चित करने के लिए भी एक प्रशिक्षित कानूनी विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा, ताकि छोटी-छोटी गलतियों के चलते शिकायतें खारिज न हो। 🙌
 
मैंने हमारे देश की आर्थिक व्यवस्था को सुधारने की बहुत कोशिश की हूँ लेकिन अभी भी इतने बड़े मुद्दों का सामना करना पड़ता है जैसे कि ग्राहक शिकायत निपटान में। मैं समझता हूँ कि मशीन आधारित प्रक्रियाओं का उपयोग करके शिकायतें खारिज नहीं होनी चाहिए। इससे हमारे देश में आर्थिक न्याय और सम्मान की भावना बढ़ सकती है। 👍
 
भाई, यह तो सचमुच एक बड़ा मौका है! अगर हमारे देश की उच्चतम न्यायालय से ऐसा आदेश आया, तो इसका मतलब है कि हमें अपने अधिकारों के बारे में जागरूक होना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि जब भी हम किसी बैंक या वित्तीय संस्थान से शिकायत करते हैं, तो उनकी जिम्मेदारी है कि उन्हें हमारी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। अगर हम अपने अधिकारों के बारे में जागरूक नहीं होते, तो हम कभी भी ऐसे आदेशों तक नहीं पहुंच पाते।

अब, यह आदेश वाकई बहुत महत्वपूर्ण है! अगर हमारे देश में ग्राहक शिकायत निपटान की प्रक्रिया मजबूत हो जाए, तो इसका मतलब है कि हमारे देश में अधिक स्वच्छता और जवाबदेही आ रही है। लेकिन, भाई, हमें यह भी याद रखना चाहिए कि जिम्मेदारी एक दिशा में बढ़ती है, अगर हम अपने अधिकारों के बारे में जागरूक नहीं होते, तो हम कभी भी उन्हें लेकर आगे नहीं बढ़ सकते।
 
बिल्कुल सही क्यों ना , अगर हम बात करें तो बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपने ग्राहकों के प्रति जिम्मेदार बनाने की जरूरत है । लेकिन आज के समय में भी बहुत से ग्राहक शिकायत निपटान की प्रक्रिया में चूक करते हैं और अपने अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

अगर हम बात करें तो मशीन आधारित प्रणाली का उपयोग करने से पहले उनकी जांच-देखभाल करनी चाहिए । ग्राहक शिकायत की भी पूरी जांच करनी चाहिए और गलती होने पर उन्हें सुधार का मौका देना चाहिए।

इसके अलावा, ओम्बुड्समैन कार्यालय में प्रशिक्षित कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करना भी बहुत जरूरी है । ताकि छोटी-छोटी गलतियों से शिकायतें खारिज न हो।
 
🤝 तो अब हमें पता चला है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सभी बैंकों को ग्राहक शिकायत निपटान की प्रक्रिया को मजबूत बनाना होगा। 🚨 यह अच्छा सुनकर है, लेकिन क्या हमें वास्तव में उनके पास ऐसा प्रणाली है? 😐

जस्टिस प्रभा एम. सिंह जी ने बोला है कि धोखाधड़ी रुकनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। 🚫 लेकिन हमें यह भी पता चल गया है कि कई बार ओम्बुड्समैन की ओर से शिकायतों को बिना मानव हस्तक्षेप के खारिज कर देने से लोग मजबूर होकर उपभोक्ता फोरम, नागरिक अदालतों और हाई कोर्ट में मुकदमे दर्ज करते हैं। 🤯

अब यह अच्छा है कि कोर्ट ने कहा है कि अगर जरूरत हो तो प्रशिक्षित कानूनी विशेषज्ञों जैसे रिटायर्ड जज या अनुभवी वकील को शामिल किया जाए। 🤝 इससे हमें पता चलेगा कि ग्राहक किस तरह की मदद मिल सकती है। 👍

और यह अच्छा है कि दिल्ली हाई कोर्ट से सभी बैंकों को आदेश जारी करने का कहा गया है, जिसमें अपनी वेबसाइट पर एक आसान फ्लोचार्ट डालेंगे। 📊 इससे हमें पता चलेगा कि ग्राहक किस तरह कस्टमर केयर, ब्रांच मैनेजर और नोडल अधिकारी तक शिकायत पहुंचा सकते हैं। 👉
 
मुझे यह तो अच्छी तरह से पता चल गया कि ग्राहक शिकायतें दर्ज करते समय खारिज नहीं होनी चाहिए। मैंने कई बार अपने पड़ोसियों की शिकायतें देखी हैं, जो क्या कर सकते हैं? वे फिर से रिपोर्ट दर्ज करते हैं। यह तो बहुत परेशान करने वाला होता है। लेकिन अब यह तो खत्म हो गया। मुझे लगता है कि शिकायत निपटान की प्रक्रिया को और सख्त बनाया जाएगा, तो इससे ग्राहकों को बहुत फायदा होगा। 🙌
 
मुझे याद है जब हमारे बचपन में बैंकों में शिकायत निपटान की प्रक्रिया बहुत आसान थी। हमारे दादाजी और माता-पिता को कभी भी बैंक से गलती करने की जरूरत नहीं पड़ी थी, क्योंकि वे अपने शिकायतों का समाधान खुद समझ लेते थे। अब यह सब इतना जटिल हो गया है कि हमें पहले भी बहुत सोच-विचार करना पड़ता है और फिर भी कभी-कभी उनकी बात मान नहीं पाते!

मुझे लगता है कि इस निर्णय से अब बैंकों को अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करना होगा, जिससे ग्राहकों को शिकायत निपटान में आसानी हो। और यह तो अच्छा है, लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि अगर हम सभी किसी तरह की गलती से बच सकते हैं, तो सब कुछ बेहतर होता।
 
बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपनी शिकायत निपटान प्रक्रिया में सुधार करने की जरूरत है 🤔। जस्टिस प्रभा एम. सिंह जी ने बिल्कुल सही कहा है। ग्राहकों को उनकी शिकायतों की पूरी जांच और देखभाल करनी चाहिए, ताकि गलतियाँ सुधर सकें और धोखाधड़ी रोकी जा सके। मशीन आधारित प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करके खारिज नहीं करना चाहिए। अगर गलती होती है, तो ग्राहकों को फिर से मौका देना चाहिए।

ओम्बुड्समैन कार्यालय में प्रशिक्षित कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करना एक अच्छा विचार है 🤓। इससे छोटी-छोटी गलतियों से बचकर शिकायतें न खारिज होने लगें। और बैंकों को अपनी वेबसाइट पर आसान फ्लोचार्ट डालना चाहिए, ताकि ग्राहक अपनी शिकायतों को सही तरीके से दर्ज कर सकें।
 
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