क्या लोकसभा में पीएम मोदी को खतरा था: स्पीकर बिरला ने क्यों टाली उनकी स्पीच; किस 'अप्रत्याशित घटना' का संकेत दिया

संसद में सुरक्षा घेरा तोड़ लेने और सदन को हंगामा करने वालों को बाहर निकालने के दौरान कई घटनाएं हुई हैं। इनमें 2001 में सांसदों और अन्य लोगों की गोलीबारी, संसद भवन पर आतंकवादी हमला, पंजाब विधानसभा में बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने सदन पर घुसपैठ की, और 2023 में दो युवक सागर शर्मा और मनोरंजन डी का सांसदों के लिए खतरा बन गया।
 
तो यह तो सचमुच एक बड़ा हंगामा हुआ है 🤯. मैंने देखा था जैसे सदन में सभी नेताओं और सांसदों को विद्युत चुंबकों की तरह खड़े रखा गया था। लेकिन जब तोड़फोड़ शुरू हुई तो सब कुछ टूट गया। यह घटनाएं हमारे देश की स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। मेरी राय में इनसानों की जिंदगी क्या महत्वपूर्ण नहीं है? हमारा सदन एक घर होना चाहिए जहां नेताओं और सांसदों को बैठकर अपने देश के लिए निर्णय लेने का मौका मिले।
 
बिल्कुल, यह संसद के बारे में बहुत गंभीर सवाल उठाता है... 🤔 क्या हमारे देश में सदन की सुरक्षा कैसे नहीं है? 2001 की घटना जब सांसदों और अन्य लोगों को गोलीबारी कर दी गई, तो उस समय क्या सरकार ने ऐसे हालात को संभालने के लिए कोई योजना बनाई थी? इसके अलावा, पंजाब विधानसभा में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सदन पर घुसपैठ करने की घटना तो कितनी ही हुई है, लेकिन हमेशा ऐसे हालातों को ठीक करने में समय नहीं लग पाता। और फिर सागर शर्मा और मनोरंजन डी जैसे दो युवक सदन पर खतरा बन गए, तो इसका मतलब यह है कि हमारी सरकार सदन की सुरक्षा के लिए सही उपाय नहीं कर रही है? 🚨
 
🤔 तो यह सब कहाँ तक चल रहा है? सदन की सुरक्षा बिल्कुल तोड़ दी गई, बिना प्रेरित होने के। आतंकवाद की समस्या का समाधान नहीं मिल रहा, बस और भी खतरे बन रहे हैं। 😬
 
मुझे लगता है कि हमारे देश में कभी-कभी बहुत ज्यादा गर्मी फूटती है, लेकिन यह तो सब कुछ भूलकर देखें, क्या हालात वास्तव में इतने खराब हैं? 2001 में हुई गोलीबारी और संसद भवन पर आतंकवादी हमला, ये सब सच है, लेकिन क्या हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारे देश ने अपने आप से बहुत कुछ बदल लिया है? पंजाब विधानसभा में बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं की घुसपैठ, ये सब तो हमारे देश की सुरक्षा को खतरे में डालने का काम नहीं करते, यह तो एक बुरी तरह से गलत विचार का प्रदर्शन है। और 2023 में दो युवक, सागर शर्मा और मनोरंजन डी, उनकी बातों ने लोगों को परेशान किया, लेकिन क्या हम उन्हें इतना विरोध नहीं करना चाहिए था, शायद उन्हें समझने की जरूरत थी। तो मुझे लगता है कि हमें अपने देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, लोगों को एक-दूसरे को समझने और सुनने की जरूरत है। 🙏
 
यार, यह तो बहुत ही गंभीर घटनाएं हुई हैं सदन में। लोग भाग जाने देना चाहिए, लेकिन फिर भी कुछ लोग ऐसा करने के लिए तैयार रहते हैं।
मुझे लगता है कि अगर सरकार ने पहले से ही यह तैयारी नहीं की, तो अब क्या करना? हमें उम्मीद रखनी चाहिए कि सदन में शांति बनाए रखा जाएगा।
लेकिन फिर भी, जब तक सरकार ने ऐसी सुरक्षा निशानियों को नहीं लगाया, लोग यहाँ और वहाँ आसानी से आ सकते हैं।
 
तन्हान की बात है यह... संसद में हंगामा करने वालों को बाहर निकालने की चाल, क्या यह हमारे देश की प्रगति की ओर नहीं जा रही है? 2001 में गोलीबारी और आतंकवादी हमला तो बहुत भयंकर था, लेकिन आज भी ऐसे हंगामे तब्ज़ा होते रहते हैं... यह संसद की बहस को बाधित कर देते हैं, जैसे कि हमारे राष्ट्रीय निर्माण पर क्या प्रभाव पड़ता है? और ये सभी घटनाएं, वे हमें डराने-धमकाने की कोशिश करती हैं... लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि हमारा देश इतना बड़ा और विविध है, जैसे मिलकर खेलने के लिए तैयार हैं। 🤔
 
मुझे लगता है कि हमारे देश में बहुत सारे लोग संसदीय मामलों में ज्यादा रुचि नहीं रखते। अगर वे नेताओं और सरकारी नीतियों पर टिप्पणी करना चाहते हैं तो उन्हें सोशल मीडिया का सहारा लेना चाहिए। मेरे विचार में, संसद की सुरक्षा बहुत जरूरी है और अगर ऐसी घटनाएं होती हैं तो उन्हें बिल्कुल निपटा देना चाहिए। लेकिन फिर भी, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि संसद में कई तरह के विचार और मतभेद होते हैं। तो मुझे लगता है कि हमें अपनी राय व्यक्त करने के लिए स्वतंत्रता देनी चाहिए, लेकिन इससे भी सावधानी बरतनी चाहिए। 🤔
 
बात तो होती है, लेकिन यह सचमुच थोड़ा भड़काऊ है। मुझे लगता है कि सदन में घुसपैठ करने वाले लोगों को समझने की जरूरत है, उनकी वजह से सबकुछ हुआ। क्या वे अपनी जगह के लिए लड़ रहे थे, या फिर बस खलंगवादी दिखाने की कोशिश कर रहे थे। मुझे लगता है कि हमें उन्हें समझने और उनकी समस्याओं को सुनने की जरूरत है, न कि बस उन्हें भड़काकर बाहर निकालने की।
 
नेशनल हेरिटेज ट्रस्ट के नेता यशवंत सिंह जी की बात सुनी तो अच्छा लगा, सदन में सुरक्षा घेरा तोड़ने वालों को फिर से एक मजबूत दिशानिर्देश बनाएं चाहिए।
 
मैंने पढ़ा है कि यह घटनाएं तभी होतीं जब लोग अपने अधिकारों को जागृत करने के लिए और सरकार पर सवाल उठाने के लिए मिलकर सड़कों पर आ rahe hain. 😕 लेकिन जब बाकी लोग चुपचाप घरों में रहते हैं तो हमें सुरक्षा प्रदान करनी होगी। मुझे लगता है कि सदन में ऐसे व्यक्ति निकालने से पहले उन्हें समझना चाहिए कि उनकी वजह से कहीं किसी की जान नहीं जा रही। इसके अलावा, हमें यह देखना चाहिए कि क्या हिंसक तरीकों से जागृति मिलती है या कुछ अन्य तरीकों से। 🤔
 
मुझे लगता है कि सदन में सुरक्षा घेरा तोड़ने वालों को समझने की जरूरत है। कई बार इतने लोग हंगामा कर देते हैं कि सदन की कार्यात्मकता प्रभावित हो जाती है 🤔। मुझे लगता है कि हमें सदन के अंदर और बाहर दोनों तरफ से सुरक्षा और समझदारी की जरूरत होती है। अगर लोग अपने विचार व्यक्त करना चाहते हैं तो उनको पार्टी या समूह में से जुड़ना चाहिए, न कि सदन में घुसपैठ करना 🚫
 
मैंने देखा है कि हमारे देश के बीच एक बहुत बड़ा मतभेद है, लेकिन मुझे लगता है कि हमें अपनी राय को साफ और स्पष्ट तरीके से रखना चाहिए। जैसे कि मैं अपने ब्लॉग पर लेख तैयार करता हूँ, उसके बाद मेरे दोस्तों के साथ चर्चा करता हूँ। संसद भवन की घटनाएं बहुत ही गंभीर थीं, और मुझे लगता है कि हमें अपने मतभेदों को हल करने के लिए एक-दूसरे की बात सुननी चाहिए। लेकिन, मेरी राय में, जब भी कोई ऐसा व्यक्ति होता है, जो सदन पर घुसपैठ करता है या घेराव तोड़ता है, तो हमें उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
 
मुझे लगता है कि भारत में पार्टी नेताओं की झगड़े बहुत बड़ा बीमारी है। कभी कभार तो लोग सदन में हंगामा करते हैं और सुरक्षा घेरे को तोड़ देते हैं, यह बहुत अजीब लगता है ।

मुझे लगता है कि अगर यह सब सही तरीके से नहीं चल रहा है, तो हमें इसे रोकने के लिए एक सामूहिक प्रयास करना चाहिए। सरकार और अन्य नेताओं से मिलकर उन्हें समझाना चाहिए कि सदन में शांति बनाए रखना ही सबसे बड़ा काम है।

कुछ लोगों को लगता है कि सदन में जो भी हुआ वह सही था, लेकिन मुझे ऐसा नहीं लग रहा। हमें अपने देश की स्थिरता बनाए रखनी चाहिए, ताकि हमारे बच्चों को भी अच्छा भविष्य मिल सके।
 
ਸੰਸਦ ਵਿੱਚ ਘੇਰਾ ਤੋੜਨ ਅਤੇ ਸਦਨ ਵਿੱਚ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਖ਼ਿਲਾਫ਼ੀ ਕੀ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਇਸ ਬਾਰੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕੀ ਵੱਸ ਦਿੱਤਾ ਜਾਏ? ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਉਬਰਦੇ ਸਮੇਂ, ਪੁਲਿਸ ਅਤੇ ਫੌਜ ਹੀ ਨਹੀਂ ਬਣਦੀ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਕੁਝ ਖ਼ਰਾਬ ਭਲਾਈ ਦੇ ਤਰੀਕਿਆਂ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਹੋ ਗਈ ਹੈ।
 
अरे, सबको थोड़ा शांत होना चाहिए, जानबूझकर सदन में हंगामा करने का मतलब कुछ नहीं है, यह भी एक तरीका है कि लोग अपने विचारों को सुनाएं। पर साथ ही, हमें यह भी याद रखना चाहिए कि सदन में किसी का जीवन खतरा तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए, पहले सभी लोग शांति से बोले।
 
😂🤣 तो हारदिक है यह घटनाएं! 🤯 क्या लगता है इन दिनों सब लोग सदन में फिलहाल बंदी पैसे कमाने के निकल पड़े हैं 🤑 जानबूझकर सदन पर खल्लार लगाते हैं तो ये घेरा तोड़ लेते हैं 🚫😡 और फिर बाहर निकाल देते हैं तो दिखाई देता है कि हमें वे सब कुछ सीखने की ज़रूरत नहीं! 🤓👀
 
मैं तो खुश हूँ कि पार्लियामेंट में सब बुद्धिमान होने लगे 🤓। यह एक अच्छा संकेत है कि हमारी संसद में विवाद और हंगामा तोड़ लेने की आदत छूट जाएगी। लेकिन फिर भी, मुझे लगता है कि हमें अपने नेताओं से बेहतर निर्णय लेने के लिए प्रयास करना चाहिए 🤝

मैं एक पुरानी तस्वीर दिखाता हूँ, जो मेरे विचारों को दर्शाती है:

```
+---------------+
| सुरक्षा |
| घेरा तोड़ |
+---------------+
|
| बाहर निकाला
v
+---------------+
| सदन में |
| शांति |
+---------------+
```

मुझे लगता है कि हमें अपने नेताओं से बेहतर निर्णय लेने की ताकत प्राप्त करनी चाहिए, जिससे हमारी संसद में शांति बनी रहे।
 
तो ये तो खूब हुआ, जैसे एक पुरानी फिल्म की कहानी। सदन में घुसपैठ करने वालों को बाहर निकालने से पहले 2023 में दोनों युवक का क्या इलाज? और पंजाब विधानसभा में जैसे हिंदू परिषद के लोग घुस गए, तो ये तो उनकी भी खूब हुई क्या? 🤦‍♂️ और 2001 में गोलीबारी, आतंकवादी हमला, ये सब तो हमेशा से चली आ रही बात। कोई ठीक से बदलाव नहीं होता। बस यही देखकर मन कुछ न करेगा… 🤔
 
अरे, यह सब तो देखकर ही मुझे थोड़ा डर लगने लगा... सदन में शांति कैसे बनाई जाती है? लोग सदन पर हंगामा कर रहे हैं और खुद सुरक्षा घेरा तोड़ देते हैं... तो कहिए सरकार तैयार नहीं थी या लोगों ने सोचा ही नहीं? 🤔

मुझे लगता है कि सदन में शांति बनाने के लिए हमें अपनी बोलचाल में भी सावधानी बरतनी चाहिए। कुछ लोग भड़काऊ भाषण देकर और लोगों को हंगामा करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं... इससे हमारे समाज में विभाजन बढ़ता है और सदन की शांति खत्म हो जाती है। 🙅‍♂️

आखिरकार, हमें अपने देश की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बातचीत करनी चाहिए। सदन में शांति बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। 🙏
 
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