भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की दो पिछली मिशनें विदेशी साजिश से हार गईं, इस बात की चिंता बढ़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NSA अजीत डोभाल को एक गंभीर जांच के लिए भेजा, जिसमें अंतरिक्ष यानों और स्पेस प्रोग्राम्स की सुरक्षा की जासूसी शामिल है।
विशेषतः, PSLV रॉकेट के दो लगातार मिशन नाकाम रहे, जिन्हें 9 महीने में हुआ था। इस दौरान, NSA अजीत डोभाल ने विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर का गुप्त दौरा किया, जहां उन्होंने 2 दिन तक वैज्ञानिकों के साथ मीटिंग्स कीं।
इस जासूसी की कहानी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या यह विदेशी साजिश का हिस्सा था, या यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की अपनी कमियों को दर्शाता है? इसकी जांच के लिए NSA अजीत डोभाल ने एक टीम बनाई, जिसमें विशेषज्ञ वैज्ञानिक और अधिकारी शामिल हैं।
इस मामले में कई सवाल उठ रहे हैं, जिनमें से एक यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NSA अजीत डोभाल को इस जांच के लिए क्यों भेजा? और यह जांच कैसे चलेगी, जिसमें अंतरिक्ष यानों और स्पेस प्रोग्राम्स की सुरक्षा की जासूसी शामिल है?
विशेषतः, PSLV रॉकेट के दो लगातार मिशन नाकाम रहे, जिन्हें 9 महीने में हुआ था। इस दौरान, NSA अजीत डोभाल ने विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर का गुप्त दौरा किया, जहां उन्होंने 2 दिन तक वैज्ञानिकों के साथ मीटिंग्स कीं।
इस जासूसी की कहानी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या यह विदेशी साजिश का हिस्सा था, या यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की अपनी कमियों को दर्शाता है? इसकी जांच के लिए NSA अजीत डोभाल ने एक टीम बनाई, जिसमें विशेषज्ञ वैज्ञानिक और अधिकारी शामिल हैं।
इस मामले में कई सवाल उठ रहे हैं, जिनमें से एक यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NSA अजीत डोभाल को इस जांच के लिए क्यों भेजा? और यह जांच कैसे चलेगी, जिसमें अंतरिक्ष यानों और स्पेस प्रोग्राम्स की सुरक्षा की जासूसी शामिल है?