जरूरत की खबर- नेस्ले के बेबी फॉर्मूला में टॉक्सिन्स: कहीं ये आपके शिशु को बीमार न कर दे, खरीदने से पहले ध्यान रखें ये बातें

नेस्ले के बेबी फॉर्मूला में टॉक्सिन्स: कहीं ये आपके शिशु को बीमार न कर दे, खरीदने से पहले ध्यान रखें ये बातें।


बेबी फॉर्मूला मिल्क अभी सिर्फ 15 दिन का है। बार-बार रो रहा है, रात में ठीक से सो नहीं पा रहा। सबको लगता है कि शायद मां के दूध से उसका पेट नहीं भर रहा। ऐसे में तुरंत सुझाव आता है कि फॉर्मूला मिल्क पिला देते हैं। बच्चा शांत हो जाएगा, अच्छी नींद आएगी। आज शिशु को फॉर्मूला मिल्क पिलाना काफी कॉमन हो गया है।


लेकिन क्या ये फॉर्मूला आपके शिशु के लिए सुरक्षित है? हाल ही में ग्लोबल फूड कंपनी नेस्ले ने कुछ इन्फेंट फॉर्मूला प्रोडक्ट्स को ग्लोबल मार्केट से वापस लिया है, क्योंकि उसमें एक दुर्लभ टॉक्सिन सेरुलाइड होने की आशंका जताई गई।


इसीलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि-

फॉर्मूला मिल्क शिशु के लिए कितना सुरक्षित है?

फॉर्मूला मिल्क खरीदते समय लेबल पर क्या देखना चाहिए?

फॉर्मूला मिल्क देने से पहले पेरेंट्स को किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।


बेबी फॉर्मूला मिल्क या इंफेंट फॉर्मूला मिल 12 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए फैक्ट्री में तैयार किया गया फूड प्रोडक्ट होता है। इसे मां के दूध के विकल्प के रूप में या उसके साथ सप्लीमेंट की तरह दिया जाता है। यह पाउडर या लिक्विड रूप में उपलब्ध होता है।


इसमें बच्चे की सही बढ़त के लिए जरूरी प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। साथ ही इसमें विटामिन और मिनरल्स भी मिलाए जाते हैं। ये पोषक तत्व बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करते हैं। फॉर्मूला मिल्क पाउडर, कंसन्ट्रेट या रेडी-टू-यूज लिक्विड फॉर्म में मिलता है।


शिशु को फॉर्मूला मिल्क कब और क्यों देते हैं?


फॉर्मूला मिल्क खासतौर पर तब दिया जाता है, जब मां का दूध उपलब्ध न हो। कई बार मां का दूध पर्याप्त नहीं होता। कुछ मेडिकल कंडीशंस में बच्चे को ब्रेस्ट मिल्क नहीं दिया जा सकता। प्रीमेच्योर या कम वजन के शिशुओं को अतिरिक्त न्यूट्रिशन की जरूरत होती है। ऐसे में डॉक्टर फॉर्मूला मिल्क की सलाह देते हैं। कामकाजी मांओं के लिए हर समय स्तनपान कराना संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में बच्चे के न्यूट्रिशन के लिए फॉर्मूला मिल्क एक विकल्प बनता है।


फॉर्मूला मिल्क शिशु के लिए सेफ है?


हां, फॉर्मूला मिल्क बच्चों के लिए सेफ माना जाता है, अगर इसे सही तरीके से और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दिया जाए। फॉर्मूला तय मानकों के तहत बनाया जाता है और इसमें शिशु की उम्र के हिसाब से जरूरी पोषक तत्व होते हैं। लेकिन इसे तैयार करते समय साफ-सफाई बहुत जरूरी होती है।


हाल ही में फॉर्मूला मिल्क में कौन से टॉक्सिन्स मिले हैं और वह बच्चे की सेहत के लिए कैसे खतरनाक हैं?


हाल ही में कुछ बेबी फॉर्मूला मिल्क में सेरुलाइड नाम का टॉक्सिन मिलने की आशंका सामने आई है। यह टॉक्सिन बैसिलस सेरेस नाम के बैक्टीरिया की कुछ किस्मों से बनता है। सेरुलाइड एक फूड पॉइजनिंग टॉक्सिन है, जो बच्चों के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे उल्टी, दस्त, पेट दर्द जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। छोटे शिशुओं में यह डिहाइड्रेशन और कमजोरी का कारण भी बन सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में फॉर्मूला मिल्क को तुरंत रिकॉल किया जाता है और इस्तेमाल से रोका जाता है।


बेबी फॉर्मूला सुरक्षित है या नहीं, ये कैसे पता करेंगे?


बेबी फॉर्मूला सुरक्षित है या नहीं, यह जानने के लिए सबसे पहले पैकिंग को ध्यान से देखना जरूरी है। हमेशा एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और सील ठीक से बंद होने की जांच करें। अगर डिब्बा फूला हुआ हो, सील टूटी हो या पाउडर की गंध अजीब लगे, तो उसे बिल्कुल इस्तेमाल न करें।


साथ ही, कंपनी या हेल्थ अथॉरिटी की ओर से जारी किसी रिकॉल या चेतावनी की जानकारी भी जरूर देखें। अगर फॉर्मूला देने के बाद बच्चे को उल्टी, दस्त, पेट दर्द या असामान्य सुस्ती दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।


बेबी फॉर्मूला के लेबल पर लिखे किन शब्दों पर गौर करना चाहिए?


बेबी फॉर्मूला खरीदते समय लेबल में इंग्रीडिएंट लिस्ट जरूर चेक करें। इसमें ध्यान दें कि कार्बोहाइड्रेट के लिए लैक्टोज, प्रोटीन के लिए व्हे या केसिन, और दिमाग व आंखों के विकास के लिए DHA/ARA लिखा हो। एक्स्ट्रा शुगर, कॉर्न सिरप सॉलिड्स या पाम ऑयल से बचना बेहतर होता है। इसके साथ ही न्यूट्रिशन पैनल, एक्सपायरी डेट, बनाने के निर्देश और सबसे जरूरी FSSAI लाइसेंस नंबर जरूर जांचें क्योंकि भारत में बिना FSSAI लाइसेंस वाला कोई भी बेबी फूड बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता है।


बेबी फॉर्मूला के देने से पहले पेरेंट्स को किन बातों का ख्याल रखना चाहिए?


बेबी फॉर्मूला देने से पहले पेरेंट्स को हाथ साबुन से धोएं। फॉर्मूला तैयार करने से पहले हाथ हमेशा अच्छी तरह धोएं। गंदे हाथों से फॉर्मूला बनाना बच्चे के लिए संक्रमण का कारण बन सकता है। इसलिए साबुन और गर्म पानी से हाथ कम–से–कम 20 सेकंड तक अच्छे से साफ करें।


फीडिंग बोतल उबालें


बोतल, निप्पल और अन्य फीडिंग इक्विपमेंट को गर्म और साफ पानी से अच्छी तरह धोएं। बोतल उबालने से ई.कोलाई, साल्मोनेला जैसे जर्म्स नष्ट हो जाते हैं। ये जर्म्स दस्त और इंफेक्शन का कारण बन सकते हैं।


फॉर्मूला उबले पानी से बनाएं


फॉर्मूला दूध बनाने में उबला और ठंडा किया हुआ पानी इस्तेमाल करें। उबला पानी फॉर्मूला पाउडर को सुरक्षित रूप से घोलने में मदद करता है। साथ ही, माइक्रोबियल कंटैमिनेशन का खतरा घटाता है।


फॉर्मूला माइक्रोवेव में गर्म न करें


फॉर्मूला को कभी माइक्रोवेव में गर्म न करें। माइक्रोवेव में फॉर्मूला अनियमित रूप से गर्म होता है और हॉटस्पॉट से बच्चे के मुंह में जलन हो सकती है। बोतल को कुछ मिनट गर्म पानी के बाउल में रखकर कमरे के तापमान तक लाएं।


जूठा फॉर्मूला फ्रिज में न रखें


बच्चा जब बोतल से फॉर्मूला पीता है, तो उसके मुंह के बैक्टीरिया दूध में पहुंच जाते हैं। फ्रिज में रखने पर भी ये बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं। दोबारा पिलाने पर यही बैक्टीरिया शिशु के पेट में इंफेक्शन, उल्टी या दस्त का कारण बन सकते हैं।


पीने के बाद बच जाए तो फेंक दें


फॉर्मूला दूध बैक्टीरिया के लिए अच्छा माध्यम होता है, खासकर जब वह कमरे के तापमान पर या पीने के बाद बचा हो। समय के साथ इसमें हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं। शिशु का इम्यून सिस्टम कमजोर होने के कारण यह उसके लिए गंभीर जोखिम बन सकता है।


फ्रेश फॉर्मूला फ्रिज में रख सकते हैं


जो फॉर्मूला बिल्कुल नया बना हो और जिसे बच्चे ने अभी पिया न हो, उसे साफ और ढंके हुए कंटेनर में फ्रिज में रखा जा सकता है। ठंडा तापमान बैक्टीरिया की बढ़त को धीमा कर देता है, जिससे दूध कुछ समय तक सुरक्षित रहता है। आमतौर पर इसे 24 घंटे के भीतर इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।


पैकेट पर लिखे निर्देश ध्यान से पढ़ें


पैकेट पर दिए निर्देश के अनुसार पानी और पाउडर का सही अनुपात मिलाएं। ज्यादा पानी डालने से पोषण कमजोर होता है और ज्यादा पाउडर देने से डिहाइड्रेशन या पेट की परेशानी हो सकती है। इसलिए निर्देशों का सख्ती से पालन करना बहुत जरूरी है।
 
मुझे लगता है कि मिल्क फॉर्मूला खरीदते समय सबसे पहले एक्सपायरी डेट और बैच नंबर चेक करना ज़रूरी है। अगर इन्हें सही देखा नहीं तो शायद टॉक्सिन्स मिल जाएंगे।
 
अरे, तुम्हें पता है नहीं कि बेबी फॉर्मूला कितना खतरनाक हो सकता है? पहले तो मैंने भी सोचा था कि यह तो हमेशा दूध का विकल्प है, लेकिन अब जानकर दिल भी खराब हुआ है। नेस्ले जैसी कंपनियों ने ग्लोबल मार्केट से कुछ इन्फेंट फॉर्मूला प्रोडक्ट्स वापस लेनी है क्योंकि उनमें टॉक्सिन्स मिले थे। यह तो बहुत खतरनाक है, बच्चे की सेहत पर इसका असर पड़ सकता है।

तो अगर तुम्हारा बेबी फॉर्मूला खरीदने जा रहे हो, तो ध्यान रखें कि लेबल पर इंग्रीडिएंट लिस्ट जरूर देखें। इसमें ध्यान दें कि कार्बोहाइड्रेट के लिए लैक्टोज, प्रोटीन के लिए व्हे या केसिन, और दिमाग व आंखों के विकास के लिए DHA/ARA लिखा हो। एक्स्ट्रा शुगर, कॉर्न सिरप सॉलिड्स या पाम ऑयल से बचना बेहतर होता है।

इसके अलावा, फॉर्मूला देने से पहले पेरेंट्स को हाथ साबुन से धोना चाहिए। फीडिंग बोतल उबालें और फॉर्मूला उबले पानी से बनाएं। माइक्रोवेव में फॉर्मूला गर्म न करें, और जूठा फॉर्मूला फ्रिज में नहीं रखें।
 
🤝 मैंने भी अपने बच्चे को बेबी फॉर्मूला देने से पहले बहुत सावधानी से निर्णय लिया, चाहे वह खरीदने से पहले पैकिंग की जांच करना हो, या देने से पहले अच्छी तरह साफ हाथों से बनाएं।

लेकिन आज मुझे बहुत गुस्सा हुआ जब मैंने पढ़ा कि नेस्ले के बेबी फॉर्मूला में टॉक्सिन्स मिल सकते हैं, और बच्चों को इससे खतरनाक हो सकता है। यह तो बहुत भयावह है... हमारे बच्चों की सेहत सबसे जरूरी चीज़ है, और इसकी सुरक्षा केवल हमें मिली ही होगी।

इसलिए, अगर आपको नेस्ले के बेबी फॉर्मूला खरीदने की सोच रहे हैं, तो मैं आपको सलाह दूंगा कि पैकिंग को ध्यान से देखें और सुनिश्चित करें कि यह सुरक्षित है। और अगर आपको इसके बारे में कोई चिंता है, तो डॉक्टर से परामर्श लें।

बच्चों की सेहत हमेशा सबसे पहले होनी चाहिए, और इसकी सुरक्षा केवल हमारी जिम्मेदारी है।
 
Wow, बेबी फॉर्मूला में टॉक्सिन्स: यह जानकारी तो बहुत जरूरी है 🤔। अगर बच्चे को फॉर्मूला देने से पहले पेरेंट्स सही तरीके से जानकारी लेते हैं और अपनी बातचीत करते हैं, तो शायद यह समस्या हल हो जाएगी।
 
अगर फॉर्मूला मिल्क खरीदते समय लेबल पर निर्देशों को ध्यान से पढ़ने की बात तो ठीक है, लेकिन यह भी जरूरी है कि पेरेंट्स अपने बच्चों को दूध मिलाएं। मैंने कभी भी अपने बच्चे को फॉर्मूला नहीं दिया, और वह स्वस्थ और ऊर्जावान है।
 
बेबी फॉर्मूला खरीदते समय सबसे पहले बोतल और पाउडर की गुणवत्ता देखें। अगर डिब्बे पर लेबल पर निश्चित जानकारी नहीं है तो यह सुनिश्चित करें कि ये वास्तव में आपके बच्चे को फायदा कर रहे हैं।
 
अगर फॉर्मूला मिल्क खरीदने जा रहे हैं तो सबसे पहले एक्सपायरी डेट और बैच नंबर चेक करें। अगर ये बढ़ गए हों तो इस्तेमाल न करें 🚫
 
मैंने कुछ और खोजा है... जिस फॉर्मूला मिल्क का नेस्ले ने कुछ टॉक्सिन्स मिलने की आशंका पर रिकॉल किया है, वहां भी सेरुलाइड नामक एक अन्य टॉक्सिन दिखाई देता है। यह तो जरूरी नहीं है कि ये दोनों अलग-अलग बैक्टीरिया से बनते हैं लेकिन फिर भी पैरेंट्स को इन टॉक्सिन्स के बारे में सावधानी बरतनी चाहिए। और फिर तो यह सवाल उठتا है कि फॉर्मूला मिल्क कैसे तैयार किया जाता है? क्या कोई प्राकृतिक तरीका होता है या इसके लिए विज्ञान-तंत्र की जरूरत है?
 
मैं तुम्हारी चिंताओं को समझता हूँ। तुम्हारे बच्चे को फॉर्मूला मिल्क देने से पहले कई बातों पर विचार करना जरूरी है। तुम्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पैकेट पर निर्देश अच्छी तरह से पढ़े जाएं और सभी आवश्यक पोषक तत्व शामिल हैं।

मैं समझता हूँ कि बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ खाना देना माता-पिताओं की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। तुम्हें अपने बच्चे की जरूरतों को समझना चाहिए और उनके लिए सुरक्षित विकल्प चुनना चाहिए।

तुम्हारे शिशु की सेहत के बारे में हमेशा सोचें। अगर तुम्हें लगता है कि कुछ गलत है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
 
बेबी फॉर्मूला खरीदने से पहले सबसे जरूरी बात यह है कि उसका लेबल अच्छी तरह से जांचें। पैकेजिंग पर इंग्रेडिएंट्स की सूची देखें और सुनिश्चित करें कि इसमें सब कुछ है जो आपके बच्चे के लिए जरूरी है। इसके अलावा, एक्सपायरी डेट और बनाने के निर्देशों की भी जांच करें। बेबी फॉर्मूला खरीदने से पहले हमेशा पैरेंट्स को यह सोचना चाहिए कि बच्चे की उम्र और जरूरतों के अनुसार कौन सा फॉर्मूला सबसे अच्छा होगा।
 
मेरे दोस्त, बेबी फॉर्मूला में टॉक्सिन्स? तो हमारे बच्चों के लिए यह एक बड़ा खतरा है। लेकिन अगर हम सही तरीके से चुनते हैं और ध्यान रखते हैं, तो यह जोखिम कम होता है।

मेरी बात यह है कि हमें फॉर्मूला मिल्क खरीदते समय लेबल पर ध्यान रखना चाहिए। इसमें इंग्रीडIENT्स लिस्ट जरूर चेक करना चाहिए और एक्स्ट्रा शुगर, कॉर्न सिरप सॉलिड्स या पाम ऑयल से बचना चाहिए।

इसके अलावा, हमें फीडिंग बोतल उबालेना चाहिए और फॉर्मूला दूध बनाने में उबला और ठंडा किया हुआ पानी इस्तेमाल करना चाहिए। माइक्रोवेव में फॉर्मूला गर्म न करना चाहिए और जूठा फॉर्मूला फ्रिज में न रखना चाहिए।

और सबसे जरूरी बात, हमें अपने बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ बनाने के लिए हमेशा ध्यान रहना चाहिए। तो चलो, अपने बच्चों को फॉर्मूला मिल्क देने से पहले सही तरीके से तैयार रहें और उनकी सेहत का ख्याल रखें। 💯
 
मैंने तो बेबी फॉर्मूला में टॉक्सिन्स के बारे में पढ़ा है और लगता है कि यह शिशुओं के लिए खतरनाक हो सकता है। मुझे लगता है कि हमें अपने बच्चों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी बहुत गंभीरता से लेनी चाहिए और उन्हें सुरक्षित और पोषकात्मक आहार देना चाहिए। मैंने फॉर्मूला मिल्क खरीदते समय लेबल पर क्या देखना चाहिए, यह जानना जरूरी है।
 
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