कौन हैं देवजी, गणपति और बेसरा, शाह के लिए चैलेंज: 76 जवानों का कत्ल, 7 करोड़ इनाम; हिड़मा सिपाही था, मास्टरमाइंड नक्सली अभी जिंदा

हिड़मा सिपाही था, मास्टरमाइंड नक्सली अभी जिंदा

छत्तीसगढ़ के नक्सली लीडर माड़वी हिड़मा पर 18 नवंबर को एनकाउंटर के दौरान गोली मारकर मार डाला गया। उसके बॉडीगार्ड को भी ढेर कर दिया गया। नक्सली संगठन में बड़ा खंडन हुआ। हिड़मा एक प्रमुख नक्सली सिपाही था, जिस पर कई हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था।

हिड़मा के सरेंडर या एनकाउंटर को मिलाकर 76 जवानों की हत्या के साथ-साथ एक बड़ा नुकसान हुआ। इस पर सरकार ने 1 करोड़ रुपये का इनाम रखा है। इसके अलावा, सरकार ने नक्सलियों को खत्म करने के लिए ऑपरेशन प्रहार चलाया है और इसी के तहत 70 नक्सलियों का सरेंडर कराया गया है।

हिड़मा सिपाही था, मास्टरमाइंड नक्सली अभी जिंदा

हिड़मा पर एनकाउंटर के दौरान गोली मारकर मार डाला गया। उसके बॉडीगार्ड को भी ढेर कर दिया गया। हिड़मा एक प्रमुख नक्सली सिपाही था, जिस पर कई हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था।

हिड़मा ने नक्सली समूह में अपने पद को बनाए रखा। हिड़मा को उनके नेतृत्व और हिंसा दोनों के लिए विशेष महत्व दिया गया था। यह व्यक्ति कई बड़े हमलों का संज्ञायी था। हालांकि, 2010 में उसके दंतेवाड़ा हमले ने नक्सली समूह को मजबूत होने का एक बड़ा मौका दिया।

हिड़मा पर सरकार और पुलिस की कोशिशों से वह अपनी शक्ति को बनाए रख सका। हालांकि, 18 नवंबर को छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर के मारेडुमिल्ली जंगल में हिड़मा पर एनकाउंटर के दौरान गोली मारकर मार डाला गया। उसके लिए यह एक बड़ा झटका था।

हिड़मा को नक्सली समूह के शीर्ष सिद्धांतों और नेतृत्व में बहुत महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता था। हालांकि, उसकी हत्या के बाद, कई अन्य प्रमुख लीडर्स और सैनिक मिलकर इस समूह को मजबूत होने के लिए काम करने की व्यवस्था कर दें।
 
अगर हम नक्सली समाज को समझने की कोशिश करते हैं तो पता चलता है कि हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं जो अपने रोजगार और आर्थिक सुरक्षा के लिए इस तरह के काम कर रहे हैं। अगर सरकार को अपनी नीतियों में बदलाव लाने की कोशिश करनी है तो हमें उनकी समस्याओं को समझना और उनके लिए समाधान खोजना होगा।
 
माड़वी की मौत से नक्सलियों के लिए बड़ा नुकसान हुआ है 🤕। उनका मास्टरमाइंड बनना अब नहीं रहेगा। सरकार ने कई प्रयास किए थे इसीलिए तो हत्या की जासूसी भी की गई थी। यह अच्छा है कि सरकार ने 1 करोड़ रुपये का इनाम रखा है।

माड़वी की मौत से नक्सलियों को नए नेताओं की जरूरत है। अगर सरकार और पुलिस दोनों मिलकर मिलकर काम करें तो नक्सलियों को हराने में आसानी होगी।

मुझे लगता है कि सरकार ने यह अच्छी सोच की है ऑपरेशन प्रहार चलाने का। अगर नक्सलियों को खत्म करने के लिए हम सभी एक साथ मिलकर काम करें तो बहुत जल्दी नक्सली समूह बंद हो जाएगा।

माड़वी की मौत से नक्सलियों का नुकसान हुआ है और सरकार को भी नुकसान पहुंचा है। यह अच्छा है कि 70 नक्सलियों का सरेंडर कराया गया है।

मुझे लगता है कि हमें नक्सलियों के खिलाफ लड़ने के लिए एकजुट होने की जरूरत है। अगर हम सभी मिलकर काम करें तो नक्सलियों को हराने में आसानी होगी।
 
नक्सली आंदोलन के इस समय में तो सरकार की हर कोशिश भी मुख्य बात नहीं है। याद रखें, यह एक जटिल मुद्दा है, जहां कई फेक्शन और राजनीतिक खेल शामिल हैं। नक्सलियों के पास अपने समूह में विभिन्न दृष्टिकोण और राय होती हैं, लेकिन सरकार की हर कोशिश से उनका समर्थन और शक्ति बनाए रखने में मदद हुई है। हालांकि, यह तो एक बड़ा सवाल है कि नक्सली आंदोलन को समाप्त करने के लिए क्या साहस और रणनीति सरकार की ओर से जुटाई गई है? 🤔
 
चेतावनी न लगाना सही नहीं था। नक्सली समूह को विनाशकारी माना जाता था, लेकिन उनकी हत्या से कोई समाधान नहीं आ पाया। 🚨
 
मानो तो नक्सलियों की यह बात बेवकूफी है कि उन्हें निकाला गया है। हिड़मा सिपाही था, लेकिन वह अपने समूह के लिए बहुत बड़ा मास्टरमाइंड था। उसकी हत्या के बाद, नक्सलियों को खत्म करने के लिए ऑपरेशन प्रहार चलाया गया है, लेकिन देखो, अब उनके लीडर्स और सैनिक मिलकर इस समूह को मजबूत बनाने की व्यवस्था कर रहे हैं। यह तो दिखाता है कि नक्सलियों ने अपने पास बहुत बड़ी शक्ति और समर्थन है। हमें उनकी बात सुननी चाहिए और समझना चाहिए कि वे क्यों ऐसा करते हैं
 
मैं जानता हूँ कि नक्सली संगठन का यह खंडन बहुत बड़ा है, लेकिन मुझे लगता है कि इस तरह की घटनाओं से हमारे देश को आगे बढ़ने का साहस नहीं मिल पाया। सरकार और पुलिस ने कई बार नक्सलियों पर हमला किया था, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।
 
मार डाले जाने वाले नक्सली नेता हिड़मा की मौत के बाद, यह सोचने योग्य है कि क्या उनके लिए इस तरह की हिंसक परिस्थितियों को चुनना एकमात्र विकल्प था? उनकी शक्ति और नेतृत्व क्षमता दोनों की बारीकी से जांच की जाए तो यह स्पष्ट होता है कि उन्हें हमेशा ऐसा करने का मौका मिलता रहा। लेकिन सवाल यह है कि उनके नेतृत्व और हिंसा की राह पर उन्होंने हमारे समाज को ज्यादा कैसे परेशान किया?
 
नक्सली आंदोलन ने हमारे देश को कई बार खत्मा करने की कोशिश की, लेकिन फिर से हिड़मा की मौत से उनका प्रभाव कम हुआ। यह एक बड़ा झटका है और अब दूसरों को अपना जगह बनाने का मौका मिलेगा। लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि नक्सली आंदोलन ने हमारे देश में कई गरीबों को जीवन प्रदान करने वाले कामों को अंजाम देने में मदद की।
 
मुझे लगता है कि नक्सली आंदोलन की कहानी बहुत जटिल और गहरी है। मैंने अपने पिताजी को सुना था कि उनके दादाजी ने भी नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में शामिल होकर एक बड़ी मेहनत की। लेकिन जब उन्होंने यह युद्ध छोड़ दिया, तो उनकी जिंदगी और बेहतरीन हो गई। इसके बाद मैंने सोचा कि नक्सली आंदोलन की कोई भी गतिविधि भी इतनी खतरनाक नहीं थी, लेकिन इसके पीछे बहुत बड़ी जिज्ञासा, उत्पीड़न और संघर्ष होते हैं।

मुझे लगता है कि हमें नक्सलियों के विकास में उनके शौक, उनकी दृष्टि, उनके परिवार और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। हालांकि उनके कुछ काम ने हमारा देश ख़राब कर दिया, लेकिन उन्होंने अपने संघर्ष में बहुत बड़ी ताकत और बलिदान दिखाया।
 
जिंदा था, अब नहीं। यह तो नक्सलियों के बीच एक बड़ा झटका है। मैंने उसे एक प्रमुख सिपाही के रूप में जाना था। उसकी हत्या पर मुझे खेद है, लेकिन मुझे लगता है कि यह तो नक्सलियों के लिए एक बड़ा नुकसान है। हमें देखकर नहीं देखना चाहिए, लेकिन यह तो देखना पड़ता है और समाधान खोजने की जरूरत है। मैं उम्मीद करता हूं कि सरकार और पुलिस अपनी कोशिशों से नक्सलियों को मजबूत होने के मौके नहीं देंगे।
 
मुझे यकीन है कि नक्सली सम्राट की जान गयी तो कई अन्य क्षेत्रों में भी बदलाव आ सकता है। मेरा मानना है कि सरकार और पुलिस ने सही रास्ता चुना, लेकिन यह एक बड़ा सवाल है कि नक्सलियों को खत्म करने के लिए क्या वे अन्य तरीके भी आजमा सकते थे।

मुझे लगता है कि नक्सलियों को समझने और उनकी समस्याओं से निपटने के लिए हमें अपनी रणनीति बदलनी चाहिए। उनके पास एक बड़ा समर्थन तंत्र है, जिसे सरकार सुनिश्चित कर सके।

ऐसा लगता है कि नक्सलियों को खत्म करने के लिए हमें विकल्प ढूंढने चाहिए। हमें उनकी समस्याओं को सुनना और उन्हें हल करने की कोशिश करनी चाहिए। शायद अगर हम उन्हें आर्थिक रूप से मदद कर सके, तो उन्हें अपने समूह छोड़ने में मदद मिल सकती है।

आज भी नक्सलियों के लिए कई समस्याएं हैं, जैसे कि जमीन का दावा करना, आर्थिक अवसर पाना। अगर सरकार इन समस्याओं को हल कर सके, तो शायद नक्सलियों को खत्म करने की जरूरत नहीं होती।
 
मुझे लगता है कि नक्सलियों की इस तरह की गतिविधियाँ हमारे समाज के लिए बहुत हानिकारक हैं। सरकार ने उन्हें खत्म करने के लिए कई कदम उठाए हैं, और मुझे लगता है कि यह सही काम है। लेकिन साथ ही, मुझे लगता है कि हमें नक्सलियों को समझने की जरूरत है, उनके पीछे की वजह क्या है। शायद उन्हें आर्थिक सुधार और शिक्षा के अवसर देने की जरूरत है।

मुझे यह खेद है कि 76 जवानों की हत्या हुई है, लेकिन मुझे लगता है कि इसके बाद हमें नक्सलियों को समझने और उनके साथ बातचीत करने की जरूरत है। हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।
 
😕 हिड़मा जैसे व्यक्ति को अपने समूह की गतिविधियों में शामिल रहने की कीमत निकल आती है... उनके परिवार और संगठन के लिए यह एक बड़ा झटका है, परंतु राज्य और देश के लिए सुरक्षा को बनाए रखना ज़रूरी है 🕊️

कुछ लोगों ने कहा है कि नक्सली समूह में शामिल होने वाले लोगों को अपने निर्णय के पीछे खड़े होने की जरूरत है, परंतु हिड़मा जैसे व्यक्ति ने अपने निर्णय से देश और राज्य को खतरा पहुँचाया है... 🤔

कई लोगों ने सरकार की कोशिशों की सराहना की है, जिन्होंने नक्सली समूह को दबाने में मदद की है। हालांकि, यह एक जटिल मुद्दा है और इसके लिए हमेशा एक सामंजस्यपूर्ण समाधान नहीं मिल पाता है... 😕
 
अरे, ये बहुत बड़ा झटका है नक्सली समूह के लिए। हिड़मा की मौत से उनकी शक्ति बहुत कम हो गई। सरकार ने 1 करोड़ रुपये का इनाम रखा है, लेकिन यह बात तो नहीं कही कि नक्सलियों को खत्म करने में सरकार की कोई दिक्कत नहीं है। ऑपरेशन प्रहार चलाने से नक्सलियों को भागने का बहुत कम मौका मिला। लेकिन, मुझे लगता है कि अगर सरकार ने नक्सलियों के खिलाफ और जोरदार कदम उठाएं तो यह सब नहीं हुआ होता।
 
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