गले में दर्द या खराश का अनुभव जरूर किया होगा। कई बार इसकी वजह से कुछ भी निगलने में परेशानी होती है और बोलना तक मुश्किल हो जाता है। अक्सर हम इसे मामूली खराश समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार इसके पीछे टॉन्सिलाइटिस की समस्या हो सकती है।
टॉन्सिल हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम का एक अहम हिस्सा होते हैं। ये बाहर से आने वाले बैक्टीरिया-वायरस को रोकने का काम करते हैं। लेकिन जब टॉन्सिल्स में इन्फेक्शन हो जाता है तो इनमें इंफ्लेमेशन और दर्द जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। इसे ही टॉन्सिलाइटिस कहते हैं।
अगर समय पर इलाज न हो तो आगे चलकर टॉन्सिलाइटिस गंभीर परेशानियों का कारण बन सकता है। हालांकि सही जानकारी और समय रहते सही कदम उठाने से इससे जल्द राहत मिल सकती है।
टॉन्सिलाइटिस के लक्षण क्या होते हैं?
टॉन्सिलाइटिस में गले और टॉन्सिल से जुड़ी कुछ समस्याएं होती हैं, जो हमारी रोजमर्रा की लाइफ को प्रभावित करती हैं।
टॉन्सिलाइटिस से बचने के लिए किन बातों का ख्याल रखना जरूरी है?
टॉन्सिलाइटिस से पूरी तरह बचना मुश्किल है, क्योंकि यह काफी संक्रामक होता है। हालांकि सही साफ-सफाई और कुछ सावधानियां अपनाकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
टॉन्सिलाइटिस का इलाज क्या है?
टॉन्सिलाइटिस का इलाज टॉन्सिलाइटिस के कारण पर निर्भर करता है। अगर इसका कारण वायरस है, तो ज्यादातर मामलों में आराम करने, लिक्विड डाइट लेने और पेन किलर लेने से यह अपने आप ठीक हो जाता है। अगर इसका कारण बैक्टीरिया है तो डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। इसका कोर्स पूरा करना बहुत जरूरी है।
टॉन्सिलाइटिस कितने दिन में ठीक हो जाता है?
टॉन्सिलितिस आमतौर पर 3 से 4 दिन में ठीक होने लगता है। लगभग एक हफ्ते में पूरी तरह ठीक हो जाता है।
टॉन्सिलाइटिस का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं?
इसके लिए डॉक्टर सबसे पहले गले की जांच करते हैं और लक्षणों के बारे में पूछते हैं। संक्रमण वायरल है या बैक्टीरियल, इसका पता लगाने के लिए गले से कॉटन स्वैब लेकर टेस्ट किया जाता है।
टॉन्सिल हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम का एक अहम हिस्सा होते हैं। ये बाहर से आने वाले बैक्टीरिया-वायरस को रोकने का काम करते हैं। लेकिन जब टॉन्सिल्स में इन्फेक्शन हो जाता है तो इनमें इंफ्लेमेशन और दर्द जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। इसे ही टॉन्सिलाइटिस कहते हैं।
अगर समय पर इलाज न हो तो आगे चलकर टॉन्सिलाइटिस गंभीर परेशानियों का कारण बन सकता है। हालांकि सही जानकारी और समय रहते सही कदम उठाने से इससे जल्द राहत मिल सकती है।
टॉन्सिलाइटिस के लक्षण क्या होते हैं?
टॉन्सिलाइटिस में गले और टॉन्सिल से जुड़ी कुछ समस्याएं होती हैं, जो हमारी रोजमर्रा की लाइफ को प्रभावित करती हैं।
टॉन्सिलाइटिस से बचने के लिए किन बातों का ख्याल रखना जरूरी है?
टॉन्सिलाइटिस से पूरी तरह बचना मुश्किल है, क्योंकि यह काफी संक्रामक होता है। हालांकि सही साफ-सफाई और कुछ सावधानियां अपनाकर इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
टॉन्सिलाइटिस का इलाज क्या है?
टॉन्सिलाइटिस का इलाज टॉन्सिलाइटिस के कारण पर निर्भर करता है। अगर इसका कारण वायरस है, तो ज्यादातर मामलों में आराम करने, लिक्विड डाइट लेने और पेन किलर लेने से यह अपने आप ठीक हो जाता है। अगर इसका कारण बैक्टीरिया है तो डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं। इसका कोर्स पूरा करना बहुत जरूरी है।
टॉन्सिलाइटिस कितने दिन में ठीक हो जाता है?
टॉन्सिलितिस आमतौर पर 3 से 4 दिन में ठीक होने लगता है। लगभग एक हफ्ते में पूरी तरह ठीक हो जाता है।
टॉन्सिलाइटिस का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं?
इसके लिए डॉक्टर सबसे पहले गले की जांच करते हैं और लक्षणों के बारे में पूछते हैं। संक्रमण वायरल है या बैक्टीरियल, इसका पता लगाने के लिए गले से कॉटन स्वैब लेकर टेस्ट किया जाता है।