दिल्ली में कनॉट प्लेस पर घूमने वालों ने हैरानी से देखा होगा, जैसे ही वहां की एक पुरानी कॉलम की तस्वीर AI-इमेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। उस तस्वीर के बाद लोगों ने यह सवाल उठाया है कि क्या ऐसा यहां आ गया है या फिर यह बस एक मज़ेदार मीम ही?
इसके पीछे की बात यह है कि उस तस्वीर में दिखाई दे रही कई जगहें वास्तविक नहीं हैं। उन्हें AI-इमेज बनाकर डिजिटल आर्ट्स लोगों को भ्रमित कर रहे हैं, जिससे व्यूअर्स को यह एहसास होता है कि कल्पना और तकनीक दोनों एक साथ मिलकर कितनी शक्तिशाली हो गई है। वहां की पुरानी कॉलम, आरches और गलियां अब ऐसे हैं जैसे वे एक दृश्य में फिल्म की भूमिकाएं निभा रही हैं।
यह तस्वीर यह बताती है कि आम-जानी जगहों पर कल्पना की शक्ति और तकनीक की ताकत कितनी बदल गई है। इससे हमें यह एहसास होता है कि जैसे ही पॉप-कल्चर और डिजिटल आर्ट्स मिलकर काम करते हैं, वैसे ही हमारी दुनिया भी एक नए रूप में बदलने लगी है।
इसके पीछे की बात यह है कि उस तस्वीर में दिखाई दे रही कई जगहें वास्तविक नहीं हैं। उन्हें AI-इमेज बनाकर डिजिटल आर्ट्स लोगों को भ्रमित कर रहे हैं, जिससे व्यूअर्स को यह एहसास होता है कि कल्पना और तकनीक दोनों एक साथ मिलकर कितनी शक्तिशाली हो गई है। वहां की पुरानी कॉलम, आरches और गलियां अब ऐसे हैं जैसे वे एक दृश्य में फिल्म की भूमिकाएं निभा रही हैं।
यह तस्वीर यह बताती है कि आम-जानी जगहों पर कल्पना की शक्ति और तकनीक की ताकत कितनी बदल गई है। इससे हमें यह एहसास होता है कि जैसे ही पॉप-कल्चर और डिजिटल आर्ट्स मिलकर काम करते हैं, वैसे ही हमारी दुनिया भी एक नए रूप में बदलने लगी है।