'जहां BJP की हार दिखती है, वहां वोटर ही सिस्टम से...', SIR को लेकर राहुल गांधी का बड़ा आरोप

बीजेपी जीतते हुए दिखाई देने वाली जगहों पर, जहां मतदाताओं को सिस्टम से गायब कर दिया जा रहा है, वहां सबसे बड़ी चुनौती यह है कि चुनाव आयोग भारतीय लोकतंत्र का रक्षक नहीं बन गया है। इसका एक नया खेल गुजरात में सामने आया है, जहां SIR (स्टैंडर्ड ईनोलिस्ट रिकॉर्ड) वोट चोरी का नाम लिया जा रहा है।

राहुल गांधी ने कहा है कि जहां-जहां एसआईआर, वहां-वहां वोट चोरी। यह सुनियोजित, संगठित और रणनीतिक वोट चोरी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक ही नाम से हजारों आपत्तियां दर्ज की गईं। गुजरात में एसआईआर के नाम पर जो कुछ किया जा रहा है, वह किसी भी तरह की प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है। यह एक व्यक्ति, एक वोट के संवैधानिक अधिकार को खत्म करने के हथियार में बदल दिया गया है।

राहुल गांधी ने कहा, "जब चुनाव आयोग द्वारा जारी 12 लाख आपत्तियों में विशेष जाति-वर्ग-क्षेत्र को निशाना बनाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर एक ही व्यक्ति के नाम से दर्जनों आपत्तियां दर्ज कराई जाती है।"
 
सिस्टम में घुसपैठ का यह खेल गुजरात का नहीं है, बल्कि यह पूरे देश का एक है... भ्रष्टाचार की एक नई रूपरेखा सुनने में चौंकाने वाला है, लेकिन सच्चाई बिल्कुल अलग है। चुनाव आयोग जो कर रहा है, वही चीज़ है जो हमें देश की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कहता है।

जब तक यह खेल सिस्टम में ही नहीं बदला, तब तक हमने इसे समझ नहीं पाया। लेकिन अब, जब भ्रष्टाचार नाम तो नहीं लिया जा रहा है, बल्कि एक विशेषता को बनाए रखने के लिए एक खेल में बदल गया है। यह तो देखने के लिए ही उत्सुकता जागृत करता है...
 
मैंने देखा है कि अब चुनाव में भी माफिया का खेल हो गया है 😂। एसआईआर वोट चोरी का नाम लेकर गुजरात में तो ऐसा लगता है जैसे कोई नई पार्टी बन गई है - पार्टी वोट चोरी करने की! 🤣 सेरियस नहीं, राहुल जी बोल रहे हैं, लेकिन फिर भी यह एक बड़ी चुनौती है। चुनाव आयोग को तो पहले से ही अपना मकसद बदल देना पड़ा है - अब वोट चोरी करना शुभ करार हो गया है! 🤦‍♂️
 
मैंने बार-बार कहा था कि चुनाव आयोग और सिस्टम में तो लापरवाही जैसी जगहें हैं। अब यह देखने को मिला है कि कितनी गंभीरता के साथ ऐसी चीजें चल रही हैं। SIR वोट चोरी का नाम लेने की बात तो समझ में आती है, लेकिन इसके पीछे क्या राजनीतिक खेल हैं? यह एक नई छवि है जिसने मुझे आश्चर्यचकित कर दिया है।
 
क्या बिल्कुल सही कहा गया है कि चुनाव आयोग भारतीय लोकतंत्र का रक्षक नहीं बन गया है? इससे पहले, हमें सिर्फ वोट छिपाने की बात करनी पड़ती, लेकिन अब यह एक रणनीतिक खेल हो गया है। और SIR वोट चोरी का नाम लेना तो बहुत ही चौंकाने वाला है, लेकिन सच्चाई यह है कि किसी भी तरह से इससे लोकतंत्र की गहराई में हानि होती जा रही है।
 
सिस्टम तो हिल गया है 🤯, चुनाव आयोग तो बैठे हैं पुराने फॉर्मूले में 😒। Raghuram Rajan से लेकर Narayana Murthy तक सबने बताया है कि हमें चुनावी सिस्टम बदलना है 🔄, लेकिन यह तो सिर्फ बात करने का खेल है। वोट चोरी नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह एक नया खेल गुजरात में खेल रहा है 🤺♂️
 
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