गणतंत्र दिवस पर पंजाब और हरियाणा में किसानों ने निकाला ट्रैक्टर मार्च, जानें इसके पीछे की वजह

पंजाब और हरियाणा में गणतंत्र दिवस पर खेती वाले लोगों ने बड़े उत्साह से ट्रैक्टर मार्च की, जिसने कई लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया। इस मार्च की शुरुआत दिल्ली के लाल किले से हुई, जहां लगभग 50 ट्रैक्टर चल रहे थे।

मुख्यमंत्री स्कुल प्रतिपक्ष (सीपी) ने बताया कि उन्होंने पहली बार 26 जनवरी 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के दौरान ट्रैक्टर परेड आयोजित किया था। उस समय परेड को आउटर रिंग रोड तक अनुमति मिली थी, लेकिन कुछ किसान मध्य दिल्ली और लाल किले तक पहुंच गए थे, जिससे देशभर में विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद से सीपी हर साल गणतंत्र दिवस पर जिला और ब्लॉक स्तर पर ट्रैक्टर परेड के जरिए किसानों की मांगों को उठाता रहा है।

इस वर्ष भी पंजाब और हरियाणा में गणतंत्र दिवस पर खेती वाले लोगों ने बड़े उत्साह से ट्रैक्टर मार्च की। इसमें कई राजनीतिक दलों के नेताओं को भी शामिल देखा गया। मुख्यमंत्री स्कुल प्रतिपक्ष ने बताया कि उन्होंने इस मार्च के लिए 12 जिलों में तैयारियां कीं हैं और इसमें लगभग 50 ट्रैक्टर शामिल थे।
 
बहुत अच्छी बात है कि पंजाब और हरियाणा में खेती वाले लोगों ने गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर मार्च किया और उन्हें अपनी आवाज सुनने में कहीं नहीं आयी। यह बहुत अच्छा संकेत है कि युवाओं और खेती वालों के बीच राजनीतिक दलों के बीच एकता बनाए रखने की भावना बढ़ गई है।

मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री स्कुल प्रतिपक्ष ने बहुत अच्छी योजना बनाई है और इसमें राजनीतिक दलों को भी शामिल करके लोगों को जोड़ने में मदद मिलेगी। इस तरह से किसान आंदोलन की जड़ें मजबूत होने लगी हैं और अब यह एक सकारात्मक दिशा में बढ़ रहा है।

ट्रैक्टर मार्च की शुरुआत लाल किले से हुई, वहाँ से कई ट्रैक्टर चल रहे थे। यह बहुत अच्छा दृश्य था और यह हमें याद दिलाता है कि किसान आंदोलन का बीज ही नहीं बल्कि समाज में बदलाव की लहर फैलने वाला शक्तिशाली स्रोत है।
 
ट्रैक्टर मार्च बहुत ही रोचक है 🚜। मुझे लगता है कि खेती वाले लोगों ने अपनी आवाज सुनाने के लिए एक अच्छा तरीका खोज लिया है। पिछले समय में जब उन्होंने आंदोलन किया था तो बहुत सारे लोग उनके साथ नहीं थे। लेकिन आज इस तरह से दिख रहा है कि वे अपनी बात कहने के लिए सशक्त हो गए हैं। मुझे लगता है कि यह एक अच्छा तरीका है कि हमें सरकार को सुनाने और अपनी मांगों को उठाने का।
 
ਬੜੀ ਤवज਼ਹ ਵਾਲਾ ਗਣਤੰਤਰ ਦਿਵਸ ਹੋਇਆ, ਪਰ ਮੈਂ ਸੁਚੇਤ ਕਰਨਾ ਹੈ ਕਿ ਜੇ ਆਪਣੀਆਂ ਖੇਤੀਬਾੜੀਆਂ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਚੰਗੀ ਅਵਸਥਾ ਨੂੰ ਮਿਲਣ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ, ਤਾਂ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੇ ਵੀ ਪੁਰਾਣੀਆਂ ਮੁੱਦਿਆਂ 'ਤੇ ਝੁਰਨਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ।
 
वाह! 🚜 ट्रैक्टर मार्च ने दिखाया है कि खेती वाले लोग भी अपने अधिकारों की लड़ाई में सशक्त हैं।👍 सीपी को शामिल होने का यह फैसला अच्छा है, चाहे वह सरकार या विपक्ष का हो। 🤝 #किसानसमर्थन #गणतंत्रदिवस
 
मुझे लगता है की यह तो बहुत ही अच्छा दृश्य देखने को मिला। पंजाब और हरियाणा में खेती वाले लोगों ने गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर मार्च किया, जिसमें कई राजनीतिक दलों के नेताओं को भी शामिल होने का अवसर मिला। यह अच्छी बात है कि युवा उत्साह और जुड़ाव का प्रदर्शन कर रहे हैं।

मुझे लगता है की इस तरह की गतिविधियों से लोगों को राजनीति में भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। शायद इससे हमें वास्तविकता के बारे में और भी अच्छी समझ मिलेगी। 🚜💪
 
बड़ा उत्साह देखकर खुश हूँ, लोगों ने अपनी आवाज सुनने का एक अच्छा तरीका चुना। इससे याद आया कि किसान आंदोलन में जो बुराई हुई थी, उसे नहीं भूलना चाहिए। अब ऐसा खेल खत्म करना चाहिए।
 
क्या लगता है कि ये ट्रैक्टर मार्च अब किसानों की आवाज़ सुनने के लिए ही नहीं, बल्कि एक राजनीतिक प्रदर्शन के लिए भी आयोजित हो रहा है? 🤔

मुझे लगता है कि यह मार्च हमें याद दिलाता है कि गणतंत्र दिवस पर हमारे देश में खेती वालों की जिंदगी कितनी संघर्षपूर्ण है। यह मार्च हमें यह भी बताता है कि किसान आंदोलन ने अपने संघर्ष को राजनीतिक सत्ता तक पहुंचाया है, और अब सरकारों को उनकी आवाज़ सुननी होगी।

लेकिन, यह मार्च केवल एक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक सामूहिकता का संदेश भी था। यह संदेश हमें याद दिलाता है कि जब हम अपने अधिकारों और आवाज़ के लिए एक साथ आते हैं, तो हम बहुत बड़ा दबाव बना सकते हैं।

अब, इस मार्च ने हमें यह प्रश्न करने पर मजबूर किया है कि गणतंत्र दिवस पर हम अपने देश की सच्चाई क्यों छुपाते हैं? 🤷‍♂️
 
वाह, ये ट्रैक्टर मार्च बेहद रोचक लग रहा है 🚜। लेकिन किसानों की मांगों पर ध्यान देने से पहले, देखिए कि उन्हें अब भी कितना संघर्ष करना पड़ता है। उनके आंदोलन ने कई वर्षों तक देशभर में विवाद खड़ा रखा था, और आज भी उन्हें समाधान नहीं मिल पाया है।

और यह जानकर अच्छा लगा कि मुख्यमंत्री स्कुल प्रतिपक्ष ने ट्रैक्टर परेड आयोजित करने का फैसला किया, लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि इससे किसानों की समस्याएं हल नहीं हो सकतीं। यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रदर्शन है, और किसानों की मांगों पर वास्तविक समाधान नहीं दिया गया है।
 
बड़ा उत्साह देखकर मन मोहित हो गया 🤩, पंजाब और हरियाणा में गणतंत्र दिवस पर खेती वाले लोगों ने ट्रैक्टर मार्च का आयोजन किया, जिसमें कई राजनीतिक दलों के नेताओं को भी शामिल देखा। यह बहुत अच्छा देखकर हँस आया मुझे, किसानों ने अपनी आवाज़ उठाई और सरकार से अपने अधिकारों के बारे में बात की। मुख्यमंत्री स्कुल प्रतिपक्ष ने बताया है कि उन्होंने पहली बार 26 जनवरी 2021 को दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन के दौरान ट्रैक्टर परेड आयोजित किया था। यह बहुत अच्छा देखकर मुझे उम्मीद है कि सरकार किसानों की बात सुनेगी। 🙏
 
बड़े उत्साह से ट्रैक्टर मार्च आयोजित करना अच्छी बात है, लेकिन कुछ चिंताएं भी हैं। मुझे लगता है कि यह मार्च किसानों की समस्याओं को हल नहीं कर सकता, बल्कि सरकार से बातचीत करने और समझौते करने की जरूरत है। जैसा कि पहले भी देखा गया है, मध्य दिल्ली में तोड़फोड़ होने पर कई लोगों को चोट लगी थी। इस बार भी कुछ ऐसा न हो कि लोगों को चोट पहुंचे।
 
बोलते बोलते ये ट्रैक्टर मार्च क्या साबित कर रहा है? पहले से कहा जाता है कि खेती वालों को अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा, लेकिन आजकल तो यह दिखाई दे रहा है कि किसान आंदोलन ने पूरे देश में जागरूकता फैला दी है। और भी एक बात, ये ट्रैक्टर मार्च केवल खेती वालों का नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों को संदेश दे रहा है कि हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ने की जरूरत है।
 
मुझे लगता है की यह पंजाब और हरियाणा में गणतंत्र दिवस पर खेती वाले लोगों के उत्साह से भरपूर हुआ, जिन्होंने ट्रैक्टर मार्च किया। 🚜👍

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है की पिछले वर्ष दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन ने यहाँ पर बहुत ही विवादपूर्ण मुद्दों को उजागर किया। लेकिन आजकल यह ट्रैक्टर मार्च सभी दलों को एक साथ लेकर आया है, जो अच्छी बात है। 🙏

मुझे लगता है की इससे हमें देशभर में किसानों की आवाज़ सुनने और उनकी समस्याओं को समझने का एक अच्छा अवसर मिलेगा।
 
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