चिल ब्लेन क्या होता है? चिल ब्लेन एक प्रकार की त्वचा की स्थिति है, जिसमें उंगलियों या हाथ-पैर के अन्य हिस्सों पर लाल या नीले धब्बे दिखाई देते हैं। यह तब होता है जब स्किन ठंडी और शुष्क हो जाती है, जिससे ब्लड वेसेल्स सिकुड़ जाते हैं और ऑक्सीजन का फ्लो कम हो जाता है। इसके बाद, अगर तापमान जल्दी से गर्म होता है, तो ब्लड वेसेल्स तेजी से फैलते हैं और अतिरिक्त खून आसपास के टिशूज में रिसने लगता है। यह बदलाव कई बार इतना तेज होता है कि इंफ्लेमेशन बढ़ जाता है, जिससे दर्द, जलन, खुजली और स्किन क्रैकिंग हो सकती है।
चिल ब्लेन कैसे होता है? चिल ब्लेन किसी भी उम्र के लोगों में हो सकता है, लेकिन यह अधिक आम तौर पर वयस्कों और पुरुषों में देखा जाता है। इसका खतरा महिलाओं में अधिक होता है, खासकर उन्हें जो शारीरिक रूप से सक्रिय रहती हैं या गर्म मौसम में अधिक समय बाहर रहती हैं।
चिल ब्लेन के लक्षण क्या हैं? चिल ब्लेन के लक्षणों में त्वचा पर लाल या नीले धब्बे दिखाई देते हैं, जो आमतौर पर हाथों और पैरों पर दिखाई देते हैं। इसके अलावा, प्रभावित हिस्से में स्वेलिंग आ सकती है, जिससे दर्द, जलन या चुभन जैसा अहसास होता है। ठंड के संपर्क में आने के बाद स्किन का रंग भी बदल सकता है।
चिल ब्लेन से बचने के लिए क्या करना चाहिए? चिल ब्लेन से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि शुरुआत में ही इसे होने से रोक दिया जाए। इसके लिए ठंड में कुछ सरल लेकिन बहुत प्रभावी सावधानियां अपनानी जरूरी हैं। ग्राफिक से समझते हैं-
* प्रभावित हिस्सों को गर्म रखें।
* गर्म दस्ताने और मोजे पहनें।
* परतों वाले कपड़े पहनें।
* ब्लैंकेट या लो सेटिंग हीटिंग पैड से हल्की गर्माहट दें।
* प्रभावित हिस्से को डायरेक्ट हीट (बहुत गर्म पानी) से बचें।
* हल्की मालिश भी मददगार होती है, लेकिन अगर त्वचा फटी हो, फफोले हों या छूने पर ज्यादा दर्द हो रहा हो, तो मालिश न करें, वरना संक्रमण या और चोट लग सकती है।
* नियमित रूप से मॉइस्चराइजर लगाने से खुजली, सूखापन और स्किन क्रैकिंग कम होती है। बेहतर है कि हल्के, खुशबू-रहित मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें, ताकि त्वचा में जलन न हो। इससे खुजली, ड्राईनेस और क्रैकिंग कम होती है।
* प्रभावित हिस्सों को न खुजलाएं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जो आगे चलकर अल्सर या दाग भी बना सकता है।
कुछ प्राकृतिक उपाय जैसे एलोवेरा जेल, कैलेंडुला क्रीम या ओटमील सोक भी खुजली और जलन में आराम दे सकते हैं, लेकिन इन्हें सिर्फ स्वस्थ, बिना फटी त्वचा पर ही लगाएं। अगर किसी तरह की जलन महसूस हो तो तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें।
चिल ब्लेन का इलाज कैसे किया जाता है? चिल ब्लेन का इलाज आमतौर पर फिजिकल चेकअप और विंटर एक्सपोजर हिस्ट्री के आधार पर किया जाता है। अगर केस गंभीर, लगातार या असामान्य हो तो डॉक्टर ब्लड टेस्ट या स्किन बायोप्सी करवाकर दूसरी बीमारियों जैसे ल्यूपस या वास्कुलिटिस को रूल आउट कर सकते हैं।
चिल ब्लेन 2-3 हफ्ते में या मौसम गर्म होने पर खुद ठीक हो जाती है, लेकिन अगर 2–3 हफ्तों बाद भी लक्षण बने रहें या बार-बार लौट आएं, तो स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह जरूरी है।
चिल ब्लेन कैसे होता है? चिल ब्लेन किसी भी उम्र के लोगों में हो सकता है, लेकिन यह अधिक आम तौर पर वयस्कों और पुरुषों में देखा जाता है। इसका खतरा महिलाओं में अधिक होता है, खासकर उन्हें जो शारीरिक रूप से सक्रिय रहती हैं या गर्म मौसम में अधिक समय बाहर रहती हैं।
चिल ब्लेन के लक्षण क्या हैं? चिल ब्लेन के लक्षणों में त्वचा पर लाल या नीले धब्बे दिखाई देते हैं, जो आमतौर पर हाथों और पैरों पर दिखाई देते हैं। इसके अलावा, प्रभावित हिस्से में स्वेलिंग आ सकती है, जिससे दर्द, जलन या चुभन जैसा अहसास होता है। ठंड के संपर्क में आने के बाद स्किन का रंग भी बदल सकता है।
चिल ब्लेन से बचने के लिए क्या करना चाहिए? चिल ब्लेन से बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि शुरुआत में ही इसे होने से रोक दिया जाए। इसके लिए ठंड में कुछ सरल लेकिन बहुत प्रभावी सावधानियां अपनानी जरूरी हैं। ग्राफिक से समझते हैं-
* प्रभावित हिस्सों को गर्म रखें।
* गर्म दस्ताने और मोजे पहनें।
* परतों वाले कपड़े पहनें।
* ब्लैंकेट या लो सेटिंग हीटिंग पैड से हल्की गर्माहट दें।
* प्रभावित हिस्से को डायरेक्ट हीट (बहुत गर्म पानी) से बचें।
* हल्की मालिश भी मददगार होती है, लेकिन अगर त्वचा फटी हो, फफोले हों या छूने पर ज्यादा दर्द हो रहा हो, तो मालिश न करें, वरना संक्रमण या और चोट लग सकती है।
* नियमित रूप से मॉइस्चराइजर लगाने से खुजली, सूखापन और स्किन क्रैकिंग कम होती है। बेहतर है कि हल्के, खुशबू-रहित मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें, ताकि त्वचा में जलन न हो। इससे खुजली, ड्राईनेस और क्रैकिंग कम होती है।
* प्रभावित हिस्सों को न खुजलाएं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जो आगे चलकर अल्सर या दाग भी बना सकता है।
कुछ प्राकृतिक उपाय जैसे एलोवेरा जेल, कैलेंडुला क्रीम या ओटमील सोक भी खुजली और जलन में आराम दे सकते हैं, लेकिन इन्हें सिर्फ स्वस्थ, बिना फटी त्वचा पर ही लगाएं। अगर किसी तरह की जलन महसूस हो तो तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें।
चिल ब्लेन का इलाज कैसे किया जाता है? चिल ब्लेन का इलाज आमतौर पर फिजिकल चेकअप और विंटर एक्सपोजर हिस्ट्री के आधार पर किया जाता है। अगर केस गंभीर, लगातार या असामान्य हो तो डॉक्टर ब्लड टेस्ट या स्किन बायोप्सी करवाकर दूसरी बीमारियों जैसे ल्यूपस या वास्कुलिटिस को रूल आउट कर सकते हैं।
चिल ब्लेन 2-3 हफ्ते में या मौसम गर्म होने पर खुद ठीक हो जाती है, लेकिन अगर 2–3 हफ्तों बाद भी लक्षण बने रहें या बार-बार लौट आएं, तो स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह जरूरी है।