गोवा- मोदी ने 77 फीट की श्रीराम-प्रतिमा का अनावरण किया: कर्नाटक में एक लाख लोगों के साथ गीता पढ़ी, श्रीकृष्ण मठ में सोने का कलश चढ़ाया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को गोवा के कैनाकोना स्थित श्री संस्थान गोकर्ण परतगली जीवोत्तम मठ में पूजा-अर्चना की। यहां भगवान राम की 77 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया की सबसे ऊंची श्रीराम प्रतिमा है।

इस मामले को लेकर पीएम ने कहा, 'हमारा लक्ष्य एक ऐसा भारत बनाना है, जहां हर व्यक्ति को सम्मान और स्वतंत्रता मिले। हमें अपनी संस्कृति और धर्म को मजबूत करना चाहिए।'

इस दौरान पीएम ने श्रीमद्भगवद गीता का पाठ किया। उन्होंने कहा, 'भगवत गीता हमें सिखाती है कि शांति और सच्चाई को वापस लाने के लिए अत्याचारी का अंत करना जरूरी है। यही नेशनल सिक्योरिटी पॉलिसी का सार है। पहले की सरकारें आतंकी हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई नहीं करती थीं, पर यह नया भारत है। हम शांति स्थापित करना जानते हैं, और उसकी रक्षा भी करते हैं।'

इस मामले को लेकर पीएम ने कहा, 'हमें अपने देश को एक नई दिशा देनी है। हमें एक ऐसा राष्ट्र बनाना चाहिए जहां हर व्यक्ति को सम्मान और स्वतंत्रता मिले।'

प्रधानमंत्री ने उडुपी में श्रीकृष्ण मठ में पूजा-अर्चना की, और इस स्थान पर उन्होंने सोने का कलश चढ़ाया। इसके बाद पीएम ने 1 लाख लोगों के साथ श्रीमद्भगवद गीता का पाठ किया।

इस मामले को लेकर पीएम ने कहा, 'हमें अपने देश को एक नई दिशा देनी है। हमें एक ऐसा राष्ट्र बनाना चाहिए जहां हर व्यक्ति को सम्मान और स्वतंत्रता मिले।'

प्रधानमंत्री ने कहा, 'हमें अपने देश को एक नई दिशा देनी है। हमें एक ऐसा राष्ट्र बनाना चाहिए जहां हर व्यक्ति को सम्मान और स्वतंत्रता मिले।'
 
मेरे दोस्त! प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फिर से भगवान राम की बड़ी-बड़ी पूजा-अर्चना की, लेकिन यहाँ सवाल उठता है कि पूजा-अर्चना करने के बाद क्या होता है? क्या हमारा लक्ष्य राजनीतिक शक्ति से ही बनाना चाहते हैं? मुझे लगता है कि हमें अपने देश को एक नई दिशा देने के लिए एक अलग रास्ता ढूंढना चाहिए, जिसमें पूजा-अर्चना और शांति की बातें से पहले विकास और समानता की बातें करें। तो यहाँ हमारा लक्ष्य क्या है? मुझे लगता है कि हमें अपने देश को एक ऐसा राष्ट्र बनाना चाहिए जहां हर व्यक्ति को सम्मान और स्वतंत्रता मिले, लेकिन यह तो आसान नहीं है।

मैंने इस बात पर विचार किया कि प्रधानमंत्री ने कहा, 'हमें अपने देश को एक नई दिशा देनी है'। लेकिन मुझे लगता है कि हमें पहले अपने देश की असामानताओं और अन्यायों से निपटना चाहिए, ताकि हम एक ऐसा राष्ट्र बना सकें जहां हर व्यक्ति को सम्मान और स्वतंत्रता मिले।

मेरे पास तो खुशी है कि प्रधानमंत्री ने श्रीमद्भगवद गीता का पाठ किया। लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपने देश की संस्कृति और धर्म को मजबूत करने के लिए एक अलग तरीका ढूंढना चाहिए।

तो यह रहा मेरा विचार, दोस्त!
 
राम मंदिर की बहुत बड़ी प्रतिमा बाई गई, यह दुनिया की सबसे ऊंची है ? 🤔

मोदी जी ने कहा कि हमारा लक्ष्य एक ऐसा भारत बनाना है, जहां हर व्यक्ति को सम्मान और स्वतंत्रता मिले। लेकिन फिर कैसे देश में सामाजिक असमानता की समस्या तो अभी भी निकली रहती है ? 🤷‍♂️
 
पीएम की बात समझ आ गई, लेकिन पहले तो पूजा-अर्चना करने की जगह कहीं और श्रीमद्भगवद गीता पढ़ना चाहिए था। फिर भी, भगवान राम की बड़ी प्रतिमा लगाने से हमारे देश की एक नई दिशा में जाने की बात सच नहीं हो सकती।
 
पीएम की भीड़-भाड़ी पूजा-अर्चना तो हुई, लेकिन सोचते हैं कि भगवान राम की 77 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा का निर्माण कैसे हुआ? देश में गरीबों और शिक्षित लोगों की जिंदगी बदलने वाले सार्वजनिक परियोजनाओं को तो अक्सर छुपा दिया जाता है, लेकिन इस प्रतिमा को लेकर तो बहुत मीडिया आहत हुआ।

क्या यह प्रतिमा हमारे वास्तविक संस्कृति और धर्म की परिभाषा है? या फिर एक राजनीतिक प्रचार अभियान का हिस्सा बन गई? मेरे लिए, समानता और स्वतंत्रता की बातें बहुत अच्छी लगती हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि हमारा देश अभी भी कई समस्याओं से जूझ रहा है।
 
इस पूजा-अर्चना के बाद, मुझे लगता है की हमें यह जानना चाहिए कि यह 77 फीट ऊंची श्रीराम प्रतिमा वास्तव में कैसे बनाई गई? क्या यह एक वैज्ञानिक रूप से सही तरीके से बनाई गई है? और इस तरह से हमारे देश को एक नई दिशा देने के लिए, हमें अपने निर्माण पर जानकारी की आवश्यकता है। 🤔

और, मुझे लगता है की यह बातें हमेशा से और भी तेजी से बढ़ती रही हैं, लेकिन क्या हम उनसे निपटने के लिए योजना बना रहे हैं? क्या हम अपने देश को एक नई दिशा देने के लिए हमारे खिलाफी और विरोधी शक्तियों से लड़ रहे हैं?

कोई जवाब बताएं।
 
भारत को सबसे बड़ा देश बनाने के लिए पीएम की बात में कुछ ऐसा है जो हम सभी को सुनना चाहिए 🤝। प्रधानमंत्री की इस बातचीत से यह साफ होता है कि हमारा देश भविष्य की ओर बढ़ रहा है, और हर व्यक्ति को सम्मान और स्वतंत्रता मिलेगी। लेकिन सवाल यह है कि पीएम की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर कैसे चर्चा की जाएगी, और क्या हमारे देश की सुरक्षा को एक नई दिशा में ले जाने के लिए कोई वास्तविक योजना है? 🤔
 
इस बारे में तो पीएम का नाटक बहुत बड़ा हो गया है 🙄, शायद लोगों की ध्यान भटकाने का तरीका है। 77 फीट ऊंची प्रतिमा तो जरूर एक दिलचस्प चीज़ है, लेकिन यह इतनी बड़ी कि एक ही जगह पर रखकर सारा देश सम्मानित होगा? 🤔 और यह कांस्य प्रतिमा बिल्कुल भी आकर्षक नहीं लग रही है 🙃। और भगवत गीता का पाठ करने का तरीका तो बहुत रोचक है, लेकिन इसके सार क्या? 🤷‍♀️ मुझे लगता है कि यह एक नई दिशा देने का तरीका है, लेकिन इससे कैसे लाभ उठाया जाए? 💸
 
बात बात कर लेती है पीएम की बोलती है, तो हमेशा कुछ नया और फूल फुला हुआ दिखाई देता है। गोवा जैसे स्थान पर भगवान राम की बड़ी प्रतिमा लगाना अच्छा है, लेकिन क्या यह हमारे देश में सच्ची एकता का संकेत है? या फिर यह एक नए भारत की चाबी बन गई है? 😊
 
मुझे लगता है कि पीएम ने शामिल हुए इस कार्यक्रम पर बहुत अच्छी बात कही 🙏। अगर हम अपने देश को एक नई दिशा देना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें अपने आप को मजबूत बनाना होगा। श्रीमद्भगवद गीता से प्रेरित करके हमें यह समझने में मदद मिलती है कि शांति और सच्चाई को वापस लाने के लिए अत्याचारी का अंत करना जरूरी है। 🙌

लेकिन इतना तो कह देना चाहिए कि पीएम ने इस मामले पर बहुत ज्यादा चर्चा नहीं की। कुछ सवाल भी उठने चाहिए थे, जैसे कि यह 77 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा कहां से आई और इसके लिए कितनी महंगाई हुई? 🤑

फिर तो मुझे लगता है कि इस दौरान पीएम ने बहुत अच्छी बात कही, लेकिन अगर हम अपने देश को एक नई दिशा देना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें अपने आप को मजबूत बनाना होगा। हमें अपनी संस्कृति और धर्म को मजबूत करना चाहिए, लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि इसके लिए हमें अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देना होगा। 💡

और फिर तो मुझे लगता है कि पीएम ने श्रीकृष्ण मठ में पूजा-अर्चना करने से बहुत ज्यादा फायदा नहीं किया। अगर हम अपने देश को एक नई दिशा देना चाहते हैं तो हमें अपनी सरकार और नीतियों पर ध्यान देना होगा। 🤔
 
मैंने पढ़ा है पीएम ने गोवा में भगवान राम की नई प्रतिमा लगाई है। लेकिन मुझे यह सवाल आता है कि इसका असल उद्देश्य क्या है? क्या यह सिर्फ एक शांतिपूर्ण वातावरण बनाने की कोशिश है, या फिर कुछ और भी। मैं सोचता हूं कि हमें अपने देश को एक नई दिशा देनी होगी, लेकिन इसके लिए हमें पहले अपने आप को समझना होगा।
 
मुझे लगता है कि इस प्रतिमा की स्थापना करने वाले लोगों ने बहुत ही अच्छा काम किया है 🙏। श्रीराम की यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची होने पर हमें गर्व होना चाहिए। मुझे लगता है कि इस तरह से हमारी संस्कृति और धर्म को मजबूत करने का एक अच्छा तरीका है। हमें अपने देश को एक नई दिशा देनी ही चाहिए, लेकिन ऐसा करने के लिए हमें शांति और सच्चाई को प्रोत्साहित करना चाहिए।

मुझे लगता है कि अगर हम अपने देश को एक नई दिशा देना चाहते हैं, तो हमें अपने देश की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। हमें अपने देश को एक ऐसा राष्ट्र बनाना चाहिए जहां हर व्यक्ति को सम्मान और स्वतंत्रता मिले।

लेकिन, मुझे लगता है कि इस तरह से अगर हम अपने देश को एक नई दिशा देना चाहते हैं, तो हमें अपने देश की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

मुझे लगता है कि अगर हम अपने देश को एक नई दिशा देना चाहते हैं, तो हमें अपने देश की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

मुझे लगता है कि अगर हम अपने देश को एक नई दिशा देना चाहते हैं, तो हमें अपने देश की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

मुझे लगता है कि अगर हम अपने देश को एक नई दिशा देना चाहते हैं, तो हमें अपन
 
मोदी जी का भगवान राम के लिए एक बड़ा प्रयास हुआ तो तो अच्छा है 🙏, लेकिन 77 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा से देश के पैसे खर्च होते देखकर मुझे थोड़ा अजीब लगा है 💸। अगर हम अपने देश को एक नई दिशा देना चाहते हैं तो शायद कुछ और उपयोगी चीजें पर ध्यान देना चाहिए 🤔
 
मुझे लगने को तय है कि भगवान राम की 77 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा तो बहुत बड़ी बात है, लेकिन यह दुनिया की सबसे ऊंची श्रीराम प्रतिमा कहीं से मिल रही है? यार, मैंने ऑनलाइन ऐसे कई जगहों पर देखा है जिसमें भी इस तरह की बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं लगाई जाती हैं, लेकिन यह गोवा में तो तो पूरी सुर्खियाँ कर लेगी। और पीएम ने श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करने वाले दिखे, लेकिन इससे पहले तक हमारे देश में यही हुआ था, जैसे कि तो वही बात!
 
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