कानपुर में स्लीपर बस जलकर राख: दो कॉन्स्टेबलों ने जान पर खेलकर 43 को बचाया, बोले- 2 मिनट देरी करते तो कई जिंदा जल जाते - Kanpur News

कानपुर में स्लीपर बस जलकर राख: दो कॉन्स्टेबलों ने जान पर खेलकर 43 को बचाया, बोले- 2 मिनट देरी करते तो कई जिंदा जल जाते।
 
😂🚧♂️ कानपुर में बस जल गई, लेकिन कॉन्स्टेबलों ने वास्तविकता को समझाया 😎 पुलिसवालों ने बस से निकलने वालों की जिंदगी बचाई, अब यह तो बस की देरी नहीं बल्कि ज़िंदगी बचानी है 🕰️ 2 मिनट देरी करते तो कई लोग जल जाते, लेकिन पुलिसवालों ने अपना सिर चोट पर रखा और लोगों को निकलने का मौका दिया 🙏🚫
 
मैंने आज पढ़ा कि कानपुर में हुई हाल ही में स्लीपर बस में आग लगने और उसके बाद वह जलकर राख हो गई। लेकिन सबसे दिल को छू रहा एक पहलवाड़ी तेजार दोस्तों की है। दो कॉन्स्टेबलों ने उस पल में जान पर खेल कर 43 व्यक्ति को बचाया।

मैं समझ नहीं पाऊंगा कैसे उनकी थकान से पहले उन्होंने इतनी तेजी से काम किया और आग को रोकने में मदद की। ये दोनों कॉन्स्टेबल तो न केवल अपने जीवन की जिंदगी बचाई, बल्कि उस 43 व्यक्ति की भी जिंदगी को संभाला।

मुझे लगता है उनकी यह बहादुरी और प्रतिभाशाली काम की बारी नहीं थी। तो हमें उन्हें और उनके साथ गए 43 व्यक्तियों को धन्यवाद देना चाहिए।
 
આ તો અસ્વચાર છે. કાનपुरમાં જે બસ થયું હતું, તેની અંદર 43 લોકો સાબિત થયાં. પણ આ કેવળ ખબર છે, અમને શું કહેવું છે? સ્લીपर બસ એટલી ઝડપથી ચલતી ને, અંદર કોઈ વાત છે? આ ઘટના સમજાય અને બચાવા માટે શરીર દિલ કરતા, બીજા સાથે યુનિફોર્મ વગર હોય છે.
 
Wow 😮, कानपुर में बस की यह सारी घटना तो बहुत ही डरावनी लग रही है 🚨। एक दिन बाद भी ऐसे ही दृश्य देखने को मिलते हैं। बस में जलने के कारण वहां कई लोगों की जान गई, तो क्या 2-3 सेकंड कम मिल सकते थे? 🤔। अगर निरीक्षण करने वालों की गति और रीढ़ भी अच्छी होती, तो शायद सब कुछ बदल जाता। दोनों पुलिसवालों की बहादुरी तो बिल्कुल सही है, उन्होंने निश्चित रूप से लोगों की जान बचाई है। 🙏
 
अरे, यह तो बहुत ही गंभीर घटना है... कनपुर में स्लीपर बस की आग लगने से इतने लोगों की जान बचने की बात सुनकर मैं थोड़ा आश्चर्यक हुआ, पर फिर मुझे यह एहसास हुआ कि ये दो कॉन्स्टेबल वास्तव में बहुत बड़ी भावना और तेजी से निर्णय लेने की शक्ति रखते हैं। अगर उन्होंने 2 मिनट देरी कर देते तो शायद इस घटना के परिणाम और भी हानिकारक होते। यह दो कॉन्स्टेबल ने जीवन बचाया, उनकी पहलकशमाही और तेजी से प्रतिक्रिया ने सबको खतरे से बाहर लाया।
 
क्या भाई कानपुर की स्लीपर बस जल गयी, यह तो बहुत ही दुखद खबर है... लेकिन जो अच्छा है, वह है कि 2 कॉन्स्टेबल ने जान पर खेलकर 43 युवक को बचाया, यह तो बहुत बड़ा साहस है। मुझे लगता है कि उनकी जान जोखिम में लेने का निर्णय सही था, क्योंकि अगर वे 2 मिनट देरी करते, तो कई युवक जल जाते। यह तो बहुत ही बड़ा फायदा है कि उन्होंने जिंदगी बचाई। मैं उनके लिए बहुत भावुक हूँ, मुझे लगता है कि वे देश की सेवा करने वाले सच्चे नायक हैं।
 
कानपुर की स्लीपर बस की यह घटना बहुत ही चिंताजनक है 🚨। मुझे लगता है कि अगर सुरक्षा उपायों की निगरानी में थोड़ी सी ध्यान दिया जाए तो ऐसी अनियंत्रित घटनाओं को रोका जा सकता था। यह दोनों कॉन्स्टेबलों ने जान पर खेलकर बचाया, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी हानिकारक स्थितियों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। सुरक्षा और प्राथमिकता के बारे में हमेशा चर्चा होती रहती है, लेकिन कभी-कभी ऐसी स्थितियों में निपटने के लिए सख्ती से काम करने की जरूरत है। 🚫
 
यह देखकर मन में हंसी आ गई कि ये कैसे हुआ। स्लीपर बस जिसमें इतने लोग सवार थे, उसके आगे कोई प्राथमिक चिकित्सा यंत्रणा नहीं थी। 2 मिनट देरी करते तो कई लोगों की जान जा सकती थी। यह सोचकर हैरानी होती है कि हमारे देश में इतने सुरक्षा उपाय होते हैं और फिर भी ऐसा हुआ।

स्लीपर बस के पीछे क्या जिम्मेदार था यह नहीं पता। लेकिन यह बात तो सभी को विचार करनी चाहिए। हमें सुरक्षित यात्रा के लिए हर स्तर पर ध्यान देना चाहिए, न कि बसों में ही इसका प्रयास करना। अगर हम सब मिलकर इस बात पर जोर देते हैं तो शायद भले ही इतने बड़े बदलाव नहीं होते, लेकिन कम से कम ऐसी घटनाओं को रोकने का प्रयास होता।

कानपुर में हुए इस दुखद इशारे से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला।
 
कानपुर में स्लीपर बस जलकर राख हुई, यह बहुत दुखद घटना है। मुझे लगता है कि पुलिस ने बहुत अच्छा काम किया। दो कॉन्स्टेबलों ने जान पर खेलकर 43 लोगों को बचाया, यह बहुत भाग्यशाली है। लेकिन मुझे लगता है कि बस के आग लगने से पहले तयारियाँ करनी चाहिए थी। दो मिनट देरी करते तो कई जिंदा जल जाते। यह बहुत दर्दनाक है।

मुझे लगता है कि सरकार और पुलिस को बस की सुरक्षा और निगरानी के बारे में ध्यान रखना चाहिए। बसों में आग लगने के लिए कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि तारों की समस्या या अन्य तकनीकी समस्या। इसके लिए सरकार और पुलिस को जागरूक रहना चाहिए और आवश्यक सावधानियाँ उठानी चाहिए।
 
🤔 yeh to kuch bhi nahi, bas do kon kon se kon sti bana rahe hain. 42 ko khela toh kya usein pehle se hi uski sahi jani nahi thi? arre, agar woh kon se kon se khel raha tha toh wo bhi thoda aage badh sakta tha. bas yeh do kon kon se khelta rehta aur 42 ko pehle se hi usi ke saamne padha rakhta. 🤷‍♂️

aur kya yeh sabhi to kanoonon ko khelne ki koshish kar raha hai? kuch log is tarah hi khelta rahe hote toh zyada jinhone usse pehle se hi pata tha woh bhi ek din khelke hi mar jaate. 🙄

lagaam meh, 2 minute dheri karte to koi bhi bach nahi hota, lekin agar wo kon se kon se uss 2 minute ke liye sahi jama rahe toh wo bhi ek din khelke hi mar jaata. yeh log sirf apne zindagi ko jeene ki koshish kar raha hai, bas usse pehle se hi pata tha woh. 😔
 
मैंने यह सुनकर हिल गया मन 🤯 कानपुर में ऐसी बात होनी पर मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ा दुर्भाग्य हुआ। 43 लोगों की जान बचाने के लिए दो कॉन्स्टेबलों ने अपनी जान खेली तो वाकई यह भारत में सेवा की शान का उदाहरण है। उनकी बहादुरी और सहनशक्ति को मैं हमेशा सलाम करूंगा। दुर्भाग्य से, ये दो जवान अगर 2 मिनट देरी करते तो कई लोग जिंदा जल जाते। यह सोचकर भी मुझे बहुत दर्द होता है कि उन्होंने इतना कुछ खुद पर उठाया और फिर भी उन्हें बचाने का मौका नहीं मिला। हमें उनकी बहादुरी को कभी नहीं भूलना चाहिए और हमें उनके बलिदान को सिर्फ एक शिक्षा के रूप में देखना चाहिए।
 
कानपुर की स्लीपर बस जलने की बातें सुनकर मुझे लगता है कि ये तो सचमुच एक गड़बड़ी है। क्या वास्तव में दो कॉन्स्टेबलों ने जान पर खेलकर 43 लोगों को बचाया? ये तो बहुत भी बड़ा काम है! 🤔

मुझे लगता है कि बस से निकलने वाले लोग अपने समय के प्रति कम जिम्मेदार थे। 2 मिनट देरी करने से कई लोग जल जाते, यह तो सच है! लेकिन क्या हमें वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि बसों में घंटे बिताए गए समय? 🙄

फिर भी, 43 लोग बच गए, जिससे हमें कुछ सीखने को मिला। बसों में सुरक्षा बढ़ाना और लोगों को जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देना चाहिए। 👍
 
कानपुर में हुआ यह दुर्भाग्य से बहुत बड़ा दांव लग गया। बस जैसे ही जलने लगी, लोगों ने बिना सोचे हुए अपने बच्चों को चाचा, चाची और भाई-बहन उठाकर दूर चले गए। मैं समझता हूँ कि समय पर हर जगह नहीं मिलता, लेकिन बस में आग लगने के बाद 2-3 मिनट का इंतजार करना जिंदा जलने की सूरत में बहुत बड़ा खतरा है। मैं दो कॉन्स्टेबलों को बहुत बधाई देना चाहता, उन्होंने जान पर खेलकर इतने जिंदा बचाए, वे वीर हैं। लेकिन यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आग लगने के बाद क्या करना है, और आग लगने से पहले क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
 
मैंने सुना है कि कानपुर में एक स्लीपर बस ने आग लगने के कारण जलकर राख हो गई, लेकिन यह दूरदर्शी है कि 2 कॉन्स्टेबलों ने जीवन की मुक्ति के लिए अपना प्राण गंवाया। यह बहुत बड़ी सच्चाई है। मैं उनकी बहादुरी और भाविक साहस पर गर्व करता हूँ। ऐसा लगता है कि वे निश्चित रूप से 2 मिनट की देरी कर सकते थे, जिससे अधिक लोग अपनी जान बचा सकेंते। अब एक सवाल उठता है - क्या बस को सुरक्षा उपकरण लगाए गए थे? क्या निरीक्षण और मॉनिटरिंग की जा रही थी? यह सब सवाल हमारे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षा हैं।
 
यह देखकर बहुत दुख हुआ। कानपुर की स्लीपर बस में आग लगना और सब कुछ जल गया। लेकिन मुझे यह अच्छी बात भी लगती है कि दो कॉन्स्टेबलों ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने 43 युवक को जानबूझकर आग से बचाया। अगर वह चार मिनट देरी करते, तो शायद हम सभी जल जाते। यह बहुत ही अच्छा नागरिक दिखता है।

मुझे लगता है कि हमें बसों और सड़कों की सुरक्षा के बारे में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए। आग लगने पर तुरंत पुलिस और फायर सर्विस को बुलाना चाहिए। अगर हम सब एक साथ मिलकर इस तरह की समस्याओं का समाधान करें, तो हम अपने देश को बेहतर बना सकते हैं।
 
क्या मुसीबत है लोगों की यह दुनिया! कानपुर में स्लीपर बस का आग लगना, राख बन गया। मैं तो ऐसा कभी नहीं सोच सकता था कि किसी बस में इतने लोग एक ही साथ जल जाएंगे।

मेरी बात यह है कि हमारे देश में सड़क सुरक्षा बहुत खराब है। बसों में आग लगने की संभावना तो होती ही, पर उस पर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाती। मैं समझता हूँ कि यह घटना बहुत बड़ी है और लोगों को डरा रही है, लेकिन हमें अपने देश की सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने की पूरी कोशिश करनी चाहिए।

मैं इस घटना की शोक संदेश देना चाहता हूँ जो 43 की परिवार और दोस्तों को। मेरी नमस्कार है उन्हें और हम सभी से उनकी तुरंत शिकायत करने की पूरी कोशिश करनी।
 
ਦੁਖ ਹੈ ਕਾਨਪੁਰ ਵਿੱਚ, ਜੋ ਹੁਣ ਬਿਮਾਰ ਅਤੇ ਆਲ੍ਹੂ ਵਿੱਚ ਮਸ਼ਹੂਰ ਹੈ। ਦੇਖਣ ਜਾਈਏ, ਸਲ਼ੀपर ਬੁਸ 'ਤੇ ਪਾਣੀ ਗੁੱਸੇ ਵਿੱਚ ਆ ਗਿਆ ਅਤੇ ਜਲ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਉਹ ਬੁਸ 'ਚੋਂ ਨਿਕਲ ਕੇ ਘੱਟੋ-ਘੱਟ 43 ਜਿੰਦਾ ਮਨੁੱਖ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਉਤਰੇ।
 
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