'जो PM मोदी और CM योगी से खुश नहीं, वो सनातन के विरोधी', जगद्गुरु का अविमुक्तेश्वरानंद पर तंज

मध्य प्रदेश के सीधी जिले पहुंचे जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य पर लगाए हुए आरोपों को स्पष्ट करने का मौका दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व से खुश नहीं हैं, वे सनातन विरोधी हैं।

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि जो लोग यहां मोहन यादव की सरकार से खुश नहीं हैं, उन्हें समझ लीजिए कि वे भी सनातन विरोधी हैं। या तो वे स्वयं विधर्मी हैं या फिर विधर्मियों से मिले हुए हैं। अविमुक्तेश्वरानंद विधर्मियों से जुड़े हुए हैं, और उनके पास मोटी रकम हो सकती है।

उन्होंने कहा, "भाजपा का विरोध करने वाली पार्टियां सनातन विरोधी हैं। भाजपा का समर्थन करने वाली जनता हमारी सेवा में योगदान कर रही है।"
 
अरे यार, यह तो बहुत बड़ी बात है! जैसे ही कोई ऐसा दावा करता है कि उसके पास सच्चाई है, वही सब झूठ सुनने लगा। अगर अविमुक्तेश्वरानंद विधर्मियों से जुड़े हुए हैं और उनके पास मोटी रकम हो सकती है, तो क्या हमें लगता है कि वह शुद्ध निर्दोष है? और भाजपा का समर्थन करने वाली जनता, अरे यह तो बस जामा मस्जिद जैसी चीज है! 🙄

मुझे लगता है, अगर कोई ऐसा दावा करता है कि उसके पास सच्चाई है, तो पहले वह अपने खाली हाथों से बात करे। और भाजपा के समर्थन करने वाली जनता, अरे यह तो बस निजामुद्दीन आआजाद से ज्यादा जिज्ञासु है! 👎

मैंने नहीं माना...
 
🤔 यह बहुत दुखद है कि अब तक कुछ लोगों ने भी इस मामले में ऐसा शब्द नहीं कहा जो सच बताए। अगर अविमुक्तेश्वरानंद विधर्मियों से जुड़े हुए हैं, तो यह सवाल उठता है कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। और अगर वह विधर्मी नहीं हैं तो फिर उनके पास मोटी रकम कैसे आई? 🤑 यह जरूर साफ करने की जरूरत है कि अविमुक्तेश्वरानंद को उनके आरोपों के बारे में और जानना चाहिए। हमें पता होना चाहिए कि वे विधर्मियों से क्यों जुड़े हुए हैं और उनके पास कैसे पहुंची है उसका जवाब।
 
मुझे लगा कि ये बातें तो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण हैं 🤕. जो लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खुश नहीं हैं, वह शायद उनकी नीतियों की वजह से नहीं हैं। भारत एक बहुसांस्कृतिक देश है, और हमें अपने विभिन्न धर्मों और समुदायों को स्वीकार करना चाहिए। अविमुक्तेश्वरानंद जी को उनके विचारों पर खुलकर विचार करना चाहिए, न कि लोगों को उनकी वजह से हिंसा करना। मुझे लगता है कि हमें अपने देश में शांति और एकता की बात करें चाहिए।
 
जो लोग कहते हैं कि यह एक राजनीतिक विवाद है, तो वे बिल्कुल नहीं समझते हैं। यह जंग है सनातनिकता से जुड़े लोगों के खिलाफ। मैं यही सोचता हूँ कि अगर आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ पर सवाल उठाते हैं, तो आपको सनातनवादी कहना चाहिए, नहीं। लेकिन आजकल लोग ऐसा करने से डरते हैं कि उनकी पार्टी में भाग लेने के लिए ना तो तैयार हो जाएं।
 
अरे दोस्त, यह तो बहुत बड़ा मुद्दा है 🤔। मैंने पढ़ा है कि जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप लगाए हैं, लेकिन वो और कैसे? 😐 यह तो बहुत बड़ी चुनौती है, मैं समझ नहीं पा रहा हूँ। क्या ये सच है कि जो लोग खुश नहीं हैं, वे सनातन विरोधी हैं? 🤷‍♂️ इससे हमारे देश की राजनीति बहुत भटक जाएगी। और फिर भाजपा का समर्थन करने वाली जनता कैसे सही से समझाएं? 🤔 मुझे लगता है कि यह सब तो एक बड़ा माहौल है, जिसे हल करने के लिए हमें धैर्य और सम्मान की जरूरत है।
 
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