ई-एफआईआर का प्रोसेस सीखने से लोगों को एफआईआर दर्ज करने में मदद मिल सकती है।
राज्य के अलग-अलग पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें।
सब्सक्राइब करके आप हमारे चैनल को अपना डेस्कटॉप नेविगेटर में शामिल कर सकते हैं, गूगल क्रोम ब्राउजर में, यूट्यूब पर और अंड्रॉइड एंड आयओएस दोनों वाली मोबाइल फ़ोन के लिए भी।
सही राज्य और पोर्टल चुनें।
रजिस्ट्रेशन करते हुए मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी से जुड़ना जरूरी है।
फॉर्म भरते समय पहचान पत्र देना होता है, जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट।
वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें।
अगर नए यूजर हैं तो नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल डालकर रजिस्ट्रेशन करें। मोबाइल पर आए ओटीपी से वेरिफिकेशन पूरा करें। पहले से रजिस्ट्रेशन है तो सीधे लॉगिन करें।
वेबसाइट पर 'नागरिक सेवाएं' या 'ई-एफआईआर' सेक्शन में जाएं।
थाने जाने की जरूरत नहीं है, बस ऑनलाइन फॉर्म भरकर सबमिट कर देना है।
सबमिट करते ही आपको एक शिकायत संख्या (रिफरेंस नंबर) मिलेगी।
शिकायत संख्या या रिफरेंस नंबर को अपने पास रखें, क्योंकि पुलिस आपको बताएगी कि आपने कैसे शिकायत दर्ज की है।
कई मामलों में इससे जुड़े डॉक्यूमेंट्स भी अपलोड करने होते हैं, जैसे वाहन चोरी में आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट), गुम हुए सामान का बिल या पहचान से जुड़ा प्रमाण।
ई-एफआईआर को ट्रैक करने के लिए अपने राज्य की पुलिस वेबसाइट पर शिकायत संख्या या रिफरेंस नंबर देखें।
इस बात की सुनिश्चितता करें कि आपके पास मामलों में भिन्नताएं हैं, जैसे चोरी, गुमशुदगी, छोटे अपराध, व्यक्तिगत हमला, घरेलू हिंसा और अन्य जैसे।
कुछ राज्यों में केवल चोरी या गुमशुदगी से जुड़े मामलों को ऑनलाइन दर्ज किया जाता है, जबकि बड़े अपराध के मामलों में पुलिस स्टेशन पर व्यक्तिगत रूप से शिकायत दर्ज करना होगा।
ई-एफआईआर दर्ज करते समय पहचान पत्र देना होता है, जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट।
दूसरी स्थिति में, अगर पुलिस को पर्याप्त सबूत नहीं मिलते, मामला गलत साबित हो जाता है, शिकायत वापस ले ली जाती है या गुमशुदगी/चोरी का मामला सुलझ जाता है।
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कई मामलों में इससे जुड़े डॉक्यूमेंट्स भी अपलोड करने होते हैं, जैसे वाहन चोरी में आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट), गुम हुए सामान का बिल या पहचान से जुड़ा प्रमाण।
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कुछ राज्यों में केवल चोरी या गुमशुदगी से जुड़े मामलों को ऑनलाइन दर्ज किया जाता है, जबकि बड़े अपराध के मामलों में पुलिस स्टेशन पर व्यक्तिगत रूप से शिकायत दर्ज करना होगा।
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दूसरी स्थिति में, अगर पुलिस को पर्याप्त सबूत नहीं मिलते, मामला गलत साबित हो जाता है, शिकायत वापस ले ली जाती है या गुमशुदगी/चोरी का मामला सुलझ जाता है।