ईरान में हाल ही में जारी उपग्रह तस्वीरों से यह पता चलता है कि अमेरिकी और इस्राइली हमलों ने दोनों प्रमुख परमाणु स्थलों पर बहुत अधिक नुकसान पहुंचाया है। नतांज साइट पर पहले ही बमबारी में मुख्य इमारत पायलट फ्यूल एनरिचमेंट प्लांट को नष्ट कर दिया था, जबकि इस्फहान साइट पर भी अमेरिकी हमलों ने बहुत अधिक नुकसान पहुंचाया है। तस्वीरों में दिख रहा है कि इन स्थलों पर छतें बनाई गई हैं, जिससे यह छुपाया जा रहा है कि वहां क्या काम चल रहा है।
इन तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और सैन्य साइट्स का पुनर्निर्माण कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य साइट्स पर बचे हुए संसाधनों को छुपाकर बाहर निकालना है, न कि किसी नई सुविधा का निर्माण। लेकिन विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ईरान अपने न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रमों को धीरे-धीरे फिर से सक्रिय कर रहा है।
इस्लामिक गणराज्य की इन गतिविधियों से साफ संकेत मिलता है कि ईरान अपने न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रमों को धीरे-धीरे फिर से सक्रिय कर रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय निगरानी और अमेरिकी दबाव की स्थिति में भी कदम उठा रहा है। यह सवाल उठता है कि ईरान की इन गतिविधियों के पीछे क्या उद्देश्य है, और इन गतिविधियों को देखते हुए क्या नीतियां अपनाई जा सकती हैं?
इन तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और सैन्य साइट्स का पुनर्निर्माण कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन गतिविधियों का उद्देश्य साइट्स पर बचे हुए संसाधनों को छुपाकर बाहर निकालना है, न कि किसी नई सुविधा का निर्माण। लेकिन विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ईरान अपने न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रमों को धीरे-धीरे फिर से सक्रिय कर रहा है।
इस्लामिक गणराज्य की इन गतिविधियों से साफ संकेत मिलता है कि ईरान अपने न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रमों को धीरे-धीरे फिर से सक्रिय कर रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय निगरानी और अमेरिकी दबाव की स्थिति में भी कदम उठा रहा है। यह सवाल उठता है कि ईरान की इन गतिविधियों के पीछे क्या उद्देश्य है, और इन गतिविधियों को देखते हुए क्या नीतियां अपनाई जा सकती हैं?