जरूरत की खबर- घर बैठे दर्ज कर सकते हैं ई–एफआईआर: जानें इसका पूरा प्रोसेस, जरूरी डॉक्यूमेंट्स, ट्रैक और फॉलोअप की प्रक्रिया

ई-एफआईआर का प्रोसेस सीखने से लोगों को एफआईआर दर्ज करने में मदद मिल सकती है।

राज्य के अलग-अलग पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें।

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सही राज्य और पोर्टल चुनें।

रजिस्ट्रेशन करते हुए मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी से जुड़ना जरूरी है।

फॉर्म भरते समय पहचान पत्र देना होता है, जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट।

वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें।

अगर नए यूजर हैं तो नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल डालकर रजिस्ट्रेशन करें। मोबाइल पर आए ओटीपी से वेरिफिकेशन पूरा करें। पहले से रजिस्ट्रेशन है तो सीधे लॉगिन करें।

वेबसाइट पर 'नागरिक सेवाएं' या 'ई-एफआईआर' सेक्शन में जाएं।

थाने जाने की जरूरत नहीं है, बस ऑनलाइन फॉर्म भरकर सबमिट कर देना है।

सबमिट करते ही आपको एक शिकायत संख्या (रिफरेंस नंबर) मिलेगी।

शिकायत संख्या या रिफरेंस नंबर को अपने पास रखें, क्योंकि पुलिस आपको बताएगी कि आपने कैसे शिकायत दर्ज की है।

कई मामलों में इससे जुड़े डॉक्यूमेंट्स भी अपलोड करने होते हैं, जैसे वाहन चोरी में आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट), गुम हुए सामान का बिल या पहचान से जुड़ा प्रमाण।

ई-एफआईआर को ट्रैक करने के लिए अपने राज्य की पुलिस वेबसाइट पर शिकायत संख्या या रिफरेंस नंबर देखें।

इस बात की सुनिश्चितता करें कि आपके पास मामलों में भिन्नताएं हैं, जैसे चोरी, गुमशुदगी, छोटे अपराध, व्यक्तिगत हमला, घरेलू हिंसा और अन्य जैसे।

कुछ राज्यों में केवल चोरी या गुमशुदगी से जुड़े मामलों को ऑनलाइन दर्ज किया जाता है, जबकि बड़े अपराध के मामलों में पुलिस स्टेशन पर व्यक्तिगत रूप से शिकायत दर्ज करना होगा।

ई-एफआईआर दर्ज करते समय पहचान पत्र देना होता है, जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट।

दूसरी स्थिति में, अगर पुलिस को पर्याप्त सबूत नहीं मिलते, मामला गलत साबित हो जाता है, शिकायत वापस ले ली जाती है या गुमशुदगी/चोरी का मामला सुलझ जाता है।
 
नहीं तो ऐसा लगेगा जब हम सब अपने घरों से थाने जाकर शिकायत दर्ज करते रहते हैं और वहां फिर देर से बैठकर शिकायत दर्ज करने की जरूरत पड़ती है। लेकिन अगर हमें ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर देते हैं तो सभी मामलों में सीधे संपर्क मिलता है और सबमिट करते ही शिकायत संख्या मिल जाती है।
 
मैंने अभी देखा कि फिल्म 'कुछ कुछ होता है' सारा रानी देवी की सबसे अच्छी फिल्म है, उनकी एक्शन और डांस करने की क्षमता तो नहीं जानती, लेकिन उनकी अभिनय क्षमता तो बिल्कुल चमत्कार की तरह है... मैंने सुना है कि यह फिल्म अभी भी हिट है, 25 साल बाद भी। मैंने अभी-अभी एक पुरानी प्रतिक्रिया पढ़ी थी, जहां लोग बताते थे कि रानी देवी ने इस फिल्म के लिए अपने शरीर को बहुत से दर्द से गुजरना पड़ा था। मैंने सोचा, क्या यह सच है? और फिर मुझे याद आया कि इन दिनों एक पुरानी पार्टी थी, जहां रानी देवी की इसी फिल्म को बात करते थे। मैंने उनसे पूछा, क्या वे इस फिल्म को इतनी पसंद करते हैं, और उन्होंने बताया कि यह फिल्म उनकी सबसे अच्छी फिल्म है... 🤩
 
अगर ऑनलाइन एफआईआर भरते समय हमें पर्याप्त सबूत निकले, तो शायद इन्हीं वाली समस्याएं कम हो जाएंगी। प्रशासन को जरूर माहित कराना चाहिए कि कितने लोग इस प्रक्रिया से बच रहे हैं और उन्हें सही तरीके से समझाने की जरूरत है।
 
ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद भी कुछ बीमारियां हो सकती हैं तो सब सबमिट करना ही क्यों जरूरी है? नंबर पर आने वाला ओटीपी मिल जाने से पहले रजिस्ट्रेशन नहीं करना चाहिए।
 
दिल्ली की एक लड़की ने अपने पिता के मुर्दे को खोज कर दिया, उनकी खोज 15 साल लगी। वह ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की बात नहीं करती, लेकिन अगर वह ऐसा करती, तो मामले को जल्दी से हल हो जाता।
 
ऐसा लगता है कि सरकार ने ई-एफआईआर प्रोसेस करने के लिए बहुत अच्छा कदम उठाया है... यह तो राज्य की अलग-अलग पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं और फिर ऑनलाइन सबमिट करके शिकायत दर्ज कर सकते हैं। बहुत आसान! 🤔
 
अरे दोस्त, ई-एफआईआर प्रोसेस सीखने से हमारे देश में अपराध को कम करने में मदद मिल सकती है, और लोगों को एफआईआर दर्ज करने में आसानी होगी। यह अच्छा है कि राज्य अलग-अलग पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकें, ताकि हमारे पास यह सुविधा हो।
 
ई-एफआईआर का इस्तेमाल करने वालों को तय करना होगा कि वे अपने शिकायत को पूरी तरह से सुरक्षित रखेंगे या नहीं। अगर वे इसमें खुद को जोड़ेंगे, तो यह एक मुश्किल स्थिति बन सकती है। फिर भी, यह एक अच्छा विचार है कि लोग अपनी शिकायत दर्ज कर सकें, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को खुलकर बात करना होगा।

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मामले शिकायत दर्ज करने में राज्य सरकार को बहुत मदद की जरूरत है, लेकिन ये ई-एफआईआर प्रोसेस अच्छी तरह से नहीं चल रहा। कई बार मुझे पता चलता है कि शिकायत दर्ज करने में समस्या आती है और पुलिस ने पर्याप्त सबूत नहीं दिखाए। इसलिए, सरकार को फिर से इस प्रोसेस को सुधारने पर ध्यान देने की जरूरत है।
 
आजकल सब कुछ ऑनलाइन होने लगा है... ई-एफआईआर भी ऐसा ही तो लोग आसानी से शिकायत दर्ज कर सकते हैं और पुलिस को अपनी समस्या बता सकते हैं। लेकिन क्या यह सब सही है? एक बार रजिस्ट्रेशन कर लेंगे तो फिर क्या? क्या वास्तव में सुधरेगा या बस पेपरवर्क में जुड़ गए रहेंगे? और यह तो ऑनलाइन सबमिट करके ही शिकायत दर्ज की जा सकती है, लेकिन अगर पहले से ही रजिस्ट्रेशन नहीं कर लिया है तो कहां से शुरू करें? बस पोर्टल पर जाकर और सबकुछ भरकर... लगता है कि यह सब एक बड़ा मजाक है।
 
अरे वाह, ई-एफआईआर दर्ज करने का तो डट फिंगर शुरू कर दिया... लेकिन क्या ये पूरा तरीका ही सही है? मैंने भी जानबूझकर कोई गलती न करूं, तबीयत बिल्कुल ठीक है और सब वेबसाइट पर से ही दर्ज करना चाहता हूँ... लेकिन क्या पूरा शिकायत दर्ज करने का तरीका ऑनलाइन ही है? और क्या अगर कोई गलती कर देता है, तो फिर से सबमिट करना पड़ेगा, यार? ऐसे में बेवकूफ बनने की भी कोई जरूरत नहीं...
 
मैं ई-एफआईआर नंबर पर रोज़मर्रा के काम से भी नहीं तालु हूँ, लेकिन ये वेबसाइट बहुत अच्छी लग रही है 🤩। ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने में इतनी आसानी है, मुझे लगता है कि यह देश को बेहतर बनाने में मदद करेगी। कोई भी समस्या हो, तो बस ऑनलाइन फॉर्म भरकर सबमिट कर देना है। यह तो सीधा और आसान है 🙌। मुझे लगता है कि सरकार ने अच्छा काम किया है, ई-एफआईआर पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना बहुत ही सरल है।
 
क्या तो ई-एफआईआर का इस्तेमाल करना बहुत आसान हो गया है? लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपने राज्यों की पुलिस वेबसाइट पर जाकर देखकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम सही तरीके से शिकायत दर्ज कर रहे हैं। कभी-कभी मामले गलत समझ लिए जाते हैं और उसी कारण हमें अपनी शिकायत को दोबारा दर्ज करने पर मजबूर किया जाता है।
 
बोलते समय सरल संरचना चाहिए, तो फिर सार्थक होता है, यह तो समझने का तरीका है कि शिकायत दर्ज करने में मदद मिल सकती है... ⚖️

ई-एफआईआर पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें, और फिर सब्सक्राइब करके अपने डेस्कटॉप नेविगेटर को शामिल करें। ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर से जुड़ना जरूरी है... 📲

सरल फॉर्म भरने से लोगों को मदद मिल सकती है, यह तो समझने का तरीका है कि रजिस्ट्रेशन करते समय पहचान पत्र देना होता है। आधार कार्ड या वोटर आईडी जैसे... 📝

ई-एफआईआर पोर्टल पर जाकर 'नागरिक सेवाएं' या 'ई-एफआईआर' सेक्शन में जाना, यह तो सरल है... 👍
 
ई-एफआईआर की बात कर रही हैं तो यह बहुत आसान है, बस पोर्टल पर जाकर और रजिस्ट्रेशन करने की, फिर शिकायत भरकर सबमिट करने की जरूरत नहीं है । लेकिन अगर नए यूजर हैं तो ओटीपी से वेरिफिकेशन कर लेना चाहिए, ताकि शिकायत दर्ज होने पर पुलिस को उसकी जानकारी मिल सके। और जब भी शिकायत दर्ज होती है तो वहां एक रिफरेंस नंबर या शिकायत संख्या मिलती है, जिससे वह मामलों को ट्रैक कर सकता है।
 
अरे भाई, तो यह ई-एफआईआर प्रोसेस सीखने का बार-बार बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन फिर भी तुम लोगों को समझाने की जरूरत है कि कैसे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने में मदद मिल सकती है। यह बहुत आसान है, बस राज्य का चुनना और पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर लेना। फिर सीधे ऑनलाइन फॉर्म भरकर सबमिट कर देना है, इस तरह कोई थाने नहीं जाना पड़ता और कोई भी विशेष पहचान पत्र नहीं चाहिए। बस अपनी शिकायत दर्ज कर लें और उसका रिफरेंस नंबर सुरक्षित रखें, फिर जब पुलिस से संपर्क हो तो उन्हें बताएं कि आपकी शिकायत क्या है। और सबसे बड़ी बात यह है कि अगर आपकी शिकायत में कोई गलतियाँ हैं तो उसे समझाएं। 🙌
 
क्या यह एक सच्चा निवासी की बात है? मैंने देखा है कि लोग अपने राज्य के पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करते हैं, लेकिन फिर भी तयार करने में विफल रहते हैं। जैसे कुछ साल पहले मेरा दोस्त ने शिकायत दर्ज करानी थी, लेकिन वह फॉर्म भरने में असफल रहा। अब वह अपने रजिस्ट्रेशन की शिकायत नहीं कर पाए। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सबकुछ सही तरीके से पूरा किया जाए, ताकि हमें नुकसान न पहुंचे।
 
बस, ऑनलाइन फॉर्म भरकर सबमिट करने की बात तो अच्छी है, लेकिन यह भी जरूरी है कि आप अपनी पहचान पत्र दिखाएं, अरे वो तो सुरक्षा के लिए है। और अगर आपके पास सबूत नहीं हैं, तो फिर बहुत से मामले खत्म हो जाते हैं। यह तो हमेशा सुनिश्चित रहें कि आप सही राज्य और पोर्टल चुनें, और अपने डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें। 📝😊
 
ई-एफआईआर दर्ज करने का तरीका समझने से पहले हमें यह समझना चाहिए कि शिकायत दर्ज करने से अधिकारी को क्या मिलता है? 🤔 अगर हम अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं तो अधिकारी को बुराई होने वाले व्यक्ति की पहचान मिलती है। लेकिन अगर हमें बिल्कुल भी खेद नहीं होता तो यहां तक कि अपने दुश्मन से पूछना पड़ सकता है कि उसने मुझसे क्या किया। यह तो एक बड़ा सबक है कि हमारी शिकायत दर्ज करने से अधिकारी को न्याय मिलता है, लेकिन अगर हम पूरी सच्चाई नहीं बताते तो यह सब फेल हो जाता है। 🚫
 
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