Indigo Crisis: सातवें दिन भी इंडिगो की 562 उड़ानें निरस्त, यात्रियों का फूट रहा गुस्सा; उड्डयन मंत्री हुए सख्त

इंडिगो एयरलाइन की संकट के बारे में बताया जा रहा है। उड़ानों के रद्द और देरी से चलने का सिलसिला सोमवार को सातवें दिन भी जारी रहा। पायलट और चालक दल के सदस्यों की कमी के कारण इंडिगो ने 562 उड़ानें रद्द कर दीं हैं। यात्रियों का गुस्सा एयरलाइन के कर्मचारियों पर फूट रहा है। उड़ानें रद्द होने के बाद उनके सूटकेस और सामान भी नहीं मिल रहे। दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू समेत कई हवाई अड्डों पर यात्रियों के बैग और सामान के ढेर लग गए हैं।

इंडिगो के इस संकट ने हजारों लोगों को संकट में डाल दिया है। उड़ानों के रद्द होने और उनके मार्ग बदलने के कारण हजारों सूटकेस और बैग भी इधर-उधर हो गए हैं। इनमें बहुत से यात्रियों के पासपोर्ट, घर की चाबियां और दवाइयां जैसी महत्वपूर्ण वस्तुएं थीं।

सरकार ने कहा है कि इंडिगो को यात्रियों के बैग जल्द लौटाने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा रहा। विकास बाजपेयी ने बताया कि वह चार दिन से सामान का इंतजार कर रहे है। वह मां के साथ कानपुर से पुणे शादी में शामिल होने गए थे। उन्होंने कहा कि वह चेक-इन के समय सामान दिया था। अब कोई बताने वाला नहीं है कि सामान कब मिलेगा।

केंद्रीय उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा है कि इंडिगो चालक दल और ड्यूटी रोस्टर का प्रबंधन करने में विफल रही। उन्होंने बताया कि एक दिसंबर को जब एफडीटीएल पर इंडिगो के साथ बैठक की थी तो कंपनी ने इस मुद्दे को नहीं उठाया था।

इंडिगो मामले की जांच कर रही समिति एयरलाइन के सीईओ पीटर एल्बर्स व सीओओ इसिड्रे पोरक्वेरस को तलब कर सकती है। उन्होंने कहा है कि इंडिगो चालक दल और ड्यूटी रोस्टर का प्रबंधन करने में विफल रही।

सरकार ने कहा है कि यात्रियों की संख्या देखते हुए 5 बड़ी विमानन कंपनियों की जरूरत है। मंत्रालय का प्रयास है कि अधिक एयरलाइनों को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

इंडिगो संकट के बाद सरकार ने कहा है कि जीपीएस स्फूफिंग से इस मामले की जांच चल रही है।
 
क्या इंडिगो वालों को नहीं पता कि उनका शेड्यूल बिल्कुल भी नहीं चलता। पूरा दिन उड़ानें रद्द होने से यात्रियों पर धावा मारता है। और फिर सरकार कहती है कि हम आपको 5 दिनों तक इंतजार करना पड़े। चार दिन से सामान इंतजार कर रहे हुए भी आपसे कोई जवाब नहीं दिया। यह तो सिर्फ पागलपन है।
 
बस अब यह तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि इंडिगो की ऐसी समस्या हो गई है। यात्रियों को इतना परेशान करना न कोई अच्छी बात है और न ही ये उनकी प्रतिष्ठा को दूषित करता है। मुझे लगता है कि इंडिगो के इस संकट की जांच में उसे अपनी गलतियों का ख्याल करना चाहिए। सरकार ने सही फैसला लेने की जरूरत है और यदि आवश्यक हो तो प्रतिबंध लगाना चाहिए अगर वे इस समस्या से उबर नहीं पाते।
 
अरे, यह तो भाई, इंडिगो की समस्या तो कितनी गंभीर है। यात्रियों का पैसा खर्च करना पड़ता है और फिर उनके सामान की भी विफलता। सरकार ने कहा है कि इन लोगों के लिए एक जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम बनाना चाहिए ताकि उनका सामान जल्द से जल्द मिल सके। लेकिन ऐसा करने में 5 दिन लगने की बात हो सकती है, भाई। 🤦‍♂️😡 यह तो परिवारों के लिए बहुत बड़ी चिंता की बात है।
 
😱 यह इंडिगो एयरलाइन की स्थिति तो बहुत बड़ी है... इतने दिनों से उड़ानें रद्द और देरी कर रही थी। यात्रियों का बैग और सामान भी चल नहीं पा रहा है। सरकार ने कहा है कि जल्द लौटाने के निर्देश दिए गए, लेकिन यह तो समय लेगा। मुझे लगता है कि इंडिगो के पास अपनी समस्याओं का समाधान करने की क्षमता नहीं है। सरकार को जरूर इस पर ध्यान रखना चाहिए और अधिक एयरलाइनों को शामिल होने के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए। 🚫
 
क्या इंडिगो एयरलाइन के पास ऐसा अधिकारी था जो उड़ानों के निर्धारण में इनाम की तरह लालच में अपना वेतन कमाने का तरीका ढूंढ रहा था। अगर ऐसा हुआ तो लोगों की इस स्थिति क्या समझनी चाहिए? और सरकार ने उड़ानों के रद्द के बाद इतने समय तक यात्रियों के बैग की जांच नहीं की। दिल्ली, मुंबई और बंगलूरू समेत कई हवाई अड्डों पर यात्रियों को अपना सामान ढूंढना पड़ रहा है, न कि सिर्फ देर रुकाएँ।
 
ये तो इंडिगो की बात है, हमेशा ऐसा होता है। पायलटों और चालक दल की कमी, उड़ानों के रद्द, यात्रियों के गुस्से... यह तो बस एक समस्या की सूची। लेकिन सरकार ने भी जरूरत में नहीं हाथ बढ़ाया। अगर एफडीटीएल ने इतनी बैठक की थी, तो तो क्यों इस मुद्दे पर नहीं उठाया? ahora जीपीएस स्फूफिंग, यह तो कोई नई चीज़ नहीं... 🤦‍♂️✈️
 
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