'जहां BJP की हार दिखती है, वहां वोटर ही सिस्टम से...', SIR को लेकर राहुल गांधी का बड़ा आरोप

राहुल गांधी ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि जहां-जहां एसआईआर हो रहा है, वहां-वहां वोट चोरी देखी जा सकती है. राजुरा में सीर होने के बाद मतदाताओं की संख्या घट गई, यही पैटर्न आलंद में भी दिखा.

भाजपा नेता बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कह रहे थे कि SIR एक व्यक्ति, एक वोट के संवैधानिक अधिकार को खत्म करने के हथियार में बदल दिया गया है. चुनाव आयोग अब लोकतंत्र का रक्षक नहीं बल्कि इस वोट चोरी की साजिश का मुख्य सहभागी बन चुका है.

गुजरात में SIR के नाम पर जो कुछ किया जा रहा है, वह किसी भी तरह की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है. यह सुनियोजित, संगठित और रणनीतिक वोट चोरी है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही नाम से हजारों-हज़ार आपत्तियां दर्ज की गईं.

गुजरात में चुनाव आयोग ने SIR को एक व्यक्ति, एक वोट के संवैधानिक अधिकार को खत्म करने के हथियार में बदल दिया गया है. चुनाव आयोग अब लोकतंत्र का रक्षक नहीं, बल्कि इस वोट चोरी की साजिश का मुख्य सहभागी बन चुका है.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने अपनी जिम्मेदारी एवं जवाबदेही दोनों को सत्ता के कदमों में गिरवी रख चुका है. चुनाव आयोग भले ही अपनी जिम्मेदारी से भागे मगर हम चुनाव आयोग को भारत के लोकतंत्र और जनता के अधिकार से खिलवाड़ नहीं करने देंगे.
 
राहुल गांधी जी के आरोप सुनकर मुझे थोड़ा निराश हुआ 😔, लेकिन फिर सोचने पर तो यह सच है कि SIR का इस्तेमाल लोकतंत्र के लिए सही नहीं हो रहा है. चुनाव आयोग की जिम्मेदारी से भागना गलत है, लेकिन हमें अपने अधिकारों की रक्षा करनी है और यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव आयोग लोकतंत्र के मूल्यों को बनाए रखे.

मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को अपने काम में सुधार करना होगा, इसलिए वह हमें लोकतंत्र की रक्षा कर सके और वोट चोरी के आरोपों में मिलीजुला नहीं मिले. अगर हम एक साथ मिलकर अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं तो फिर भारत एक मजबूत लोकतंत्र बन सकता है.
 
राहुल गांधी जी का बोल है कि जहां-जहां एसआईआर होती हैं वहां-वहां वोट चोरी देखी जा सकती है.. और मुझे लगता है कि ये सच्चाई है। गुजरात में SIR को लेकर तो बहुत सारी आपत्तियां दर्ज हुईं, हज़ारों-हज़ार वोट चोरी का आरोप लगाया गया। और चुनाव आयोग ने भी अपनी जिम्मेदारी ख़तम कर दी है।

पूरे देश में हमारे चुनाव प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत है, लेकिन यह तो सिर्फ चुनाव आयोग नहीं कर सकता है, हम सभी एकजुट होकर इसे सुधारना होगा। और यह भी सच है कि अगर हमारे पास ईवीएम जैसी तकनीक होती, तो चुनाव घोटालों की संख्या कम होनी चाहिए। लेकिन इतनी तकनीक के बीच भी हमें अपने मतदान अधिकारों की रक्षा करनी होगी।

यहाँ एक छवि है जो गुजरात में SIR के नाम पर हुई वोट चोरी की संख्या को दर्शाती है। और यहाँ एक अन्य छवि है जिसमें एसआईआर के दौरान मतदाताओं की संख्या घटती दिखाई देती है।

![SIR वोट चोरी की संख्या](sir_votchori_sankhya.jpg)

![मतदाताओं की संख्या घटती](matadaton_ki_sankhya_ghatti.jpg)
 
मुझे लगता है कि यह SIR की गंभीर समस्या को दिखाता है. 🚨 2025 में भारत में चुनावों में वोटिंग शुद्धता का आंकड़ा 70% से 75% तक पहुंच गया है... 👀 सीर की इस्तेमाल बढ़ने से लोकतंत्र के प्रति विश्वास कम हो रहा है. 🤝 गुजरात में SIR के नाम पर दर्ज की गई आपत्तियों की संख्या 5000 से अधिक है... 👎 चुनाव आयोग की जिम्मेदारी और जवाबदेही कम हो रही है. 📊 अगर हम देखें तो SIR के इस्तेमाल बढ़ने के बाद मतदाताओं की संख्या में 20% तक गिरावट आती है... 📈
 
ये तो साफ-साफ बात है कि चुनावी मैदान पर हर पार्टी अपने-अपने राजनीतिक नेताओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, लेकिन भाजपा की आरोप लगाने से यह सवाल उठता है कि वोट चोरी कैसे होती है? और चुनाव आयोग का क्या काम हुआ? कांग्रेस ने कहा है कि चुनाव आयोग ने अपनी जिम्मेदारी गिरवी रख दी है, लेकिन यह सवाल उठता है कि चुनाव आयोग को तो जनता की सुरक्षा करनी होती है। और अब जब हमने SIR पर राजनीति करने लगी है तो चुनाव आयोग को लोकतंत्र का रक्षक कहा जाता है, लेकिन मुझे लगता है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक खेल है। 🤔
 
भाजपा नेताओं की बातों से मुझे लगता है कि उनकी चिंता वोट चोरी के बारे में है, लेकिन यह तो पहले से ही होता रहता है। अगर वोट चोरी नहीं होती, तो शायद भाजपा के नेताओं पर इतना आरोप लगाने की जरूरत न होती।

मुझे लगता है कि गुजरात में SIR के मामले में हमें और जानकारी चाहिए। क्या यह वास्तव में एक व्यक्ति को एक वोट के अधिकार को खत्म करने के लिए बनाया गया है, या यह कोई गलत धारणा है?
 
क्या बात करें, SIR का मतलब कुछ और ही है... किसानों की मांगों को मानने की जगह पार्टियों की राजनीति में खो जाया गया है. वोट चोरी के आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग पर सख्त होना चाहिए, लेकिन इसके साथ-साथ अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही को भी ध्यान में रखना चाहिए. चूंकि यह बात सभी से सुननी चाहिए, इसलिए मुझे लगता है कि इस पर एक विशेषज्ञ समिति बनाई जाए ताकि सच्चाई को बताया जा सके.
 
बस यह तो बहुत ही चिंताजनक बात है... चुनाव आयोग एक बार फिर अपनी जिम्मेदारी में भी मुश्किल में पड़ गया है. SIR के नाम पर इतनी वोट चोरी हो रही है, यह तो देखकर हैरान रहना ही नहीं बल्कि गुस्सा करना ही है... लेकिन फिर भी उम्मीद है कि चुनाव आयोग में कुछ सुधार होने की संभावना है. लेकिन हमें यह भी देखना होगा कि चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी को लेकर क्या कदम उठाता है.
 
सीर नाम के इस पर्दे के पीछे बीजेपी की जो रणनीति है, वह बहुत ही खतरनाक है... 🚨 चुनाव आयोग जैसा संगठन जब संविधान के सिद्धांतों से दूर जाता है, तो लोकतंत्र के अस्तित्व पर भी खतरा पैदा करता है... यह विशेष रूप से गुजरात में हो रही कार्रवाई की बात करते हैं जहां SIR नाम के इस वोट चोरी को लेकर हजारों आपत्तियां दर्ज की गईं।

यदि चुनाव आयोग संविधान का पालन नहीं कर रहा है और लोकतंत्र का रक्षक बन रहा है, तो इसके परिणामस्वरूप लोकतंत्र का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। इस समय हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही को पूरा कर रहा है और लोकतंत्र के अधिकारों की रक्षा कर रहा है।

इस पर्दे के पीछे की रणनीति में सीर नाम का इस्तेमाल वोट चोरी को छिपाने के लिए किया जा रहा है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संगठन होना चाहिए।
 
मैंने देखा है कि वोट चोरी की बातें होती ही हैं, लेकिन चुनाव आयोग से जो मामला चल रहा है, वह तो कुछ और है। यहां पर केवल एक नाम, एसआईआर, पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि चुनाव आयोग अपनी गंभीरता से बात नहीं कर पाया है। मुझे लगता है कि SIR को इस तरह से बढ़ाया गया है ताकि चुनावी व्यवस्था को प्रभावित किया जा सके। इसके परिणामस्वरूप, चुनाव आयोग अब लोकतंत्र का रक्षक नहीं बल्कि इस वोट चोरी की साजिश का मुख्य सहभागी बन गया है। 😒
 
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