जबलपुर में निर्माणाधीन पुल के पिलर की सेंट्रिंग गिरी: एक की मौत, दो मजदूरों के हाथ-पैर टूटे; निर्माण कार्य रोका गया - Jabalpur News

जबलपुर में पुल निर्माणाधीन हादसा, एक मजदूर की मौत, दो घायल

जबलपुर के ललपुर-न्यू भेड़ाघाट क्षेत्र में एनएचआई द्वारा निर्माणाधीन पुल पर रविवार रात बड़े हादसे हो गए। इस हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई और दो घायल हुए।

पिलर की सेंट्रिंग असंतुलित होकर गिरने से हादसा हुआ, जिसमें 35 वर्षीय मुर्सलेम एस की मौत हो गई। वह पश्चिम बंगाल के चर कृष्णापुर जिले का निवासी था। दो मजदूर घायल हुए और उन्हें उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया है।

घायलों की पहचान 22 वर्षीय रसल एस, चर कृष्णापुर खामेर, जिला मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल) और 21 वर्षीय राजेश्वर सिंह, पिता महेंद्र सिंह, निवासी छत्तीसगढ़ है। घटना के वक्त कुछ कर्मचारी और इंजीनियर मौके पर थे। जानकारी मिलते ही, एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृतलाल साहू और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे।

हादसे के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया है। घटना के वक्त एक तरफ वजन ज्यादा होने से पिलर की सेंट्रिंग असंतुलित होकर गिर गई, जिससे हादसा हुआ। पूरे मामले की जांच की जा रही है।
 
जबलपुर में पुल निर्माणाधीन हादसे से सबको गहरी आँखें डालकर देखना चाहिए, यह बहुत बड़ा विवाद तय करेगा। मजदूरों की जान जानबूझकर खतरे में न डाली जाए। इस तरह के हादसे रोकने के लिए सरकार और निर्माण प्रोजेक्ट्स को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। 🚧💔

पुल निर्माण में मजदूरों की सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, लेकिन क्या इस तरह की घटनाएं कभी भी रोकनी को मिलेगी? हमें भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए।

पूर्वी दिल्ली में एक ही तरह का हादसा हुआ था, जहाँ मजदूरों ने अपनी जान गंवाई थी। हमें ऐसे हादसों से बचने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। 🚨💥

पुल निर्माण का काम भारत में बहुत बड़ा है, लेकिन मजदूरों की जान हमेशा खतरे में रहती है। यह एक गंभीर समस्या है जिसे तुरंत हल नहीं किया जा सकता। 💔🚧

हमारे देश में ऐसे कई जगह हैं जहाँ मजदूरों को बुराई का सामना करना पड़ता है। हमें इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए एक साथ मिलकर काम करना चाहिए। 🙏💪

मजदूरों के अधिकारों और सुरक्षा पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। हमें मजदूरों की जान बचाने के लिए एक साथ मिलकर लड़ना चाहिए। 💔🚧

इस तरह के हादसे कभी भी रोकने के लिए, हमें सुरक्षा उपकरण पहनने और मजदूरों को सावधानी से काम करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। 🚧💪
 
जबलपुर के इस पुल निर्माण में घटने हुए तो बहुत बड़ा सवाल उठता है... कैसे ऐसा हादसा हुआ, जब पूरा समुदाय देखकर दर्द होता। मजदूरों की जान जोखिम में लाने से बिल्कुल भी सहज नहीं होना चाहिए। एनएचआई को यह जांचना जरूरी है कि पुल निर्माण में दुर्घटनाएं ऐसी न हों। तीन मजदूरों की जान गई, दो घायल हुए... ये तो बहुत बड़ा दुःख है, हमारे समाज का यही सवाल उठता है कि मजदूरों का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा।
 
आज की नई दुनिया तो कितनी खतरनाक है 🤯 पुल निर्माण पर्यट हुआ और एक मजदूर की जान गई, दो घायल हुए। मुझे लगता है कि यह हमारे विकास की दिशा में नहीं बढ़ रहा है, जब तक कि हम लोग इस तरह के हादसों से सीखते न हैं। पुल निर्माण में जान-माल की बाजार बन गया है और मजदूरों को कितनी मुश्किल में रखा जाता है। हमें एक दूसरे की मदद करनी चाहिए, यही हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है।
 
😕 यह बहुत दुखद है... मजदूरों को ऐसी स्थिति में डाला गया तो बिल्कुल नहीं चाहिए... पुल निर्माण में भी सुरक्षा सबसे पहली परवाह करनी चाहिए। मैंने हाल ही में खुद अपने दोस्त के पिता ने बताया था कि उनके भाई एक मजदूर हैं और वह बहुत सावधानी से काम करते हैं। यह जानकर मुझे बहुत दुख हुआ कि ऐसी गलती हो गई। 🤕
 
बेटियों को भी मजदूरी करने के लिए मजबूर किया जाता है तो यह अच्छा नहीं है, चाहे पुल बनाने या फिर किसी अन्य निर्माण कार्य में हो। दो बच्चों की भी घायल होने की बात सुनकर दिल में दुख होता है। ऐसे काम किए जाने पर दंडित करना चाहिए।
 
नहीं पता, यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हमेशा से ही प्रोजेक्ट डायरेक्टर्स और निर्माण कार्यों में होती रहती है... जब तक सब अच्छी-खासी नहीं हो जाती, तब तक कुछ भी नहीं बदलेगा। यह मजदूर मर गया तो किसी को बुरा नहीं हुआ, लेकिन मरने वाला कौन सा पिलर था? क्या किसी को पता था कि वह पिलर टूट जाएगा या नहीं? मैं समझता हूं कि निर्माण कार्यों में खतरे होते रहते हैं, लेकिन क्या हमें वास्तविकता से मुकाबला करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए? हमें यह सोचना चाहिए कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए हम क्या कर सकते हैं... 🤯
 
बिल्कुल सही निकला है एनएचआई द्वारा निर्माणाधीन पुल पर हाल ही में हुआ हादसा। यह जानकर शर्मिंदगी होती है कि 35 वर्षीय मुर्सलेम एस की मौत हो गई और दो मजदूर घायल हुए। यह तो बस एक निर्माण कार्य की अनियमितता का उदाहरण है।

अगर सरकार अपने प्रोजेक्ट्स पर नज़र रखने में सक्षम नहीं है तो फिर हमें सोच-समझकर यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या हमारे देश की राजधानी में इतने बड़े प्रोजेक्ट्स पर नज़र रखने वाले अधिकारी अपने नागरिकों की ज़िंदगी की सुरक्षा को लेकर सही तरीके से काम कर रहे हैं?
 
ਇਹ ਘਟਨਾ ਬਹੁਤ ਗੁੱਸੇ ਦੀ ਹੈ। ਅਰੇ ਕੋਈ ਮਜ਼ਦੂਰ ਆਪਣੀ ਜਿੰਦ ਵੇਚ ਨਹੀਂ ਦੇਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ। ਸੋਚੋ ਤਾਂ ਪਲੱਗ ਉਧਰ ਆਈਏ ਨਹੀਂ, ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਡੈਮ ਦੇ ਨਿਰਮਾਣ ਦੌਰਾਨ ਵੀ ਅੱਗੇ-ਪਛੜ੍ਹੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ।
 
मैं तो अभी भी उस प्लेस पर गया था जब हादसा हुआ था 🤯 दुर्भाग्य से वह मजदूर अपनी जान खो गई। मेरी बहन का भाई उस जगह पर मजदूरी कर रहा था। मैं उसकी नजदीकी परिवार का हूँ, मुझे तो बहुत डर लग रहा था जब उसने फोन किया और बताया कि वहां कुछ जानलेवा घटिया हुआ है। मैंने तो उसके पिता से भी बात की, वे बहुत चिंतित थे। उस मजदूर की मौत से हमें बहुत दुख हुआ, हमें आशा है कि जांच में सच्चाई निकल आएगी।
 
मुझे लगता है कि एनएचआई ने फिर से अपने निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा पहल को ध्यान में नहीं रखा। दो मजदूर घायल हुए और एक की मौत हो गई, यह बहुत बड़ी चिंताजनक घटना है। क्या एनएचआई ने अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के बारे में वास्तविक रूप से सोचा है? पिलर की सेंट्रिंग असंतुलित होकर गिरने से यह हादसा हुआ, यह बहुत बड़ी गड़बड़ी है। मुझे लगता है कि एनएचआई ने अपने वादों पर ध्यान नहीं दिया और इसकी बजट योजना पर भी कोई विचार नहीं किया। अब क्या होगा?
 
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