भारत में 10 करोड़ लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित है, जिसके कारण कई गंभीर बीमारियां बढ़ती हैं। यह स्लीप डिसऑर्डर सिर्फ खर्राटों की समस्या नहीं है, बल्कि एक बड़ा हेल्थ रिस्क है।
अब तक स्लीप एपनिया का इलाज लाइफस्टाइल में बदलाव और कुछ खास मशीनों के जरिए किया जाता है। ऐसे में अगर इसे दवा से इलाज करने की व्यवस्था हो जाए तो यह मेडिकल साइंस में एक बड़ी क्रांति होगी।
भारत में इस ओरल पिल की दवा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसकी अप्रूवल अमेरिका में FDA पर निर्भर है। अगर इसे FDA से मंजूरी मिलती है तो यह पहली ऐसी दवा होगी, जो खासतौर पर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के इलाज में इस्तेमाल की जाएगी।
इस दवा ने फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में स्लीप एपनिया की गंभीरता में लगभग 47% तक कमी दिखाई है। यह दवा स्लीप एपनिया को कंट्रोल करने में लगभग आधे तक असरदार साबित हुई है, जो मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इस दवा ने गले की मांसपेशियों को एक्टिव रखकर सांस नली को बंद होने से बचाएगी। इससे सांस रुकने की समस्या कम होगी। साथ ही ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होगी और स्लीप एपनिया की गंभीरता भी घटेगी।
इस दवा में कोई बड़ा या खतरनाक साइड इफेक्ट नहीं पाए गए हैं। फिलहाल कोई बड़ा या खतरनाक साइड इफेक्ट सामने नहीं आया है। हालांकि FDA की मंजूरी और लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
इस दवा स्लीप एपनिया को ठीक करने में कारगर होगी। इससे स्लीप एपनिया के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। इस दवा भारत में कब तक उपलब्ध नहीं होगी, जब तक इसे अमेरिका या अन्य प्रमुख देशों में मंजूरी नहीं मिलती है।
अब तक स्लीप एपनिया का इलाज लाइफस्टाइल में बदलाव और कुछ खास मशीनों के जरिए किया जाता है। ऐसे में अगर इसे दवा से इलाज करने की व्यवस्था हो जाए तो यह मेडिकल साइंस में एक बड़ी क्रांति होगी।
भारत में इस ओरल पिल की दवा फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसकी अप्रूवल अमेरिका में FDA पर निर्भर है। अगर इसे FDA से मंजूरी मिलती है तो यह पहली ऐसी दवा होगी, जो खासतौर पर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के इलाज में इस्तेमाल की जाएगी।
इस दवा ने फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में स्लीप एपनिया की गंभीरता में लगभग 47% तक कमी दिखाई है। यह दवा स्लीप एपनिया को कंट्रोल करने में लगभग आधे तक असरदार साबित हुई है, जो मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इस दवा ने गले की मांसपेशियों को एक्टिव रखकर सांस नली को बंद होने से बचाएगी। इससे सांस रुकने की समस्या कम होगी। साथ ही ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होगी और स्लीप एपनिया की गंभीरता भी घटेगी।
इस दवा में कोई बड़ा या खतरनाक साइड इफेक्ट नहीं पाए गए हैं। फिलहाल कोई बड़ा या खतरनाक साइड इफेक्ट सामने नहीं आया है। हालांकि FDA की मंजूरी और लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
इस दवा स्लीप एपनिया को ठीक करने में कारगर होगी। इससे स्लीप एपनिया के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। इस दवा भारत में कब तक उपलब्ध नहीं होगी, जब तक इसे अमेरिका या अन्य प्रमुख देशों में मंजूरी नहीं मिलती है।