जरूरत की खबर- जल्द आ सकती है स्लीप-एपनिया की दवा: मिलेगी खर्राटों से निजात, जानें कैसे करेगी काम, भारत में कब तक मिल सकती है

भारत में करीब 10.4 करोड़ लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) से पीड़ित हैं। इस बीमारी को अक्सर लोग सिर्फ खर्राटों की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह बीमारी धीरे-धीरे हार्ट, ब्रेन और मेटाबॉलिज्म समेत ओवरऑल हेल्थ को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।

स्लीप एपनिया के लिए अभी तक कोई डेडिकेटेड दवा नहीं है। आमतौर पर इसका इलाज लाइफस्टाइल में बदलाव और कुछ खास मशीनों के जरिए किया जाता है।

अमेरिका में पिछले कुछ सालों से इस पर रिसर्च चल रही थी। वहां के डॉक्टरों ने एक ओरल पिल बनाई है, जो थर्ड फेज क्लिनिकल ट्रायल के बाद अप्रूवल के इंतजार में है।

इस दवा को फिलहाल अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की मंजूरी का इंतजार है। अगर इसे अप्रूवल मिल जाती है तो यह पहली ऐसी दवा होगी, जो स्लीप एपनिया के इलाज के लिए होगी।

इस दवा से सांस नली को बंद होने से बचेगी और सांस रुकने की समस्या कम होगी। साथ ही ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होगी और स्लीप एपनिया की गंभीरता भी घटेगी।

मेडिकल साइंस और डॉक्टर्स इस दवा को स्लीप एपनिया के इलाज के लिए एक नई उम्मीद मान रहे हैं। यह पिल उन मरीजों के लिए खासतौर पर फायदेमंद हो सकती है, जो CPAP मशीन पर निर्भर हैं।

कुछ महीनों का इंतजार करना पड़ सकता है इस दवा के बारे में। हालांकि यह दवा कारगर साबित होने पर स्लीप एपनिया के मरीजों को इससे बड़ी राहत मिलेगी।
 
स्लीप एपनिया की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ रही है देश में… लोग खर्राटे लगने पर ही इस बात पर ध्यान देते हैं, लेकिन इससे उनके हार्ट, ब्रेन और अन्य हिस्सों को गंभीर नुकसान पहुंचता है 🤕। यह तो बहुत ही खतरनाक बीमारी है। अगर अमेरिकी देश में एक दवा बन जाती है जिससे सांस नली को बंद नहीं होने देती, तो यह स्लीप एपनिया के मरीजों के लिए बहुत बड़ा राहत का काम करेगी। 🌟 अगर जल्दी से इसकी मंजूरी हो जाती है और यह दवा बाजार में आती है, तो इससे कई लोगों की जिंदगी में बदलाव आएगा। 🤞
 
मुझे लगने लगा है कि इस दवा को अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को पहले से ही ठेका दिया गया है। क्योंकि अगर यह अप्रूवल मिल जाती है तो वे तुरंत इसका टेस्ट करेंगे और इसे बाजार में लाने की कोशिश करेंगे।

मैंने भी सोचा है कि अमेरिका की दवा कंपनियां अपनी खुद की दवाएं बनाने के लिए दुनिया भर को घूम रही हैं। यह दवा की अप्रूवल के इंतजार में उन्हें थोड़ी रुकावट मिलना अच्छा नहीं लग रहा है।

मुझे लगता है कि इस दवा से निकलने वाली कमाई सिर्फ अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और उनके खिलाड़ीों तक ही पहुंचेगी।
 
ਇਹ ਖੁਸ਼ੀ ਦੀ ਬਾਤ ਨਹੀਂ है! ਉੱਚ ਵਰਗ ਵਾਲੇ ਪੈਸਾ ਕਰਕੇ ਮਿਲੀ ਇਸ ਡਰੁਗ ਦੀ ਖ਼बਰਦਾਰੀ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦੀ। ਅੱਜ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ, ਇਸ ਡਰੁਗ ਦਾ ਆਪਣੇ ਭਾਈ ਨੂੰ ਕਿਉਂ ਚੀਜ਼ ਕਹੋ?

ਪਰ, ਫਿਰ ਵੀ, ਮੈਨੂੰ ਸਲਾਮੀਆਂ ਦੇ ਤੁਰੰਤ! ਜੇ ਕੋਈ ਡਰੱਗ कੰਪਨੀ ਆਪਣੀ ਵਿਸ਼ਾਲ ਬੈਜ਼, ਟਾਕਸ, ਪ੍ਰੋਫਿਟ ਡਰੱਗ ਅਤੇ ਦੁਨੀਆ ਭਰ ਦੇ ਵਿਸ਼ਵਾਸਯੋਗ ਮਾਡਲਜ਼ ਪਾ ਕੇ, ਅਤੇ ਅਮੇਰੀਕਾ ਦੀ ਫੁੱਟ-ओਨ-मਾਈਂ-ਸਿਟ ਗਰੈਜ਼ ਬ੍ਰਿਚ, ਤਾਂ ਇਹ ਡਰੱਗ ਕਿਵੇਂ ਨਾ ਮਿਲ ਸਕਦੀ?

ਅਖ਼ਬਾਰਾਂ ਆਪਣੀ ਜ਼ਬਰਦसਤੀ ਨਹੀਂ ਗਵਾਉਂਦੇ। 10.4 करੋੜ ਲੋਕ, ਭਾਰਤ ਮਿਸ਼ਨ ਚੈਪਟਰ ਖੁਦ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦੇ।

ਅਜਿਹਾ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਬ੍ਰਾਡ ਸੌਫਟ, ਮੈਂ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਆਖ਼ਦੀ ਸੀ ਕਿ ਇਹ ਡਰੱਗ ਅਮਰੀਕਾ ਵਿੱਚ ਹੀ ਨਹੀਂ ਤਾਂ ਜਿੰਦ ਆ ਸਕਦੀ।
 
ऐसा लगता है कि हमें अपनी सोचने की शैली में बदलाव करने की जरूरत है। लोग यह नहीं समझते कि खर्राटों की समस्या तो बस सतह पर ही निकलती है, फिर भी इसका असर दिल, मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों पर पड़ता है। हमें इस बीमारी को लेकर अधिक जागरूक होने की जरूरत है और अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार रहना चाहिए। यह नई दवा निकलने पर संभव है कि हमें इसकी राहत मिलेगी, लेकिन हमें पहले स्वयं अपने जीवन में बदलाव लाने की जरूरत है। 🤔
 
दवा बनने से पहले बहुत सोच-विचार करना पड़ेगा। अगर यह दवा स्लीप एपनिया के इलाज में फायदेमंद है तो जरूर अच्छी जानेगी, लेकिन इससे पहले इस पर बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि इस नए ऑरल पिल की खोज बहुत अच्छी निकल रही है। अगर यह दवा लोगों को स्लीप एपनिया से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकती है, तो यह एक बहुत बड़ी बात है!

मैंने अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों से पूछा है कि क्या उन्होंने कभी स्लीप एपनिया से समस्या की, और अगर हाँ तो उनकी कहानी बहुत रोमांचक थी।

लेकिन अभी भी लोग सिर्फ खर्राटों की समस्या मानते हैं और इसकी गंभीरता नहीं समझते। यह बहुत जरूरी है कि हम इस बीमारी को लेकर जागरूक रहें और इसके प्रभावों को समझें।

अब अगर यह दवा स्वीकृत हो जाती है, तो मुझे लगता है कि यह कई लोगों की जिंदगी में एक सकारात्मक बदलाव लाने की संभावना है।
 
जैसे ही स्लीप एपनिया के विशेषज्ञों ने बताया है, भारत में 10.4 करोड़ लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं और यह दुर्भाग्य से है कि इसे अक्सर खर्राटों की समस्या मानकर नजरअंदाज किया जाता है। इसका मतलब है कि लोग इस बीमारी को गंभीरता नहीं देते हैं और इससे उनके हार्ट, ब्रेन और मेटाबॉलिज्म पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जो बहुत बड़ी समस्या है।
 
मुझे लगता है कि इस दुनिया में जिंदगी बहुत ही जल्दबाजी में लगी हुई है, लोग तो सिर्फ-सिर्फ अपनी नौकरी, पैसे, और दोस्तों की बातचीत में फसे रहते हैं, इसीलिए उनका ध्यान अपने शारीरिक स्वास्थ्य पर नहीं रहता।

अगर हम अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, तो हमारी जिंदगी में बहुत ही सकारात्मक बदलाव आएंगे। यह जरूरी है कि लोगों को अपने शरीर की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए और डॉक्टर से परामर्श करना।

इसलिए, जैसे-जैसे हमारे देश में इस बीमारी को समझने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है, तो यह जरूरी है कि हम अपने शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने लगें।
 
OSA की समस्या बहुत ज्यादा है और इसका इलाज करना मुश्किल है, लेकिन यह दवा निकलने से अच्छी खबर है 🌟! मेडिकल साइंस को भी अच्छा लग रहा है #OSA समाधान। अब हमारे देश में भी इस बीमारी का इलाज करने के लिए और अच्छा उपचार मिल सकता है 🙏, जिससे लोगों को राहत मिलेगी। अगर यह दवा कारगर साबित होती है, तो CPAP मशीन पर निर्भर मरीजों के लिए यह एक अच्छा समाधान हो सकता है #CPAP।
 
मुझे लगता है कि इस बात को बहुत कम ध्यान दिया जाता है, लेकिन स्लीप एपनिया भारत में बहुत आम समस्या है। मैंने अपने परिवार और दोस्तों में कई लोगों को यही समस्या का सामना करने वाले हुए हैं।

यह बात सच है कि इसे अक्सर खर्राटों की समस्या के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसका इलाज करना बहुत मुश्किल होता है। मैंने सुना है कि अमेरिका में अब एक नई दवा बनाई गई है जो इस समस्या के इलाज में मदद कर सकती है।

मुझे लगता है कि अगर यह दवा बिल्कुल सही साबित होती है, तो इससे बहुत से लोगों को राहत मिलेगी। पिछले समय मैंने अपने दादाजी को इस समस्या से गंभीरता से जूझते हुए देखा।

अब तो हमें कुछ महीनों का इंतजार करना पड़ेगा, लेकिन अगर यह दवाई अच्छी साबित होती है तो इससे बहुत भलाई मिलेगी।
 
अरे यार, तो इंसान जैसे कई लोग भारत में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से पीड़ित हैं... और हमारे देश के डॉक्टरों को अभी तक इसके इलाज के लिए कोई अच्छी दवाई नहीं बनाने में सफल रहे। तो क्या थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है, और फिर एक ओरल पिल निकालना, जो सांस नली को बंद होने से बचाएगी। मेडिकल साइंस के लोगों का मानना है कि यह पिल CPAP मशीन पर निर्भर मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकती है। लेकिन अगर यह दवाई तैयार हो जाती है, तो स्लीप एपनिया के मरीजों को इससे बड़ी राहत मिलेगी। शायद...
 
ये बात तो सच है की इस बीमारी की गंभीरता बहुत ज्यादा होती है। अगर हम सिर्फ खर्राटों की समस्या मानकर देखते हैं तो और खासतौर पर दिल और मस्तिष्क के लिए यह बहुत खतरनाक है . आमतौर पर इस बीमारी का इलाज लाइफस्टाइल में बदलाव करना होता है।
 
मुझे लगता है कि मुंबई के स्ट्रीट फूड वेक्टर्स बहुत ही रोमांचक हैं 🤩। जिस दिन पनीर पुरी के खिलाड़ी को बेसर टोस्ट पर बनाए गए टमाटर चटख का आनंद लेना मिलेगा, उस दिन मुझे जाने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन रोज मरीजों की संख्या बढ़ रही है और डॉक्टर को नई दवा ढूंढने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यह अच्छी बात मानी जाएगी, लेकिन अगर इसे फिर से विकसित करना पड़े तो बहुत समय लग सकता है 🕰️
 
नहीं, तो क्या! इस दवा को पहले से लेकर अब तक अमेरिका में 10-15 साल लग गए हैं और फिर भी ये दवा तैयार नहीं हुई। यह बहुत देर लग रही है और मरीजों को अभी भी खर्राटों की समस्या के साथ जीना पड़ता है। मुझे लगता है कि दवा की बनावट लोगों की उम्मीदों से कहीं कम हो गई होगी।

अगर यह दवा वास्तव में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के इलाज के लिए एक हल नहीं है तो फिर भी इस पर बहुत पैसा और समय लग रहा है। हमारे देश में भी इस बीमारी के इलाज के लिए उपचार विकल्पों की कमी है, यहां तक कि CPAP मशीन के लिए भी सस्ते और आसान विकल्प नहीं हैं।
 
OSA की समस्या तो हर किसी का दोस्त है 🤯, लेकिन लोग इसे खासतौर पर नहीं मानते हैं और खर्राटों की बात करके दूर भाग जाते हैं। लेकिन यह बहुत गंभीर समस्या है, जो हार्ट, ब्रेन और मेटाबॉलिज्म सबको प्रभावित करती है... 🤖

मेडिकल साइंस अच्छी होती है 😊, अमेरिका के डॉक्टरों ने ऐसी दवा बनाई है, जो SLP के इलाज में बहुत फायदेमंद हो सकती है। अगर इसे FDA से मंजूरी मिल जाती है तो यह एक नई उम्मीद होगी... 💪
 
ऐसी कुछ दवाईयाँ नहीं बनती, जो सिर्फ खर्राटों की समस्या ही न हो, बल्कि हमारे हर हिस्से को प्रभावित कर दे। तो फिर स्लीप एपनिया वाले लोगों के लिए इस दवा की बात करने में जानकर खुश हूँ।

पहली दवाईयाँ बन गईं, जो कि केवल खर्राटों को कम कर देतीं। अब तो हमें ऐसी दवाईयाँ बननी चाहिएं, जो हमारा सारा शरीर स्वस्थ रखे।

जैसे कि यह दवाईयाँ है, जिससे हमारी सांस नली खुलती है और हमें सांस फूलने की बात नहीं होती। यह तो एक बहुत ही अच्छा संदेश है।
 
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