सीड साइक्लिंग क्या है? यह एक डाइट बेस्ड वेलनेस ट्रेंड है, जिसमें मेंस्ट्रुअल साइकिल के अलग-अलग फेज में चार तरह के बीज खाए जाते हैं। इसे खासतौर पर वे महिलाएं अपनाती हैं, जो बिना दवा के हॉर्मोनल पैटर्न को सपोर्ट करना चाहती हैं।
सीड साइक्लिंग में पीरियड्स के पहले दिन से लेकर 14वें दिन तक रोज एक-एक टेबलस्पून पिसे हुए अलसी और कद्दू के बीज खाए जाते हैं। इनमें मौजूद पोषक तत्व शरीर में एक्स्ट्रा एस्ट्रोजन को कंट्रोल करने और कमी होने पर उसे सपोर्ट करने में मदद करते हैं, जिससे ओव्यूलेशन सही समय पर हो सकता है।
इसके बाद साइकिल के दूसरे हिस्से यानी ल्यूटियल फेज में, अगले पीरियड के पहले दिन तक रोज एक-एक टेबलस्पून पिसे हुए सूरजमुखी और तिल के बीज खाए जाते हैं। इनमें मौजूद पोषक तत्व प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो पीरियड्स को समय पर लाने और पीरियड से पहले होने वाली समस्याओं जैसे पेट दर्द, मूड स्विंग और ब्रेस्ट पेन को कम करने में मदद करते हैं।
सीड साइक्लिंग का सही तरीका है इसके लिए हर दिन एक-एक टेबलस्पून पिसे हुए अलसी और कद्दू के बीज खाने की सलाह दी जाती है, फिर अगले दिन सूरजमुखी और तिल के बीज खाने की।
इसे साइक्लिंग की तरह अपनाएं, लेकिन इसका नियमित रूप से पालन करना जरूरी नहीं है। यह डाइट सपोर्टिंग न्यूट्रिशन की तरह ही अपनाया जा सकता है।
इस बात पर रिसर्च हुई है कि सीड साइक्लिंग वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, लेकिन एक स्टडी में पता चला है कि इसे अपनाकर PCOS से जुड़ा हॉर्मोनल बैलेंस और फर्टिलिटी आउटकम बेहतर हो सकता है।
सीड साइक्लिंग में पीरियड्स के पहले दिन से लेकर 14वें दिन तक रोज एक-एक टेबलस्पून पिसे हुए अलसी और कद्दू के बीज खाए जाते हैं। इनमें मौजूद पोषक तत्व शरीर में एक्स्ट्रा एस्ट्रोजन को कंट्रोल करने और कमी होने पर उसे सपोर्ट करने में मदद करते हैं, जिससे ओव्यूलेशन सही समय पर हो सकता है।
इसके बाद साइकिल के दूसरे हिस्से यानी ल्यूटियल फेज में, अगले पीरियड के पहले दिन तक रोज एक-एक टेबलस्पून पिसे हुए सूरजमुखी और तिल के बीज खाए जाते हैं। इनमें मौजूद पोषक तत्व प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो पीरियड्स को समय पर लाने और पीरियड से पहले होने वाली समस्याओं जैसे पेट दर्द, मूड स्विंग और ब्रेस्ट पेन को कम करने में मदद करते हैं।
सीड साइक्लिंग का सही तरीका है इसके लिए हर दिन एक-एक टेबलस्पून पिसे हुए अलसी और कद्दू के बीज खाने की सलाह दी जाती है, फिर अगले दिन सूरजमुखी और तिल के बीज खाने की।
इसे साइक्लिंग की तरह अपनाएं, लेकिन इसका नियमित रूप से पालन करना जरूरी नहीं है। यह डाइट सपोर्टिंग न्यूट्रिशन की तरह ही अपनाया जा सकता है।
इस बात पर रिसर्च हुई है कि सीड साइक्लिंग वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, लेकिन एक स्टडी में पता चला है कि इसे अपनाकर PCOS से जुड़ा हॉर्मोनल बैलेंस और फर्टिलिटी आउटकम बेहतर हो सकता है।