कौन हैं देवजी, गणपति और बेसरा, शाह के लिए चैलेंज: 76 जवानों का कत्ल, 7 करोड़ इनाम; हिड़मा सिपाही था, मास्टरमाइंड नक्सली अभी जिंदा

छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर मारेडुमिल्ली जंगल में हुए एनकाउंटर के दौरान माड़वी हिड़मा को मार गिराया गया। उसकी पत्नी मडकम राजे उर्फ रजक्का और 4 अन्य नक्सलियों को भी ढेर कर दिया गया।

बस्तर जिले की आई.जी. सुंदरराज ने बताया, "हिड़मा एक शानिवार था, लेकिन यहां तक कि वह भी हिड़मा नहीं था। हमें पता चला था कि वह माड़वी है। उसकी मां को पत्र भेजे गए, उनके दोनों की मां तो एक ही परिवार से रहीं। राजू नामक व्यक्ति की गुहार नकार दी, लेकिन मैंने फिर उसकी गुहार लेने का प्रयास किया। अगर वह सरेंडर नहीं करते तो हमें उसकी भी मार लेनी पड़ेगी।"

इस एनकाउंटर से पहले, हिड़मा ने कई बड़े हमलों में भाग लिया था, जिसमें 2010 का दंतेवाड़ा हमला और 2021 का सुकुमा-बीजापुर हमला शामिल थे।

हिड़मा पर 6 करोड़ का इनाम लगाया गया है। इससे पहले उसकी पत्नी मडकम राजे उर्फ रजक्का और 4 अन्य नक्सलियों पर भी इनाम लगाया गया था।

इस एनकाउंटर से नक्सलियों को बहुत बड़ा झटका लगा है। ऐसे कई नक्सली जिन्हें पहले सरेंडर करने के लिए मजबूर किया गया था, अब उनके पास बहुत सारे निशानेबाज और मार्शल आर्म थे।

नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में शामिल एक अधिकारी ने बताया, "आंदोलन की रीढ़ तो टूट ही चुकी है। ये भी सच है कि हिड़मा इस रीढ़ का मजबूत हिस्सा था।"

इस एनकाउंटर से नक्सलियों को बहुत बड़ा झटका लगा है। ऐसे कई नक्सली जिन्हें पहले सरेंडर करने के लिए मजबूर किया गया था, अब उनके पास बहुत सारे निशानेबाज और मार्शल आर्म थे।

हिड़मा पर 7 करोड़ का इनाम लगाया गया है। इससे पहले उसकी पत्नी मडकम राजे उर्फ रजक्का और 4 अन्य नक्सलियों पर भी इसी प्रकार के इनाम लगाए गए थे।
 
मेरे दोस्त, यह नक्सलवाद की समस्या बहुत गहरी हुई है। जैसे ही हिड़मा मारा गया, उसकी पत्नी और अन्य नक्सलियों को भी मार कर दिया गया। इससे नक्सलवाद की स्थिति और भी खराब हो गई है।

मेरी राय में यह बात सच्ची है कि नक्सलियों के लिए इनाम लगाना उनके लिए बहुत बढ़िया लगता है। इससे उन्हें अपने गांवों की समस्याओं से दूर रहने का मौका मिलता है, और वे अपने परिवारों को भी मुश्किल से निकाल नहीं पाते हैं।

लेकिन, मेरे दोस्त, यह तो हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है। हमें नक्सलवाद को खत्म करना होगा, और इसके लिए हमें अपने सामाजिक कार्यक्रमों पर ध्यान देना होगा। हमें नक्सलियों के साथ बातचीत करनी होगी, उनकी समस्याओं को समझना होगा।

मेरी बात में जो सच्चाई है, वह यह है कि नक्सलवाद की समस्या बहुत गहरी हुई है। लेकिन, हमें इसे खत्म करने की साहसिक कोशिश करनी होगी।
 
नक्सलवाद को मारने से बाकी क्या होगा। 🤔 सिर्फ उन्हें मराने से समस्या नहीं हल होती। नक्सलियों को समझने की जरूरत थी, उनकी समस्याओं का समाधान करने की जरूरत थी। लेकिन सरकार और पुलिस को ऐसा करने की जगह उन्हें मारने का विकल्प चुना। 🤷‍♂️
 
नक्सलियों को अब ऐसा सोचना चाहिए कि अगर वे शांति में जीवन जीना चाहते हैं तो उनके पास फायरअर से लेकर राइफल तक नहीं होनी चाहिए। हमें नक्सलियों के साथ दोस्ती करने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें समझाने की जरूरत है कि उनका यह जीवन जीने का तरीका ठीक से नहीं है।
 
नक्सलवाद की यह दुनिया तो ख़त्म होने से पहले ही अपने अंत में ही खत्म हो रही है ना? ये दोस्ती, ये जीवन, यह लड़ाई सब कुछ टूटने की ओर बढ़ गया है। नक्सलियों के लिए इनाम लगाने से बच्चे बड़े होते देखो, और फिर उनको मार कर देते हैं ना। ऐसा तो भारतीय जंग में जरूर हुआ करता था, लेकिन अब यह तो हमारी ज़िंदगी नहीं बन सकती।
 
नक्सलवाद से लड़ते समय हमें अपने विरोधी को समझने की जरूरत होती है। हिड़मा की कहानी देखें, उसने जीवन में अपनी पार्टी और समूह की बातों पर ध्यान नहीं दिया। वह एक लोग था, उसकी जिंदगी में कोई फिलासफी नहीं थी, बस एक निशानेबाज बनने का सपना था। यही वो उसकी मौत का कारण बना। हमें अपने रास्तों पर चलने के लिए सोच-समझकर चलना चाहिए, और दूसरों की गलतियों में न भटकें।

क्या कभी आप सोचे हैं कि नक्सलवादी हमारे समाज में अपने विरोध को कहाँ से लाने लगे? यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। हमें खुद पर ध्यान देना चाहिए, और जीवन को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
 
मेरे दोस्त, यह तो बहुत दुखद बात है! माड़वी हिड़मा को मारने से नक्सली आंदोलन को बड़ा झटका लगा है। लेकिन हमें याद रखना होगा कि नक्सलियों ने बहुत से लोगों को खो दिया है, जैसे कि मेरे बाबू की दादी। वे बच्चों और महिलाओं को भी मार रहे थे, यह तो बहुत ही गहरा दर्द है।

मैं समझता हूँ कि सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने का फैसला किया है, लेकिन हमें सोच-समझकर इस बात पर विचार करना चाहिए कि हम नक्सली आंदोलन को जीतने के लिए क्या कर सकते हैं।

मेरी तो यह राय है कि हमें नक्सलियों से मिलने और समझने की कोशिश करनी चाहिए। हम उनसे बात करके उनके दृष्टिकोण को समझने की कोशिश करें। लेकिन यह तो मेरी राय है, और मैं जानता हूँ कि नक्सलियों के साथ बातचीत करना आसान नहीं है।

मैंने अपने बचपन की कहानियाँ सुनाई हैं, जब हमारे गाँव में नक्सली आंदोलन शुरू हुआ था। लोगों को डर था, और सरकार ने भी उनकी बात मानने की कोशिश नहीं की। लेकिन आजकल तो सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने का फैसला किया है, और यह तो एक अच्छी बात है।
 
मारेडुमिल्ली जंगल में हुए एनकाउंटर को देखकर लगता है कि नक्सलियों को बहुत बड़ा झटका लगा है। 2010 का दंतेवाड़ा हमला और 2021 का सुकुमा-बीजापुर हमला जैसे बड़े हमलों में भाग लेने वाली हिड़मा की गोलीबारी में मारे जाने से नक्सलियों को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा है।

छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर नक्सलियों की गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार ने बहुत मेहनत की है, लेकिन अभी भी उनका सामना करना बहुत मुश्किल है।

माड़वी हिड़मा की मां और पत्नी की मां एक ही परिवार से रहीं। इससे यह साबित होता है कि नक्सलियों को बचाने वाले लोग भी उनके परिवार से जुड़े हुए हैं।

हिड़मा की गोलीबारी में मारे जाने से नक्सलियों को बहुत बड़ा झटका लगा है। इससे नक्सलियों को रोकने वाले अधिकारियों को अपनी न्यूनतम शक्ति के साथ काम करने का मौका मिलेगा।

मारेडुमिल्ली जंगल में हुए एनकाउंटर को देखकर यह भी लगता है कि नक्सलियों को रोकने वाले अधिकारियों को अपनी रणनीति बदलने की जरूरत है।
 
माड़वी हिड़मा जैसे लोगों को तो निशानेबाज बनाकर दिया गया है, लेकिन उनकी पत्नी को इतना बड़ा इनाम मिलना चाहिए कि वह अपने पति को मारने से पहले खुद भाग जाए। 😒

नक्सली आंदोलन की तरह-तरह की समस्याओं से हमारा देश लड़ रहा है, लेकिन इसके लिए कोई समाधान नहीं दिया गया है। नक्सलियों को मारने वाले अधिकारी तो खुद भी जान जोखिम में रखते हैं और फिर सोचते हैं कि नक्सलियों को मारना ठीक है? 🤔

ऐसे में नक्सलियों को सरेंडर करने के लिए मजबूर करने की कोशिश करें, तो कम से कम नुकसान होगा। लेकिन हमारे देश में ऐसा नहीं होता, यहाँ सब बोलते हैं कि नक्सलियों को मारना ठीक है। 😡
 
नक्सलियों की दुनिया बहुत ही खतरनाक है 🚨। माड़वी हिड़मा जैसे बड़े नेताओं की गंवारी से नक्सलियों को बहुत बड़ा झटका लग गया है। लेकिन यही बात है, नक्सलियों की दुनिया में खतरनाक लोग रहते हैं और वे कभी भी सरेंडर नहीं करते। मुझे लगता है कि सरकार अपने जवानों को पूरी सुरक्षा प्रदान करे ताकि नक्सलियों को आसानी से पराजित किया जा सके।
 
अगर नहीं तो कैसे? यह हिड़मा दाल में मिल जाएगा 🤯. नक्सलियों को ऐसा करने की जरूरत नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपने फैसले पर अडिग रहे। अब उनके पास कई निशानेबाज और मार्शल आर्म हैं, जिससे आगे की लड़ाई करना आसान हो गया है। मुझे लगता है कि सरकार को नक्सलियों से लड़ने के लिए अच्छा योजना बनानी चाहिए, नहीं तो फिर यही दौर बना रहेगा 🤔.
 
यह तो बहुत बड़ा झटका है नक्सलियों के लिए। मुझे लगता है कि सरकार ने सही फैसला लिया है, लेकिन हमें यह भी सोचना चाहिए कि क्या इससे नक्सलियों की समस्या पूरी तरह से हल हो जाएगी। मुझे लगता है कि इसके लिए और कुछ करने की जरूरत है। हमें यह भी सोचना चाहिए कि हमारे देश की शांतिपूर्ण विकास के लिए नक्सलियों की समस्या का समाधान कैसे किया जाए।
 
माड़वी हिड़मा को मारने की बात तो सुनकर मैंने ही गहरी सांस ली है 😱। नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में शामिल अधिकारी ने कहा कि हिड़मा इस एनकाउंटर से नक्सलियों की रीढ़ तो टूट ही गई है। लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि अगर इतनी जानवरनुमा क्षत्रियाओं को मारकर नक्सलियों की रीढ़ टूट जाएगी तो फिर इनके बाद क्या होगा? 🤔

माड़वी हिड़मा की गुफ़ारिश बहुत बड़ी थी, 6 करोड़ का इनाम लगाया गया है 😮। लेकिन ये तो मेरे लिए बहुत बुरा है, वह चोर-छूर सड़कों पर दौड़ता रहता, नक्सलियों की सेना के साथ जंग करता था। उसकी पत्नी मडकम राजे उर्फ रजक्का और 4 अन्य नक्सलियों पर भी इसी तरह के इनाम लगाए गए हैं। यह तो अच्छा नहीं है 🤕

एक बात तो साफ़ है कि नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में शामिल अधिकारी ने बहुत साहस दिखाया है। लेकिन फिर भी मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूँ।
 
मुझे बहुत दुःख हुआ कि उनकी पत्नी भी मर गई। मैं समझ नहीं पाया कि नक्सलियों को इतना खतरा न हो। अगर सरकार ने उन्हें शांति से बैठने का मौका दिया, तो यह सब न होता। मुझे लगता है कि नक्सली जैसे लड़खड़ाहट में रहने वालों को हमारी सरकार अपनी पौध-पौधे भांग लेने वाले देश में स्थान नहीं देती। 🤔
 
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