वायु प्रदूषण से जुड़े कानूनों में बदलाव, उद्योगों को राहत देने का एक बड़ा कदम।
केंद्र सरकार ने वायु और जल प्रदूषण से जुड़े कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों से उद्योगों को अपनी गतिविधियों को जारी रखने में मदद मिलेगी। अब कागजी कार्रवाई कम होगी और राज्य सरकारों को भी इसका लाभ उठाने का मौका मिलेगा।
नए दिशानिर्देशों के तहत सबसे बड़ा बदलाव संचालन की सहमति (Consent to Operate - CTO) की वैधता है। अब एक बार SITO मिलने के बाद यह तब तक वैध रहेगा, जब तक इसे रद्द नहीं किया जाता। हालांकि, पर्यावरण नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण जारी रहेगा।
अब बार-बार मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। इससे उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम होगा। लाल श्रेणी (Red Category) के उद्योगों के लिए सहमति देने की प्रक्रिया का समय 120 दिनों से घटाकर 90 दिन कर दिया गया है। इससे सीटीओ के रिन्यूअल में होने वाली देरी से संचालन में आने वाली अनिश्चितता भी खत्म होगी।
एक ही आवेदन में सभी मंजूरी मिलेगी। अब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) एक ही आवेदन पर विचार कर सकेंगे। इसी एक आवेदन के आधार पर वायु और जल अधिनियमों के साथ-साथ विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत भी एकीकृत अनुमति जारी की जाएगी।
इस बदलाव से छोटे उद्योगों को भी राहत मिलेगी। इन औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। ऐसे उद्योगों के लिए स्थापना की सहमति (Consent to Establish - CTE) एक स्व-प्रमाणित आवेदन जमा करने पर ही स्वीकृत मान ली जाएगी।
नए दिशानिर्देशों में न्यूनतम दूरी के कठोर मानदंडों को हटा दिया गया है। अब इसकी जगह साइट-विशिष्ट पर्यावरणीय मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अलावा, राज्यों को 5 से 25 साल की अवधि के लिए एकमुश्त SITO शुल्क निर्धारित करने की भी अनुमति दी गई है।
केंद्र सरकार ने वायु और जल प्रदूषण से जुड़े कानूनों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों से उद्योगों को अपनी गतिविधियों को जारी रखने में मदद मिलेगी। अब कागजी कार्रवाई कम होगी और राज्य सरकारों को भी इसका लाभ उठाने का मौका मिलेगा।
नए दिशानिर्देशों के तहत सबसे बड़ा बदलाव संचालन की सहमति (Consent to Operate - CTO) की वैधता है। अब एक बार SITO मिलने के बाद यह तब तक वैध रहेगा, जब तक इसे रद्द नहीं किया जाता। हालांकि, पर्यावरण नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण जारी रहेगा।
अब बार-बार मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। इससे उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम होगा। लाल श्रेणी (Red Category) के उद्योगों के लिए सहमति देने की प्रक्रिया का समय 120 दिनों से घटाकर 90 दिन कर दिया गया है। इससे सीटीओ के रिन्यूअल में होने वाली देरी से संचालन में आने वाली अनिश्चितता भी खत्म होगी।
एक ही आवेदन में सभी मंजूरी मिलेगी। अब राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCBs) एक ही आवेदन पर विचार कर सकेंगे। इसी एक आवेदन के आधार पर वायु और जल अधिनियमों के साथ-साथ विभिन्न अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत भी एकीकृत अनुमति जारी की जाएगी।
इस बदलाव से छोटे उद्योगों को भी राहत मिलेगी। इन औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। ऐसे उद्योगों के लिए स्थापना की सहमति (Consent to Establish - CTE) एक स्व-प्रमाणित आवेदन जमा करने पर ही स्वीकृत मान ली जाएगी।
नए दिशानिर्देशों में न्यूनतम दूरी के कठोर मानदंडों को हटा दिया गया है। अब इसकी जगह साइट-विशिष्ट पर्यावरणीय मूल्यांकन किया जाएगा। इसके अलावा, राज्यों को 5 से 25 साल की अवधि के लिए एकमुश्त SITO शुल्क निर्धारित करने की भी अनुमति दी गई है।