गणतंत्र दिवस परेड में झांकियों का महत्व और उनका पुराना कनेक्शन
जनवरी के मध्य में, भारत के राजधानी शहर नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन होता है। इस दिन के अवसर पर, देश के विभिन्न हिस्सों से झांकियां लाई जाती हैं जो भारतीय संस्कृति, इतिहास और समाज की कहानियां बताती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणतंत्र दिवस परेड में झांकियों का कनेक्शन इतना पुराना है?
गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत 1950 में हुई थी, लेकिन झांकियों को औपचारिक रूप से 1952 में शामिल किया गया था। पहले वर्षों में, झांकियों की संख्या कम थी और उनका दिखावा भी भव्य नहीं होता था। लेकिन समय के साथ, झांकियों ने अपना महत्व बढ़ाया और देश भर के युवाओं ने इनमें अपना प्रयोग करना शुरू कर दिया।
'झांकी' शब्द संस्कृत और प्राकृत से आया है, जिसका अर्थ है नजारा या झलक। पहले झांकियों में लोककथाएं, खेती या पौराणिक दृश्य दिखाये जाते थे। आज, गणतंत्र दिवस परेड में हर साल 22 से 30 झांकियां होती हैं जो राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और प्रमुख सरकारी संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
इन झांकियों में, संगीत, लोक नृत्य, स्थानीय कपड़े और थीम वाली कहानियां दिखाकर भारतीय संस्कृति, इतिहास और विकास का प्रदर्शन किया जाता है। ये झांकियां हमें अपने समाज की विविधता, संस्कृति और परंपराओं के बारे में बताती हैं।
जनवरी के मध्य में, भारत के राजधानी शहर नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन होता है। इस दिन के अवसर पर, देश के विभिन्न हिस्सों से झांकियां लाई जाती हैं जो भारतीय संस्कृति, इतिहास और समाज की कहानियां बताती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणतंत्र दिवस परेड में झांकियों का कनेक्शन इतना पुराना है?
गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत 1950 में हुई थी, लेकिन झांकियों को औपचारिक रूप से 1952 में शामिल किया गया था। पहले वर्षों में, झांकियों की संख्या कम थी और उनका दिखावा भी भव्य नहीं होता था। लेकिन समय के साथ, झांकियों ने अपना महत्व बढ़ाया और देश भर के युवाओं ने इनमें अपना प्रयोग करना शुरू कर दिया।
'झांकी' शब्द संस्कृत और प्राकृत से आया है, जिसका अर्थ है नजारा या झलक। पहले झांकियों में लोककथाएं, खेती या पौराणिक दृश्य दिखाये जाते थे। आज, गणतंत्र दिवस परेड में हर साल 22 से 30 झांकियां होती हैं जो राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और प्रमुख सरकारी संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
इन झांकियों में, संगीत, लोक नृत्य, स्थानीय कपड़े और थीम वाली कहानियां दिखाकर भारतीय संस्कृति, इतिहास और विकास का प्रदर्शन किया जाता है। ये झांकियां हमें अपने समाज की विविधता, संस्कृति और परंपराओं के बारे में बताती हैं।