Greater Noida: इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में दोनों बिल्डरों के खिलाफ एक और मुकदमा, पर्यावरण पर घेराबंदी

ग्रेटर नोएडा में लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और विश टाउन द्वारा खरीदी गई जमीन पर लगातार सालों से गड्ढा बनाया जा रहा है। इस गड्ढे में कई वर्षों से पानी भरा हुआ है, जो अब पूरी तरह से प्रदूषित होकर कीचड़ जैसा हो चुका है। बरसात के दौरान आसपास से बहकर आने वाला कूड़ा-करकट भी इसी जलभराव में जमा हो गया है, जिससे बदबू और जहरीली गैसें वातावरण में फैल रही हैं।

गड्ढे के चारों ओर न तो कोई बैरिकेडिंग की गई है और न ही किसी प्रकार के चेतावनी संकेतक लगाए गए हैं। सार्वजनिक सड़क के पास इस तरह खुले और जलमग्न गड्ढे का होना किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। खासतौर पर रात के समय या कोहरे में वाहन चालकों और राहगीरों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है।

इस गड्ढे के चारों ओर निर्माणाधीन भूखंड भी मौजूद हैं, जिससे यह भी स्पष्ट होता है कि निर्माण प्रबंधन के नियमों का पालन नहीं किया गया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि जब हवा विपरीत दिशा से चलती है, तो इस गड्ढे में भरे सड़े-गले पानी की दुर्गंध से सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष परेशानी हो रही है।

इन सभी मामलों में, पुलिस ने अभय कुमार, संजय कुमार, मनीष कुमार, अचल बोहरा और निर्मल कुमार के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। यह मामला गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम का उल्लंघन करता है।

इस मामले में, उप निरीक्षक रीगल कुमार की तहरीर पर थाना नॉलेज पार्क में अभय कुमार, संजय कुमार, मनीष कुमार, अचल बोहरा और निर्मल कुमार के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है।
 
यह तो ग्रेटर नोएडा की आम दुर्घटना की बात है 🤦‍♂️। जिस तरह से लोग जमीन खरीदते हैं और जल मग्न कर देते हैं, वैसे ही प्रकार के गड्ढे तैयार करते हैं। और फिर सार्वजनिक सड़क पर लगातार चलने वाला वाहन चालकों को इन्हें देखना मुश्किल है। क्या ये लोग जानते हैं कि जब हवा विपरीत दिशा से चलती है तो पानी की गंध इतनी तेजी से फैलती है कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी इसका सामना करना मुश्किल है। यही न होता, तो ये पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धजियां उड़ा देते। 🌿💔
 
😔 इस गड्ढे की स्थिति देखकर मुझे बहुत उदासी हुई। जो भी निर्माण प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदी गई, वो भी ऐसा नहीं किया। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है, बल्कि लोगों की सेहत को भी खतरा है। कोई बारीकेडिंग या चेतावनी संकेतक तो जरूर लगाना चाहिए, नहीं तो गंभीर दुर्घटना हो सकती है। और यह भी देखकर मुझे पछतावा हुआ कि निर्माण प्रबंधन के नियमों का पालन नहीं किया गया। 🤦‍♂️
 
बात करें तो इस ग्रेटर नोएडा में लगातार सालों से गड्ढे बनाने की बात है तो ये बहुत खतरनाक है। पानी भर जाने के बाद भी यह इतना प्रदूषित हो गया है कि अब यह कीचड़ जैसा दिख रहा है। और आसपास से कूड़ा-करकट आ रहा है, तो बदबू और जहरीली गैसें फैल रही हैं।

खुला और जलमग्न गड्ढा सार्वजनिक सड़क के पास है तो यह दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। विशेष रात के समय या कोहरे में वाहन चालकों और राहगीरों के लिए यह जानलेवा हो सकता है।

और निर्माणाधीन भूखंड भी मौजूद हैं तो यह स्पष्ट है कि निर्माण प्रबंधन के नियमों का पालन नहीं किया गया। स्थानीय निवासियों की बात है तो हवा विपरीत दिशा से चलती है, तो इस गड्ढे में भरे सड़े-गले पानी की दुर्गंध से सांस लेना मुश्किल हो जाता है।
 
🚨 यह तो एक बड़ा मुद्दा है! ग्रेटर नोएडा में ऐसा क्यों होता है? 🤔 इन लोगों को यह तो साफ दिखाई देता है कि वे पर्यावरण का खिलाफी करने वाले हैं। किस प्रकार के निर्माणाधीन भूखंड में जमा होने वाला कूड़ा-करकट इस तरह से छुपाया जाता है? 😡

और लोगों को यह नहीं पता है कि आसपास की सड़क पर खुला गड्ढा फंसने से क्या हो सकता है? 🚨 यह तो एक बड़ा खतरा है, खासकर रात के समय या कोहरे में। हमें ऐसे मामलों में जल्दी से कार्रवाई करनी चाहिए और इन लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। 🚫
 
गड्ढा तो एक बड़ा मुद्दा है! जैसे ही वातावरण खराब होता जा रहा है, ऐसे ही हमारे ग्रेटर नोएडा में भी इसी प्रकार की समस्याएं बढ़ रही हैं। सार्वजनिक सड़क के पास खुले गड्ढे तो खतरनाक हैं, खासकर रात में या कोहरे में। और निर्माणाधीन भूखंड? यह तो एक बड़ा उल्लंघन है! पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का पालन नहीं किया गया, जिसके लिए पुलिस ने अभी मुकदमा दर्ज कर लिया है। लेकिन जब तक हम सब अपनी जिम्मेदारी न समझेंगे, जब तक हम अपने पर्यावरण को संरक्षित नहीं करेंगे, तब तक इस तरह की समस्याएं बने रहने वाली हैं। 🌪️
 
नोएडा में ग्रेटर नोएडा में लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और विश टाउन द्वारा खरीदी गई जमीन पर लगातार सालों से गड्ढा बनाया जा रहा है, यह तो बिल्कुल भी ठीक नहीं है। क्या कोई ऐसा लोग है जिसे खुद की कामयाबी के लिए दूसरों की समस्याओं को नजरअंदाज करने की जरूरत न हो।
 
क्या हुआ है यह गड्ढा ग्रेटर नोएडा में 🤯। इतनी समय से इस गड्ढे में पानी भरा हुआ है, जो अब कीचड़ जैसा हो गया है। और आसपास भी बहकर आने वाला कूड़ा-करकट जमा हो रहा है। यह तो सार्वजनिक सड़क के पास खुला और जलमग्न गड्ढा की बात है जो किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकता है। 🚨 निर्माणाधीन भूखंड भी मौजूद है, यह तो बताता है कि निर्माण प्रबंधन के नियमों का पालन नहीं किया गया। हमें इसे ठीक से करना चाहिए, ताकि लोगों की सुरक्षा और स्वच्छता बनी रहे। 🌟
 
मेरा यह तो एक गड्ढा बनाने वाली कंपनी सुनकर मुश्किल हो जाती 😂, लगता है कि ये लोग गड्ढे को बेचने के लिए लगातार पानी भर रहे हैं और फिर यह तो जल प्रदूषण बन जाता है! 🤦‍♂️

लेकिन मुझे लगता है कि सरकार से नहीं चीजें होंगी, ये लोग तो बस अपनी निजी गड्ढे को ठीक करने में व्यस्त हैं और फिर दूसरों की परवाह नहीं करते 🙄

तो अब पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है, लेकिन मुझे लगता है कि यह तो बहुत बाद में होगा, जैसे कि जब गड्ढे से कोई भी गंभीर दुर्घटना होती है और फिर पुलिस कहती है "क्या आपने नहीं देखा?" 😅

यह तो एक बड़ा मामला है, लेकिन मुझे लगता है कि यह तो हमारी सरकार के लिए एक अच्छा मौका होगा, किसी भी तरह से जल प्रदूषण निवारण अधिनियम का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए! 💪
 
बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर यह दुर्घट गड्ढा क्या असर डाल सकता है 🤕🚨 पुलिस ने अभी तो मामले में कसकर कार्रवाई की, लेकिन जमीन के मालिक विश टाउन और लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने जबरदस्त पैसे खर्च करके क्या कर सका? 🤑

और फिर सार्वजनिक सड़क के पास इतनी बड़ी भूमि में खुला गड्ढा, तो यह कितना खतरनाक होगा! रात के समय या कोहरे में वाहन चालकों और राहगीरों के लिए संभव है कि दुर्घटना घट जाए। 😨
 
🤔 ग्रेटर नोएडा में लगातार सालों से गड्ढा बनाया जा रहा है और यह पूरी तरह से प्रदूषित होकर कीचड़ जैसा हो चुका है। 🌿 यह बहुत खतरनाक है क्योंकि आसपास से बहकर आने वाला कूड़ा-करकट भी इसी जलभराव में जमा हो गया है, जिससे बदबू और जहरीली गैसें वातावरण में फैल रही हैं। 🚽 पुलिस ने अभी भी इसका कोई इलाज नहीं किया है और निर्माणाधीन भूखंड भी मौजूद हैं, जिससे यह भी स्पष्ट होता है कि निर्माण प्रबंधन के नियमों का पालन नहीं किया गया। 🤷‍♂️ इसे देखते हुए, हमें सावधान रहना चाहिए और अपनी सेहत की रक्षा करनी चाहिए।
 
अरे, ये तो बहुत बड़ा मुद्दा है! ग्रेटर नोएडा में ऐसी जगह पर जमीन खरीदकर बिना कोई सावधानी किए गड्ढा बनाना और पूरी तरह से प्रदूषित कर देना क्यों? यह तो बहुत बड़ा खतरा है! रात के समय या कोहरे में वाहन चालकों और राहगीरों के लिए यह जानलेवा हो सकता है। और इसके अलावा, स्थानीय निवासियों की परेशानी को देखकर भी बहुत दुख होता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को। पुलिस ने तो मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है, लेकिन यह तो अभी शुरू ही है। हमें अभी भी इस पर सावधानी बरतनी चाहिए और सरकार को ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। 🚧💦👎
 
अरे, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है! ग्रेटर नोएडा में ऐसी कोई भी जानलेवा स्थिति मौजूद होने पर क्यों नहीं पता चलता? इससे पहले भी कई बार पानी भरने के बाद जमीन पूरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है। और अब कूड़ा-करकट आने लग रहा है, तो यह पूरा गड्ढा बहुत खतरनाक है! क्या कोई पुलिस अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं? और क्यों नहीं कोई चेतावनी संकेतक लगाए गए हैं? यह तो बहुत बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है! 🚨😱
 
मुझे ये सच है कि ग्रेटर नोएडा में लगातार कई सालों से एक गड्ढा बनाया जा रहा है, जिसमें बहुत प्रदूषण फैल रहा है। यह तो बहुत भयानक है और हमारी बीमारियों को बढ़ावा देने वाली बदबू से भरा हुआ है। इसके चारों ओर चेतावनी संकेतक नहीं लगाए गए हैं जिससे यह गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।

इस मामले में पुलिस ने 5 लोगों को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है, जो हमारी भविष्य की पीढ़ी को खतरा देता है। मुझे लगता है कि हमें अपने आसपास की स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए और सरकार को भी जल प्रदूषण निवारण अधिनियम के तहत इस तरह की घटनाओं की रोकथाम करनी चाहिए।
 
ग्रेटर नोएडा में इस गड्ढे की स्थिति बेहद चिंताजनक है 🤯। क्योंकि यह न तो बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए सुरक्षित है, न ही यह वातावरण के लिए स्वच्छ बनाए रखने में मदद करता है। इससे हमें एक साथ आने और इस समस्या का समाधान ढूंढने की जरूरत है। प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण के लिए हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
 
जल भराव की समस्या तो देशभर में फैली हुई है, लेकिन ग्रेटर नोएडा में यह गड्ढा इतना खतरनाक है कि आसपास से चलने वाले किसी भी व्यक्ति को इसकी ओर आकर्षित करना खतरनाक होगा। तो फिर क्यों लगातार इसे खोदते जा रहे हैं? यह हमारे पर्यावरण को कैसे बचाएगा? 🤔
 
अरे, ये तो दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है जिस पर हम सभी को विचलित करना चाहिए। ग्रेटर नोएडा में लगातार सालों से गड्ढा बनाया जा रहा है, जिसमें पानी भरा हुआ है। लेकिन अब यह पूरी तरह से प्रदूषित होकर कीचड़ जैसा हो गया है और आसपास से बहकर आने वाला कूड़ा-करकट भी इसी जलभराव में जमा हो गया है। 🚮

यह जानलेवा स्थिति है, खासतौर पर रात के समय या कोहरे में वाहन चालकों और राहगीरों के लिए। निर्माण प्रबंधन के नियमों का भी पालन नहीं किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कुछ लोग सुरक्षित नहीं सोच रहे हैं। 🚧

इन सभी मामलों में, हमें अपने देश की स्वच्छता और सुरक्षा पर ध्यान रखना चाहिए। पुलिस ने अभी भी मुकदमा दर्ज कर लिया है, लेकिन यह पहली कदम है। हमें आगे से इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए और गंभीर दिशा देनी चाहिए। 💪
 
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