‘जिस देश ने हसीना को पनाह दी, वो दोस्त कैसे’: BNP लीडर बोले- इंडिया स्पेशल नहीं, एक-दो मर्डर को हिंदुओं के खिलाफ हिंसा न कहें

बांग्लादेश में चुनावों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिसने देश की राजनीति पर गहरा असर डाला है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) इस चुनाव में सबसे बड़ी शक्ति है, और इसकी अगुआई उसके पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान कर रहे हैं।

बांग्लादेश में भारत और उसके साथी देशों के रिश्तों पर सवाल उठते हुए, एक पत्रकार ने BNP के सदस्य अब्दुल मोइन खान से बातचीत की। उन्होंने कहा, "हमने भारत को सिर्फ एक पड़ोसी देश माना है। हमें उसके साथ अच्छा रिश्ता बनाना चाहते हैं।"

लेकिन भारत ने बांग्लादेश को शरण दिया है और प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, जिसने दोनों देशों के रिश्तों पर गहरा असर डाला है।

चुनाव के साथ जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है, जिसमें प्रावधान है कि राजनीतिक दलों की अलग-अलग मांगों के बीच संतुलन बनाने के लिए 100 सदस्यों वाले अपर हाउस प्रतिनिधित्व के आधार पर बनाया जाएगा।

हिंदूवादी नेता गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का नामांकन रद्द कर दिया गया था, जिसने व्यापक अभिवादन में आकर लोगों को बेचारे ही डराया।
 
बांग्लादेश के चुनावों पर ध्यान रखना जरूरी है, खासकर जब देश के भविष्य पर इसका असर पड़ता है। मुझे लगता है कि BNP ने अच्छी तरह से अपने राजनीतिक वादों को पेश किया है, लेकिन चुनाव के बाद भी दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना जरूरी है। जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह एक अच्छा कदम है ताकि राजनीतिक दलों के बीच संतुलन बनाया जा सके। लेकिन इस समय देश में हिंदूवादी नेताओं को भी ध्यान रखना जरूरी है, खासकर जब उनकी विरोधी भावनाएं लोगों को उत्तेजित कर रही हैं। 🤔
 
बात तो यह है कि बांग्लादेश में चुनावों की वजह से दोनों देशों के बीच कोई भी संबंध गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। लेकिन यार, ऐसा लगता है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की वजह से सब कुछ खराब हो रहा है। 😐

अगर मैं तो कहूं, तो मुझे लगता है कि भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों पर सवाल उठते हुए, हमें दोनों देशों के बीच संबंध बनाने की जरूरत है। लेकिन ऐसा नहीं हो सकता, अगर हम दोनों पक्षों में जागरूकता और समझ बढ़ाएं। 🤔

और भारत ने बांग्लादेश को शरण देने की वजह से सब कुछ गलत हो रहा है? यार, ऐसा लगता है कि हमें अपने पड़ोसी देशों के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए। 🤝

लेकिन तो यह तो बिल्कुल सही है, जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। लेकिन हमें ऐसे चुनावों की तरह सोच नहींना चाहिए, जहां राजनीतिक दलों को अलग-अलग मांगों के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रतिनिधित्व के आधार पर ही मतदान करना पड़ता है। 🤔

और गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का नामांकन रद्द करने की वजह से व्यापक अभिवादन में आकर लोगों को डराया गया। यार, ऐसा नहीं होना चाहिए। हमें अपने नेताओं के प्रति अधिक समझ और जिम्मेदारी रखनी चाहिए। 🙏

क्या तुम्हें भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों पर सवाल उठते हुए कोई विचार है? 🤔
 
बच्चे तो पहले चुनावों से भूलकर अब चोरों की तरह बोल रहे हैं... क्या चोरी करने वाले लोग मामला बनाएंगे? 🤦‍♂️
 
बांग्लादेश की चुनावों को लेकर यह साबित करना ताकि हम समझें कि देश की राजनीति पर गहरा असर है, कि भारत और बांग्लादेश के बीच दोस्ती और सहयोग की गहराई है। हमें जानकर खुशी मिलेगी कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का बेटा तारिक रहमान इस चुनाव में अपने अभियान चला रहे हैं, लेकिन भारत और बांग्लादेश के बीच शरण देने और प्रत्यर्पण की मांग करने से हमें समझने में मदद मिलेगी। जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह को लेकर भी यह महत्वपूर्ण है कि हम सभी राजनीतिक दलों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करें।
 
बोलते रहते हैं ये चुनाव, पार्टियाँ एक-दूसरे से झगड़ने लग रही हैं। लेकिन खालिदा जिया की बेटी तारिक रहमान ने ऐसी बातें कही हैं जो देश की राजनीति को कुछ अलग दिखाती हैं। उन्होंने कहा है कि हम बांग्लादेश को भारत का पड़ोसी देश मान रहे हैं, लेकिन यह तो एक अच्छा संदेश है। शरण देने और प्रत्यर्पण करने पर रुकना तो थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह भारत की बात है और बांग्लादेश की बात नहीं। जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह एक अच्छा विचार है, क्योंकि इससे देश को अपनी अलग-अलग मांगों को समझने में मदद मिलेगी। और गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का नामांकन रद्द करना तो एक अच्छा फैसला है, लेकिन यह तो जिम्मेदारियों की बात है।
 
बांग्लादेश की चुनावी स्थिति तो बहुत गंभीर है। तारिक रहमान की इस चुनावी नेतृत्व में BNP सबसे बड़ी शक्ति है, लेकिन उनके नेतृत्व में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर सवाल उठता तो बहुत बड़ा असर पड़ेगा।

चुनावी मामले से जुड़ी बातें मेरे मन में यही सवाल उठती हैं - हमारा देश भारत कितने अच्छी तरह से जानता है? क्या हम समझते हैं कि पड़ोसी देशों की राजनीति और समस्याएं हमारे लिए कैसे महत्वपूर्ण हो सकती हैं?

मेरा तो सवाल यह है - चुनाव के साथ जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह में 100 सदस्यों वाले अपर हाउस प्रतिनिधित्व का मान्यता क्यों नहीं मिली? यह समस्या मुझे बहुत दुख देती है।

प्रमाणिक जैसे नेताओं को रद्द करना और उनके विरोधियों को डराना-धमकाना तो बहुत ही अस्वीकार्य बात है। हमें अपने देश में लोकतंत्र के मूल्यों को समझना चाहिए, जैसे कि स्वतंत्रता, समानता, और विविधता।
 
बंग्लादेश में चुनाव के पीछे बहुत से सवाल हैं 🤔, सबसे ज्यादा यह कि भारत और बांग्लादेश के बीच दोस्ती कैसे बनेगी, अगर पहले तो हमारे देश ने उन्हें शरण दिया था... और अब वह हमसे प्रत्यर्पित करना चाहते हैं? 😕

मुझे लगता है कि बांग्लादेश में स्थिरता बनाए रखने के लिए सबसे ज्यादा बात यही है, अगर वे दोनों देश मिलकर काम करें तो शायद सब ठीक हो जाएगा... 🤞

और चुनाव के बाद जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह, ये तो एक अच्छा निर्णय है... लेकिन पहले तो क्या इन सभी दलों के बीच कैसे संतुलन बनाया जाएगा? 🤔
 
बात बोलते बोलते मैं सोच रहा हूँ कि चुनावों को लेकर सवाल उठना तो सामान्य बात है, लेकिन यह जानकर अच्छा लगा कि अब लोग राजनीतिक दलों की छवियों पर सवाल उठाने लगते हैं और उनके नेताओं के दिलचस्प पीछे की कहानियाँ सुनने की इच्छा रखते हैं।

बांग्लादेश में भी ऐसी चीजें हो रही हैं, जहाँ लोगों को लगता है कि उनके देश में बदलाव की जरूरत है। और यह एक अच्छी बात है, क्योंकि बदलने की जरूरत हमेशा अच्छे परिणामों से जुड़ी होती है।

और फिर भी अगर हम विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो हमें अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध बनाने पर ध्यान देना चाहिए। पार्टी नेताओं के बीच छोटे-छोटे झगड़े भूलना नहीं चाहिए, और हमें एक-दूसरे को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
 
बड़े बहुत सुर्प्राइज है कि बांग्लादेश में चुनावों पर सवाल उठ रहे हैं। तो सिर्फ इसलिए नहीं की देश राजनीतिक रूप से कमजोर है, बल्कि पूरा खेल राजनीतिक और सामाजिक असंतुलन से भरा पड़ा है 🤯। बNP के नेता तारिक रहमान भारत को एक पड़ोसी देश मानने के लिए तैयार हैं? यहाँ तक कि उन्होंने अपने पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को भी शामिल नहीं किया है! 😂 क्या ये लोग सोचते हैं कि दुनिया उनके देश की समस्याओं पर ध्यान देगी? 🤔

चुनावों में जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह का मुद्दा बहुत ही दिलचस्प है। यह तो एक अच्छा विचार है कि राजनीतिक दलों को अपनी अलग-अलग मांगों के बीच संतुलन बनाने के लिए 100 सदस्यों वाले अपर हाउस प्रतिनिधित्व का उपयोग करें ताकि देश के लोगों को सच्ची चुनौतियाँ मिल सकें। 🙌

क्या बंदूक से लड़ने वाले नेताओं को बैठकर बातचीत करने का समय नहीं आया? गोबिंद चंद्र प्रमाणिक जैसे हिंदूवादी नेताओं के नामांकन पर रोक लगाना एक अच्छा फैसला है लेकिन मुझे लगता है कि इससे उन्हें और भी अधिक शक्तिशाली बनाने का मौका मिल गया है। 😏
 
बंगाल में चुनाव होने से पहले बहुत घुंसपू माहौल है 🤯। पुराना तारिक रहमान अब नई पीढ़ी का नेता बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी भी वह अपने परिवार के इतिहास से जुड़ा हुआ है।

भारत-विरोधी बयान करने वाले खान जी से बात करते हुए तो उनकी बोलियाँ एकदम मुश्किल में आती हैं 💔। लेकिन अगर हम गहराई पर देखें, तो यह केवल राजनीति का खेल है।

जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह बहुत महत्वपूर्ण है, चाहे वह बांग्लादेश में या भारत में। इससे सुनिश्चित होता है कि हर दल अपनी अलग पहचान बनाए रखे। लेकिन अभी यह सवाल उठता है कि क्या वास्तव में राजनीतिक दलों को एक साथ आने की कोशिश करने का मौका मिलेगा? 🤔
 
बोलते हैं तो, यह चुनाव ऐसी तैयारी नहीं कर रहा है जैसा हमें लगता है। पहले तो गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का नामांकन रद्द हो गया, और फिर उनके समर्थकों ने व्यापक अभिवादन में लोगों को डराया। यह अच्छी नहीं है, क्या? हमें ऐसा नहीं चाहता कि कोई भी नेता अपने मतदाताओं को डराए।

चुनाव के बाद, दोनों देशों के रिश्तों पर कुछ सुधार होगा, मान लिया जाए। लेकिन हमें ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा जिनका हम कभी नहीं सोच सकते थे।

उम्मीद है, यह चुनाव दोनों देशों के बीच शांति और समझ को बढ़ावा देगा।
 
बांग्लादेश में चुनावों से पहले तो लगता है कि कुछ गलत होने वाला है। भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर सवाल उठने से दोनों देशों की राजनीति पर गहरा असर पड़ता है। मुझे लगता है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की यह चुनावी अभियान बहुत ही विचलित करने वाला होगा। तारिक रहमान जी को उनके पिता खालिदा जिया की जगह पर अगुआई करने में शुभकामनाएं हैं, लेकिन यह सवाल उठता है कि उनकी पार्टी की नीतियां कैसे देश के नागरिकों के लिए फायदेमंद होगी। चुनाव के साथ जुलाई चarter पर जनमत संग्रह बहुत जरूरी है, खासकर जब यह राजनीतिक दलों की अलग-अलग मांगों को संतुलित करने के बारे में है।
 
चुनावों के बाद से ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या बांग्लादेश में सच्चाई कहीं भूल गई है? क्या वे तय कर सकते हैं कि वो अपनी राजनीतिक शक्तियों को कैसे इस्तेमाल करते हैं? मुझे लगता है कि चुनावों में जुड़ी समस्याओं से हमारा देश खुद भी प्रभावित होगा।
 
बात बांग्लादेश चुनाव की, तो यह बहुत ज्यादा गंभीर है 😕। देखिए, भारत और बांग्लादेश में रिश्तों पर सवाल उठते हुए, लेकिन फिर भी हमारा दोस्त बने रहते हैं। मुझे लगता है कि चुनावों में जो तारिक रहमान आ गए हैं, वे अच्छे नेता हो सकते हैं।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि हमें अपने पड़ोसी देश के साथ अच्छे रिश्ते बनाने के लिए क्या करना चाहिए? मुझे लगता है कि हमें बातचीत करनी चाहिए और दूसरी तरफ से भी समझना चाहिए। शरण देने की बात, तो यह एक बड़ा मुद्दा है, लेकिन हमें इस पर सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए।

और जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह, तो यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है। इससे हमें राजनीतिक दलों के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है और देश के लिए अच्छा भविष्य निर्माण कर सकते हैं। 🤞
 
अरे, तुमने देखा है कि बांग्लादेश में चुनाव कैसे हर किसी को खिलवाड़ कर रहे हैं? सबसे बड़ी शक्ति कौन है, यह तय करने से पहले हमें अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छा रिश्ता बनाना चाहिए।

मैं समझता हूं, जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन मुझे लगता है कि हमें इससे पहले अपनी सरकार और समाज में बदलाव लाना चाहिए। अगर हम अपने देश में शांति और संतुलन बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं, तो फिर भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों पर कैसे समाधान मिलेगा?
 
बीते कुछ दिनों से बांग्लादेश की चुनाव स्थिति पर बहुत ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। मुझे लगता है कि यह चुनाव न केवल बांग्लादेश के लिए बल्कि भारत और इसके आसपास के देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मौका है। 🌟

बात करते हैं तारिक रहमान जी की अगुआई में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की विजय संभव नहीं है। मुझे लगता है कि भारत और बांग्लादेश के बीच शरण और प्रत्यर्पण पर चल रहे मुद्दे को हल करने के लिए एक निष्पक्ष और तटस्थ दृष्टिकोण लेना जरूरी है।

लेकिन यह चुनाव हमें कुछ महत्वपूर्ण सबक सिखाता है - राजनीति में जीत हार की दुनिया में फिर से खेलने की तैयारी करना। वोट और उनकी आवाज़ को मानना भी बहुत जरूरी है।

और फिर यह चुनाव हमें भारत और बांग्लादेश के बीच शांति और समझ की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर देता है।
 
चुनावों के बाद तो हालात कैसे होंगे, यह सोचते समय तारिक रहमान का यह दावा बहुत मजाक है, भारत को पड़ोसी देश मानकर अच्छा रिश्ता बनाना? 🤔 चुनावों से पहले भी बांग्लादेश ने दिखाया है कि वह अपनी स्वतंत्रता और शक्ति पर विश्वास करता है।

और जनमत संग्रह में 100 सदस्यों का अपर हाउस प्रतिनिधित्व? यह तो बहुत बड़ा झूठ है, किसे लगता है कि देश की राजनीति इस तरह आसानी से नियंत्रित की जा सकती है? 🙄
 
मैंने हाल ही में अपने दोस्त के गाँव में चुनाव के बारे में बातचीत की, उन्होंने मुझे बताया कि उनके गाँव में लोग तारिक रहमान को राजनेता होने से बहुत खुश हैं, लेकिन उनकी पार्टी को चुनाव जीतने में कुछ असफलताओं की वजह से कई लोग निराश हैं। यह चुनाव देश के भविष्य के बारे में बहुत महत्वपूर्ण है, और उम्मीद है कि नए नेता देश को एक बेहतर दिशा में ले जाएंगे।
 
बोलते बोलते लगता है कि हमें कभी भी अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्ते बनाने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन फिर भी हमें उनकी समस्याओं को समझने और सम्मान करने की जरूरत है। बांग्लादेश में हो रहे चुनावों में तारिक रहमान जैसे नेता को अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, और भारत से आ रहे दबाव को समझना चाहिए।

हमें याद रखना होगा कि चुनावों में जीत हासिल करने के लिए हमें अपने देश की मध्यमता को खोने नहीं देना चाहिए। इससे हमें सिर्फ अपने राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किसी भी कीमत पर व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने की जरूरत नहीं होती।

इस चुनाव में जुलाई चार्टर की जानकारी देना महत्वपूर्ण है, और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि राजनीतिक दलों की अलग-अलग मांगों पर ध्यान दिया जाए, ताकि हम अपने देश को आगे बढ़ा सकें।
 
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