गडकरी बोले- अपने शहर में टॉयलेट का पानी बेचता हूं: विदिशा में कहा- उस पानी से 300 करोड़ रुपए मिलते हैं, अब कचरा बेचने लगा हूं - Vidisha News

नितिन गडकरी ने अपना वादा पूरा किया, टॉयलेट के पानी में से 300 करोड़ रुपए कमाए, अब कचरा भी बेच रहे हैं।

विदिशा में आयोजित कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने अपने शहर में टॉयलेट के पानी का दोबारा उपयोग करके उसे बेचने की कहा, जिससे करीब 300 करोड़ रुपए की आमदनी होती। उन्होंने यह भी कहा कि अब वे कचरे से भी कमाई शुरू कर दी हैं।
 
ये तो बहुत ही रोचक बात है नितिन गडकरी जी की, लेकिन मुझे लगता है कि यह उनकी एक खूबसूरत योजना नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ा संदेश भी है। अगर हम अपने टॉयलेट के पानी को फिर से उपयोग करके बेच सकते हैं तो यह हमारे जल संसाधनों को बचाने में बहुत मदद करेगा।

लेकिन, मुझे लगता है कि इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए हमें अपनी जीवनशैली में भी बदलाव लाने की जरूरत है। अगर हम सभी अपने टॉयलेट के पानी को सावधानी से उपयोग करके बेच सकते हैं तो यह हमारे देश के लिए बहुत बड़ा योगदान होगा। और, यह एक अच्छा सबक भी है कि हमें अपने जीवाश्म परिवर्तन की ओर जाने की जरूरत है।
 
मुझे लगता है कि नितिन गडकरी जी की इस बात की बात करने की बहुत बड़ी साहसिकता और विचारशीलता की जरूरत थी। यहाँ तक की कचरा भी बेचने की बात करना तो एक नई दिशा है। मुझे लगता है कि इससे हमें अपने पर्यावरण को संरक्षित करने और अपनी जिंदगी को पेशेवर बनाने की तरीके खोजने में मदद मिल सकती है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर किसी को यह विचार होगा, मैं इस बात से सहमत हूँ कि हमें अपनी रचनात्मकता और साहसिकता का उपयोग करके नए तरीके ढूंढने चाहिए।
 
मुझे लगता है कि ये गडकरी जी की बहुत ही दिलचस्प और सामर्थ्य की कहानी है। वे विदिशा में आयोजित कार्यक्रम में अपने शहर में टॉयलेट के पानी का बिक्री करने की व्यवस्था कर रहे थे, ताकि वह उस पानी को दोबारा उपयोग करके उसे बेच सके। यह सोचकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि इतनी आमदनी से कमाई जा सकती है। और अब वे कचरे से भी कमाई शुरू कर दिए हैं, तो ये एक नए आयाम की व्यवस्था है जिसे लोगों ने कभी नहीं सोचा था।
 
नितिन गडकरी जी की बात में मजाक नहीं है, वास्तव में उन्होंने अपने शहर में टॉयलेट के पानी को फिर से उपयोग करके उसे बेचने का वादा पूरा किया है। यह एक अच्छा विचार है कि हम किसी भी चीज़ का दोबारा उपयोग करें और उसका मूल्य बढ़ाएं। लेकिन यह सवाल उठता है कि अगर ऐसा करने के लिए उन्होंने इतनी रुपए कमाए, तो वे इस पैसे से अपने समाज के लिए कुछ काम नहीं कर रहे?
 
बिल्कुल सही है नितिन गडकरी जी का यह विचार। हमें पानी की बात करनी चाहिए, लेकिन टॉयलेट के पानी से कमाई भी गलत नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम पानी को बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि इसे फिर से उपयोग करके उसका मूल्य बढ़ाने की बात है। और अगर हमारे शहर की समस्याओं को हल करने की बात की जाए, तो इससे एक अच्छा उदाहरण भी बन सकता है। लेकिन फिर भी, यह देखना जरूरी है कि यह विचार हर किसी के लिए उपयुक्त है, और हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि यह प्रक्रिया साफ-सुथरी हो।
 
अरे, ये नितिन गडकरी ही तो लगता है जो लोगों को भूल भुलैया बनाते हैं... टॉयलेट पानी का फिर से उपयोग करके बेचना! क्या यही रोज़मर्रा की जिंदगी में निवेश करने का तरीका है? और अब कचरा भी बेचने लगे... यह तो पूरा मजाक है!
 
यह तो बहुत ही रोचक बात है कि नितिन गडकरी ने अपना वादा पूरा किया है और अब उन्हें इतनी अच्छी कमाई होनी चाहिए। लेकिन मुझे लगता है कि यह बहुत ही खतरनाक हो सकता है कि अगर हमारे पास ऐसा सुविधाजनक तरीका होता है, तो लोग इससे नौकरी खत्म कर देंगे।
 
यह तो नितिन गडकरी जी की मेहनत की बात है… 300 करोड़ रुपए पाने का हमेशा कहते थे लेकिन सच्चाई कितनी अलग है… अगर वे ऐसा करने में सक्षम हैं तो फिर क्यों हम नहीं? यह एक सोच-विचार जो हमें सबक सिखाता है कि दिल से ठीक करने की जरूरत होती है, न कि दम पर… और अब कचरा भी बेचने लगे हैं तो फिर चीजों को समझने में कुछ समय लगेगा, लेकिन एक बात तय है कि वे अपने शहर के लोगों को साबित करना चाहते हैं।
 
मुझे लगता है कि ये बहुत अच्छी बात है। नितिन गडकरी को देश में बहुत सम्मान मिलता है, वे बहुत ही रचनात्मक विचार लेकर आए हैं। उनकी यह बातें लोगों को सोचते हुए बने होते, जैसे हमें पेड़ लगाकर तेजी से हवा का संचार करने की जरूरत है। मुझे लगता है कि अगर हम सभी अपने टॉयलेट के पानी को फिर से उपयोग करके उसे बेचकर 300 करोड़ रुपए कमाएं, तो देश में बहुत खुशियां होंगी।
 
अरे, ये तो बहुत बड़ा दावा है नितिन गडकरी का... 300 करोड़ रुपए टॉयलेट के पानी से कमाए जैसे? और फिर वे कचरा भी बेचने लगे हैं? यह तो बहुत बड़ा व्यापार है... लेकिन कौन सुनिश्चित कर सकता है कि ये सब सच है? मुझे लगता है कि इससे पहले हमें इसे अच्छी तरह समझना चाहिए कि यह कैसे काम करता है, और फिर ही तो हम इसकी प्रशंसा कर सकते हैं... लेकिन संदेह करना भी ठीक है 😒
 
बिल्कुल मान जो हुआ उसके लिए इस्तेमाल करके पैसा जमा करने की बात अच्छी लगी, लेकिन यह तो हमारे ग्रीन टूल्स पर भी ध्यान देने की जरूरत है। विदिशा में जो आयोजित किया गया था उसमें उन्होंने कुछ अच्छी बातें कही लेकिन कचरा बेचने की बात तो थोड़ी चिंताजनक लगी। हमारे देश में हर जगह कचरा फैला हुआ है और इसके पीछे बहुत सी जिम्मेदारियां होती हैं।
 
मुझे लगता है कि नितिन गडकरी जी ने अपने विचार बहुत अच्छे से समझाये, लेकिन मैं थोड़ा चिंतित हूं। अगर हम टॉयलेट के पानी को दोबारा उपयोग कर सकते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि हम अपने ग्रिड को फेंक दें। लेकिन नितिन जी ने बात की है कि अब वे कचरे से भी कमाई करने लगे हैं। मुझे लगता है कि अगर हम साफ-सफाई के बारे में ध्यान रख सकते हैं, तो हमारे पास इस तरह के विचारों की जरूरत नहीं होगी। 🤔
 
अरे मैने सुना है कि नितिन गडकरी ने अपना वादा पूरा कर लिया है, लेकिन मुझे लगता है कि यह सब तो थोड़ा भ्रम है। टॉयलेट के पानी से इतनी रुपए कमाए जा सकते हैं? नहीं, नहीं... मेरे दोस्त, इससे पहले जब तक ऐसी बातें ना हों तो हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में भी पाइप की व्यवस्था होती है, और गाड़ी से नहीं, क्योंकि यह तो एक मजाक है...
 
मैंने देखा तो यार, नितिन गडकरी का बिजनेस तरीका बिल्कुल अलग है। सबसे पहले, उन्होंने अपने शहर में टॉयलेट के पानी का दोबारा उपयोग करने और उसे बेचने का विचार किया। तो क्या हुआ? उन्होंने 300 करोड़ रुपए कमाए। यहाँ तक कि हमारे देश में भी यह एक अच्छा विचार नहीं था, लेकिन नितिन गडकरी ने ऐसा किया। अब वह कचरे से भी कमाई शुरू कर रहे हैं। तो यार, इससे हमें सीखने को कुछ बातें मिलती हैं। सबसे पहले, अगर हम अपने संसाधनों का सही तरीके से उपयोग करें, तो हमें बहुत बड़ी कमाई करने की संभावना होती। और दूसरा, कभी न कभी, यहां तक कि हमारे देश में भी ऐसे व्यवसाय शुरू करने का मौका मिलता है। तो आइए हम सभी अपने जीवन में इस तरह के विचारों को लागू करें और देखें, क्या हमें बेहतरीन कमाई करने की संभावना नहीं मिलेगी।
 
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