क्या शशि थरूर मारेंगे पलटी? खुद दे दिया जवाब, केरल चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर हलचल तेज

केरल विधानसभा चुनाव की घड़ी में, कांग्रेस पार्टी में हलचल तेज है। शशि थरूर, जो केरल के तिरुवनंतपुरम सांसद और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, अब अपनी पार्टी से नाराज़ दिखाई दे रहे हैं। विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर हुई बैठक में भी उनकी अनुपस्थिति पर जोर दिया गया है।

थरूर की पार्टी से नाराजगी की खबरें लगातार बढ़ रही हैं। इस बीच, उनके दुबई में एक साहित्य महोत्सव में भाग लेने पर जोर दिया गया है। यह सवाल उठता है कि क्या थरूर ने दुबई में माकपा से जुड़े लोगों के साथ बैठक की है, जिसकी खबरें लगातार चल रही हैं।

केरल विधानसभा चुनाव के बाद, कांग्रेस पार्टी पर अपने भीतर एक बड़ा तानाशाही मोड़ आ सकता है। थरूर की नाराजगी से यह सवाल उठता है कि क्या उनकी पार्टी इस चुनाव में मजबूत रूप से खड़ी हो पाएगी।
 
केरल विधानसभा चुनाव की घड़ी में तो हर party ko thoda tension aa rahi hai 😅, shashi tharur ke baare mein koi bhi information milne se pehle pahle sabko pata chal jayega ki unhe aise kaise lekar aaya hai. lakin agar unka aage badhnaa chahe toh party ko ek naye direction ko follow karni padegi 🤔, kyunki tharur ka leadership bahut hi influential hai congress party ke liye.
 
अरे, ये तो वाकई में केरल विधानसभा चुनाव की घड़ी हो रही है! शशि थरूर की पार्टी से नाराजगी की खबरें लगातार बढ़ रही हैं... यह तो देखकर ज्वलंत हो गया है कि क्या उनकी पार्टी इस चुनाव में मजबूत रूप से खड़ी हो पाएगी। थरूर जी अपने दुबई में साहित्य महोत्सव में भाग लेने पर जोर दिया गया है, लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या उन्होंने माकपा से जुड़े लोगों के साथ बैठक की है? यह तो देखना दिलचस्प है कि कांग्रेस पार्टी इस चुनाव में कैसे संकट में पड़ जाती है। 😬💥
 
मुझे लगता है कि शशि थरूर जी की नाराजगी की खबरें वास्तव में दिलचस्प हैं! लेकिन, मेरे अनुसार, उनकी इस समस्या से पहले से ही कांग्रेस पार्टी को अपने भीतर से कई छोटे-छोटे तानाशाही मोड़ आ रहे थे।

मुझे लगता है कि शशि जी की अनुपस्थिति वाली बैठक में उनकी विशेष परिस्थितियों और उनकी पार्टी से जुड़ी समस्याओं को नहीं लेकर आया गया। लेकिन, चुनाव से पहले ऐसे कई सवाल उठने चाहिए कि शशि जी की नाराजगी से यह कांग्रेस पार्टी मजबूत होगी या कमजोर?

मुझे लगता है कि शशि जी को अपनी समस्याओं को साफ करें और उन्हें पार्टी में लाएं, तभी वास्तविक सफलता हो सकती है। लेकिन, अगर वह अपनी समस्याओं को नहीं देखते हैं तो यह चुनाव केरल के लिए बहुत बड़ा जोखिम हो सकता है! 🤔
 
मुझे लगता है कि शशि थरूर की नाराजगी की खबरें तो कुछ हद तक भी बने रहने देनी चाहिए। क्योंकि अगर वे अपनी पार्टी से जुड़े लोगों के साथ माकपा से जुड़े लोगों के बीच बैठक कर रहे हैं, तो यह अच्छा नहीं होगा। कांग्रेस पार्टी को अपने भीतर एक बड़ा तानाशाही मोड़ आ सकता है, और इसके लिए हमें सावधान रहना चाहिए। 🤔💬
 
केरल विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी पर तानाशाही मोड़ आ जाएगा, यह जरूर नahi, कोई भी तय नहीं कर सकता। शशि थरूर की नाराजगी से भी पार्टी मजबूत हो पाएगी, यह सोचकर मज़ाक है। केरल में चुनावों में जीत से पहले ही पार्टियाँ तानाशाही मोड़ लेती हैं तो फिर वे नाराजगी से क्या बच सकते हैं?
 
🤔 केरल विधानसभा चुनाव की घड़ी में शशि थरूर की नाराजगी की खबरें लगातार बढ़ रही हैं। यह तो ठीक है कि वे अपनी राय व्यक्त करें, लेकिन दुबई में साहित्य महोत्सव में भाग लेने पर उनका ध्यान लगता है। क्या ये सवाल उठना चाहिए कि क्या वे माकपा से जुड़े लोगों के साथ बैठक की हैं? यह तो एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है। लेकिन यह सच है कि कांग्रेस पार्टी पर अपने भीतर एक बड़ा तानाशाही मोड़ आ सकता है, अगर थरूर की नाराजगी से वो इस चुनाव में मजबूत रूप से खड़ी नहीं हो पाती।
 
मुझे लगता है कि शशि थरूर की पार्टी से नाराजगी बहुत बड़ा मुद्दा है। लेकिन, वह अभी भी एक महान लेखक और विचारक हैं। उनकी पार्टी में तानाशाही आ सकती है, लेकिन यह हमेशा सही नहीं होती। मुझे लगता है कि शशि जी ने अपनी पार्टी से नाराजगी दिखाई है, लेकिन वह अभी भी एक अच्छे नेता हैं। केरल विधानसभा चुनाव को लेकर, मुझे लगता है कि यह बहुत ही रोमांचक होगा। हमें देखने को मिलेगा कि क्या शशि जी की पार्टी इस चुनाव में मजबूत रूप से खड़ी हो पाएगी। 🤔
 
सोचता हूँ कि शशि थरूर की पार्टी से नाराजगी की खबरें सच हों या नहीं, लेकिन यह तो जरूरी है कि विधानसभा चुनाव की तैयारी में सबको एक ही दिशा में चलने की जरूरत हो। केरल की जनता को उम्मीद है कि पार्टियाँ अपने नेताओं के बीच कोई भ्रष्टाचार नहीं कर रही हैं।

अगर थरूर जी स्वस्थ रहते हैं तो उनकी पार्टी में एक नई दिशा आ सकती है, लेकिन अगर वे अस्वस्थ हैं तो यह सवाल उठता है कि क्या उनकी पार्ती उनके बिना चल सकेगी। केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी पर उम्मीदें हैं, लेकिन अगर उन्हें अपने भीतर से तानाशाही आ जाती है तो यह अच्छा नहीं होगा।
 
बोलो! शशि थरूर की पार्टी से नाराजगी की खबरें लगातार बढ़ रही हैं, तो इसका मतलब ये नहीं है कि उन्होंने अपनी पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाने में असफल हो गए हैं। थरूर एक अच्छे लेखक और राजनेता हैं और उनकी राय पर ध्यान देना जरूरी है। दुबई में साहित्य महोत्सव में भाग लेने की बात तो एकदम सही है, लेकिन इस बीच माकपा से जुड़े लोगों के साथ बैठक करने की खबरें तो और भी चिंताजनक हैं।
 
जैसे ही हमारी कांग्रेस पार्टी के नेताओं पर जोर दिया जाता है तो हमारी पार्टी में हलचल तेज होती जा रही है। थरूर साहब की अनुपस्थिति से यह सवाल उठता है कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव में मजबूत रूप से खड़ी हो पाएगी या नहीं। लेकिन जैसे हमारे देश में कभी भी तानाशाही शासन हुआ है, वही हमारी कांग्रेस पार्टी में भी ऐसा होने का खतरा है।
 
मुझे लगता है कि शशि थरूर की बारी में बड़े-बड़े नेताओं जैसा दिखने की जोर डालना तो थोड़ा थकावट भरा लगता है। और दुबई में साहित्य महोत्सव में भाग लेने का यह स्टेजिंग बहुत खुलकर कर रहे हैं ना, पार्टी की चुनौतियों से बचने की।

केरल विधानसभा चुनाव को लेकर फिर से एक नया मोड़ आ रहा है तो भी थरूर की नाराजगी से पहले क्या तय हुआ? उनकी पार्टी को अब तानाशाही मोड़ आ सकता है तो ये ठीक नहीं लगता। और यह सवाल उठता है कि कांग्रेस पार्टी वास्तव में अपनी राजनीतिक स्थिति को सुधारने की कोशिश कर रही है या बस दिखावट बना रही है?
 
केरल विधानसभा चुनाव की घड़ी में कांग्रेस पार्टी में हलचल तेज है। शशि थरूर की नाराजगी से हमें यह सवाल उठता है कि क्या उनकी पार्टी इस चुनाव में मजबूत रूप से खड़ी हो पाएगी। तिरुवनंतपुरम सांसद के व्यक्तित्व और नेतृत्व पर हमेशा सवाल उठते रहते हैं। अब यह सवाल उनकी नाराजगी के बारे में उठ रहा है। दुबई में साहित्य महोत्सव में भाग लेने से हमें लगता है कि थरूर को अपने पार्टी चुनाव से जुड़े लोगों के साथ बैठक करनी चाहिए।
 
बिल्कुल हानिकारक भी हो सकती है, अगर थरूर ने कांग्रेस पार्टी से भाग जाना है तो यह तो अच्छी बात नहीं होगी, अगर वह अपने गृह मंत्रालय से भी इस्तीफा देते हैं तो कम ही अच्छा होगा।
 
थरूर जी की बात समझ में आती है, लेकिन उनकी नाराजगी से माकपा के नेताओं से मिलने की खबरें तो बड़ा रISK लग रही है 🤔। केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जीत की उम्मीदें बढ़ गई हैं, लेकिन थरूर जी की नाराजगी से यह रिकॉर्ड तोड़ने की संभावनाएं कम हो सकती हैं। मुझे लगता है कि पार्टी को अपने भीतर एक नई दिशा चुननी होगी, जिससे वोटरों का भरोसा बढ़ सके।
 
केरल विधानसभा चुनाव की तैयारी में ऐसी कई गड़बड़ी हो रही है! शशि थरूर की नाराजगी से यह सवाल उठता है कि उनकी पार्टी क्या वोट बैंक के खिलाफ खड़ी हो पाएगी। दुबई में साहित्य महोत्सव में भाग लेने से उन्होंने अपनी पार्टी से नाराजगी की बात कही है। यह तो अच्छा नहीं है, चुनाव की तैयारी में ऐसी बातें तो फिर से विपक्ष को सही दिशा में ले जाने में मदद करेंगी।
 
मैंने देखा है तो लोग कांग्रेस पार्टी में होने वाली हलचल को बहुत बुराई नहीं समझते। शशि थरूर जैसे नेताओं से हमेशा उम्मीदें बढ़ती रहती हैं और फिर भी वे हमें नाराज़ कर देते हैं। अब तो उनकी पार्टी को चुनाव में लड़ने की संभावना नहीं रह जाती है। और यह सब दुबई में एक साहित्य महोत्सव पर बैठने की वजह से हुआ। मैं तो लगता हूँ कि उनकी पार्टी को चुनाव में खोना ही अच्छा होगा।
 
अरे, ये तो वास्तव में भारी चुनाव की घड़ी है। शशि थरूर की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी पार्टी को पहले से ही बहुत सारे चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। जैसे कि, क्या वे अपने ब्रेन ट्रस्ट दिग्गजों को सही दिशा में ले पाएंगे, और उनकी अनुपस्थिति पर कितना प्रभाव पड़ेगा? 🤔

केरल में चुनाव के तौर-तरीकों में बदलाव आ रहा है, लेकिन यह सिर्फ राजनीतिक राजनीति नहीं है। हमें देखना होगा कि, क्या कांग्रेस पार्टी अपनी स्थिति को सुधारने के लिए सही फैसले लेगी। और शशि थरूर की नाराजगी से यह सवाल उठता है कि, क्या वे अपनी पार्टी को मजबूत बनाने में सफल हो पाएंगे। 👀
 
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