जम्मू-कश्मीर में LoC के पास पाकिस्तानी ड्रोन दिखा: सेना ने एंटी ड्रोन सिस्टम एक्टिव किया; 10 दिन में पांचवी घटना

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी ड्रोन का दिखाई देना: सेना ने जवाबी कार्रवाई की, 10 दिनों में पांचवीं घटना

पाकिस्तानी ड्रोन को लेकर जम्मू-कश्मीर में कई घटनाएं हुई हैं। इनमें से एक विवादास्पद घटना शाम 6.35 बजे राजौरी के तेरियाथ के खब्बर गांव में देखी गई थी। यहाँ सैनिकों ने फायरिंग कर ड्रोन को घायल कर दिया।

इस घटना के बाद भारतीय सेना ने अपने एंटी ड्रोन सिस्टम को सक्रिय किया। इसके बाद पाकिस्तानी ड्रोन पाकिस्तान की ओर लौट गया। इससे पहले 9 जनवरी को, इसी तरह की घटनाएं हुई थीं।

इससे पहले 11 जनवरी को भी जम्मू-कश्मीर के सांबा, राजौरी, और पुंछ में कई ड्रोन दिखाई दिए। इनमें से सबसे पहले 5 ड्रोन शाम करीब 6.35 बजे गनिया-कलसियां गांव के ऊपर देखे गए थे। इसके बाद मीडियम और लाइट मशीन गन से फायरिंग की।

इस घटना को देखते हुए लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर निगरानी बढ़ा दी गई है। ड्रोन से जुड़ी जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।

ऑपरेशन सिंदूर

7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था। इस अभियान में पाकिस्तानी और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकवादी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की गई।

इस ऑपरेशन के बाद भारत ने कहा है कि अगर पाकिस्तान आतंकी हमले या घुसपैठ की कोशिश करेगा, तो भारत जवाबी कार्रवाई में तैयार है।
 
नहीं तो यह ड्रोन चल रहे थे? पहले से हम जानते हैं कि पाकिस्तानी लोग ये बहुत आसानी से अपने देश से भारत तक आते हैं। वो एक घंटी में यहां पहुंच सकते हैं और फिर भी उनका जवाब हमें नहीं मिलता।

क्यों की हमें ऐसे ड्रोन की मदद चाहिए जो हमारी सेना की रक्षा कर सके। लेकिन ये पाकिस्तानी ड्रोन कितना उपयोगी हो सकते हैं? देखो, इस तरह के ड्रोन को हमारी निगरानी में रखने में बहुत समय लगता है और उसके बाद भी हमें उसके पीछे-पीछे चलना पड़ता है। तो फिर यह ड्रोन क्यों दिखाई देता है?
 
आज जम्मू-कश्मीर में फिर से पाकिस्तानी ड्रोन दिखाई दिए, यह एक बहुत बड़ा खतरा है 🚨। हमें सेना को बधाई देनी चाहिए जिसने जवाबी कार्रवाई में ड्रोन को घायल कर दिया। लेकिन यह घटनाएं हमें सोचती हैं कि क्या हम अपने पड़ोसी देशों के प्रति सहानुभूति नहीं भी रख सकते हैं? 🤔

अगर हमारे देश में सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए सेना को एंटी ड्रोन सिस्टम को सक्रिय करना पड़ता है, तो यह एक अच्छा समाधान है। लेकिन हमें अपने देश की आर्थिक और सामाजिक विकास पर भी ध्यान देना चाहिए। 📈

ऑपरेशन सिंदूर नामक इस अभियान में पाकिस्तानी आतंकवादी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की गई, यह एक बहुत बड़ा कदम है 🚀। हमें उम्मीद है कि इसे सफल माना जाएगा और पड़ोसी देशों के साथ शांति बनाए रखी जाएगी।
 
मुझे लगता है कि पाकिस्तानी ड्रोन से हमें चिंता हुई नहीं... 🤔 क्योंकि अगर वे इतनी बुद्धिमती से घुसपैठ कर रहे थे, तो फिर कैसे जानकर यह पता चलता कि हमें इसके लिए तैयार रहना चाहिए? 😅 और अगर वे ड्रोन के साथ आतंकवादियों को भी लेकर आ रहे हैं, तो फिर वहाँ क्या खास बात है जिससे हम इस तरह की घटनाओं से निपट सकें? 🤷‍♂️

कुछ लोग कह सकते हैं कि हमें जरूरी सुरक्षा उपाय करने चाहिए, लेकिन मेरा विचार है कि अगर हम इतनी ज्यादा सावधानी बरतने लगें, तो फिर हम इसके लिए खेलने वालों को देने का मौका नहीं देंगे। 🤷‍♂️ यह एक त्रुटि है कि हम इतना जोर से लड़ रहे हैं कि हम अपने खिलाफी भी लड़ रहे हैं। 💥
 
जम्मू-कश्मीर में ड्रोन के इस बढ़ते मामले ने तो सेना को खुलकर जवाब देने का मौका दिया है 🚀, लेकिन क्या यही सब समाधान नहीं होगा? पाकिस्तान से विरोध का एकमात्र तरीका निकलने वाला यह अभियान और भी बड़ा खतरा बन सकता है। इसके अलावा, हमें याद रखना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर में कोई भी घटना होने पर स्थानीय लोगों को सबसे पहले सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
 
मैं समझ नहीं पाया कि जब से पाकिस्तानी ड्रोन जम्मू-कश्मीर में दिखाई देने लगे, तब से भारतीय सेना को जवाबी कार्रवाई करने का क्या मौका मिल रहा है? पहले कोई बात नहीं कही, फिर सुराग मिलने पर तुरंत हमला कर दिया।
 
देखिए क्या हुआ पाकिस्तानी ड्रोन को मिल गया। सेना ने जल्दी से जवाबी कार्रवाई की। यह अच्छी बात है कि हमने अपने एंटी ड्रोन सिस्टम को सक्रिय कर लिया और पाकिस्तानी ड्रोन को वापस भेज दिया। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तानी आतंकवादी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की गई। यह एक अच्छा कदम है कि हमने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपनी तैयारी बढ़ा दी है।
 
नहीं जानता क्या आगे कैसे दिखता है यह लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर कोई और संदिग्ध गतिविधि होगी। पहले पाकिस्तानी ड्रोन पर जवाबी कार्रवाई में भारत ने अपनी ताकत दिखाई, अब आगे क्या होगा यह देखने को मिलेगा 🤔
 
अगर जैसे ही ड्रोन जम्मू-कश्मीर में दिखते हैं तो सेना तुरंत जवाबी कार्रवाई कर लेती है और पाकिस्तानी ड्रोन घायल कर दिया जाता है। लेकिन अगर हम इस बारे में गहराई से बात करते हैं तो यह सवाल उठता है कि ये इतनी आसानी से घायल कैसे होते हैं? और फिर भी सेना ने जवाबी कार्रवाई में सफलता पायी है।

ऑपरेशन सिंदूर में एयर स्ट्राइक करने से पहले तो बहुत सोच-विचार किया गया होगा। लेकिन आखिर में जरूरत पड़ी तो फिलहाल कुछ सवाल अभी भी बाकी हैं।
 
बातचीत में एक विवादास्पद मुद्दा है। पाकिस्तानी ड्रोन के दिखाई देने से जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बढ़ गई है, लेकिन यह सवाल उठता है कि ड्रोन क्यों और कैसे लाए गए हैं? 🤔

चार्ट से देखें, पाकिस्तानी ड्रोन की घटनाएं निम्नलिखित हैं:

• 9 जनवरी को: जम्मू-कश्मीर में पहली बार ड्रोन दिखाई दिया।
• 11 जनवरी को: सांबा, राजौरी, और पुंछ में कई ड्रोन दिखाई दिए।
• 5 जनवरी को: गनिया-कलसियां गांव के ऊपर ड्रोन दिखाई दिए।

इन घटनाओं से यह पता चलता है कि पाकिस्तानी ड्रोन का उद्देश्य क्या है, लेकिन अभी तक इसका जवाब नहीं मिला है।

इसलिए, ऑपरेशन सिंदूर और निगरानी बढ़ाने की कोशिशें पाकिस्तानी ड्रोन को रोकने का एक तरीका हो सकती हैं। 📈
 
पाकिस्तानी ड्रोन की इस घटना ने फिर से जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है 🚨। यह घटनाएं हमें यह बताती हैं कि पाकिस्तान भारत की सीमाओं तक अपना व्यापार नहीं छोड़ सकता। इसके अलावा, यह साबित करता है कि पाकिस्तान आतंकवाद और तerrorism का समर्थक है, जो हमारे लिए एक गंभीर चुनौती है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी सुरक्षा को मजबूत बनाया है और अगर पाकिस्तान फिर से ऐसी घटनाएं करेगा, तो हमें जवाबी कार्रवाई में तैयार रहना चाहिए। लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हमारी सुरक्षा केवल सैन्य बलों तक ही नहीं है, बल्कि हमारे नागरिकों और सरकार को भी इसकी जिम्मेदारी है।
 
मुझे लगता है कि लाइन ऑफ कंट्रोल पर निगरानी बढ़ाना एक अच्छी दिशा में कदम है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर के इस प्रदेश में किसी भी तरह की अस्थिरता को रोका जाए। लेकिन इसके लिए हमें साथ में एक अच्छी प्लानिंग करनी चाहिए और सभी एजेंसियों को एक होकर काम करना चाहिए।

अब अगर पाकिस्तान ड्रोन फिर से दिखाई देता है, तो हमें अपने एंटी-ड्रोन सिस्टम को बेहतर बनाना चाहिए। और साथ ही हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि लाइन ऑफ कंट्रोल पर निगरानी बढ़ाने से पहले हमारी तैयारी पूरी हो।

तो ये मेरी राय है, क्या आपसे सहमति है? 🤔
 
बात क्यों होती है, ड्रोन से हमारी रक्षा करने की कोशिश करते हैं लेकिन दूसरी ओर पाकिस्तान भी अपनी सीमा पर सुरक्षा करने के लिए ड्रोन का उपयोग कर रहा है। यह एक चक्कर की तरह चलने लगा है और कोई समाधान नहीं मिलता। इसके अलावा, हमारे एंटी ड्रोन सिस्टम कितनी प्रभावी हैं, यह भी देखना जरूरी है।
 
ये तो कितनी बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी ड्रोन की देखी गई घटना पर बहुत सारी चिंताएं हैं। लेकिन फायरिंग कर ड्रोन को घायल करने से पहले क्या योजना बनाई गई थी, इसकी जांच करनी चाहिए। और पाकिस्तानी ड्रोन की देखी गई घटना में अलर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों ने कहा है कि अगर वो आगे भारतीय सीमा तक पहुंचते हैं, तो बहुत बड़ा खतरा बन जाएगा।
 
जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी ड्रोन की संभावना बहुत बढ़ गई है 🤯। अगर हमने पहले 9 जनवरी को यहीं जैसी घटनाएं देखी होतीं, तो शायद भारत ने पहले से ही जवाबी कार्रवाई में तैयारी कर ली होगी। लेकिन फिर भी, पाकिस्तानी ड्रोन को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है।

क्या पाकिस्तान के पास ऐसी तकनीकें हैं जिससे वे अपने ड्रोन्स को जम्मू-कश्मीर से दूर भेज सकते हैं? और अगर हां, तो हमें इसका इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?

मुझे लगता है कि हमें इस मुद्दे पर अधिक जागरूकता बढ़ानी चाहिए। हमें यह समझने की जरूरत है कि पाकिस्तानी ड्रोन से हमारी सुरक्षा और नागरिकों की जान क्यों खतरे में है।

ऑपरेशन सिंदूर से पहले, हमें इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। लेकिन अब हमें पता चल गया है कि यह एक बड़ा ऑपरेशन था। और अगर हमने इसे देखा, तो यही समझ आएगा कि हमारे सैनिकों ने अपनी चेतावनी भरी कार्रवाई में तैयारी कर ली होगी।

लेकिन फिर भी, इस तरह की घटनाएं होना जारी रहता है। और हमें यह समझने की जरूरत है कि इसका निवारण कैसे किया जाए।
 
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