ईरान में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स की कहानी एक दुखद उदाहरण है। युवाओं ने अपनी पढ़ाई के लिए विदेशों में जाकर अपना भविष्य बनाने के लिए कई परिश्रम किया, लेकिन फिर भी उन्हें सही से मदद नहीं मिली।
बच्चों को हॉस्टल में रहने के बदले में शुल्क देना पड़ता है। अगर वे हॉस्टल छोड़ देते हैं तो उनके पास इतने पैसे नहीं बचते। उन्हें अपने टिकट भी खरीदने के लिए पैसे खत्म हो जाते हैं। इसका मतलब यह है कि सरकार ने उन पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
इस बीच, ईरान में 10,000 से अधिक भारतीय नागरिक हैं और वे अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार जीवन जीते हैं। लेकिन इस मामले में सरकार को बच्चों पर ही दबाव बनाना पड़ता है। उन्हें कहा जाता है कि अगर वे ईरान से नहीं निकलते तो उनके पास खाने-पीने के लिए कोई साधन नहीं है।
आजकल, भारतीय नागरिकों की मदद करने वाली सरकार ने कहा है कि अगर आप ईरान जाते हैं तो अपने घर जाने पर आपको सबसे पहले पासपोर्ट लौटवाना पड़ेगा। इसके बाद उन्हें फ्लाइट टिकट खरीदने की सलाह दी जाती है।
ईरान में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स की कहानी तो बहुत दुखद है । युवा अपने भविष्य को बनाने के लिए विदेशों में जाते हैं और फिर भी उन्हें सही से मदद नहीं मिल पाती। बच्चों को हॉस्टल में रहने के बदले में शुल्क देना पड़ता है और अगर वे हॉस्टल छोड़ देते हैं तो उनके पास इतने पैसे नहीं बचते। यह तो सरकार की देखभाल से बिलकुल भी अलग नहीं है।
मैने सुना है कि ईरान में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स की कहानी। बहुत दुखद है कि युवाओं को अपनी पढ़ाई के लिए विदेशों में जाकर अपना भविष्य बनाने के लिए कितनी परिश्रम करनी पड़ती है, लेकिन फिर भी उन्हें सही से मदद नहीं मिली।
मुझे लगता है कि सरकार ने बच्चों को हॉस्टल में रहने के बदले में शुल्क देना एक गलत सोच है। अगर वे हॉस्टल छोड़ देते हैं तो उनके पास इतने पैसे नहीं बचते। इसका मतलब यह है कि सरकार ने उन पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
मुझे लगता है कि सरकार को अपने नागरिकों की मदद करनी चाहिए, लेकिन फिर भी सरकार बच्चों पर ही दबाव बनाना पड़ता है। उन्हें कहा जाता है कि अगर वे ईरान से नहीं निकलते तो उनके पास खाने-पीने के लिए कोई साधन नहीं है।
यह तो बहुत अच्छी बात है कि सरकार ने कहा है कि अगर आप ईरान जाते हैं तो पहले पासपोर्ट लौटवाएं और फिर टिकट खरीदें, यह तो बहुत सावधानी और रचनात्मकता का मिश्रण है। मुझे लगता है कि अगर हमारे युवाओं को ऐसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो शायद यह एक अच्छा अवसर हो सकता है कि वे अपनी जरूरतों के अनुसार अपने भविष्य को बनाएं और सरकार को सिखाएं कि हमें अपने नागरिकों पर इतना दबाव नहीं रखना चाहिए।
क्योंकि अगर सरकार बच्चों पर ही दबाव बनाती है, तो यह उनके भविष्य के लिए बहुत नकारात्मक होगा। मुझे लगता है कि हमें अपने युवाओं को सिखाना चाहिए कि वे अपने जीवन के निर्णयों पर अपनी गलतियाँ सुधारने के लिए तैयार रहें।
अरे, ये तो बहुत चिंताजनक स्थिति है , अगर भारतीय सरकार ने ऐसा पासपोर्ट लौटवाने की मुहावरा दिया है, तो यह विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए बहुत परेशानी का कारण बनेगा।
क्या हमें ये नहीं सोचा था कि अगर कोई विदेश जाता है तो उसका पासपोर्ट वहां से लौटवाना पड़े। इसका मतलब यह भी है कि सरकार ने अब विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
आजकल, 10,000 से अधिक भारतीय नागरिक ईरान में रहते हैं और उन्हें अपनी जिंदगी जीने का मज़ा नहीं आता है। सरकार पर यह दबाव बनाना अच्छा नहीं है, हमें उन्हें मदद करनी चाहिए।
नहीं, ये तो भारतीय नागरिकों के लिए एक बड़ी समस्या होगी, अगर वे अपने पासपोर्ट बाहर कर देते हैं और फिर टिकट खरीदते हैं। इसका मतलब यह है कि सरकार उन पर ही दबाव बनाना शुरू कर देगी।
नरम दिल की बात है ये बच्चों की। विदेश में पढ़ाई करने जाने से पहले हम सबको खुद को अच्छी तरह से तैयार करना पड़ता है, लेकिन इन युवाओं को इतनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हॉस्टल में रहने के बदले में शुल्क देना और फिर भी इतनी पैसे बचाने में असमर्थ होना। यह सचमुच बहुत दुखद है
ईरान में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स की कहानी तो बहुत दुखद है । ये बच्चे अपनी पढ़ाई के लिए विदेशों में जाकर अपना भविष्य बनाने के लिए इतनी परिश्रम करते हैं और फिर भी उन्हें सही से मदद नहीं मिलती।
यार, हॉस्टल में रहने के बदले में शुल्क देना पड़ता है और अगर वे हॉस्टल छोड़ देते हैं तो उनके पास इतने पैसे नहीं बचते। उन्हें अपने टिकट भी खरीदने के लिए पैसे खत्म हो जाते हैं। इसका मतलब यह है कि सरकार ने उन पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
मुझे लगता है कि सरकार ने अपनी व्यवस्था बदलनी चाहिए, ताकि ये बच्चों को सही से मदद मिल सके। उनको आर्थिक सहायता भी देनी चाहिए और उन्हें अपने भविष्य के लिए कोई प्लान बनाने में मदद करनी चाहिए।
मेरे दोस्तों , ईरान में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स की कहानी बहुत दुखद है । ये छोटे बच्चे अपनी पढ़ाई के लिए विदेशों में जाकर अपना भविष्य बनाने के लिए बहुत परिश्रम कर रहे थे, लेकिन फिर भी उन्हें सही से मदद नहीं मिल रही है। यह देखकर मुझे बहुत उदासी हुई । क्योंकि ये बच्चे अपने भविष्य के लिए बहुत कुछ कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसका मतलब यह है कि वे अपने टिकट खरीदने के लिए पैसे खत्म हो जाते हैं और फिर भी उन्हें सही से मदद नहीं मिलती।
मुझे लगता है कि सरकार ने इन बच्चों पर बहुत बोझ डाल दिया है। अगर हमारे देश में ऐसा न होता, तो ये बच्चे अपने भविष्य के लिए सुरक्षित रहेंगे। हमें अपने युवाओं की मदद करनी चाहिए और उन्हें अपने भविष्य के लिए अच्छे अवसर देने चाहिए।
अरे ये तो बहुत शर्मनाक है! हमारे युवाओं को इतना परेशान करने के लिए सरकार को क्यों बोलती है? उन्हें खाने-पीने के लिए पैसे नहीं मिलने दो, फिर तो भी उनको यह सोचना पड़ता है कि आगे क्या करे। और अब पासपोर्ट लौटवाना पड़ने की बात, ये तो बहुत बुरी है। हमारे युवाओं को जीवन में आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए, न कि ऐसा करने से पहले उनकी हर गतिविधि पर निगरानी रखें।
मुझे यह तो बहुत दुखद लगता है कि हमारे युवाओं को इतनी परेशानियों में डाला जा रहा है। विदेश जाकर पढ़ाई करने का सपना देखने वाले बच्चों को अब अपने भविष्य के लिए ऐसी परिस्थितियों में फंसना कैसा लगता है? और सरकार को उन्हें इतनी दबाव में रखना कैसे सही है? क्या हमारे देश में आज भी बच्चों को हॉस्टल में रहने के बदले में शुल्क देना पड़ता है? यह तो एक बड़ा विकास नहीं है!
बिल्कुल, यह एक बहुत बड़ा मुद्दा है । युवाओं को अपने भविष्य के लिए विदेशों में जाना पड़ता है, लेकिन सरकार ने उन्हें इतनी बारीकी से फंसाया हुआ है। बच्चों को हॉस्टल में रहने के बदले में शुल्क देना पड़ता है और अगर वे छोड़ देते हैं तो उनके पास कोई पर्याप्त संसाधन नहीं रहता। यह एक बहुत बड़ा जोखिम है और सरकार को उन्हें बचाने में मदद करनी चाहिए।
सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि युवाओं पर सरकार द्वारा इतना दबाव पड़ रहा है। अगर वे अपने पासपोर्ट खो देते हैं तो फिर उन्हें सिर्फ इतना ही उम्मीद करनी होगी कि सरकार उनकी मदद करे। लेकिन इस तरह की समस्याएं होना चाहिए उन लोगों के लिए जो बहुत प्रयास करते हैं अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए।
अरे वाह, यह तो बहुत दुखद है युवाओं की स्थिति तो वाकई भयानक है। मैंने अपने छोटे भाई का साथी, जो ईरान गए थे, उनकी कहानी सुनी थी, वह बहुत परेशान था। उन्हें भी हॉस्टल में रहने के लिए पैसे देने पड़ते थे, और फिर भी वे अपना भविष्य बनाने की कोशिश कर रहे थे। यह तो सरकार की भूल ही क्या है। हमें लगता है कि अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया, तो युवाओं की मदद से उनके भविष्य में सकारात्मकता आ जाती।
ये बहुत अजीब है कि सरकार हमेशा बच्चों पर दबाव बनाती रहती है, फिर भी वे युवाओं को विदेश में पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह सोचकर खेद हो जाता है कि सरकार द्वारा उनकी मदद नहीं की जा रही है।
मुझे लगता है कि युवाओं को अपने भविष्य के बारे में सोचकर भी निर्णय लेना चाहिए। अगर वे विदेश जाने के बाद खुश नहीं होते हैं, तो फिर वे कहाँ जाते हैं? यह देखने के लिए कि क्या उनके सपने सच होंगे।
आजकल, सरकार की यह दिशा बहुत ही अजीब है। उन्हें युवाओं को नियंत्रित करने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें अपने जीवन के बारे में सोचकर आगे बढ़ने की जरूरत है।
इस मामले में सरकार पर लगने वाली दबाव बहुत बड़ा है, हमें लगता है कि बच्चों को अपने भविष्य के बारे में सोचकर निर्णय लेना चाहिए। अगर वे ईरान जाते हैं तो उन्हें यहीं रहने की जरूरत नहीं। हमें लगता है कि सरकार को बच्चों पर ही दबाव बनाने से पहले उन्हें अपने भविष्य के बारे में सोचकर निर्णय लेने का समय देना चाहिए
એવું લાગે છે કે, સરકાર તો શુદ્ધ સૌથી ખરાબ જ પરિણામો ને તૈયારી કરે છે. એવા સરકારે હંમેશા લોકોને આપણી ખુબ જ તકો છે, પરંતુ અવિચારે વધારાથી ઉપયોગ નહિ કરતા લોકોને આપણી ખુબ જ દુષ્ટ શરણાઈઓ છે.
भारतीय स्टूडेंट्स की कहानी बहुत दुखद है... जब युवा अपनी पढ़ाई के लिए विदेशों में जाकर अपना भविष्य बनाने के लिए कई परिश्रम करते हैं तो फिर भी उन्हें सही से मदद नहीं मिलती।
मुझे लगता है कि सरकार को बच्चों की मदद करने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। अगर वे बड़े हो गए तो भी उन्हें सही से मदद मिले। बिना किसी दबाव के विदेश में पढ़ने और अपने भविष्य को बनाने का हक दिया जाना चाहिए।