Interview: नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी बोले- बच्चों में बढ़ रही नकारात्मक सोच, परिवार और स्कूल की भूमिका अहम

कैलाश सत्यार्थी ने कहा, "आजकल तकनीक और गैजेट्स बच्चों की आसान पहुंच बढ़ा रहे हैं। इसे देखते समय मैं चिंतित हूं। बहुत सारी नकारात्मक सामग्री बच्चों को मिल रही है, जो उनके मस्तिष्क में दुर्गंध फैला रही है। बाल यौन उत्पीड़न, प्रतियोगिता, परिवार और स्कूल के वातावरण में भेदभाव - यह सभी बच्चों के मस्तिष्क में नकारात्मकता भरे लहज़े बनाने वाली हैं।"
 
मुझे लगता है कि हमारे बेटों को यह सुधारना होगा, उनकी कल्पना और खिलौनों से खेलने में मजा लेने का समय देना चाहिए। जैसे की कैलाश सत्यार्थी जी ने कहा है कि तकनीक से बच्चों को नकारात्मकता भरी सामग्री काफी आसानी से मिल रही है। लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि खेल क्षेत्र और शिक्षा में भी हमें अपनी सोच बदलनी होगी।
 
अरे, यह सच है कि तकनीक और गैजेट्स बच्चों को बहुत सारे गलतियाँ दे रही हैं 🤖। मेरी बेटी को भी ऐसा हुआ है, वह अपने फोन पर रहती है तो उसके मस्तिष्क में खेलने का समय नहीं रहता। और आजकल के बच्चों को बहुत सारी नकारात्मकता दिखाई देती है, जैसे कि वो अपने परिवार को ठेस पहुँचाने की बातें करते हैं या खुद को कमजोर समझने की। हमें बच्चों को सिखाना चाहिए कि तकनीक का सही इस्तेमाल करना और अपने आसपास के लोगों का सम्मान करना।
 
मुझे ये बात बहुत पागलपन है... कैलाश सत्यार्थी जी ने बिल्कुल सही कहा 🤔। टेक्नोलॉजी और गैजेट्स बच्चों को बहुत आसानी से मिल रहे हैं लेकिन इसे देखकर मुझे लगता है कि हमारे बच्चों की मस्तिष्क को बहुत खतरा हो रहा है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम्स में बहुत सारी नकारात्मकता है, जो शिशुओं से लेकर छोटे बच्चों तक पहुंच रही है... यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है! 🤷‍♀️ और फिर वो भी ये कि परिवार, स्कूल और प्रतियोगिताओं में भेदभाव होने लगा है, जो बच्चों के मस्तिष्क में नकारात्मकता भरे लहज़े बनाने वाली है। हमें तो अपने बच्चों को सुरक्षित रखने की जरूरत है और उन्हें सकारात्मक चीज़ों से जोड़ने की जरूरत है, न कि नकारात्मकता से... 🤞
 
मुझे लगने लगा कि ये ज्यादा ही खतरनाक हो सकता है... बच्चों को दूर से तकनीक और गैजेट्स में डूबने का मौका मिल रहा है, लेकिन उनके आसपास का वातावरण ठीक नहीं है। जैसे बाल यौन उत्पीड़न और भेदभाव, यह सब उनकी उम्र के हिसाब से सही नहीं है। मुझे लगता है कि पूरी तरह से ऑनलाइन शिक्षा और खेल एक अच्छा विचार नहीं है, हमें बच्चों को दुनिया से जोड़ने का तरीका ढूंढना चाहिए, न कि उन्हें अलग करना। 🤔💻
 
मुझे लगता है कि हमारे देश के बच्चों को जागरूक करने की जरूरत है। उन्हें पता होना चाहिए कि सोशल मीडिया और गैजेट्स का उपयोग उनके लिए क्यों खतरनाक हो सकता है। उन्हें ऐसी नकारात्मक सामग्री से दूर रहने की जरूरत है जो उनके मस्तिष्क को खराब कर सकती है। हमें अपने बच्चों को सही मूल्यों और आदर्शों का पाठ्यक्रम देना चाहिए ताकि वे संसार में एक अच्छे नागरिक बनें।
 
कैलाश सत्यार्थी जी ने बिल्कुल सही कहा, ये दुनिया बच्चों के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। सोशल मीडिया और टेकनॉलॉजी का इस्तेमाल बच्चों को हमेशा नकारात्मक बनाए रखने वाला है, वे खुद को देखकर दुसरों पर भरोसा नहीं कर पाते।
 
मुझे लगता है कि बच्चों को इतने सारे गैजेट्स और तकनीकी चीजें देने से पहले उन्हें इसके फायदे और नुकसान बात करनी चाहिए। मैं तो खुद एक छोटा सा समय से ऑनलाइन पढ़ता हूँ, लेकिन मुझे लगता है कि बहुत ज्यादा विकल्प देने से बच्चों का मस्तिष्क थक सकता है। और नकारात्मक सामग्री से बचना जरूरी है, क्योंकि यह उनके भविष्य को भी प्रभावित कर सकती है 🤔
 
कैलाश सत्यार्थी जी की बात सुनकर मुझे थोड़ा दर्द हुआ 🤕। तो ये कहने की कोशिश करूं, तकनीक और गैजेट्स का उपयोग बच्चों में उनके विकास पर बहुत बड़ा प्रभाव डाल रहा है। लेकिन फिर भी, हम उन्हें सीमित रूप से इसका उपयोग करने देते हैं 🤔। और उनके पास सकारात्मक सामग्री देने के बजाय नकारात्मकता को बढ़ावा देने की बात क्यों कर रहे हैं?
 
बच्चों को प्रासंगिक जानकारी देने के बजाय कैलाश सत्यार्थी साहब बच्चों को नकारात्मकता फैलाने वाली चीजें देने से रोकने के लिए हैं? 🤔
 
मुझे लगता है कि युवाओं को अपनी खुद की दुनिया बनानी चाहिए, लेकिन क्या उनके पास पर्याप्त जिम्मेदारी है? सबकुछ स्क्रीन पर मिलता है, और वे यह तय नहीं कर सकते कि क्या वो पढ़ना चाहते हैं या खेलना चाहते हैं। और फिर भी मुझे लगता है कि उन्हें अपने दोस्तों के साथ समय बिताने का मौका मिलना चाहिए, न कि एक ही दोस्त के साथ सारी दिनों तक बैठकर गेम खेलना। शायद वो भी अच्छा होता, जैसा कि मेरी माँ कहती है
 
बच्चों को इतनी ज्यादा टीवी देखने की जरूरत नहीं है, फिर भी उनकी नजर तो यूट्यूब और फेसबुक पर पड़ जाती है 📺😱 मेरी बेटी की दोस्तों से मिलने के लिए व्हाट्सएप जैसी ऐप्स का इस्तेमाल करती हैं और खुद भी एक यूट्यूब चैनल बनाने लगी थी 🤣, तो बच्चों को ऐसी कई नकारात्मक चीजें मिल रही हैं ना? शायद हमें अपने बच्चों को कुछ और अच्छे विकल्प देने चाहिए जिससे उनके मस्तिष्क को सकारात्मक ऊर्जा मिले।
 
मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी समस्या है। मेरे अनुसार, प्लेबॉय और ग्लैमर जैसी पत्रिकाओं से बच्चों को नकारात्मकता की एक लहर लगनी चाहिए। आजकल युवा सभी ऐसे वीडियो देखते हैं जिनमें कोई भी नकारात्मक नहीं होता, यह उनके मस्तिष्क में संदेश नहीं देता। और इसके अलावा, बच्चों को सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों की तुलना करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे वे अपने आप से असंतुष्ट महसूस करते हैं और आत्महत्या का रास्ता ढूंढने लगते हैं।
 
मुझे लगता है कि युवाओं को हमेशा से जागरूक रहना चाहिए। यह सच है कि तकनीक और गैजेट्स बच्चों की दुनिया में बहुत प्रभावी हैं लेकिन उन्हें इस उपयोग को संतुलित तरीके से करना चाहिए। नकारात्मक सामग्री से बचना जरूरी है, अगर नहीं तो यह उनके भविष्य को खराब कर सकती है। हमें अपने बच्चों को सही मूल्यों और ज्ञान के साथ समझावा चाहिए।
 
बच्चों को ऐसी ज़िंदगी देने दो, जिसमें खुशियाँ और शांति का संचार हो। तकनीकी जगत में तेजी से बदलाव आ रहा है, लेकिन हमें यह ध्यान रखें कि बच्चों को ऐसी चीज़ें देनी चाहिए जो उन्हें बेहतर बनाएं, न कि उनके दिमाग़ को कच्चा करें।
 
मुझे ये बात समझ आ रही है कि हमारे देश के बच्चों पर ऐसी कई चिंताएं हैं... तकनीक का फायदा और नुकसान तो दोनों ही, अगर हम इसे सही तरीके से प्रबंधित करें तो अच्छा होगा। परिवार, स्कूल, सरकार - हम सभी एक साथ मिलकर बच्चों की जरूरतों को समझने की कोशिश करें।

कल की तकनीक जैसे सेल फोन और गेमिंग कंसोल बच्चों के लिए बहुत ही ज्यादा आकर्षक हैं, लेकिन अगर हम इसे सही तरीके से नियंत्रित करें तो इससे कुछ भी गलत नहीं होगा। मेरी राय में शिक्षा और परिवार दोनों की बात करनी चाहिए।
 
कैलाश सत्यार्थी जी की बात सुनकर मुझे थोड़ा चिंतित महसूस हुआ... 🤔 क्या हम बच्चों को सही संदेश दे पा रहे हैं? उनके लिए कौन सी तकनीक और गैजेट्स उपयुक्त हैं? हमें उन्हें नकारात्मकता से भरपूर सामग्री से दूर रखने की जरूरत है, ताकि वे अपने भविष्य को सकारात्मक बना पाएं... 💡
 
मुझे लगता है कि युवाओं को अपने डिवाइस से जुड़ी दुनिया को समझने का समय मिल गया है, लेकिन उन्हें यह तय करना चाहिए कि वे अपने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों दुनिया का कैसे संतुलन बनाएंगे। मैं सोचता हूं कि हमारी पीढ़ी में बहुत सारे बदलाव आये हैं, जैसे की इंटरनेट, सोशल मीडिया, और ऑनलाइन शिक्षा, लेकिन कुछ बातों पर ध्यान रखना जरूरी है। अगर हम वास्तव में बच्चों को उनके भविष्य के लिए तैयार करना चाहते हैं, तो उन्हें यह सिखाना चाहिए कि वे अपने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जीवन का सही मंत्र समझें।

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कैलाश सत्यार्थी जी की बात सुनकर मुझे बहुत पेशेवर लगा। उनका कहना है कि तकनीक और गैजेट्स बच्चों को नकारात्मकता भरी चीजें देती हैं और उन्हें कितनी खराब स्थिति में डाल रही हैं। मुझे लगता है कि यह सच है, खासकर जब हम देखते हैं कि बच्चे अपने फोन और टीवी पर इतने समय बिताते हैं, जो उनके विकास के लिए खराब है।
 
मुझे लगा कि हमारे देश में अभी तक इतनी बोलचाल नहीं हुई थी, जिससे बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़े। टीवी, सोशल मीडिया, और इंटरनेट जैसे साधन आज बच्चों को तेजी से बढ़ावा दे रहे हैं। इससे हमें अपने बच्चों की कल्पनाशीलता पर गौर करना चाहिए। उन्हें खिलौनों, पुस्तकों, और खेलों से जुड़ना चाहिए, जिससे उनके मस्तिष्क में सकारात्मकता बनी रहे। हमें अपने बच्चों को ऐसे वातावरण देना चाहिए, जहां वे शिक्षित हों, प्यार मिले, और सुरक्षित महसूस करें।
 
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