जयपुर लीटरेचर फेस्टिवल (JLF) में गांधी और सावरकर पर चर्चा हुई। संदर्भात जिन्ना के विचारों को भी उठाया गया।
शनिवार को जयपुर लेटरेचर फेस्टिवल का सेशन राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति की स्पीच के साथ शुरू हुआ। इसके बाद लेखक मार्कण्ड आर परांजपे ने कहा, जिन्ना को खिलाफत आंदोलन खलीफा के पद को बहाल करने के लिए किया गया था। गांधी ने इसलिए समर्थन किया कि वे हिंदू मुस्लिम एकता चाहते थे।
सावरकर ने इस बात का विरोध किया था। सावरकर ने गांधी को कहा, जिन पॉलिसी का आप प्रयोग कर रहे हैं। मुस्लिमों की तुष्टिकरण की नीति यह भारत का विभाजन करवाने की वजह बनेगी।
गौर गोपाल दास ने कहा, रिश्ते सबसे ज्यादा मायने रखते हैं, क्योंकि रिश्तों से ज्यादा जरूरी शायद कुछ भी नहीं होता। कब तक अकेले रहोगे? कोई तो चाहिए, जिससे अपनी कहानी शेयर कर सको। पैसा और सफल ही सब रह जाएगा।
असली तकलीफ तो जिंदगी से होती है, जबकि लोग मौत को बेवजह बदनाम करते हैं। हमारी जिंदगी में इस वक्त कोई न कोई ऐसा बोझ होता है, जो उसे अंदर से परेशान कर रहा होता है। सवाल यह है कि आज आप कौन-सा बोझ नीचे रखने को तैयार हैं।
आज लोग अपनी सेल्फी दुनिया को दिखाते हैं, लेकिन दिल की बात कहने के लिए किसी अपने की जरूरत होती है।
नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक कैलाश सत्यार्थी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कहा, मैंने आज तक किसी को नोबेल पुरस्कार पाने के लिए इतना क्रेजी होते हुए भी देखा। जो इसे पाने के लिए कुछ भी कर देते।
जेएलएफ में राज्यसभा सांसद और लेखिका सुधा मूर्ति ने अपनी मदरलैंड, मदर लेंग्वेज के बारे में बात की।
जेएलएफ के तीसरे दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
शनिवार को जयपुर लेटरेचर फेस्टिवल का सेशन राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति की स्पीच के साथ शुरू हुआ। इसके बाद लेखक मार्कण्ड आर परांजपे ने कहा, जिन्ना को खिलाफत आंदोलन खलीफा के पद को बहाल करने के लिए किया गया था। गांधी ने इसलिए समर्थन किया कि वे हिंदू मुस्लिम एकता चाहते थे।
सावरकर ने इस बात का विरोध किया था। सावरकर ने गांधी को कहा, जिन पॉलिसी का आप प्रयोग कर रहे हैं। मुस्लिमों की तुष्टिकरण की नीति यह भारत का विभाजन करवाने की वजह बनेगी।
गौर गोपाल दास ने कहा, रिश्ते सबसे ज्यादा मायने रखते हैं, क्योंकि रिश्तों से ज्यादा जरूरी शायद कुछ भी नहीं होता। कब तक अकेले रहोगे? कोई तो चाहिए, जिससे अपनी कहानी शेयर कर सको। पैसा और सफल ही सब रह जाएगा।
असली तकलीफ तो जिंदगी से होती है, जबकि लोग मौत को बेवजह बदनाम करते हैं। हमारी जिंदगी में इस वक्त कोई न कोई ऐसा बोझ होता है, जो उसे अंदर से परेशान कर रहा होता है। सवाल यह है कि आज आप कौन-सा बोझ नीचे रखने को तैयार हैं।
आज लोग अपनी सेल्फी दुनिया को दिखाते हैं, लेकिन दिल की बात कहने के लिए किसी अपने की जरूरत होती है।
नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक कैलाश सत्यार्थी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कहा, मैंने आज तक किसी को नोबेल पुरस्कार पाने के लिए इतना क्रेजी होते हुए भी देखा। जो इसे पाने के लिए कुछ भी कर देते।
जेएलएफ में राज्यसभा सांसद और लेखिका सुधा मूर्ति ने अपनी मदरलैंड, मदर लेंग्वेज के बारे में बात की।
जेएलएफ के तीसरे दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।