सीड साइक्लिंग एक डाइट बेस्ड वेलनेस ट्रेंड है, जिसमें मेंस्ट्रुअल साइकिल के अलग-अलग फेज में चार तरह के बीज खाए जाते हैं। इसे खासतौर पर वे महिलाएं अपनाती हैं, जो बिना दवा के हॉर्मोनल पैटर्न को सपोर्ट करना चाहती हैं।
सीड साइक्लिंग में अलसी और कद्दू के बीज पहले 13-14 दिनों तक रोजाना खाए जाते हैं, जिसे फॉलिक्यूलर फेज कहा जाता है। इसके बाद अगले पीरियड के पहले दिन से लेकर 14वें दिन तक, यानी जब ओव्यूलेशन की तैयारी होती है, तब रोज अलसी और कद्दू के बीज खाए जाते हैं। इनमें मौजूद पोषक तत्व शरीर में एक्स्ट्रा एस्ट्रोजन को कंट्रोल करने और कमी होने पर उसे सपोर्ट करने में मदद करते हैं, जिससे ओव्यूलेशन सही समय पर हो सकता है।
15वें दिन से अगले पीरियड आने तक तिल और सूरजमुखी के बीज खाए जाते हैं। ये प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो पीरियड्स को समय पर लाने और पीरियड से पहले होने वाली समस्याओं जैसे पेट दर्द, मूड स्विंग और ब्रेस्ट पेन को कम करने में मदद करते हैं।
सीड साइक्लिंग सिर्फ पीरियड्स वाली महिलाओं तक सीमित नहीं है। सही तरीके से अपनाई जाए तो यह पुरुषों और उन महिलाओं के लिए भी फायदेमंद हो सकती है, जिनका पीरियड साइकिल इश्यू नहीं है।
सीड साइक्लिंग में अलसी के बीज में लिग्नान और फाइबर होते हैं, जो एस्ट्रोजन मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करते हैं। कद्दू के बीज जिंक का अच्छा स्रोत हैं, जो प्रोजेस्टेरोन प्रोडक्शन में जरूरी माना जाता है। सूरजमुखी के बीज में विटामिन-E होता है, जो हॉर्मोन रेगुलेशन में भूमिका निभाता है। तिल के बीज में लिग्नान और हेल्दी फैट्स होते हैं, जो हॉर्मोनल बैलेंस को सपोर्ट कर सकते हैं।
सीड साइक्लिंग का सही तरीका यह है कि पहले 13-14 दिनों में रोजाना एक-एक टेबलस्पून पिसे हुए अलसी और कद्दू के बीज खाए जाते हैं। इसके बाद अगले पीरियड के पहले दिन से लेकर 14वें दिन तक, यानी जब ओव्यूलेशन की तैयारी होती है, तब रोज अलसी और कद्दू के बीज खाए जाते हैं। फिर अगली साइकिल के साथ यही प्रक्रिया दोहराई जाती है।
हालांकि शोधकर्ता यह साफ कहते हैं कि इसे इलाज के विकल्प नहीं, बल्कि सपोर्टिंग अप्रोच के तौर पर देखना चाहिए।
सीड साइक्लिंग में अलसी और कद्दू के बीज पहले 13-14 दिनों तक रोजाना खाए जाते हैं, जिसे फॉलिक्यूलर फेज कहा जाता है। इसके बाद अगले पीरियड के पहले दिन से लेकर 14वें दिन तक, यानी जब ओव्यूलेशन की तैयारी होती है, तब रोज अलसी और कद्दू के बीज खाए जाते हैं। इनमें मौजूद पोषक तत्व शरीर में एक्स्ट्रा एस्ट्रोजन को कंट्रोल करने और कमी होने पर उसे सपोर्ट करने में मदद करते हैं, जिससे ओव्यूलेशन सही समय पर हो सकता है।
15वें दिन से अगले पीरियड आने तक तिल और सूरजमुखी के बीज खाए जाते हैं। ये प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन को सपोर्ट करते हैं, जो पीरियड्स को समय पर लाने और पीरियड से पहले होने वाली समस्याओं जैसे पेट दर्द, मूड स्विंग और ब्रेस्ट पेन को कम करने में मदद करते हैं।
सीड साइक्लिंग सिर्फ पीरियड्स वाली महिलाओं तक सीमित नहीं है। सही तरीके से अपनाई जाए तो यह पुरुषों और उन महिलाओं के लिए भी फायदेमंद हो सकती है, जिनका पीरियड साइकिल इश्यू नहीं है।
सीड साइक्लिंग में अलसी के बीज में लिग्नान और फाइबर होते हैं, जो एस्ट्रोजन मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करते हैं। कद्दू के बीज जिंक का अच्छा स्रोत हैं, जो प्रोजेस्टेरोन प्रोडक्शन में जरूरी माना जाता है। सूरजमुखी के बीज में विटामिन-E होता है, जो हॉर्मोन रेगुलेशन में भूमिका निभाता है। तिल के बीज में लिग्नान और हेल्दी फैट्स होते हैं, जो हॉर्मोनल बैलेंस को सपोर्ट कर सकते हैं।
सीड साइक्लिंग का सही तरीका यह है कि पहले 13-14 दिनों में रोजाना एक-एक टेबलस्पून पिसे हुए अलसी और कद्दू के बीज खाए जाते हैं। इसके बाद अगले पीरियड के पहले दिन से लेकर 14वें दिन तक, यानी जब ओव्यूलेशन की तैयारी होती है, तब रोज अलसी और कद्दू के बीज खाए जाते हैं। फिर अगली साइकिल के साथ यही प्रक्रिया दोहराई जाती है।
हालांकि शोधकर्ता यह साफ कहते हैं कि इसे इलाज के विकल्प नहीं, बल्कि सपोर्टिंग अप्रोच के तौर पर देखना चाहिए।