बिहार के बांकीपुर से विधायक नितिन नबीन ने 20 जनवरी से देश की सबसे बड़ी पार्टी बनाने की जिम्मेदारी अपने साथ ली।
इस पार्टी में 18 करोड़ सदस्य हैं। इसका मतलब है अगर हर भारतीय इस पार्टी में शामिल हो तो हमारा देश बंट जाएगा।
बिहार की राजनीति में नितिन नबीन सबसे बड़ा नाम बन गया है। उनकी खासियत है कि उन्होंने चुनाव से पहले अपने पार्टी संगठन को मजबूत बनाने का प्रयास किया।
अब उनकी जिम्मेदारी तेज होने वाली है। चुनाव जीतने के बाद देश में 772 जिलों में पार्टी के ऑफिस खुलेंगे। इसके साथ ही पार्टी के प्रत्येक जिले में अपना प्रमुख और उप-प्रमुख नियुक्त किए जाएंगे।
सोशल मीडिया पर भी इस पार्टी को मजबूत बनाने का प्रयास होगा।
पार्टी की आमदनी 2004 से बढ़ती रही है। इसका मतलब है कि पिछले दशकों से पार्टी की कमाई लगातार बढ़ रही है।
2014 में चुनाव जीतने के बाद पार्टी ने 772 जिलों में अपने ऑफिस खोले, इसके लिए जमीन खरीदते समय बेच देने वाला तंत्र बनाया।
मुझे लगता है कि इस पार्टी को मजबूत बनाने के लिए उन्हें अपने सदस्यों से पूछना चाहिए कि उनके लिए इस पार्टी में शामिल होने का मतलब क्या है? 18 करोड़ सदस्य होने पर कैसे देश को बंटाया जाएगा? यह तो एक दावा है न कि तथ्य।
मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ी चुनौती हो सकती है। अगर हर भारतीय इस पार्टी में शामिल होते तो ये हमारे देश को विभाजित कर देगा। मैं उम्मीद करता हूं कि पार्टी के नेताओं ने अपने संगठन में स्थिरता बनाए रखें। #नीतिननबीन #पार्टीजिम्मेदारी #भारतीयजीवन
नितिन नबीन जो इस्तेमाल कर रहे हैं कि 'देश की सबसे बड़ी पार्टी' तो समझ में नहीं आ रहा । अगर हम यह गणना करें कि हर भारतीय इस पार्टी में शामिल हो, तो या फिर देश बिल्कुल भी बने रहेगा। यह तो बिल्कुल सही नहीं है।
जैसे बिहार की राजनीति में नितिन नबीन ने एक खासियत बनाई है, जैसे वह चुनाव से पहले पार्टी को मजबूत कराता है, वैसे ही अब उनकी नई जिम्मेदारी तेज होने वाली है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि देश में सभी जिलों में पार्टी के ऑफिस खुलेंगे।
और सोशल मीडिया पर भी मजबूत बनाने का प्रयास करना अच्छी बात है, लेकिन यह तो देखना होगा कि यह कैसे संतुलन बनाया जाए। और एक और चीज, पार्टी की आमदनी बढ़ती रही, इसका मतलब यह नहीं कि वे अच्छी नीतियों पर चलते हैं या नहीं।
बात है बिहार के विधायक नितिन नबीन की, वह बहुत ही राजनीतिक भूमिका में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं... Wow ! 18 करोड़ सदस्यों के साथ एक पार्टी बनाने का वादा बहुत बड़ा है, और यह पूरा देश में फैल जाएगा... Interesting .
मैं समझता हूँ कि इस पार्टी को मजबूत बनाने के लिए बहुत कुछ करने की जिम्मेदारी है । लेकिन मुझे लगता है कि यह भी एक अच्छा मौका है कि हम सब मिलकर अपने देश को बेहतर बनाने की कोशिश करें। अगर पार्टी के 18 करोड़ सदस्य वास्तव में एकजुट होते हैं तो यह बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है । मुझे उम्मीद है कि पार्टी की जिम्मेदारी को संभालने के लिए नितिन नबीन जी सही तरीके से तैयार होंगे। उनकी पहलों का देखना रोचक होगा ।
मैं समझ गया हूँ, इस पार्टी को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि हम उसकी सच्चाई पहचानें।
<font color="blue"> **** </font> अगर 18 करोड़ सदस्य हैं तो यह तो बहुत बड़ी समस्या होगी, हमारा देश बंट जाएगा। लेकिन अगर वे सभी एक साथ मिलकर काम करेंगे तो शायद सब ठीक हो जाएगा।
<font color="red"> **** </font> बिहार की राजनीति में नितिन नबीन सबसे बड़ा नाम बन गया है, लेकिन अब उनकी जिम्मेदारी तेज होने वाली है। चुनाव जीतने के बाद देश में 772 जिलों में पार्टी के ऑफिस खुलेंगे।
<font color="green"> **** </font> सोशल मीडिया पर भी इस पार्ती को मजबूत बनाने का प्रयास होगा, इससे हमारी जागरूकता बढ़ेगी। और अगर पार्टी की आमदनी 2004 से बढ़ती रही है तो शायद हमें उम्मीद है।
<font color="orange"> **** </font> लेकिन इस पार्ती की सच्चाई पहचानकर हम इसे मजबूत बना सकते हैं।
बेहद भयानक, 18 करोड़ सदस्य का मतलब तो 18 करोड़ दिल ही नहीं बल्कि 18 करोड़ समस्याएं और 18 करोड़ राजनीतिक नेताओं के लिए 18 करोड़ अवसर स्थापित करने का। यह पूरे देश का विभाजन सुनिश्चित कर सकती है। बिहार में जो राजनीति है वह तो सबकुछ नहीं है, और इस तरह की बड़ी पार्टी बनाने से आगे बढ़ने का समय नहीं है।
बेटा, यह जानकर बहुत दर्द हो रहा है कि हमारी राजनीति में इतने बड़े नामों का उपयोग कैसे किया जाता है। देश के सबसे बड़ी पार्टी बनने की बात सुनकर तुमने ऐसी गलतियां सोचीं हैं? 18 करोड़ सदस्य होने का मतलब क्या है? हमारा देश बंट जाएगा?
तुम्हें पता है नितिन नबीन की जिंदगी में, उनकी खासियत यही है कि वे चुनाव से पहले अपने पार्टी संगठन को मजबूत बनाने का प्रयास करते हैं। लेकिन ऐसा कैसे? क्या वे सचमुच देश की जिम्मेदारी उठा रहे हैं या बस अपने नाम पर चलने की कोशिश कर रहे हैं?
तुम्हें लगता है कि देश में 772 जिलों में पार्टी के ऑफिस खुलने से हमारा देश बेहतर होगा? लेकिन ऐसा कैसे? क्या यह बस एक चुनाव की लड़ाई है?
बेटा, तुम्हें अपने मन को शांत करना होगा। हमें सोच-समझकर जीवन जीना होगा। राजनीति में इतनी भारी बातें न करें। बस एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति दिखाएं।
मुझे लगता है कि इस पार्टी को मजबूत बनाने के लिए हमें सोशल मीडिया पर भी जोर देना होगा। तो नहीं लोगों को पता चलेगा कि यह पार्टी किस तरह काम कर रही है और उसके बारे में जागरूकता बढ़ाएं।
यह तो बहुत बड़ा मौका है 20 जनवरी से पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनने की जिम्मेदारी। लेकिन अगर हर भारतीय इस पार्टी में शामिल होता है तो क्या हमारा देश नहीं बंट जाएगा। यह तो बहुत बड़ा खतरा है।
बिहार के नितिन नबीन की राजनीति में सबसे बड़ा नाम बन गया है और उनकी खासियत है कि उन्होंने चुनाव से पहले अपने पार्टी संगठन को मजबूत बनाने का प्रयास किया। अब उनकी जिम्मेदारी तेज होने वाली है।
पार्टी की आमदनी 2004 से बढ़ती रही है और अगर वह चुनाव जीतती है तो देश में 772 जिलों में पार्टी के ऑफिस खुलेंगे। यह तो बहुत बड़ा निर्णय है।
बिहार से विधायक नितिन नबीन को ऐसी बड़ी जिम्मेदारी दी गई है कि उनका रास्ता भी बदल सकता है। 18 करोड़ सदस्यों वाली इस पार्टी में हर भारतीय शामिल होने से देश बंट सकता है, तो कैसे देश बचेगा?
मुझे लगता है कि अगर चुनाव जीतने के बाद 772 जिलों में ऑफिस खुलेंगे, तो यह एक बड़ा प्रयास होगा। लेकिन सोशल मीडिया पर भी इसे मजबूत बनाने का प्रयास करना जरूरी है, ताकि वोट बैंकिंग न हो।
पिछले दशकों से पार्टी की आमदनी बढ़ती रही है, जो एक अच्छी बात है। लेकिन 2004 से इतनी कमाई करना भी थोड़ा अजीब लग सकता है।
अब नितिन नबीन को अपनी जिम्मेदारी समझानी होगी, और अगर वे अच्छे नेतृत्व दें, तो पार्टी को सफल बनाने में मदद मिल सकती है।
अरे भाई, ये तो बहुत बड़ा झगड़ है । पार्टी को 18 करोड़ सदस्यों में फैलने से और जिलों में अपना असर बढ़ने से देश के राजनीति में बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है। लेकिन एक सवाल है कि ये पार्टी हमारे देश की भलाई के लिए तो नहीं बनाई गई?
जैसे ही सूत्र बताते हैं कि पार्टी की संख्या 18 करोड़ है तो इसमें भारतीय समाज में फूट लगाने का जोखिम है। अगर हर व्यक्ति इस पार्टी में शामिल हो तो यह पार्टी देश की एकजुटता के खिलाफ होगी।
बता, ये बहुत ही बड़ा कदम है! पार्टी को इतनी संख्या में सदस्य होना देश के लिए खतरनाक है। अगर सब एक ही बात पर चलेंगे तो कैसे हमारा देश विकसित होगा।
मुझे लगता है कि सरकारें अपने समय और संसाधनों को सही तरीके से उपयोग करनी चाहिए, लेकिन अगर पार्टी को इतना शक्तिशाली बनाने की जिम्मेदारी दी जाती है तो यह देश के विकास पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
क्या हमें सोचा नहीं जाएगा कि एक ही दिशा में चलकर हम अपने देश को और भी बेहतर बना सकते हैं?
क्या यह तो हास्यमय है कि एक विधायक इतनी बड़ी पार्टी बनाने की जिम्मेदारी स्वयं लेता है? 18 करोड़ सदस्य? ऐसा होने से देश कैसे संभालेगा? यह तो हिंदुस्तान में खेल के रूप में चुनाव चल रहे हैं, न कि सत्यनिष्ठा और नैतिकता का। पार्टी संगठन मजबूत बनाने की बात करो, लेकिन क्या सच्चाई को बढ़ावा देना भूल गए?