उत्तर प्रदेश के गवर्नर से लेकर जीएसटी डिप्टी कमिशनर तक, अफसरों का इस्तीफा देने से पहले सभी ने अपनी सरकार में ही पद छोड़ने की तैयारी में थी. इन्हीं अफसरों में से एक हैं प्रशांत सिंह जो अयोध्या में जीएसटी के डिप्टी कमिशनर थे. उनके इस्तीफे के बाद कई आरोप लगाए गए और अब यह दावा किया जा रहा है कि प्रशांत सिंह चुनाव लड़ने की तैयारी में थे लेकिन टिकट नहीं मिल सका।
सूत्रों की मानें तो प्रशांत सिंह के भाई विश्वजीत सिंह ने उनके लिए फर्जी सर्टिफिकेट्स पर नौकरी हासिल करने का दावा किया है। यह दावा पहले लगाया गया था लेकिन अब जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई. इसके अलावा, प्रशांत सिंह के भाई विश्वजीत सिंह ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
प्रशांत सिंह ने 2022 में जीएसटी विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर पद पर रहते हुए बीजेपी से मऊ जिले से टिकट की दावेदारी भी की थी। उस वक्त उन्होंने अपना समर्थन लेकर कई पोस्टर लगाकर वो माहौल बना रहे थे। लेकिन टिकट नहीं मिला तो नौकरी जारी रखी और प्रमोट होकर डिप्टी कमिशनर बन गए और ट्रांसफर अयोध्या हो गया।
इसके अलावा, यह दावा किया जाता है कि प्रशांत सिंह को मऊ में भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दलों से अच्छे रिश्ते हैं। उनके चारों ओर समाजवादी पार्टी के संस्थापक, स्व. मुलायम सिंह यादव के करीबियों में से एक अमर सिंह की पार्टी के जिलाध्यक्ष भी थे।
इन आरोपों और दावों पर अभी तक कोई बयान नहीं जारी हुआ है, लेकिन अयोध्या के सरकारी सूत्रों ने बताया है कि डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह के भाई विश्वजीत सिंह के आरोप ग़लत पाए गए थे। उनके खिलाफ जांच चल रही है और इसमें भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई है।
सूत्रों की मानें तो प्रशांत सिंह के भाई विश्वजीत सिंह ने उनके लिए फर्जी सर्टिफिकेट्स पर नौकरी हासिल करने का दावा किया है। यह दावा पहले लगाया गया था लेकिन अब जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई. इसके अलावा, प्रशांत सिंह के भाई विश्वजीत सिंह ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
प्रशांत सिंह ने 2022 में जीएसटी विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर पद पर रहते हुए बीजेपी से मऊ जिले से टिकट की दावेदारी भी की थी। उस वक्त उन्होंने अपना समर्थन लेकर कई पोस्टर लगाकर वो माहौल बना रहे थे। लेकिन टिकट नहीं मिला तो नौकरी जारी रखी और प्रमोट होकर डिप्टी कमिशनर बन गए और ट्रांसफर अयोध्या हो गया।
इसके अलावा, यह दावा किया जाता है कि प्रशांत सिंह को मऊ में भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दलों से अच्छे रिश्ते हैं। उनके चारों ओर समाजवादी पार्टी के संस्थापक, स्व. मुलायम सिंह यादव के करीबियों में से एक अमर सिंह की पार्टी के जिलाध्यक्ष भी थे।
इन आरोपों और दावों पर अभी तक कोई बयान नहीं जारी हुआ है, लेकिन अयोध्या के सरकारी सूत्रों ने बताया है कि डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह के भाई विश्वजीत सिंह के आरोप ग़लत पाए गए थे। उनके खिलाफ जांच चल रही है और इसमें भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई है।